Jhota Murder Case में अब एक नया मोड़ आ गया है, जहां पीड़ित के पिता और एक्शन कमेटी के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरोध को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
देखा जाए तो यह बयान उस वक्त आया जब आंदोलन में शामिल कुछ सदस्य अमित शाह का विरोध करने की तैयारी में थे, लेकिन परिवार का रुख इससे बिल्कुल अलग नजर आया।
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पिता ने किया गृहमंत्री के विरोध से इनकार
भीम सिंह ने साफ कहा कि बीते दिन एक्शन कमेटी के कुछ सदस्यों ने अमित शाह का विरोध करने का ऐलान किया था। अगर गृह मंत्री का विरोध किया जाता है तो यह समझा जाए कि उनका खुद का विरोध हो रहा है।
समझने वाली बात है कि भीम सिंह भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं, इसलिए देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री या रक्षामंत्री, चाहे कोई भी हो, वे सभी का सम्मान करने की बात कहते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि गृहमंत्री अमित शाह चाहें तो उनके घर आकर भी उनसे बातचीत कर सकते हैं।
अब पत्नी होंगी एक्शन कमेटी में शामिल
दिलचस्प बात यह है कि भीम सिंह ने ऐलान किया कि अब परविंदर सिंह की पत्नी खुद एक्शन कमेटी में शामिल होंगी और मीडिया को भी संबोधित करेंगी। इससे मामले को लेकर परिवार का पक्ष सीधे तौर पर सामने आ सकेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि धरने में आम आदमी पार्टी का कोई भी नेता शामिल न हो। हालांकि अगर कोई नेता पार्टी से इस्तीफा देकर धरने में आता है तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं होगी। वहीं उन्होंने कहा कि अन्य राजनीतिक दलों के नेता परविंदर सिंह को इंसाफ दिलाने के लिए धरने में शामिल हो सकते हैं।
CBI जांच की मांग दोहराई
पिता ने गृहमंत्री से अपील की कि मामले की तुरंत CBI जांच शुरू करवाई जाए। उन्होंने आशंका जताई कि जांच में देरी होने से पंजाब पुलिस मानसा में परविंदर सिंह के कत्ल मामले से जुड़े सबूत मिटा सकती है। चिंता का विषय यह भी है कि इसी आशंका के मद्देनजर ही उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग बार-बार उठाई है।
AAP विधायकों के घरों का घेराव
इसी बीच एक्शन कमेटी से जुड़े किसान और समर्थक AAP विधायकों के घरों पर पहुंचकर लानत पत्र सौंप रहे हैं। यह दर्शाता है कि आंदोलन अब सिर्फ धरने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ताधारी पार्टी के नेताओं तक सीधा दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है।
वहीं दूसरी ओर, भीम सिंह ने आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों पर उन्हें बिना जानकारी दिए फैसले लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को इंसाफ दिलाना प्राथमिकता है और धरने में आने वाले किसी भी राजनीतिक नेता का विरोध नहीं होना चाहिए।
पिता-कमेटी के बीच बढ़ी दूरियां
सवाल उठता है कि जब परिवार और एक्शन कमेटी एक ही मकसद के लिए लड़ रहे हैं, तो फिर फैसलों को लेकर इतनी दूरी क्यों बढ़ रही है। भीम सिंह का कहना है कि 13 से 16 अक्टूबर तक लिए गए फैसले उनसे पूछकर लिए जा रहे थे, लेकिन 17 और 18 अक्टूबर की बातचीत में उन्हें शामिल नहीं किया गया।
आम आदमी के लिए क्या है इसका असर
जब किसी आंदोलन में पीड़ित परिवार और समर्थक संगठन के बीच ही मतभेद उभरने लगें, तो इससे पूरे आंदोलन की दिशा प्रभावित होने का खतरा रहता है। आम जनता के लिए यह एक सबक है कि न्याय की लड़ाई में एकजुटता कितनी जरूरी होती है।
विश्लेषण: आंदोलन के भीतर दरार, कहीं भटक न जाए असली मुद्दा
अगर गौर करें तो भीम सिंह का यह बयान इस बात का साफ संकेत है कि एक्शन कमेटी के भीतर अलग-अलग विचारधाराएं काम कर रही हैं। एक तरफ कमेटी राजनीतिक रूप से आक्रामक रुख अपनाना चाहती है, तो दूसरी तरफ पीड़ित परिवार किसी भी राजनीतिक दल से टकराव नहीं चाहता। यह टकराव कहीं न कहीं असली मुद्दे – यानी निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा – से ध्यान भटका सकता है। पत्नी को कमेटी में शामिल करने का फैसला शायद परिवार की तरफ से सीधा नियंत्रण वापस लेने की एक कोशिश है।
जानें पूरा मामला
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद बनी एक्शन कमेटी लगातार CBI जांच और नेताओं के इस्तीफे की मांग कर रही है। लेकिन पिता भीम सिंह ने हाल के फैसलों में अपनी भागीदारी न होने पर नाराजगी जताई है और ऐलान किया है कि अब उनकी बहू खुद कमेटी में शामिल होकर मीडिया को संबोधित करेंगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- पिता भीम सिंह ने अमित शाह के विरोध से खुद को अलग बताया
- परविंदर की पत्नी अब खुद एक्शन कमेटी में होंगी शामिल
- AAP विधायकों के घरों पर लानत पत्र सौंपने पहुंचे समर्थक
- भीम सिंह ने CBI जांच की मांग फिर से दोहराई











