Varanasi Ropeway को लेकर काशी की धरती एक ऐतिहासिक बदलाव की गवाह बनने जा रही है। वाराणसी में देश का पहला और दुनिया का तीसरा पब्लिक ट्रांसपोर्ट अर्बन रोपवे प्रोजेक्ट बनकर लगभग तैयार है। लगभग 645 करोड़ रुपये की लागत से बना यह आधुनिक रोपवे कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया चौराहे तक की 45 मिनट की दूरी को घटाकर महज 15 से 16 मिनट में समेट देगा।
देखा जाए तो हर साल देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी आते हैं, लेकिन जब आस्था का यह जनसैलाब सड़कों पर उतरता है तो बनारस की तंग गलियों में लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। इसी जाम से मुक्ति दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट की नींव रखी थी।
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96% काम पूरा, पांच स्टेशन बनाए गए
लगभग ₹645 करोड़ की लागत से तैयार यह रोपवे प्रोजेक्ट अब धरातल पर उतर चुका है और इसका 96% काम पूरा हो चुका है। कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया चौराहे तक की लगभग 4 किलोमीटर की दूरी अब तक सड़कों पर भारी ट्रैफिक के कारण 45 से 50 मिनट में तय होती थी। इस अर्बन रोपवे के शुरू होते ही यह दूरी महज 15 से 16 मिनट में पूरी हो जाएगी।
इस पूरे रूट पर कुल पांच आधुनिक स्टेशन बनाए गए हैं: कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म से सीधे रोपवे स्टेशन को जोड़ा गया है, जहां लिफ्ट, एस्केलेटर, डिजिटल टिकट वेंडिंग मशीन और सामान रखने के लॉकर जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।
| रोपवे स्टेशन | क्रम |
|---|---|
| कैंट रेलवे स्टेशन | पहला |
| काशी विद्यापीठ | दूसरा |
| रथयात्रा | तीसरा |
| गिरजाघर | चौथा |
| गोदौलिया | पांचवां (अंतिम) |
किराया सिर्फ ₹10 से ₹50, स्मार्ट कार्ड पर मिलेगी छूट
मेट्रो की तर्ज पर इसमें स्मार्ट कार्ड की सुविधा भी दी जाएगी, जिस पर 20% तक की छूट मिलेगी। यात्रा का किराया ₹10 से लेकर अधिकतम ₹50 तक तय किया गया है। तकनीक की बात करें तो यह रोपवे मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला सिस्टम पर काम करता है, जो दुनिया की सबसे सुरक्षित प्रणालियों में गिना जाता है। यह तकनीक अब तक बोलीविया और मैक्सिको सिटी जैसे पहाड़ी शहरों में अपनाई गई है, लेकिन बनारस जैसे घने और समतल शहर में इसका इस्तेमाल अपने आप में अनोखा प्रयोग है।
एक गोंडोला में 10 यात्री आराम से सफर कर सकते हैं। सुरक्षा के लिहाज से सभी टावरों पर एनिमोमीटर लगाए गए हैं, और अगर हवा की रफ्तार 60 किमी/घंटे से ऊपर जाती है तो सिस्टम अपने आप नियंत्रित हो जाता है। बिजली गुल होने पर बैकअप सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है और गोंडोला को निकटतम स्टेशन तक सुरक्षित पहुंचा देता है।
जानें पूरा मामला
यह पूरा सिस्टम कार्बन उत्सर्जन मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल है। जमीन की बेहद कम जगह घेरने के कारण यह घने इलाकों के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प साबित होता है। ऊर्जा बचत के लिए स्टेशनों और गोंडोला पर सोलर पैनल भी लगाए गए हैं। इस रोपवे के शुरू होते ही काशी देश का पहला ऐसा शहर बन जाएगा जिसके पास जल, थल और सड़क के साथ हवा में भी सार्वजनिक परिवहन की आधुनिक सुविधा मौजूद होगी।
विशेषज्ञ विश्लेषण
अगर गौर करें तो यह प्रोजेक्ट सिर्फ ट्रैफिक समस्या का हल नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की एक बड़ी रणनीति भी है। जिस तरह से काशी में हर साल करोड़ों श्रद्धालु आते हैं, उसे देखते हुए यह रोपवे शहर की कनेक्टिविटी और पर्यटन अनुभव दोनों को बेहतर बनाएगा। इससे साफ होता है कि सरकार धार्मिक शहरों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए पारंपरिक पहचान को तकनीकी प्रगति से जोड़ने की कोशिश कर रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- वाराणसी में देश का पहला और दुनिया का तीसरा अर्बन रोपवे प्रोजेक्ट 96% पूरा हुआ।
- कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक 45 मिनट का सफर सिर्फ 15-16 मिनट में होगा।
- किराया ₹10 से ₹50 तक, स्मार्ट कार्ड पर 20% छूट मिलेगी।
- प्रोजेक्ट मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला सिस्टम पर आधारित है, जो कार्बन उत्सर्जन मुक्त है।












