Hardeep Puri Rajya Sabha का रास्ता अब उत्तर प्रदेश की जगह मध्य प्रदेश से होकर गुजरेगा। भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा का प्रत्याशी घोषित कर दिया है। यह सीट डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी, जिस पर 12 नवंबर को मतदान होना है। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी, क्योंकि कुछ दिन पहले तक पुरी के मंत्रिमंडल में बने रहने पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे थे।
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‘जब लिस्ट में नाम नहीं था, तब उठी थीं अटकलें’
देखा जाए तो यह पूरा मामला तब गरमाया जब BJP ने कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी की। उस लिस्ट में हरदीप सिंह पुरी का नाम कहीं नहीं था। पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर, 2026 को खत्म हो रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी था कि अगर वे राज्यसभा में नहीं पहुंचे, तो क्या उनका केंद्रीय कैबिनेट में रहना संभव होगा?
चिंता का विषय यह था कि संवैधानिक तौर पर केंद्रीय मंत्री बनने के लिए संसद के किसी भी सदन का सदस्य होना जरूरी है। अगर पुरी का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो जाता और वे किसी भी सदन में नहीं होते, तो उन्हें मंत्री पद से हाथ धोना पड़ सकता था। लेकिन अब BJP ने एमपी से उनका रास्ता साफ कर दिया है।
‘मुरुगन के इस्तीफे ने खोला रास्ता’
अगर गौर करें तो इस पूरी राजनीतिक उठापटक की शुरुआत डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे से हुई। 14 अक्टूबर 2026 को मुरुगन ने अपने केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्यसभा की सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया। मुरुगन ने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर लौटना चाहते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि मुरुगन ने खुद को “दिहाड़ी मजदूरों का बेटा” बताते हुए पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री बनने को अपना सबसे बड़ा सौभाग्य करार दिया। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था, लेकिन उन्होंने करीब साढ़े तीन साल पहले ही इस्तीफा दे दिया। भारत निर्वाचन आयोग ने 22 अक्टूबर को चुनाव कार्यक्रम जारी किया और 12 नवंबर को मतदान की तारीख तय की। उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना भी होगी।
‘एमपी में चुनावी गणित: 116 विधायकों का कोटा’
समझने वाली बात है कि मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए सामान्य तौर पर 116 मतों का कोटा चाहिए। लेकिन इस बार गणित थोड़ा अलग है। कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे, जिसके चलते 229 विधायकों के आधार पर कोटा तय होगा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि बीना विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं है। वे खुद को कांग्रेस में बताती हैं, लेकिन BJP के कार्यक्रमों में भी नजर आती रही हैं। दलबदल से जुड़े मामले के कारण उनके वोट को लेकर दोनों दलों की प्रभावी संख्या का सटीक आकलन अभी बाकी है।
| विवरण | संख्या/तथ्य |
|---|---|
| कुल विधानसभा सीटें | 230 |
| जीत का सामान्य कोटा | 116 मत |
| प्रभावी मतदाता (मल्होत्रा की अनुपस्थिति में) | 229 |
| मतदान की तारीख | 12 नवंबर 2026 |
| मतगणना | 12 नवंबर, शाम 5 बजे |
| पुरी का मौजूदा कार्यकाल समाप्त | 25 नवंबर 2026 |
‘अमृतसर की हार से लेकर दिल्ली की कुर्सी तक’
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी हरदीप सिंह पुरी के राजनीतिक सफर की। साल 2019 में पुरी ने अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उस वक्त पंजाब में BJP का शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन था। पुरी दोनों पार्टियों के संयुक्त प्रत्याशी थे।
लेकिन नतीजे चौंकाने वाले रहे। कांग्रेस उम्मीदवार गुरजीत सिंह औजला ने उन्हें करीब 1 लाख वोटों से हरा दिया। औजला को 4,45,032 वोट मिले, जबकि पुरी के खाते में 3,45,406 वोट ही आए। उस हार के बाद पुरी ने लोकसभा का रास्ता नहीं अपनाया, बल्कि राज्यसभा के जरिए केंद्रीय राजनीति में अपनी जगह मजबूत की।
‘कैबिनेट में रहने का रास्ता साफ’
राहत की बात यह है कि अब हरदीप सिंह पुरी के केंद्रीय कैबिनेट में बने रहने पर कोई खतरा नहीं रहा। BJP ने जो चिट्ठी जारी की है, उससे साफ होता है कि पार्टी आलाकमान ने पुरी पर भरोसा बरकरार रखा है। एमपी में BJP की मजबूत स्थिति को देखते हुए पुरी की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
इसका मतलब है कि पेट्रोलियम और आवास जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे पुरी अब बिना किसी संवैधानिक अड़चन के अपना काम जारी रख सकेंगे। यह दर्शाता है कि BJP नेतृत्व ने अनुभवी चेहरों को बनाए रखने की रणनीति पर काम किया है, बजाय नए प्रयोगों के।
‘जानें पूरा मामला’
हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। पहले उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा थी, लेकिन BJP की यूपी लिस्ट में उनका नाम नहीं आया। इस बीच डॉ. एल. मुरुगन ने 14 अक्टूबर को तमिलनाडु में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिससे मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट खाली हो गई। BJP ने इसी सीट पर पुरी को उतारने का फैसला लिया। 12 नवंबर को मतदान होगा और पुरी की जीत के बाद वे 25 नवंबर से पहले ही नए कार्यकाल के साथ राज्यसभा में पहुंच जाएंगे।
‘विश्लेषण: BJP की रणनीति का बड़ा संकेत’
इस पूरे घटनाक्रम को अगर एक नजरिए से देखें तो यह BJP के भीतर संतुलन बनाए रखने की कवायद है। पुरी जैसे अनुभवी नेता, जो सीधे चुनावी मैदान में उतरने में असफल रहे थे, उन्हें पार्टी ने राज्यसभा के रास्ते सक्रिय रखा। मुरुगन का इस्तीफा और पुरी की एंट्री: यह दोनों घटनाएं एक साथ मिलकर यह संकेत देती हैं कि BJP 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले दक्षिण भारत में जमीनी काम और उत्तर भारत में अनुभवी चेहरों को मजबूत करने की दोहरी रणनीति पर चल रही है। आम आदमी के लिए इसका सीधा असर यह है कि पेट्रोलियम और शहरी विकास जैसे मंत्रालयों की नीतियों में अब स्थिरता बनी रहेगी, क्योंकि मंत्री बदलने से अक्सर योजनाओं की रफ्तार थम जाती है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- हरदीप सिंह पुरी को BJP ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा प्रत्याशी बनाया, 12 नवंबर को मतदान होगा।
- डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर पुरी की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
- इस फैसले से पुरी का केंद्रीय कैबिनेट में बने रहना सुनिश्चित हो गया है।
- 2019 में अमृतसर से लोकसभा चुनाव हारने के बाद पुरी राज्यसभा के जरिए केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हैं।













