Rajbir Ghuman CBI Summons मामले में पंजाब की सियासत और ब्यूरोक्रेसी में उस वक्त तनाव और बढ़ गया, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मण आज तय समय पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के सामने पेश नहीं हुए। केंद्रीय एजेंसी ने 5 अक्टूबर को दिल्ली में दर्ज भ्रष्टाचार के मामले को लेकर उन्हें दोपहर 2:30 बजे चंडीगढ़ के सेक्टर 30 स्थित दफ्तर में तलब किया था। जांच अधिकारी तय समय के काफी देर बाद तक घुम्मण का इंतजार करते रहे, लेकिन वह नहीं पहुंचे।
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‘घंटों चला इंतजार: सेक्टर 30 दफ्तर में हलचल’
देखा जाए तो दोपहर से ही चंडीगढ़ के सेक्टर 30 स्थित सीबीआई दफ्तर के बाहर मीडिया और सुरक्षाबलों का जमावड़ा लगा हुआ था। अधिकारियों को उम्मीद थी कि तय समन के मुताबिक ओएसडी पेश होंगे और दर्ज एफआईआर के संबंध में अपने बयान दर्ज कराएंगे।
लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, सस्पेंस गहराता चला गया। अधिकारी काफी देर तक दस्तावेजों के साथ उनकी राह तकते रहे। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी, जब यह साफ हो गया कि ओएसडी आज जांच एजेंसी के सामने पेश होने के मूड में नहीं हैं।
‘सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल: क्या इसी वजह से बनाई दूरी?’
अगर गौर करें तो इस गैर-हाजिरी के पीछे एक सोची-समझी कानूनी रणनीति नजर आ रही है। पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, इस विशेष याचिका पर एक-दो दिन के भीतर देश की शीर्ष अदालत में सुनवाई होनी तय है। समझने वाली बात यह है कि सरकार को पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से इस जांच पर कोई अंतरिम राहत या रोक मिल सकती है। इसी संभावित राहत के मद्देनजर ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मण ने फिलहाल सीबीआई के सामने पेश होने से किनारा करना ही बेहतर समझा।
‘सीएमओ का अलग ही दावा: नहीं मिला कोई समन’
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ सीबीआई के अधिकारी दफ्तर में बैठकर इंतजार करने का दावा कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के सूत्रों ने एक बिल्कुल अलग ही रुख सामने रख दिया है।
सीएमओ के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि राजबीर सिंह घुम्मण को आज पेश होने के संबंध में सीबीआई से कोई आधिकारिक समन मिला ही नहीं था। दफ्तर के एक जिम्मेदार अधिकारी ने साफ कहा कि उनके पास पेशी को लेकर कोई पूर्व सूचना या कानूनी नोटिस नहीं पहुंचा था। इसी आधार पर दलील दी जा रही है कि जब समन मिला ही नहीं, तो पेशी का सवाल ही नहीं उठता।
‘सीबीआई केस और कानूनी टकराव की स्थिति’
| विवरण | एजेंसी का पक्ष और कार्रवाई | पंजाब सरकार और सीएमओ का रुख |
|---|---|---|
| पेशी का समय | दोपहर 2:30 बजे (सीबीआई सेक्टर 30, चंडीगढ़) | समन मिलने की बात को पूरी तरह नकारा |
| कानूनी आधार | दिल्ली में दर्ज एफआईआर RC 2202026 E 0013 | सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर, राहत की आस |
| जांच का दायरा | वर्ष 2023 से 2026 के बीच के कथित मामले | राजनीतिक बदले की भावना और अधिकारों का हनन |
| छापेमारी | पंजाब-चंडीगढ़ में 8 ठिकानों पर तलाशी पूरी | 12 घंटे की रेड के बाद भी कुछ नहीं मिला |
| कोर्ट की डेडलाइन | 2 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश | शीर्ष अदालत में आदेश को दी गई सीधी चुनौती |
‘2 महीने में कोर्ट को देनी है रिपोर्ट: जांच का बढ़ता दबाव’
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पूरी जांच पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशों और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा डीजीपी पंजाब को लिखी गई चिट्ठियों के आधार पर शुरू हुई है। अदालत ने सीबीआई को दो महीने के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दे रखा है।
एफआईआर में राजबीर सिंह घुम्मण के अलावा नितिन गोहिल, जतिन गोहिल उर्फ राजा, डॉ. रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर, आर.एस. नागरा और कुछ अज्ञात लोगों के नाम शामिल हैं। केंद्रीय एजेंसी ने मंगलवार को 8 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी भी की थी। 2023 से 2026 के दौरान हुए संदिग्ध कामों को आधार बनाकर यह शिकंजा कसा गया है।
‘इस कानूनी खींचतान का प्रशासनिक असर’
इस पूरे घटनाक्रम से एक बात पूरी तरह साफ हो जाती है कि यह मामला अब केवल एक अधिकारी की पेशी तक सीमित नहीं रह गया है। यह राज्य सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसी के बीच एक बड़े कानूनी और संवैधानिक टकराव में बदल चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं। अगर अदालत से राहत नहीं मिलती है, तो सीबीआई का रुख और भी कड़ा हो सकता है, जिससे आने वाले दिनों में पंजाब की सियासत में और बड़ा तूफान खड़ा होना तय है।
‘जानें पूरा मामला’
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने दिल्ली के ई.ओ.-2 थाने में पंजाब के मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मण और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। इसी सिलसिले में पूछताछ के लिए घुम्मण को चंडीगढ़ दफ्तर बुलाया गया था, जहां वह पेश नहीं हुए। राज्य सरकार ने इस पूरी जांच को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- सीएम भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मण सीबीआई के सामने पेश नहीं हुए।
- सीबीआई चंडीगढ़ के सेक्टर 30 स्थित दफ्तर में दोपहर 2:30 बजे से उनका इंतजार करती रही।
- पंजाब सरकार ने जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की है, जिसकी सुनवाई 1-2 दिन में होगी।
- सीएमओ सूत्रों का दावा है कि घुम्मण को पेशी का कोई औपचारिक समन नहीं मिला था।
- अदालत ने सीबीआई को दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।










