Double Domicile MBBS Fraud – मेडिकल शिक्षा में एडमिशन पाने की होड़ में कुछ स्टूडेंट्स ने सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया और अब उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। Baba Farid University of Health Sciences (BFUHS) ने 85% पंजाब स्टेट कोटा सीटों के तहत MBBS में एडमिशन के लिए 25 उम्मीदवारों को बाहर कर दिया है। कारण? ये सभी उम्मीदवार एक साथ पंजाब और दूसरे राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों की स्टेट कोटा सीटों के लिए अप्लाई कर रहे थे। देखा जाए तो, यह “डबल डोमिसाइल” की दुरुपयोग का साफ मामला है।
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25 उम्मीदवारों को निकाला गया: कौन से राज्यों में कर रहे थे अप्लाई
यूनिवर्सिटी ने उन 25 उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक किए हैं जो पंजाब स्टेट कोटा के साथ-साथ चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, असम, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के स्टेट कोटे के तहत भी अप्लाई कर रहे थे।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि इन 25 में से:
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | उम्मीदवारों की संख्या |
|---|---|
| चंडीगढ़ | 8 |
| कर्नाटक | 5 |
| हिमाचल प्रदेश | 3 |
| मध्य प्रदेश | 3 |
| असम | 1 |
| तेलंगाना | 1 |
| जम्मू-कश्मीर | 1 |
| तमिलनाडु | 1 |
| उत्तराखंड | 1 |
| महाराष्ट्र | 1 |
10 जुलाई 2026 के नोटिफिकेशन की धारा 18 का हवाला
बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ने पंजाब सरकार के 10 जुलाई 2026 के नोटिफिकेशन की धारा 18 का हवाला दिया है। इस धारा के तहत, पंजाब स्टेट कोटे के तहत एडमिशन मांगने वाले उम्मीदवारों के लिए यह अनिवार्य है कि वे सिर्फ एक राज्य की स्टेट कोटा सीट के लिए ही अप्लाई करें।
रिकॉर्ड की जांच करने पर, यूनिवर्सिटी ने सभी 25 उम्मीदवारों को इस नियम का उल्लंघन करते हुए पाया। दिलचस्प बात यह है कि इन्हें अकादमिक सत्र 2026-27 के लिए 85% स्टेट कोटा सीटों के लिए विचार किए जाने से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
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एक से ज्यादा राज्यों में डोमिसाइल का दावा
यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में वे उम्मीदवार शामिल थे जिन्होंने एक से ज्यादा राज्यों में रिहायशी (डोमिसाइल) का दावा पेश किया था ताकि उन्हें MBBS सीट मिल सके। अधिकारियों ने कहा कि हालांकि नियम उम्मीदवार को सिर्फ एक राज्य के स्टेट कोटे के तहत एडमिशन मांगने की इजाजत देते हैं, लेकिन कई चतुर उम्मीदवार काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान राज्यों के बीच आपसी वेरिफिकेशन में खाली जगहों (गैप्स) का फायदा उठाकर पंजाब में भी अप्लाई कर रहे थे।
समझने वाली बात यह है कि यह सिर्फ एक या दो स्टूडेंट्स का मामला नहीं है। यह एक व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था, जिसमें कुछ उम्मीदवार अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग डोमिसाइल सर्टिफिकेट्स इस्तेमाल कर रहे थे।
हलफनामा (Affidavit) भी झूठा जमा करवाया
इस तरह की धोखाधड़ी रोकने के लिए पंजाब सरकार ने अनिवार्य किया है कि हर उम्मीदवार और उनके माता-पिता एक हलफनामा (Affidavit) जमा करवाएं। इसमें साफ तौर पर यह घोषित करना होता है कि वे किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में स्टेट कोटा सीटों का दावा नहीं कर रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि हलफनामे की शर्त का उद्देश्य इस प्रथा के खिलाफ पहली रोक के रूप में काम करना था। लेकिन उम्मीदवार दूसरे राज्यों में आवेदन जारी रखते हुए झूठे शपथ पत्र जमा करवा कर इसे लगातार छुपाते रहे। यह कानूनी रूप से एक गंभीर अपराध है।
शिकायतों के बाद जांच शुरू की गई
यह कार्रवाई माता-पिता और उम्मीदवारों की अनगिनत शिकायतों के बाद सामने आई है। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि कई उम्मीदवार एक से अधिक राज्यों में स्टेट कोटा सीटों का लाभ लेने के लिए “डबल डोमिसाइल” का दुरुपयोग कर रहे हैं।
इन शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए BFUHS ने संदिग्ध उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए सर्टिफिकेट्स और सहायक दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की। अगर गौर करें तो, यह पहला मौका नहीं है जब ऐसी शिकायतें आई हैं। लेकिन इस बार यूनिवर्सिटी ने सख्त कदम उठाते हुए उम्मीदवारों को बाहर किया है।
ईमानदार स्टूडेंट्स को नुकसान
इस तरह की धोखाधड़ी का सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार स्टूडेंट्स को होता है जो सिर्फ एक राज्य में अप्लाई करते हैं और नियमों का पालन करते हैं। जब कुछ उम्मीदवार एक से ज्यादा राज्यों में सीट ब्लॉक कर लेते हैं, तो वास्तविक जरूरतमंद उम्मीदवारों को मौका नहीं मिल पाता।
हर साल हजारों स्टूडेंट्स NEET की कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन जब कुछ लोग सिस्टम का गलत फायदा उठाते हैं तो ईमानदार परिवारों के सपने टूट जाते हैं। इसीलिए यूनिवर्सिटी की यह कार्रवाई एक सराहनीय कदम है।
काउंसलिंग प्रक्रिया में कैसे निकल जाते हैं ऐसे केस?
यहां सवाल उठता है कि आखिर ऐसे उम्मीदवार काउंसलिंग प्रक्रिया में कैसे निकल जाते हैं? दरअसल, हर राज्य की अपनी काउंसलिंग प्रक्रिया होती है और राज्यों के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग की व्यवस्था पूरी तरह मजबूत नहीं है। कुछ स्मार्ट उम्मीदवार इसी खामी का फायदा उठाते हैं।
हालांकि अब BFUHS और दूसरी यूनिवर्सिटीज क्रॉस-वेरिफिकेशन सिस्टम को और मजबूत बना रही हैं ताकि ऐसे मामले सामने आ सकें।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
फिलहाल तो इन 25 उम्मीदवारों को सत्र 2026-27 के लिए पंजाब स्टेट कोटा से बाहर कर दिया गया है। लेकिन यह भी संभव है कि इन उम्मीदवारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है, क्योंकि उन्होंने झूठा हलफनामा जमा किया था।
इसके अलावा, यूनिवर्सिटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब हर उम्मीदवार के दस्तावेजों की और कड़ाई से जांच की जाएगी। भविष्य में ऐसी किसी भी कोशिश को तुरंत पकड़ा जाएगा।
पैरेंट्स और स्टूडेंट्स को सलाह
अगर आप या आपके बच्चे MBBS में एडमिशन की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ एक राज्य की स्टेट कोटा सीट के लिए ही अप्लाई करें। किसी भी तरह की शॉर्टकट या जुगाड़ की कोशिश न करें। एक बार पकड़े जाने पर न सिर्फ आपका एडमिशन कैंसिल हो सकता है, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ने 25 उम्मीदवारों को MBBS एडमिशन से बाहर किया
- ये सभी पंजाब और दूसरे 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ अप्लाई कर रहे थे
- डबल डोमिसाइल की दुरुपयोग, झूठा हलफनामा जमा करने का मामला
- पंजाब सरकार के 10 जुलाई 2026 के नोटिफिकेशन की धारा 18 का उल्लंघन
- ईमानदार स्टूडेंट्स को नुकसान, सिस्टम को और पारदर्शी बनाने की जरूरत












