CBI Probe Punjab को लेकर इस वक्त राज्य की सियासत में हलचल मची हुई है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने पंजाब में तबादलों-तैनातियों, पक्षपातपूर्ण नीतियों और टेंडर अलॉटमेंट से जुड़ी कथित अनियमितताओं के 15 मामलों की सरकारी फाइलों की पड़ताल शुरू कर दी है। समझने वाली बात है कि यह सिर्फ एक सामान्य जांच नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच रखने वाले कई अफसरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रही है।
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29 सदस्यीय टीम कर रही है पूरे मामले की पड़ताल
दरअसल, CBI की एक 29 सदस्यीय टीम इस समय पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों ने केंद्रीय एजेंसी को जरूरी रिकॉर्ड पहले ही मुहैया करा दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि सीबीआई टीम ने सिर्फ सरकारी अफसरों तक ही सीमित न रहते हुए, उन प्राइवेट व्यक्तियों को भी जांच में शामिल किया है जिन्होंने किसी न किसी घोटाले को उजागर किया था। इससे साफ होता है कि एजेंसी इस बार मामले की तह तक जाना चाहती है।
मुख्यमंत्री दफ्तर के करीबियों पर पहले से दर्ज है केस
यहां याद दिलाना जरूरी है कि सीबीआई ने मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मण और उनके पांच अन्य करीबियों : नितिन गोहल, जितिन गोहल, रोमी महाजन, बीर दविंदर और आर.एस. नागरा के खिलाफ 5 अक्टूबर को पहले ही केस दर्ज कर रखा है।
अब सीबीआई ने मुख्यमंत्री दफ्तर में राजबीर घुम्मण और जितिन गोहल की नियुक्ति से जुड़ी फाइलें भी मांग ली हैं। बीते दो दिनों में अलग-अलग विभागों ने यह फाइलें एजेंसी को भेज भी दी हैं।
| जांच का विषय | संबंधित जानकारी |
|---|---|
| OSD नियुक्ति | राजबीर घुम्मण की नियुक्ति संबंधी फाइलें |
| CMO तैनाती | जितिन गोहल की तैनाती का रिकॉर्ड |
| हाउसिंग प्रोजेक्ट | जीरकपुर स्थित एस्कॉन प्राइमेरा प्रोजेक्ट |
| भर्ती | टाउन प्लानर (ग्रेड-ए) भर्ती 2024 |
| अस्पताल लाइसेंस | सरहिंद के माइंड केयर हॉस्पिटल का नवीनीकरण |
जीरकपुर हाउसिंग प्रोजेक्ट से लेकर अनाज ढुलाई तक
अगर गौर करें तो सीबीआई द्वारा तलब किए गए रिकॉर्ड का दायरा काफी बड़ा है। इसमें पंजाब स्थानीय सरकार विभाग में सहायक टाउन प्लानरों (ग्रेड-ए) की 2024 की भर्ती से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
इसके अलावा जीरकपुर के एयरपोर्ट रोड पर पिंड छत में मालवा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए जा रहे एस्कॉन प्राइमेरा ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट की फाइलें भी जांच के घेरे में हैं।
वहीं दूसरी ओर, सरहिंद के माइंड केयर हॉस्पिटल के लाइसेंस नवीनीकरण, 2024-25 में वेरका द्वारा की गई खरीद, और खाद्य-सिविल सप्लाई विभाग की अनाज ढुलाई व मजदूरी नीतियों से जुड़ा रिकॉर्ड भी मांगा गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि असला लाइसेंसों से जुड़ा रिकॉर्ड भी इस जांच का हिस्सा बना है।
इस जांच के मायने क्या हैं
देखा जाए तो यह जांच सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहने वाली। इतने बड़े स्तर पर फाइलों की मांग यह दर्शाती है कि केंद्रीय एजेंसी पंजाब सरकार के कामकाज के तौर-तरीकों को बारीकी से परखना चाहती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़े अफसरों या नेताओं से पूछताछ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सवाल उठता है कि क्या यह जांच सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगी, या इसका असर राज्य की सियासत पर भी सीधा पड़ेगा? आम जनता के लिए यह जानना जरूरी है क्योंकि टेंडर और भर्तियों में पारदर्शिता सीधे उनके हक से जुड़ा मसला है।
जानें पूरा मामला
यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री दफ्तर में हुई नियुक्तियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं में हुए कथित पक्षपात से जुड़ा है। 5 अक्टूबर को सीबीआई ने राजबीर सिंह घुम्मण समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था, जिसके बाद से एजेंसी लगातार अलग-अलग विभागों से रिकॉर्ड मांग रही है। अब 15 मामलों की फाइलों की जांच शुरू होने के बाद यह मुद्दा पंजाब की सियासत में गरमाता जा रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- CBI की 29 सदस्यीय टीम पंजाब में 15 मामलों की फाइलों की जांच कर रही है।
- मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मण समेत छह लोगों पर पहले से केस दर्ज है।
- जीरकपुर हाउसिंग प्रोजेक्ट, टाउन प्लानर भर्ती और अस्पताल लाइसेंस की फाइलें जांच के घेरे में।
- असला लाइसेंस, वेरका खरीद और अनाज ढुलाई नीति का रिकॉर्ड भी तलब किया गया।













