Ammunition Scam Case ने अब पंजाब के रामपुरा फूल से जुड़े एक बड़े कारोबारी परिवार को शिकंजे में ले लिया है। CBI ने नई दिल्ली में 12 अक्टूबर को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मिलिट्री सप्लाई से जुड़े रिश्वतखोरी मामले का भंडाफोड़ किया। इसमें मिलिट्री कंपनी के एक बड़े अधिकारी समेत छह लोगों पर केस दर्ज किया गया, जिनमें रामपुरा फूल के आशीष कांसल भी शामिल हैं।
देखा जाए तो यह मामला सिर्फ रिश्वतखोरी का नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक होने का भी है। और यही बात इस केस को बाकी भ्रष्टाचार के मामलों से अलग और ज्यादा गंभीर बना देती है।
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क्या है पूरा मामला
रामपुरा फूल के शिव चंद कांसल के परिवार की कंपनी ‘मैसर्ज SMPP लिमिटेड’ डिफेंस सेक्टर में ड्रोन टेक्नोलॉजी और गोला-बारूद बनाने का काम करती है। केंद्र सरकार की मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) ने एक साल की अवधि के लिए 500 करोड़ रुपये का गोला-बारूद सप्लाई ठेका इसी कंपनी को दिया हुआ था।
समझने वाली बात है कि इतनी बड़ी रकम का सरकारी ठेका मिलना आसान बात नहीं। और शायद इसी वजह से इस सौदे के पीछे कुछ और भी खेल चल रहा था, जिसका पता अब CBI की जांच में खुलकर सामने आया है।
कैसे हुआ भंडाफोड़
CBI के बयान के मुताबिक, मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड पुणे के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार अपनी तैनाती के दौरान रक्षा उत्पादन, खरीद और अन्य रणनीतिक रूप से संवेदनशील जानकारी लीक कर रहे थे। ठेकेदारों या निजी विक्रेताओं के साथ यह जानकारी साझा करने के बदले उनसे नाजायज रिश्वत मांगी जाती थी।
चिंता का विषय यह है कि इस तरह की सूचना लीक होने से कौमी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। आशीष कांसल ने इसी 500 करोड़ के सरकारी ठेके के सिलसिले में अनिल कुमार के साथ नियमित संपर्क बना रखा था। कांसल की कंपनी का एक कर्मचारी रवित कुमार तिवाड़ी भी इस पूरे खेल में अनिल कुमार के संपर्क में था।
12 अक्टूबर को मिलनी थी भारी रिश्वत
दिलचस्प बात यह है कि CBI को पहले से भनक लग चुकी थी कि 12 अक्टूबर को अनिल कुमार को आशीष कांसल से भारी रिश्वत मिलने वाली है। इसी सूचना के आधार पर एजेंसी ने जाल बिछाया और सही वक्त पर कार्रवाई करते हुए पूरे गिरोह को दबोच लिया।
CBI ने अनिल कुमार के ठिकानों से 1.73 करोड़ रुपये की नगदी बरामद की। इससे साफ होता है कि यह कोई छोटा-मोटा लेन-देन नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित तरीके से चल रहा भ्रष्टाचार का नेटवर्क था। एजेंसी ने अनिल कुमार और आशीष कांसल के अलावा बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया है।
रामपुरा फूल से दिल्ली तक का सफर
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि रामपुरा फूल का कांसल परिवार काफी समय पहले दिल्ली शिफ्ट हो चुका था। मैसर्ज SMPP लिमिटेड कंपनी में आशीष कांसल होल-टाइम डायरेक्टर हैं, जबकि उनके पिता शिव चंद कांसल मैनेजिंग डायरेक्टर की भूमिका में हैं।
इसी तरह मधू कांसल होल-टाइम डायरेक्टर हैं, वहीं महिमा गुप्ता और मनोज गुप्ता भी कंपनी में डायरेक्टर पद पर काम करते हैं। यह दर्शाता है कि पूरा कारोबार एक पारिवारिक नेटवर्क के तहत चलाया जा रहा था।
ED भी पहले से कर रही थी जांच
वहीं दूसरी ओर, यह पहला मौका नहीं जब कांसल परिवार केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर आया हो। एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने मई महीने में मनी लॉन्ड्रिंग के एक अलग मामले में इसी परिवार के रॉयल एस्टेट ग्रुप और चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के आधा दर्जन ठिकानों पर छापेमारी की थी।
इन कंपनियों से जुड़े परवीन कांसल उर्फ रॉकी कांसल और उनके भाई नीरज कांसल को बाद में गिरफ्तार भी कर लिया गया था। और अब रॉकी कांसल के भतीजे आशीष कांसल का नाम सामने आने से पूरा परिवार दोहरी मुसीबत में घिर गया है।
आम आदमी के लिए क्यों अहम है यह मामला
सवाल उठता है कि जब रक्षा क्षेत्र जैसे संवेदनशील सेक्टर में भी भ्रष्टाचार इतनी गहराई तक घुस चुका है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा। देश की सुरक्षा से जुड़े सौदों में अगर जानकारी लीक होती रहे, तो इसका सीधा असर सीमा पर तैनात जवानों से लेकर आम नागरिकों तक की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
विश्लेषण: डिफेंस सेक्टर में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें
अगर गौर करें तो यह मामला सिर्फ एक परिवार या एक अधिकारी की गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिस तरह से एक सरकारी अधिकारी संवेदनशील रक्षा जानकारी को पैसों के बदले लीक कर रहा था, वह पूरे सिस्टम की खामियों की तरफ इशारा करता है। इसका मतलब है कि डिफेंस डील्स में पारदर्शिता लाने के लिए मौजूदा निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही, कांसल परिवार का नाम पहले भी मनी लॉन्ड्रिंग केस में आना यह भी दिखाता है कि कुछ कारोबारी घराने बार-बार कानून की सीमाओं को लांघने की कोशिश करते हैं, और एजेंसियों को ऐसे नेटवर्क पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है।
जानें पूरा मामला
CBI ने 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार और SMPP लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर आशीष कांसल समेत छह लोगों पर 500 करोड़ के गोला-बारूद सौदे में रिश्वतखोरी और संवेदनशील रक्षा जानकारी लीक करने का केस दर्ज किया। जांच में 1.73 करोड़ रुपये नगद बरामद हुए और कई आरोपी गिरफ्तार किए गए। यह परिवार पहले भी मई में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED की रडार पर रह चुका है।
मुख्य बातें (Key Points)
- CBI ने 500 करोड़ के गोला-बारूद सौदे में रिश्वतखोरी मामले में छह लोगों पर केस दर्ज किया
- रामपुरा फूल के आशीष कांसल और MIL पुणे के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार गिरफ्तार
- अनिल कुमार के ठिकानों से 1.73 करोड़ रुपये नगद बरामद, कौमी सुरक्षा खतरे में पड़ने की आशंका
- कांसल परिवार मई में भी ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में फंस चुका है













