Punjab MLA Survey 2027 ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले दैनिक भास्कर एप की ओर से कराए गए इस सर्वे में लोगों ने अपने मौजूदा विधायकों पर जमकर नाराजगी जाहिर की है। सर्वे के मुताबिक प्रदेश के 90% मौजूदा MLA से जनता संतुष्ट नहीं है और वे इन्हें 2027 में दोबारा विधायक के तौर पर नहीं देखना चाहते।
देखा जाए तो सबसे ज्यादा नुकसान सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को होता दिख रहा है, जिसके 95% विधायकों को लोग दोबारा नहीं चुनना चाहते। लोगों ने इसकी वजह विधायकों का खराब व्यवहार और कमजोर कामकाज बताया है।
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‘सर्वे का तरीका और पार्टीवार आंकड़े’
यह सर्वे पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर के बीच किया गया। इसमें 102 सीटों पर रिजल्ट जारी किया गया, जबकि बाकी 15 सीटों पर पर्याप्त वोटिंग न होने के कारण नतीजे घोषित नहीं हो सके। जिन 102 सीटों का परिणाम आया, उनमें 83 पर AAP, 13 पर कांग्रेस, दो-दो पर BJP व अकाली दल, एक पर बसपा और एक पर निर्दलीय विधायक हैं।
चिंता का विषय यह है कि इन 102 में से 92 विधायकों को लोग दोबारा जिताना नहीं चाहते। कांग्रेस के 13 में से 7 यानी 54% विधायक लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, जिनमें 5 को काम और 2 को व्यवहार के आधार पर नकारा गया। वहीं BJP, अकाली दल, बसपा और निर्दलीय विधायक भी किसी को पसंद नहीं आए।
| पार्टी | कुल विधायक (सर्वे में) | दोबारा नहीं चाहते | प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| AAP | 83 | लगभग 79 | 95% |
| कांग्रेस | 13 | 7 | 54% |
| BJP | 2 | 2 | 100% |
| अकाली दल | 2 | 2 | 100% |
| बसपा | 1 | 1 | 100% |
| निर्दलीय | 1 | 1 | 100% |
‘सिर्फ 9 विधायकों से संतुष्ट हैं लोग’
सर्वे में महज 9 सीटों पर लोगों ने अपने मौजूदा विधायकों के काम और व्यवहार से संतुष्टि जताई। इनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान के अलावा AAP के सिर्फ 2 और विधायक शामिल हैं। पंजाब कांग्रेस के नए प्रधान बने परगट सिंह को जालंधर कैंट के लोग दोबारा विधायक बनाना चाहते हैं।
इसी बीच विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा और पार्टी से सस्पेंड चल रहे अबोहर के विधायक संदीप जाखड़ से भी लोग संतुष्ट हैं। दिलचस्प बात यह है कि संदीप जाखड़ फिलहाल BJP के साथ सक्रिय हैं, फिर भी उनके क्षेत्र के लोग उन्हें दोबारा मौका देना चाहते हैं।
‘SC विधायकों का प्रदर्शन सबसे खराब’
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब की 34 SC सीटों में से सर्वे में 26 के नतीजे जारी किए गए, और इनमें से एक भी दलित विधायक लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। इन 26 में से 23 विधायकों का काम लोगों को पसंद नहीं आया, जिनमें सबसे ज्यादा 20 विधायक AAP के और 3 कांग्रेस के हैं। इसके अलावा 3 SC विधायकों का व्यवहार भी नापसंद किया गया, जिनमें 2 AAP और 1 कांग्रेस का है।
‘क्षेत्रवार हाल: मालवा, दोआबा और माझा में गुस्सा’
समझने वाली बात है कि पंजाब के हर क्षेत्र में जनता का गुस्सा साफ नजर आया। मालवा की 69 सीटों में से 60 का रिजल्ट घोषित हुआ, जिसमें सिर्फ 4 विधायकों को लोग दोबारा जिताना चाहते हैं: CM भगवंत मान, गुरप्रीत बनावाली, अमृतपाल सुखानंद (तीनों AAP) और संदीप जाखड़ (कांग्रेस)। बाकी 55 यानी 92% विधायक नापसंद किए गए, जिनमें 53 AAP के हैं। मलेरकोटला के AAP विधायक मोहम्मद जमील उर रहमान इकलौते ऐसे MLA हैं जिनके बारे में लोग अभी फैसला नहीं कर पाए।
दोआबा की 23 में से 19 सीटों के नतीजे आए, जिनमें सिर्फ 2 पर लोग मौजूदा विधायक को दोहराना चाहते हैं, और यह दोनों कांग्रेस के हैं। बाकी 17 विधायकों का काम नापसंद किया गया, जिनमें 10 AAP के हैं। वहीं माझा की 25 में से 23 सीटों के नतीजों में सिर्फ 3 कांग्रेस विधायक पसंद किए गए, जबकि 20 विधायक, जिनमें 16 AAP के हैं, नकार दिए गए।
| क्षेत्र | कुल सीटें (रिजल्ट) | दोबारा पसंद | दोबारा नापसंद |
|---|---|---|---|
| मालवा | 60 | 4 (3 AAP, 1 कांग्रेस) | 55 (92%) |
| दोआबा | 19 | 2 (दोनों कांग्रेस) | 17 |
| माझा | 23 | 3 (सभी कांग्रेस) | 20 |
‘पहली बार के विधायक और महिला MLA सबसे ज्यादा फेल’
अगर गौर करें तो 2022 में पहली बार चुनकर आए 83 विधायकों में से 83 ही सर्वे नतीजों का हिस्सा बने, जिनमें AAP के 75, कांग्रेस के 5 और अकाली-बसपा-निर्दलीय का 1-1 विधायक शामिल है। इनमें से AAP के 75 में से 72 और कांग्रेस के 5 में से 4 विधायकों को लोग दोबारा नहीं चाहते।
हैरान करने वाली बात यह है कि 2022 में चुनी गई सभी 13 महिला विधायकों (AAP की 11, अकाली और कांग्रेस की 1-1) के इलाके के लोग उनके काम से नाराज दिखे और किसी एक को भी दोबारा जिताने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं 89 पुरुष विधायकों में से 79 को भी लोग नकार चुके हैं, सिर्फ 9 पुरुष विधायकों का काम पसंद आया।
विशेषज्ञ विश्लेषण
अगर इस सर्वे को गहराई से देखें तो यह साफ संकेत मिलता है कि 2022 में मिले भारी जनादेश के बावजूद AAP के पहली बार चुने गए विधायकों का जमीनी प्रदर्शन जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाया। 75 में से 72 नए विधायकों का नकारा जाना यह दर्शाता है कि सिर्फ पार्टी के चेहरे पर जीत हासिल करना अब पर्याप्त नहीं रह गया, स्थानीय स्तर पर कामकाज ही असली कसौटी बन गया है। वहीं दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस, जिसके पास सीटें कम हैं, वहां संतुष्टि का प्रतिशत अपेक्षाकृत बेहतर है, खासकर परगट सिंह और प्रताप बाजवा जैसे अनुभवी नेताओं के मामले में। इससे यह भी साफ होता है कि राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में सक्रियता अब भी जनता के भरोसे का बड़ा आधार बनी हुई है।
‘जानें पूरा मामला’
दैनिक भास्कर का यह सर्वे 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कराया गया है, जब सभी पार्टियां अपनी रणनीति और उम्मीदवारों की सूची तैयार करने में जुटी हैं। 2022 में AAP ने पंजाब में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता हासिल की थी, लेकिन इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि तीन साल बाद ही पार्टी के ज्यादातर विधायकों के खिलाफ जनता में गहरी नाराजगी है। यह सर्वे आने वाले चुनाव में टिकट बंटवारे और उम्मीदवार चयन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 102 में से 92 विधायकों को पंजाब की जनता 2027 में दोबारा नहीं चाहती, AAP के 95% विधायक नापसंद हैं।
- सिर्फ 9 विधायकों से लोग संतुष्ट हैं, जिनमें CM भगवंत मान, परगट सिंह और प्रताप बाजवा शामिल हैं।
- 34 SC सीटों में से किसी भी दलित विधायक का काम लोगों को पसंद नहीं आया।
- 2022 में चुनी गई सभी 13 महिला विधायकों को भी जनता दोबारा नहीं चुनना चाहती।











