Birth Death Registration Amendment Act 2026: अब समय पर करानी होगी रजिस्ट्रेशन –भारत में जन्म और मौत की देरी से रजिस्ट्रेशन के नियमों को सख्त करने वाले नए कानून के प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो जाएंगे। यह जानकारी भारत के Registrar General मृत्युंजय कुमार नारायण ने बुधवार को दी।
देखा जाए तो यह एक बड़ा प्रशासनिक सुधार है। अब तक बहुत से लोग सालों-साल बाद जन्म या मौत की रजिस्ट्रेशन करवाते थे, लेकिन अब यह इतना आसान नहीं रहेगा।
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संसद से पास होकर राष्ट्रपति की मिली मंजूरी
संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित ‘Birth and Death Registration (Amendment) Bill, 2026’ पिछले महीने राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून बन गया था।
एक गजट नोटिफिकेशन में नारायण ने कहा, “जन्म और मौत रजिस्ट्रेशन (संशोधन) अधिनियम, 2026 (2026 का 12) की धारा 1 की उप-धारा (2) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए, केंद्र सरकार 1 अक्टूबर, 2026 को उस तारीख के रूप में नियुक्त करती है जिस दिन से उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।”
नए कानून की मुख्य बातें: समय सीमा और प्रक्रिया
समझने वाली बात है कि नया कानून तीन अलग-अलग समय सीमाओं के लिए अलग-अलग नियम बनाता है:
पहली स्थिति: घटना के 21 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन (सामान्य प्रक्रिया)
दूसरी स्थिति: घटना के 1 साल बाद लेकिन 2 साल के अंदर रजिस्ट्रेशन
इसके लिए DM (District Magistrate), SDM (Sub-Divisional Magistrate) या किसी अधिकृत Executive Magistrate के आदेश जरूरी होंगे। कानून के अनुसार अधिकारी को तय फीस के भुगतान के बाद रजिस्ट्रेशन आगे बढ़ाने से पहले घटना की सच्चाई की पड़ताल करनी होगी।
तीसरी स्थिति: घटना के 2 साल बाद रजिस्ट्रेशन
यह सबसे कठिन है। इसके लिए Judicial Magistrate (First Class) के आदेश अनिवार्य होंगे। यानी अब अदालत से मंजूरी लेनी होगी।
क्यों जरूरी था यह संशोधन?
दरअसल, पुराने कानून में काफी ढिलाई थी। लोग 5-10 साल बाद भी आसानी से रजिस्ट्रेशन करवा लेते थे। इससे कई समस्याएं होती थीं:
1. दस्तावेजों में हेराफेरी: उम्र में गड़बड़ी, नकली पहचान पत्र बनाना आसान हो जाता था
2. संपत्ति विवाद: देर से मौत का सर्टिफिकेट बनवाकर विरासत में धोखाधड़ी
3. सरकारी योजनाओं में धांधली: गलत आयु प्रमाण पत्र से लाभ उठाना
4. जनसांख्यिकीय डेटा की कमी: सही आंकड़े न मिलना
यहां ध्यान देने वाली बात है कि 2023 में भी इस अधिनियम में संशोधन किया गया था और उसी साल 1 अक्टूबर से नए नियम लागू हुए थे। लेकिन अब और कड़े प्रावधान किए जा रहे हैं।
कैसे करें समय पर रजिस्ट्रेशन?
जन्म के मामले में:
- अस्पताल में जन्म होने पर वहां की प्रशासनिक टीम खुद रजिस्ट्रेशन कर देती है
- घर पर जन्म होने पर 21 दिन के अंदर नजदीकी रजिस्ट्रार या नगर निगम/पंचायत कार्यालय में सूचित करें
- जरूरी दस्तावेज: माता-पिता का पहचान पत्र, निवास प्रमाण, आधार कार्ड
मौत के मामले में:
- अस्पताल में मौत होने पर वहां से डेथ सर्टिफिकेट मिलता है
- घर पर मौत होने पर 21 दिन के अंदर रजिस्ट्रार को सूचित करें
- महामारी या अचानक मौत में पुलिस रिपोर्ट भी जरूरी हो सकती है
देरी की स्थिति में क्या करें?
अगर गौर करें तो अब देरी से रजिस्ट्रेशन काफी मुश्किल और महंगा हो जाएगा:
1-2 साल की देरी:
- निर्धारित फीस (राज्य अनुसार अलग-अलग, आमतौर पर ₹2-5 तक)
- कारण बताना होगा
- सबूत जुटाने होंगे (अस्पताल के रिकॉर्ड, गवाह आदि)
- SDM/DM के सामने पेश होना होगा
2 साल से ज्यादा देरी:
- कोर्ट में अर्जी दाखिल करनी होगी
- वकील की जरूरत पड़ सकती है
- ज्यादा फीस और समय
- पूरी कानूनी प्रक्रिया
आम नागरिकों पर क्या होगा असर?
हैरान करने वाली बात है कि अभी भी देश में करोड़ों लोग ऐसे हैं जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते।
लेकिन अब यह बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि:
- स्कूल में दाखिले के लिए
- सरकारी नौकरी के लिए
- पासपोर्ट बनवाने के लिए
- आधार कार्ड में सुधार के लिए
- विवाह प्रमाण पत्र के लिए
- संपत्ति के अधिकार के लिए
1969 का मूल कानून और उसका महत्व
जन्म और मौत रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1969, जन्म और मौत की रजिस्ट्रेशन के नियमों और इससे जुड़े मामलों के लिए बनाया गया था। इस अधिनियम के तहत जन्म और मौत की रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है और इस कानून के तहत जारी किया गया सर्टिफिकेट कानूनी पहचान प्रदान करता है।
किसी व्यक्ति के जन्म या मौत को साबित करने के लिए जन्म या मौत का सर्टिफिकेट सबूत के रूप में मान्य है।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य महत्वपूर्ण घटनाओं की “समय पर रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करना” है।
देखा जाए तो यह डिजिटल इंडिया के तहत एक बड़ा कदम है। जब सभी नागरिकों के पास समय पर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र होंगे, तो:
- बेहतर जनसांख्यिकीय डेटा मिलेगा
- योजनाओं का सही क्रियान्वयन होगा
- धोखाधड़ी कम होगी
- कानूनी विवाद घटेंगे
मुख्य बातें (Key Points):
- Birth and Death Registration (Amendment) Act, 2026 के प्रावधान 1 अक्टूबर से लागू
- 2 साल बाद रजिस्ट्रेशन के लिए अब Judicial Magistrate (First Class) की मंजूरी जरूरी
- 1-2 साल की देरी में DM/SDM/Executive Magistrate के आदेश चाहिए
- घटना की सच्चाई की पड़ताल और तय फीस अनिवार्य
- समय पर रजिस्ट्रेशन को प्रोत्साहित करना मुख्य उद्देश्य











