Dhruv Rathee Arrest मशहूर यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को गुरुग्राम पुलिस ने रविवार तड़के करीब 3 बजे रिहा कर दिया। लेकिन रिहाई के बाद उन्होंने जो वीडियो बयान जारी किया, उसने पूरे मामले को एक नया और गंभीर मोड़ दे दिया है। राठी ने साफ शब्दों में दावा किया कि उन्हें “गिरफ्तार” या “हिरासत” में नहीं लिया गया था, बल्कि उनका “अगवा” (KIDNAPPED) किया गया था।
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे गुरुग्राम के सेक्टर 56 स्थित केंद्रीय विहार सोसाइटी में उनके घर से पुलिस ने उन्हें उठाया। यह कार्रवाई कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) द्वारा जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित धरने से ठीक पहले की गई।
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“मुझे अगवा किया गया”: राठी का वीडियो बयान
देखा जाए तो राठी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में जो लिखा, वह बेहद तीखा और सीधा था। उन्होंने लिखा: “मुझे गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया था, मुझे अगवा (KIDNAPPED) किया गया था।” इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने गुरुग्राम पुलिस को किसी भी तरह की कोई लिखित अंडरटेकिंग नहीं दी है।
यह दावा इसलिए भी अहम है क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों में पुलिस की तरफ से यह कहा जाता है कि व्यक्ति ने खुद सहमति से कुछ शर्तें मानी हैं। राठी ने इस बात को पूरी तरह नकार दिया है।
पूरा घटनाक्रम: सुबह 9:30 से तड़के 3 बजे तक
समझने वाली बात है कि इस पूरे मामले का टाइमलाइन काफी दिलचस्प है। शनिवार सुबह 9:30 बजे पुलिस उनके घर पहुंची। उन्हें हिरासत में लिया गया। दिन भर वे पुलिस की कस्टडी में रहे। और फिर रविवार तड़के 3 बजे उन्हें रिहा करके उनके परिवार के हवाले कर दिया गया।
दिलचस्प बात यह है कि यह पूरी कार्रवाई उस धरने के इर्द-गिर्द घूमती है जो CJP ने जंतर-मंतर पर करने की योजना बनाई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन होना था, और ठीक उससे पहले राठी को उठा लिया गया।
यह सवाल उठता है: आखिर क्यों?
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि एक यूट्यूबर को धरने से पहले ही हिरासत में ले लेना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह एहतियाती कदम था? क्या कानून-व्यवस्था का हवाला दिया गया? या फिर यह अभिव्यक्ति की आजादी पर एक चोट है?
अगर गौर करें तो पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स पर सरकारी कार्रवाई के मामले लगातार बढ़े हैं। राठी का मामला इसी कड़ी का एक और हिस्सा लगता है। उनके करोड़ों फॉलोअर्स हैं और उनकी आवाज एक बड़े वर्ग तक पहुंचती है। ऐसे में उनकी हिरासत का संदेश साफ है।
आम आदमी पर क्या असर?
चिंता का विषय यह है कि जब एक मशहूर व्यक्ति के साथ ऐसा होता है तो आम नागरिक की स्थिति क्या होगी? अगर कोई सामान्य इंसान किसी शांतिपूर्ण विरोध में शामिल होना चाहे, तो क्या उसके साथ भी ऐसा ही सलूक होगा? यह सवाल हर उस व्यक्ति के मन में उठता है जो लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाना चाहता है।
जानें पूरा मामला
कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर धरने का ऐलान किया था। इसी कार्यक्रम में शामिल होने से पहले ध्रुव राठी को गुरुग्राम पुलिस ने उनके घर से हिरासत में लिया। करीब 17-18 घंटे की हिरासत के बाद तड़के 3 बजे उन्हें रिहा किया गया। रिहाई के बाद राठी ने पुलिस पर “अगवा” करने का गंभीर आरोप लगाया है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- ध्रुव राठी को शनिवार सुबह 9:30 बजे गुरुग्राम से हिरासत में लिया गया
- रविवार तड़के 3 बजे रिहा करके परिवार के हवाले किया गया
- राठी ने दावा किया: “मुझे अगवा किया गया, गिरफ्तार नहीं”
- कोई लिखित अंडरटेकिंग न देने की बात कही
- CJP के जंतर-मंतर धरने से ठीक पहले हुई कार्रवाई













