Kerala Assembly Remove CEC Gyanesh Kumar Resolution : देशभर में वोटर सूचियों की विशेष संशोधन (SIR) को लेकर मचे घमासान और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच केरला विधानसभा ने सोमवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) Gyanesh Kumar को पद से हटाने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर दिया है। मुख्यमंत्री V.D. Satheesan द्वारा पेश इस प्रस्ताव में योग्य मतदाताओं के नाम काटने (Disenfranchisement) और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। देखा जाए तो, यह देश की किसी भी विधानसभा द्वारा इस तरह का पहला प्रस्ताव माना जा रहा है।
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वोट का अधिकार और लोकतंत्र की नींव
V.D. Satheesan ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “वोट का अधिकार हमारे लोकतंत्र की बुनियाद है। किसी भी संस्था को नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।” दिलचस्प बात यह है कि, यह प्रस्ताव सिर्फ CEC को हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें चुनायुक्त आयुक्तों की चयन समिति में बुनियादी बदलाव की भी मांग की गई है।
केरला सरकार ने सुझाव दिया है कि चुनाव आयोग की आजादी और विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए इस समिति में तीन लोगों को शामिल किया जाना चाहिए:
- प्रधानमंत्री
- लोकसभा में विपक्ष के नेता
- भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्तमान में चुनायुक्त आयुक्तों की नियुक्ति में विपक्ष का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जिसे लेकर लंबे समय से विवाद रहा है।
Disenfranchisment: वोटरों के नाम कटने का मुद्दा
प्रस्ताव में विशेष रूप से SIR (Special Intensive Revision) के दौरान वोटर सूचियों से योग्य मतदाताओं के नाम गायब होने का मुद्दा उठाया गया है। समझने वाली बात यह है कि जब भी वोटर लिस्ट की सफाई होती है, तो लाखों लोगों के नाम बिना किसी सूचना के कट जाते हैं, जिससे उन्हें वोट डालने का अधिकार छीन लिया जाता है। केरला विधानसभा ने मांग की है:
- वोटर सूचियों में कथित अनियमिताओं को तुरंत दूर किया जाए।
- गलत तरीके से हटाए गए सभी योग्य वोटरों के अधिकारों को बहाल (Restore) किया जाए।
दिलचस्प बात यह है कि, यह प्रस्ताव INDIA गठबंधन के रुख से मेल खाता है, जो लगातार यही आरोप लगा रहा है कि वर्तमान चुनाव आयोग केंद्र सरकार के ‘इशारे’ पर काम कर रहा है और वोटर लिस्ट को प्रभावित करके चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
पहली बार: किसी विधानसभा ने CEC को हटाने की मांग की
संवैधानिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहली बार है जब किसी राज्य की विधानसभा ने चुनाव आयोग के प्रमुख को हटाने की मांग करते हुए औपचारिक प्रस्ताव पास किया है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हालांकि यह प्रस्ताव सलाहात्मक (Advisory) है—क्योंकि राज्य विधानसभा के पास CEC को सीधे हटाने की शक्ति नहीं है—लेकिन इसका राजनीतिक और नैतिक दबाव काफी महत्वपूर्ण है।
यह प्रस्ताव संवैधानिक संकट की ओर इशारा करता है, जहाँ एक ओर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता का सवाल है और दूसरी ओर राज्यों का यह मानना है कि उनके नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार से खिलवाड़ हो रहा है।
जानें पूरा मामला: SIR विवाद क्या है?
Special Intensive Revision (SIR) चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की विशेष समीक्षा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि वर्तमान SIR में खासतौर पर गरीब, अल्पसंख्य और विपक्षी-प्रवृत्ति वाले क्षेत्रों के लोगों के नाम जानबूझकर काटे गए हैं, जिसे लेकर Supreme Court में भी याचिका दायर की गई है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ऐतिहासिक प्रस्ताव: Kerala Assembly ने पहली बार CEC Gyanesh Kumar को हटाने का प्रस्ताव पास किया।
- Disenfranchisement: वोटर लिस्ट से योग्य नाम कटने और उन्हें वापस लाने की मांग।
- नई चयन प्रक्रिया: CEC/ECs की नियुक्ति के लिए PM, LoP और CJI वाली समिति का सुझाव।
- सर्वसम्मति: CM V.D. Satheesan के नेतृत्व में पूरी विधानसभा ने समर्थन किया।











