iPhone Sales India: भारत में 2025 में करीब 1 करोड़ 40 लाख iPhone बिके हैं। देखा जाए तो यह आंकड़ा चौंकाने वाला इसलिए है क्योंकि जब पूरा स्मार्टफोन बाजार लगभग स्थिर था, तब Apple का मार्केट शेयर 7% से बढ़कर 9% हो गया। दिलचस्प बात यह है कि यह वृद्धि ऐसे समय में हुई जब एक आम भारतीय की सालाना औसत आय करीब ₹2,28,000 है और iPhone 18 Pro की कीमत ₹1,64,900 यानी सालाना आय का लगभग 80% है।
भारत दुनिया का हर चौथा iPhone बनाता है। हम ₹2 लाख करोड़ के iPhone दूसरे देशों को भेजते हैं। यह अब देश का सबसे बड़ा ब्रांडेड एक्सपोर्ट बन गया है, जो डीजल, हीरे और यहां तक कि दवाइयों से भी बड़ा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब हम इतने iPhone बनाते हैं, तो अपने ही देश में इसकी कीमत इतनी ज्यादा क्यों है? और सबसे बड़ा सवाल – कम कमाई के बावजूद लोग iPhone कैसे खरीद रहे हैं?
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EMI की क्रांति ने बदली तस्वीर
इसका जवाब एक शब्द में छुपा है: EMI। काउंटर पॉइंट के आंकड़ों के अनुसार 2026 में भारत के करीब 42% स्मार्टफोन EMI या किसी फाइनेंसिंग पर बिक रहे हैं। लेकिन असली बात यह नहीं है। असली बात यह है कि कहां बिक रहे हैं।
टियर-1 शहरों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु में EMI पर बिकने वाले फोन 41% हैं। वहीं टियर-2 शहरों में यह आंकड़ा बढ़कर 57.5% हो गया है। और टियर-3 व उससे छोटे शहरों में लगभग 55% फोन EMI पर बिक रहे हैं। यानी जितना छोटा शहर, उतनी ज्यादा EMI।
अगर गौर करें तो एक साल पहले टियर-2 शहरों में यह आंकड़ा 44% था, जो अब 57.5% है। सिर्फ एक साल में 13 प्रतिशत की छलांग। यह कोई मामूली बदलाव नहीं है।
17 महीने की लंबी किस्त का सच
भारत में हर ब्रांड के फोन की औसत EMI अवधि अलग-अलग है। Xiaomi की 8.5 महीने, Vivo की 3.5 महीने, Samsung की 11.5 महीने। लेकिन Apple की औसत EMI अवधि है 17.2 महीने। यानी एक iPhone खरीदने वाला भारतीय औसतन 1 साल 5 महीने तक उस फोन की किस्त भरता रहता है।
समझने वाली बात यह है कि जब दाम ₹1 लाख से ऊपर पहुंच जाते हैं, तो लंबी EMI कोई सुविधा नहीं रह जाती। वह एक मजबूरी बन जाती है। भारत में अभी ₹1 लाख से ऊपर के 24 फोन मॉडल उपलब्ध हैं और ₹50,000 से ₹1 लाख के बीच के 40 से ज्यादा मॉडल हैं।
सिर्फ फोन नहीं, स्टेटस सिंबल खरीद रहे हैं लोग
एक शोध में भारत के करीब 24,000 घरों का डेटा देखा गया। 2014 से 2019 के बीच का यह डेटा बताता है कि लोग “विज़िबल कंजम्पशन” यानी दिखाई देने वाली चीजों पर कितना खर्च करते हैं। कपड़े, गहने, गाड़ी, फोन, शादी जैसी चीजें इसमें शामिल हैं।
नतीजा यह था कि जब आप आय को बराबर कर देते हैं, तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के घर दिखने वाली चीजों पर ऊपर की जातियों के घरों से ज्यादा खर्च करते हैं। सबसे कम कमाने वाले चौथाई लोग सबसे ज्यादा कमाने वाले चौथाई लोगों से दिखने वाली चीजों पर ज्यादा खर्च करते हैं।
और एक बात और – हर समूह चाहे अमीर हो या गरीब, अपने कुल खर्चे का करीब 10 से 12% इन्हीं दिखाने वाली चीजों पर लगाता है। आय में जमीन-आसमान का फर्क है, लेकिन दिखावे का हिस्सा लगभग एक जैसा है।
जाति से मुक्त पहला स्टेटस सिंबल
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस देश में आपकी औकात किन चीजों से तय होती है? आपका सरनेम, आपका गांव, आपकी भाषा, आपका रंग, आपके पिता का काम, आपका मोहल्ला, आपका कॉलेज और आपकी अंग्रेजी। इनमें से एक भी चीज ऐसी नहीं जो आप बदल सकते हैं।
लेकिन एक ऐसी चीज है जो आप खरीद सकते हैं और जो खरीदने के बाद बिल्कुल सबके जैसी दिखती है। एक Mercedes खरीदना सबके बस की बात नहीं है। एक बड़ा घर सबके बस की बात नहीं है। विदेश घूमने जाना सबके बस की बात नहीं है। लेकिन एक iPhone ₹1 लाख, 17 महीने की किस्त पर – वो बहुत लोगों के बस में आ जाता है।
और सबसे बड़ी बात यह है कि जब वो iPhone टेबल पर रखा जाता है, तो वह यह नहीं बताता कि उसका मालिक कौन है। वह एक जैसा दिखता है, एक जैसा बजता भी है और उसका नीला मैसेज बॉक्स सबके लिए एक जैसा नीला होता है।
भारत में iPhone सिर्फ एक फोन नहीं है। iPhone इस देश का शायद पहला स्टेटस सिंबल है जो आपसे आपकी जाति नहीं पूछता है। वो सिर्फ एक कीमत पूछता है और कीमत जात के उलट चुकाई जा सकती है।
छोटे शहरों में EMI क्यों ज्यादा है
जब आप यह समझ लेते हैं तो EMI वाला आंकड़ा अपने आप समझ में आने लगता है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में EMI ज्यादा क्यों है। इसलिए नहीं कि वहां लोग कम समझदार हैं, बल्कि इसलिए कि वहां उस निशान की कीमत ज्यादा है।
दिल्ली के एक बड़े ऑफिस में iPhone रखने से कोई फर्क नहीं पड़ता। वहां सबके पास लगभग यह होगा। लेकिन एक छोटे शहर में जहां आपको लोग आपके खानदान से जानते हैं, आपके पिता के काम से जानते हैं, वहां वो फोन एक बयान बन जाता है। एक स्टेटस सिंबल बन जाता है।
और देश में उस बयान की कीमत उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा है जिनके पास देने के लिए सबसे कम है। यह मूर्खता नहीं है। यह एक ऐसे समाज का सीधा जवाब है जो आपसे आपके होने की कीमत वसूलता है।
भारत में सबसे ज्यादा बढ़े iPhone के दाम
इस साल भारत में iPhone के दाम बहुत बढ़ गए हैं। iPhone 17 की कीमत ₹82,900 से बढ़कर ₹99,900 हो गई है – लगभग 20% से ज्यादा की वृद्धि। iPhone 17 ₹64,900 से बढ़कर ₹79,900 हो गया है यानी लगभग 30% की वृद्धि। iPhone 18 Pro ₹1,34,900 से बढ़कर अब ₹1,64,900 हो गया है यानी लगभग 22% की बढ़ोतरी।
अब इसको दुनिया से मिलाइए। अमेरिका में दाम करीब 12.5% बढ़े हैं, यूके में 12.5%, जापान में करीब 11%, चाइना में करीब 10% और भारत में 20 से 22%। यानी दुनिया में सबसे ज्यादा दाम भारत में ही बढ़े हैं।
काउंटर पॉइंट के मुताबिक इसकी वजह तीन हैं: पहला इंपोर्ट ड्यूटी, दूसरा रुपए का डेप्रिसिएशन और तीसरा यहां बनने की लागत।
निर्यात बढ़ा, पर कीमत भी बढ़ी
वो बात जो सबसे अजीब लगती है – हम दुनिया का हर चौथा iPhone बनाते हैं, हम ₹2 लाख करोड़ का iPhone दूसरे देशों को भेजते हैं और वही फोन खरीदने के लिए हमें दुनिया में सबसे ज्यादा दाम बढ़ता हुआ देखना पड़ रहा है।
बनाना भारत के लिए बहुत अच्छी बात है। वित्तीय वर्ष 2022 में भारत से ₹9,351 करोड़ के iPhone एक्सपोर्ट हुए थे। वित्तीय वर्ष 2026 में ₹2 लाख करोड़ के। चार साल में करीब 21 गुना की वृद्धि। यह सिर्फ Apple का फायदा नहीं है। इसके साथ-साथ फैक्ट्रियां आईं, सप्लाई चेन बनी, लाखों लोगों को रोजगार मिला और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाले देशों की लिस्ट में ऊपर आ गया।
EMI का अर्थव्यवस्था पर असर
खरीदने के अलग हिसाब हैं। जब भारत में ₹1 लाख का फोन खरीदते हैं तो उस पैसे का बड़ा हिस्सा एक घर की बचत से निकलकर एक विदेशी कंपनी और सरकारी ड्यूटी में चला जाता है। उससे भी बड़ी बात यह है कि वह पैसा अगले 17 महीने के लिए बंद हो जाता है।
एक घर की आय का जो हिस्सा किस्त में चला गया, वो फिर कहीं और नहीं जा सकता है। ना पढ़ाई में जाएगा, ना इलाज में जाएगा, ना बचत में जाएगा और ना किसी छोटे काम में।
पिछले कुछ समय में फोन लोन के डिफॉल्ट्स बहुत बढ़ रहे हैं। खासकर जब RBI ने कंपनियों को यह रोकने से मना किया कि वह किस्त ना भरने पर फोन को दूर से लॉक कर दें। एनालिस्ट अब यह कह रहे हैं कि लोग फोन बदलने ही देर से शुरू करेंगे। पहले तीन से पांच साल में बदलते थे, अब शायद पांच से सात साल लगेंगे क्योंकि पुराने फोन की किस्त ही खत्म नहीं होती है।
कौन खरीद रहा है iPhone
गरीब भारत iPhone खरीद रहा है – यह बात जैसी कही जाती है वैसी सच नहीं है। साल भर में 1 करोड़ 40 लाख iPhone और देश की आबादी है करीब 140 करोड़ से ज्यादा। मतलब साल भर में हर 100 में से एक भारतीय से भी कम।
वर्ल्ड इनइक्वैलिटी रिपोर्ट के मुताबिक भारत के ऊपर के 10% लोगों के पास देश की 58% आय है और 65% संपत्ति है। लेकिन वो 10% कितने हैं? करीब 14 करोड़ लोग। यानी भारत का अमीर हिस्सा अकेला ही दुनिया के बहुत से देशों से बड़ा है।
इसीलिए बाहर से ऐसा लगता है कि पूरा देश अमीर हो गया है, जबकि असल में पूरा देश अमीर नहीं हुआ है। बस अमीरों की गिनती इतनी हो गई है कि वो भीड़ लगने लगी है।
लेकिन EMI वाला आंकड़ा इस बात को पूरी तरह भी सच नहीं रहने देता क्योंकि टियर-2 में 57.5% और एक साल में 13 पॉइंट की बढ़ोतरी यह कह रही है कि खरीदने वालों की लाइन अब उस ऊपर वाले हिस्से से नीचे भी आ रही है धीरे-धीरे।
फोन सिर्फ दिखावा नहीं, जरूरत भी है
बहुत लोगों के लिए फोन सिर्फ दिखावा नहीं है। एक फोटोग्राफर के लिए वो एक कैमरा भी है। एक डिलीवरी करने वाले के लिए वो एक नौकरी भी है। एक छोटे दुकानदार के लिए वो दुकान है। एक क्रिएटर के लिए वो स्टूडियो है। करोड़ों लोगों के लिए वो बैंक है।
iPhone की रीसेल वैल्यू भी ज्यादा होती है। यानी दो साल बाद बेचने पर आपको ज्यादा पैसा मिलता है। तो असली लागत सिर्फ स्टिकर की कीमत नहीं है।
iPhone खरीदने से पहले ये 5 बातें जरूर सोचें
पहला – किस्त को अपने महीने की कमाई से बांट कर देखिए। अगर आपकी महीने की किस्त आपकी महीने की कमाई का 5% से ज्यादा है, तो आप फोन नहीं खरीद रहे हैं, आप एक लोन ले रहे हैं।
दूसरा – नो कॉस्ट EMI फ्री नहीं होती है। या तो ब्याज कीमत के अंदर छुपा हुआ है या फिर डिस्काउंट छोड़कर आपको मिलता है। एक बार कैश वाली कीमत और EMI वाली कुल कीमत दोनों जोड़कर मिलाइए। प्रोसेसिंग फी भी जोड़ लीजिए। फर्क साफ दिख जाएगा।
तीसरा – 17 महीने लंबे होते हैं। अपने आप से एक सवाल पूछिए कि क्या 17 महीने बाद भी मुझे इस फोन से उतना ही प्यार होगा? और उससे बड़ा सवाल कि क्या उस वक्त तक मेरे ऊपर कोई दूसरी किस्त भी चल रही होगी? क्योंकि एक किस्त के ऊपर दूसरी किस्त यानी वो जगह है जहां आपका फंदा और कसता चला जाएगा।
चौथी बात – पिछली जनरेशन का फोन देखिए। नया मॉडल आते ही पुराना मॉडल 20 से 25% सस्ता हो जाता है।
पांचवा – अपने आपसे साफ पूछिए कि आप क्या खरीद रहे हैं। अगर वह फोन आपको पैसा कमाकर देता है तो वह खर्चा नहीं है। अगर वह आपका टूल है तो कोई बात नहीं। अगर नहीं देता है, अगर आप वो निशान खरीद रहे हैं या सिंबल खरीद रहे हैं तो उसमें भी कोई शर्म की बात नहीं है। बस यह पता होना चाहिए कि आप खरीद क्या रहे हैं और उसकी कीमत आप क्या चुका रहे हैं।
जो चीज हम जानकर खरीदते हैं उसका बोझ अलग होता है और जो हम बिना जाने खरीदते हैं उसका बोझ बहुत अलग होता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 2025 में भारत में 1 करोड़ 40 लाख iPhone बिके, Apple का मार्केट शेयर 7% से बढ़कर 9% हुआ
- टियर-2 शहरों में 57.5% फोन EMI पर बिके, जो एक साल में 13% की वृद्धि है
- iPhone खरीदने वाले औसतन 17.2 महीने तक किस्त भरते हैं
- भारत दुनिया का हर चौथा iPhone बनाता है और ₹2 लाख करोड़ का निर्यात करता है
- भारत में iPhone की कीमत दुनिया में सबसे ज्यादा बढ़ी है (20-22%)
- शोध बताते हैं कि कम कमाई वाले दिखावे की चीजों पर ज्यादा खर्च करते हैं
- iPhone भारत का पहला ऐसा स्टेटस सिंबल बना है जो जाति नहीं पूछता













