Sonia Gandhi Book Launch Memoir — सोनिया गांधी ने X (पूर्व ट्विटर) पर कहा है: “मेरी किताब आएगी तो तमाशा होगा।” 10 नवंबर 2026 को उनकी आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ रिलीज होने वाली है। दशकों से जिस इतालवी महिला की कहानी दूसरे बताते आए हैं, अब वह खुद अपनी ज़ुबानी कहेंगी — कैंब्रिज के उस ग्रीक रेस्तोरां से लेकर भारतीय राजनीति के शिखर तक का सफर।
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1970 का दशक। इंग्लैंड। एक अनजान शहर, एक प्रेम की शुरुआत, एक ग्रीक रेस्तोरां। ये कोई फिल्म की लाइन नहीं, बल्कि सोनिया गांधी की असली कहानी है। देखा जाए तो इटली से भारत, एक आम लड़की से प्रधानमंत्री की पत्नी, फिर कांग्रेस अध्यक्ष बनना — यह यात्रा इतनी सरल नहीं रही। चालीस साल तक लोगों ने उनकी कहानी अपने तरीके से बताई। अब मनिया बेगम खुद कह रहीं हैं।
और बस यहीं से शुरू हुई एक महिला की आवाज की कहानी।
कैंब्रिज में राजीव से दोस्ती: पहली मुलाकात का जादू
सोनिया की किताब की शुरुआत होती है 1960-70 के दशक के कैंब्रिज से। वहां उन्हें मिले राजीव गांधी। ग्रीक रेस्तोरां में खाना खाते समय दोस्ती शुरू हुई, जो बाद में प्रेम में तब्दील हुई।
सोनिया ने किताब में लिखा है:
“वह बहुत सौम्य दिखने वाले व्यक्ति थे। बेशक, वह बहुत अच्छे दिखते थे। लेकिन उनका सौम्य स्वभाव साफ नजर आता था।”
यह प्रेम की पहली झलक थी। दोनों पार्टियों, घूमने-फिरने में समय बिताते थे। राजीव के जेंटल नेचर ने सोनिया को आकर्षित किया। समझने वाली बात है कि यह सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों का मेल था।
भारत आकर नए परिवार में ढलना: साड़ी, हिंदी, संस्कृति
शादी के बाद जब सोनिया भारत आईं, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी — खुद को ढालना। भाषा नहीं आती थी, संस्कृति अलग थी, खानपान भिन्न था। मगर सोनिया ने हिंदी सीखी, साड़ी पहनी, भारतीय जीवनशैली अपनाई।
आत्मकथा में यह पहलू अक्सर नजरअंदाज रहता है। इटली की एक युवती के लिए ‘यूरोपीय सांस से भारतीय सांस तक’ का सफर कितना कठिन रहा होगा? किताब में सोनिया इसी ‘बेलॉन्गिंग’ (अपनापन पाने) की यात्रा बताएंगी।
इंदिरा की हत्या, राजीव की हत्या: दर्द और राजनीति
1984: इंदिरा गांधी की हत्या। राजीव प्रधानमंत्री बने।
1991: राजीव की हत्या। सोनिया का सारा जगत बदल गया।
किताब में सोनिया लिखती हैं कि इन त्रासदियों ने उन्हें सार्वजनिक जीवन की ओर धकेला। पहले वह निजी जीवन में ही रहना चाहती थीं, मगर परिस्थितियों ने कुछ और ही सोचा था।
1997: कांग्रेस को एकजुट करने का फैसला
1991 में राजीव की मौत के बाद, सोनिया 6 साल तक राजनीति से दूर रहीं। मगर 1996-97 में जब कांग्रेस बिखरने लगी, तब सोनिया को एहसास हुआ कि पार्टी को जोड़ने की जरूरत है।
1997 में पार्टी की सदस्यता ली। 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष बन गईं। यह सोनिया का सबसे महत्वपूर्ण फैसला साबित हुआ। 19 साल तक (1998-2017) वह अध्यक्ष रहीं — पार्टी के इतिहास में सबसे लंबा कार्यकाल।
2004: PM पद को ठुकरा देना — इतिहास का सबसे बड़ा ‘नो’
2004 में कांग्रेस की जीत हुई। सहयोगियों ने सोनिया को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया। 335 सांसदों का समर्थन था। मगर सोनिया ने 18 मई 2004 को पद ठुकरा दिया।
विरोधियों का तर्क: “वह विदेशी हैं।” कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह सोनिया का आंतरिक नियम था — परिवार के पहले सदस्य के तौर पर वह PM नहीं बन सकतीं। इसलिए उन्होंने मनमोहन सिंह को PM बनाने का रास्ता खोल दिया।
किताब में सोनिया इसी ऐतिहासिक फैसले को समझाएंगी — क्यों ‘NO’ कहा?
मुख्य बातें (Key Points)
- किताब: ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ (अंग्रेजी में)।
- लॉन्च: 10 नवंबर 2026।
- लेखक: सोनिया गांधी (संस्मरण/आत्मकथा)।
- मुख्य विषय: कैंब्रिज से राजीव से मिलना, शादी, भारत आना, इंदिरा की मौत, राजीव की मौत, कांग्रेस अध्यक्ष बनना, 2004 का PM पद ठुकरा देना।
- विशेष: प्रायनका की तस्वीरें, पारिवारिक यादें, व्यक्तिगत भावनाएं।
- X पर घोषणा: सोनिया गांधी ने कहा — “जब किताब आएगी, तमाशा होगा।”












