Amit Shah Punjab Visit आज पूरे सूबे की सियासत का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बन गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 20 अक्टूबर को दिल्ली से सीधे अमृतसर पहुंचेंगे और वहां से हेलिकॉप्टर के जरिए गुरदासपुर, संगरूर और मानसा का दौरा करेंगे। देखा जाए तो यह कोई साधारण दौरा नहीं है, बल्कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत अपनी जान देकर चुकाने वाले तीन परिवारों से मिलने का संवेदनशील मिशन है।
दिलचस्प बात यह है कि शाह के पहुंचने से ठीक कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर मानसा के नशा विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जांच CBI को सौंपने का ऐलान कर दिया। यानी एक तरफ केंद्रीय मंत्री पीड़ित परिवारों के आंसू पोंछने पहुंच रहे हैं, तो दूसरी तरफ राज्य सरकार अपनी तरफ से बड़ा दांव खेलकर माहौल को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश में जुटी है।
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तीन मौतें, तीन कहानियां: एक नज़र में समझें पूरा मामला
समझने वाली बात है कि शाह जिन तीन परिवारों से मिलने जा रहे हैं, उनकी कहानियां अलग-अलग गांव और शहर की हैं, लेकिन तीनों की जड़ में एक ही मुद्दा है : नशे का विरोध करना और उसकी कीमत जान देकर चुकाना।
| मृतक का नाम | जगह | कैसे हुई मौत | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|---|
| परविंदर सिंह झोटा (42) | मानसा | केमिस्ट से नशा बेचने पर बहस, गोली लगने से मौत | CBI जांच का ऐलान, 8 दिन से डेडबॉडी अस्पताल में |
| बिक्रमजीत सिंह (40) | गुरदासपुर | नशा तस्करी का विरोध, धारदार हथियार से हत्या | 2 आरोपी गिरफ्तार, केंद्र ने रिपोर्ट मांगी |
| गुलजार सिंह | संगरूर (तूर बंजारा) | मंत्री चीमा से सवाल पूछने पर दबाव, जहर खाकर सुसाइड | हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल |
अगर गौर करें तो तीनों ही मामलों में केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले ही पंजाब सरकार से रिपोर्ट तलब कर चुका है। इससे साफ होता है कि मामला अब सिर्फ राज्य की कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केंद्र-राज्य के बीच की सियासी रस्साकशी का विषय बन चुका है।
शाह का पूरा शेड्यूल: कहां-कहां जाएंगे गृहमंत्री
अमित शाह सबसे पहले अमृतसर एयरपोर्ट पर उतरेंगे। वहां से हेलिकॉप्टर पकड़कर सीधा गुरदासपुर रवाना होंगे, जहां वे बिक्रमजीत सिंह के परिवार का हाल-चाल जानेंगे। इसके बाद उनका अगला पड़ाव होगा संगरूर जिले का गांव तूर बंजारा, जहां गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात तय है।
फिर बारी आएगी मानसा की। यहां एक पार्क में शाह झोटा के पिता, पत्नी और बेटों से बातचीत करेंगे। और दिन के आखिर में वे लुधियाना के दरेसी ग्राउंड में सबसे बड़े दशहरा मेले में शामिल होकर रावण दहन भी करेंगे। यानी एक ही दिन में भावुक मुलाकातों के साथ-साथ त्योहारी मंच पर भी नजर आएंगे गृहमंत्री।
CM मान का बड़ा दांव: CBI को सौंपा झोटा केस
शाह के पहुंचने से ठीक पहले भगवंत मान ने ‘X’ पर पोस्ट करके कहा कि नशे के खिलाफ लड़ रहे परविंदर सिंह झोटा के पिता और परिवार के साथ सरकार हर समय मजबूती से खड़ी है। उन्होंने साफ कहा कि परिवार की मांग को मानते हुए यह केस CBI को सौंपा जा रहा है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब सरकार पहले CBI जांच का विरोध करती रही है और इस मुद्दे पर अदालत तक गई थी। अब वही सरकार खुद केस CBI को सौंप रही है। इसका मतलब है कि सियासी दबाव इतना बढ़ गया कि सरकार को अपना पुराना रुख बदलना पड़ा। राहत की बात यह है कि पीड़ित परिवार और इंसाफ कमेटी की मुख्य मांग आखिरकार मान ली गई।
वित्तमंत्री चीमा का पलटवार: ‘भाजपा लाशों पर राजनीति कर रही’
शाह के दौरे से ठीक पहले पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि मेडिकल नशे पर पाबंदी लगाने के लिए केंद्र को तीन बार पत्र लिखे गए, लेकिन एक का भी जवाब नहीं आया।
चीमा का कहना है कि पंजाब में बिकने वाला केमिकल नशा खुद पंजाब में नहीं बनता। इसकी शुरुआत भाजपा शासित हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से हुई थी और इन दवाइयों की एक भी फैक्ट्री पंजाब में नहीं है। सवाल उठता है कि अगर नशा बाहर से आ रहा है, तो जिम्मेदारी सिर्फ राज्य सरकार की कैसे हो सकती है?
चीमा ने यह भी कहा कि इन दवाइयों को NDPS एक्ट में शामिल करने के लिए 31 अक्टूबर 2025 को केंद्र को दो पत्र लिखे गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मिथाइल अल्कोहल को लेकर भी यही हाल रहा। उनका आरोप है कि केंद्र पुराने और आजादी-पूर्व के कानूनों का हवाला देकर जिम्मेदारी से बच रहा है।
मंत्री अमन अरोड़ा के 4 तीखे सवाल
वहीं दूसरी ओर, पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा ने भी चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके गृहमंत्री के सामने चार सवाल रखे। पहला सवाल सीधा सीमा सुरक्षा से जुड़ा था : पंजाब की 543 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा और 50 किलोमीटर के दायरे में BSF और केंद्र सरकार जिम्मेदार हैं, फिर भी नशा और हथियार पाकिस्तान से क्यों आ रहे हैं?
दूसरा सवाल गुजरात के मुद्रा पोर्ट से जुड़ा था, जहां बड़ी मात्रा में हेरोइन की खेप पकड़ी गई थी। तीसरा सवाल बेहद तीखा था : 2007 से 2017 तक जब अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार थी, तब ‘चिट्टा’ जैसा शब्द क्यों चर्चा में आया? और चौथा सवाल महाराष्ट्र व हरियाणा जैसे भाजपा शासित राज्यों में बढ़ते गैंगस्टर मामलों को लेकर था। इससे साफ होता है कि पंजाब सरकार केंद्र के सवालों का जवाब देने के बजाय जवाबी हमला करने की रणनीति पर उतर आई है।
झोटा मर्डर केस: नशा बेचने का सवाल बना मौत की वजह
मानसा के रहने वाले 42 वर्षीय परविंदर झोटा इलाके में नशे के खिलाफ मुहिम चला रहे थे। 13 अक्टूबर को उन्होंने एक संदिग्ध व्यक्ति को नशीली दवाओं के साथ पकड़ा और उसे केमिस्ट अश्विनी कुमार की दुकान पर ले गए। उसी वक्त झोटा फेसबुक लाइव कर रहे थे।
और बस यहीं से शुरू हुई असली त्रासदी। दोनों के बीच बहस बढ़ी और अश्विनी कुमार ने झोटा को गोली मार दी। झोटा को पेट और जांघ में तीन गोलियां लगीं, अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। गुस्साई भीड़ ने आरोपी का घर और मेडिकल स्टोर फूंक डाला। परिवार ने अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया और करीब 8 दिन से डेडबॉडी अस्पताल में ही पड़ी है। मानसा की SHO बेअंत कौर को सस्पेंड किया गया और मुख्य आरोपी को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया गया।
गुलजार सिंह सुसाइड केस: सवाल पूछना पड़ा महंगा
संगरूर के गांव तूर बंजारा के गुलजार सिंह खेतों में मजदूरी करते थे। उनका 26 वर्षीय बेटा नशे की लत में इस कदर डूबा था कि घर के बर्तन, गैस सिलेंडर और मां के गहने तक बेच दिए। 6 सितंबर 2026 को वित्तमंत्री हरपाल चीमा गांव में कार्यक्रम के लिए पहुंचे, तो गुलजार सिंह ने पूछ लिया कि गांव में चिट्टे की बिक्री क्यों नहीं रुक रही।
परिवार का आरोप है कि इसके बाद उन्हें धमकाया गया और पंचायत के सामने माफी मांगने का दबाव बनाया गया। 7 सितंबर को उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया और अगले दिन लुधियाना के अस्पताल में उनकी मौत हो गई। मौत से पहले के वीडियो में गुलजार सिंह ने जिन लोगों के नाम लिए, उनमें मंत्री चीमा का नाम भी शामिल था। यह मामला अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जरिए लड़ा जा रहा है।
बिक्रमजीत सिंह हत्याकांड: विवाद की दो अलग कहानियां
गुरदासपुर के गांव माड़ी पनवां में 15 अक्टूबर की रात 40 वर्षीय बिक्रमजीत सिंह की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई। उनके दो साथी गंभीर घायल हुए। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में नशा तस्करी का विरोध करने पर यह हमला हुआ।
हालांकि दिलचस्प बात यह है कि बटाला के SSP महताब सिंह का कहना है कि विवाद चोरी हुए मोबाइल फोन को लेकर शुरू हुआ था और इसका नशा तस्करी से कोई संबंध नहीं मिला। पुलिस ने छह लोगों को नामजद किया और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 16 अक्टूबर को ही पंजाब सरकार से इस घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांग ली थी।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
इन तीनों घटनाओं का सीधा असर पंजाब के आम नागरिकों की सुरक्षा भावना पर पड़ा है। मानसा में तो इस बार दशहरे का त्योहार तक फीका पड़ गया है, बाजारों में रौनक गायब है और दुकानदार ग्राहकों के इंतजार में खाली बैठे हैं। यह दर्शाता है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले आम लोगों के मन में अब डर बैठ गया है, जो किसी भी समाज के लिए चिंता का विषय है।
राजनीतिक रस्साकशी में कहां खड़ा है पंजाब?
अगर गौर करें तो इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा नुकसान आम जनता का हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने में व्यस्त हैं, जबकि तीन परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं। यह दर्शाता है कि नशे जैसी गंभीर समस्या पर जब तक केंद्र और राज्य मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक सिर्फ बयानबाजी और एक-दूसरे पर आरोप ही होते रहेंगे। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि CBI जांच का नतीजा क्या निकलता है और क्या सच में मेडिकल नशे पर कोई ठोस नीति बनती है या नहीं।
जानें पूरा मामला
दरअसल पिछले कुछ हफ्तों में पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले तीन लोगों की जान जा चुकी है : दो की हत्या हुई और एक ने सुसाइड किया। इन तीनों मामलों ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले ही इन घटनाओं पर पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांग चुका है। अब अमित शाह के दौरे के साथ यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, और इसी बीच CM मान का CBI जांच का ऐलान इसे और बड़ा सियासी रंग दे गया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमित शाह आज गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में तीन पीड़ित परिवारों से मिलेंगे
- CM भगवंत मान ने शाह के दौरे से पहले परविंदर झोटा हत्याकांड की CBI जांच का ऐलान किया
- वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने केंद्र पर मेडिकल नशे को लेकर पत्रों का जवाब न देने का आरोप लगाया
- मंत्री अमन अरोड़ा ने गृहमंत्री से सीमा सुरक्षा, मुद्रा पोर्ट और गैंगस्टर मुद्दों पर 4 सवाल पूछे













