Beadbi Sodh Act Akal Takht विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार सोध एक्ट 2026 मामले में श्री अकाल तख्त द्वारा निर्धारित किए गए दो महीने के समय के आखिरी दिन सरकार ने इस संबंध में एक कमेटी बनाने की सूचना अकाल तख्त को भेज दी है।
इस संबंध में आज डिप्टी कमिश्नर दफ्तर के नुमाइंदे द्वारा भी एक पत्र श्री अकाल तख्त के सचिवालय में सौंपा गया। इसकी पुष्टि श्री अकाल तख्त सचिवालय के सूत्रों द्वारा की गई है।
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कौन-कौन हैं सात सदस्यीय कमेटी में?
सूबे के गृह विभाग द्वारा जारी किए गए इस पत्र में इस संबंध में गठित की गई सात सदस्यीय कमेटी और कमेटी के सदस्यों के नामों का जिक्र शामिल है। गौर करें तो यह कमेटी अकाल तख्त द्वारा बनाई गई पांच सदस्यीय कमेटी के साथ तालमेल करेगी।
| नाम | पद/परिचय |
|---|---|
| गियानी रघबीर सिंह | पूर्व जत्थेदार |
| बाबा हरनाम सिंह खालसा | दमदमी टकसाल मुखी |
| बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा वाले | धार्मिक नेता |
| जस्टिस जसपाल सिंह (सेवामुक्त) | पूर्व न्यायाधीश |
| जस्टिस गुरबीर सिंह (सेवामुक्त) | पूर्व न्यायाधीश |
| जतिंदर सिंह औलख | सेवामुक्त पुलिस अधिकारी |
| प्रीत इंदरपाल सिंह | कानूनी अधिकारी |
इस कमेटी के नोडल अधिकारी हरजीत सिंह संधू को बनाया गया है, जो अकाल तख्त द्वारा बनाई गई कमेटी से तालमेल करेंगे।
क्यों बना यह विवाद?
सरकार की यह कार्यवाही उस वक्त सामने आई है जब अकाल तख्त द्वारा कानून में सोधों के संबंध में दिया गया निर्धारित दो महीने का समय खत्म हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि दो महीने का समय दिए जाने से पहले भी अकाल तख्त द्वारा सरकार को एक महीने का समय दिया गया था।
उस वक्त भी निर्धारित समय के आखिरी दिन सरकार द्वारा इस संबंध में अगली कार्यवाही की गई थी। यानी यह पैटर्न पहली बार नहीं दोहराया गया है।
कहां से शुरू हुआ पूरा मामला?
बताना जरूरी है कि इस साल अप्रैल महीने में खालसा साजना दिवस मौके पर सरकार द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार सोध एक्ट, 2006 बनाया गया था। जिसकी कुछ मदों पर शिरोमणि कमेटी, श्री अकाल तख्त और कई सिख जत्थेबंदियों द्वारा इतराज प्रगटाया गया था।
श्री अकाल तख्त द्वारा इस संबंध में कार्यवाही करते हुए पंजाब विधानसभा के स्पीकर को अकाल तख्त पर बुलाया गया था और उन्हें इतराज़योग मदों के बारे में जानकारी दी गई थी।
एक महीने में भी नहीं हुई कार्यवाही
उन्हें यह इतराज़योग मदा कानून से हटाने के लिए भी कहा गया था। कोई कार्यवाही न होने पर श्री अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार गियानी कुलदीप सिंह गड़गज द्वारा पंजाब विधानसभा के सारे सिख विधायकों और मंत्रियों को श्री अकाल तख्त पर तलब किया गया था।
वहां समूह विधायकों और मंत्रियों द्वारा कानून में सोध के लिए सहमति दी गई थी। उस वक्त सरकार को एक महीने का समय दिया गया था।
पांच महीने बाद भी मामला जहां का तहां
कानून में सोधों के मामले को लेकर लगभग पांच महीने का समय बीत चुका है, पर मामला अभी भी ज्यों का त्यों है। समझने वाली बात है कि इतने लंबे समय के बाद भी कोई ठोस हल न निकलना, धार्मिक और सियासी दोनों हलकों में चिंता का विषय बन गया है।
आम सिख समुदाय के लिए क्यों अहम है यह मामला?
यह मुद्दा सीधे तौर पर सिख धार्मिक मान्यताओं और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सतिकार से जुड़ा है, इसलिए पंजाब के लाखों सिख श्रद्धालुओं के लिए इसका भावनात्मक महत्व काफी गहरा है। अगर यह मामला जल्द हल नहीं होता, तो सरकार और धार्मिक संस्थाओं के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
जानें पूरा मामला
श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार सोध एक्ट को लेकर अप्रैल महीने से विवाद चल रहा है। शिरोमणि कमेटी और अकाल तख्त की आपत्तियों के बाद सरकार को कानून में बदलाव के लिए कई बार समय दिया गया, लेकिन अब सरकार ने औपचारिक रूप से एक कमेटी बनाकर अकाल तख्त से तालमेल शुरू करने की पहल की है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Beadbi Sodh Act Akal Takht विवाद में सरकार ने सात सदस्यीय कमेटी बनाई।
- कमेटी में पूर्व जत्थेदार, धार्मिक नेता, सेवामुक्त न्यायाधीश और पुलिस अधिकारी शामिल।
- अकाल तख्त द्वारा दिया गया दो महीने का समय आज खत्म हुआ।
- पांच महीने से चल रहे इस विवाद का अभी तक कोई ठोस हल नहीं निकला।













