Parvinder Jhota Murder Case एक बार फिर सुर्खियों में है और इस बार वजह है केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 20 अक्टूबर को होने वाला पंजाब दौरा। मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की बीते 13 अक्टूबर को दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सात दिन बीत जाने के बावजूद न तो शव का पोस्टमार्टम हुआ है, न ही अंतिम संस्कार। परिवार और समर्थक मानसा में धरने पर बैठे हैं और इंसाफ मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं।
देखा जाए तो यह मामला अब सिर्फ एक हत्याकांड नहीं रहा, बल्कि पंजाब की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दलों की एंट्री ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है।
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कैसे हुई थी परविंदर झोटा की हत्या
मानसा के एक भीड़-भाड़ वाले बाजार में मेडिकल स्टोर के अंदर यह वारदात हुई थी। परविंदर सिंह झोटा उस वक्त फेसबुक लाइव कर रहे थे। आरोप है कि स्टोर मालिक अश्विनी कुमार ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीली दवाइयां बेचने पर झोटा द्वारा सवाल पूछे जाने से भड़कर उन पर गोलियां चला दीं।
समझने वाली बात है कि झोटा लंबे समय से कैमिस्ट की दुकानों से नशीले पदार्थों की गैर-कानूनी बिक्री के खिलाफ मुहिम चला रहे थे। आरोपी को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया गया। लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होता – परिवार का कहना है कि जांच में देरी होने से सबूत मिट सकते हैं, इसलिए CBI जांच ही एकमात्र रास्ता है।
सरकार ने उतारीं तीन महिला IAS अधिकारी
ऐसे में पंजाब सरकार ने एक्शन कमेटी से रस्मी बातचीत के लिए तीन महिला IAS अधिकारियों की अनौपचारिक टीम मानसा के मैदान में उतारी है। इस टीम में 2007 बैच की कंवलप्रीत कौर बराड़, 2011 बैच की अपनीत रियात और मानसा की डिप्टी कमिश्नर नवजोत कौर शामिल हैं।
राहत की बात यह रही कि करीब हफ्ते भर की खींचतान के बाद आखिरकार सरकार बातचीत के मूड में आई। इससे पहले स्थानीय पुलिस अधिकारी बातचीत का रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन एक्शन कमेटी ने पुलिस से बात करने से साफ इनकार कर दिया था। यह दर्शाता है कि कमेटी का गुस्सा सिर्फ हत्या तक सीमित नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन पर भरोसे की कमी भी इसकी बड़ी वजह है।
अमित शाह के दौरे पर बवाल क्यों
अब बात करते हैं इस पूरे मामले के सबसे चर्चित मोड़ की। अमित शाह ने फेसबुक पोस्ट के जरिए 20 अक्टूबर को पंजाब के तीन जिलों – मानसा, संगरूर और गुरदासपुर – में जाने का ऐलान किया है। दोपहर 12 बजे वे मानसा में झोटा के परिवार से मिलेंगे, सवा 1 बजे संगरूर और सवा 3 बजे गुरदासपुर पहुंचेंगे।
और बस यहीं से शुरू हुई असली कशमकश। एक्शन कमेटी ने शाह के मानसा दौरे का खुलकर विरोध करने का ऐलान कर दिया है। कमेटी नेता हरदीप सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार को मंच पर नहीं आने दिया जाएगा। उनका तर्क है कि नशे का कारोबार सिर्फ पंजाब सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की नाकामी भी इसके पीछे बराबर की वजह है।
वहीं दूसरी ओर शाह ने अपनी पोस्ट में भगवंत मान सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकारी संरक्षण में चिट्टे का कारोबार फल-फूल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत सरकार चिट्टा कारोबारियों को चुन-चुनकर जेल भेजेगी।
पिता भीम सिंह की नाराजगी, बहू होंगी कमेटी में शामिल
इसी बीच परविंदर के पिता भीम सिंह फौजी का रुख बाकी एक्शन कमेटी सदस्यों से अलग नजर आया। उन्होंने सोमवार सुबह एक वीडियो जारी कर आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों पर बिना बताए फैसले लेने का आरोप लगाया।
भीम सिंह ने साफ कहा कि वे खुद भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं और देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री या रक्षामंत्री चाहे जो भी हो, वे सभी का सम्मान करते हैं। अगर गृहमंत्री का विरोध होता है तो यह समझा जाए कि उनका खुद का विरोध हो रहा है। यह बयान साफ तौर पर कमेटी के भीतर मतभेद की ओर इशारा करता है।
चिंता का विषय यह भी है कि 17-18 अक्टूबर की बैठकों के फैसलों की जानकारी उन्हें सीधे नहीं दी गई, बल्कि दूसरे लोगों से पता चली। इसका मतलब है कि परिवार और एक्शन कमेटी के बीच तालमेल में दरार आनी शुरू हो गई है। भीम सिंह ने ऐलान किया कि अब उनकी पुत्रवधू खुद कमेटी में शामिल होकर मीडिया को संबोधित करेंगी, ताकि परिवार का पक्ष सीधे सामने आ सके।
दिलजीत दोसांझ ने दिया ‘शहीद’ का दर्जा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पंजाबी इंडस्ट्री से भी भावुक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। गायक दिलजीत दोसांझ ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर झोटा की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “शहीद परविंदर सिंह… दुख की इस घड़ी में पूरा पंजाब परिवार के साथ है। परिवार को इंसाफ मिलना चाहिए।”
उम्मीद की किरण तब और मजबूत हुई जब अभिनेत्री नीरू बाजवा ने अपनी नई पंजाबी फिल्म “थापी” की स्क्रीनिंग फिलहाल रोकने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “सिनेमा लोगों के लिए है, यह कभी लोगों से बड़ा नहीं हो सकता।” गायक बब्बू मान ने भी मानसा पहुंचकर धरने में शिरकत की और झोटा की लड़ाई को सराहा।
तीन जिलों की कहानी, एक जैसा दर्द
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अमित शाह सिर्फ मानसा नहीं जा रहे। उनका दौरा संगरूर और गुरदासपुर तक फैला है, और तीनों जगहों की कहानी एक जैसे दर्द की है।
| जिला | पीड़ित | घटना |
|---|---|---|
| मानसा | परविंदर सिंह झोटा | गोली मारकर हत्या |
| गुरदासपुर | बिक्रमजीत | कत्ल |
| संगरूर | गुलजार सिंह | सुसाइड |
इससे साफ होता है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कई परिवारों ने अपने घर के सदस्य खोए हैं, और यह मुद्दा अकेले मानसा तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पंजाब की त्रासदी बनता जा रहा है।
जिला प्रशासन से होगी अहम बैठक
एक्शन कमेटी की जिला प्रशासन के साथ पहली औपचारिक बैठक 19 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इस बैठक में हत्या की जांच, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने से जुड़ी मांगें उठाई जाएंगी। सवाल उठता है कि क्या यह बैठक धरने को खत्म करने की दिशा में कोई ठोस नतीजा निकाल पाएगी, या मामला यूं ही खिंचता रहेगा।
आम आदमी पर क्या असर
इस पूरे मामले का सीधा असर पंजाब के उन आम परिवारों पर पड़ रहा है जो नशे के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत रखते हैं। अगर प्रशासन ऐसे कार्यकर्ताओं को सुरक्षा नहीं दे पाया, तो आने वाले समय में कोई और आवाज उठाने से डरेगा। यही वजह है कि यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
विश्लेषण: राजनीति और इंसाफ के बीच फंसा एक परिवार
अगर गौर करें तो यह मामला अब इंसाफ की लड़ाई से आगे बढ़कर राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है। एक तरफ केंद्र सरकार इसे राज्य सरकार की नाकामी बताकर अपनी छवि चमकाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ एक्शन कमेटी केंद्र को भी बराबर का जिम्मेदार मानती है। इस खींचतान में सबसे ज्यादा नुकसान उस परिवार का हो रहा है जो सिर्फ अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहता है। पिता भीम सिंह की नाराजगी इस बात का साफ संकेत है कि आंदोलन के भीतर भी एकराय नहीं बन पा रही, और यही बंटवारा कहीं न कहीं असली मुद्दे – यानी निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा – से ध्यान भटका सकता है।
जानें पूरा मामला
13 अक्टूबर को मानसा के एक मेडिकल स्टोर पर नशीली दवाइयों की बिक्री का विरोध करने पर कैमिस्ट अश्विनी कुमार ने परविंदर सिंह झोटा को गोली मार दी थी। इसके बाद से परिवार और समर्थक धरने पर बैठे हैं और CBI जांच समेत पांच मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। अब तक न पोस्टमार्टम हुआ है, न अंतिम संस्कार, और 20 अक्टूबर को गृहमंत्री अमित शाह के दौरे ने इस मामले को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- मानसा में 13 अक्टूबर को नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या, सात दिन बाद भी अंतिम संस्कार नहीं
- पंजाब सरकार ने बातचीत के लिए तीन महिला IAS अधिकारियों की टीम मानसा भेजी
- अमित शाह 20 अक्टूबर को मानसा, संगरूर और गुरदासपुर जाएंगे, एक्शन कमेटी ने किया विरोध का ऐलान
- दिलजीत दोसांझ ने झोटा को ‘शहीद’ बताया, नीरू बाजवा ने फिल्म की स्क्रीनिंग रोकी













