Punjab Power Crisis ने राज्य को बुरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है। देश भर में चल रही कोयले की भारी कमी के कारण पंजाब को बिजली की उपलब्धता में लगभग 1,850 मेगावाट की बड़ी कमी का सामना करना पड़ रहा है। देखा जाए तो यह संकट केवल आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पंजाब के उद्योगों, आम लोगों और किसानों पर पड़ रहा है।
इस संकट ने केंद्रीय क्षेत्र (Central Sector) के थर्मल पावर स्टेशनों से मिलने वाले प्रदेश के हिस्से और राजपुरा स्थित थर्मल प्लांट के उत्पादन, दोनों को ही गंभीर रूप से प्रभावित किया है। समझने वाली बात यह है कि इसके परिणामस्वरूप राज्य में औद्योगिक उत्पादन को बड़ा झटका लगा है, जिससे उद्योगपतियों में भारी रोष है।
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कितनी भारी है बिजली की कमी
राज्य बिजली प्राधिकरण द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, स्थिति बेहद चिंताजनक है। राज्य से बाहर स्थित केंद्रीय क्षेत्र के थर्मल पावर स्टेशनों में पंजाब का निर्धारित हिस्सा लगभग 2,814 मेगावाट है। हालांकि इस समय इन प्लांटों से पंजाब को औसतन सिर्फ 1,621 मेगावाट बिजली ही मिल रही है।
अगर गौर करें तो इससे राज्य के असली हिस्से और प्राप्त हो रही बिजली के बीच लगभग 1,193 मेगावाट का बड़ा अंतर पैदा हो गया है। यह तो केवल केंद्रीय प्लांटों की बात है।
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| स्रोत | निर्धारित क्षमता | वर्तमान आपूर्ति | कमी |
|---|---|---|---|
| केंद्रीय थर्मल स्टेशन | 2,814 मेगावाट | 1,621 मेगावाट | 1,193 मेगावाट |
| राजपुरा थर्मल प्लांट | 1,330 मेगावाट (कुल क्षमता) | ~660 मेगावाट (आधी क्षमता) | ~670 मेगावाट |
| कुल कमी | – | – | ~1,850 मेगावाट |
राजपुरा प्लांट ने बढ़ाई मुश्किल
स्थिति को और भी चिंताजनक नाभा पावर लिमिटेड द्वारा चलाए जा रहे राजपुरा थर्मल प्लांट ने बना दिया है। यहां कोयले की आपूर्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। इस प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 1,330 मेगावाट है, लेकिन कोयले की कमी के कारण यह पिछले कुछ दिनों से अपनी आधी क्षमता (लगभग 660 मेगावाट) पर ही चल रहा है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि केंद्रीय थर्मल स्टेशनों से 1,193 मेगावाट की कमी और राजपुरा प्लांट से 660 मेगावाट का उत्पादन घटने से पंजाब को कुल मिलाकर 1,850 मेगावाट का बड़ा झटका लग रहा है।
उद्योगों पर पड़ी सबसे बड़ी मार
बिजली विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय प्लांटों की वास्तविक जनरेशन घटने के कारण पंजाब के हिस्से आने वाली सप्लाई विभिन्न प्लांटों के हिसाब से प्रभावित हुई है। इस संकट का सबसे बड़ा खामियाजा राज्य के उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि पंजाब के औद्योगिक क्षेत्र, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, अनिश्चित बिजली आपूर्ति के कारण उत्पादन में कटौती करने को मजबूर हैं। इससे न केवल उत्पादकता प्रभावित हो रही है, बल्कि रोजगार पर भी असर पड़ रहा है।
आम लोग और किसान भी प्रभावित
इसके अलावा, अनऐलानी बिजली कटौती के कारण घरेलू और कृषि क्षेत्र के उपभोक्ता भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिल पा रही है, जो फसलों के लिए चिंता का विषय है। घरेलू उपभोक्ताओं को बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है।
समझने वाली बात यह है कि यह समस्या पूरे देश में थर्मल जनरेशन को प्रभावित कर रही है, लेकिन पंजाब जैसे राज्य जो बिजली के लिए थर्मल प्लांटों पर निर्भर हैं, सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
बिजली मंत्री का बयान
यह ताजा आकलन बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने देश व्यापी कोयले की कमी का पंजाब पर पड़ रहे असर के बारे में चिंता जताई थी।
5 सितंबर को जारी अपने बयान में बिजली मंत्री ने कहा था कि कोयले के गंभीर संकट के कारण पंजाब में बिजली उत्पादन लगभग 1,500 मेगावाट घट गया है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कोयले की कमी के कारण देश भर में लगभग 63 गीगावाट (GW) बिजली सप्लाई प्रभावित हुई है।
तरुणप्रीत सिंह सौंद ने विशेष तौर पर केंद्र से कोयले की कम सप्लाई को राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल प्लांटों के घटे उत्पादन के लिए जिम्मेवार ठहराया।
केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
बिजली मंत्री ने केंद्र सरकार से अपील की है कि इस संकट को हल करने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं ताकि आम लोगों और इंडस्ट्री को बिना रुकावट बिजली मिल सके। उन्होंने कहा कि यह केवल पंजाब की नहीं, बल्कि पूरे देश की समस्या है और इसके लिए केंद्र को जिम्मेदारी लेनी होगी।
अर्थव्यवस्था पर असर
यह देखा जाना जरूरी है कि लंबे समय तक चलने वाली बिजली कटौती राज्य की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करेगी। उद्योग पहले से ही परेशान हैं और अगर यह स्थिति जारी रही तो निवेश और रोजगार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
राज्य सरकार अब केंद्र के साथ-साथ वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में भी है। हालांकि तत्काल राहत के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ाना ही एकमात्र उपाय है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब को 1,850 मेगावाट बिजली की भारी कमी का सामना
- केंद्रीय थर्मल स्टेशनों से 1,193 मेगावाट की कमी
- राजपुरा प्लांट आधी क्षमता पर चल रहा
- उद्योगों पर सबसे बड़ी मार, उत्पादन प्रभावित
- किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को अनऐलानी कटौती
- बिजली मंत्री ने केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की









