Sukhna Lake Flood Gate Alert: पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ से सटे पहाड़ी इलाके में पड़ रही बारिश मैदानी इलाके के लिए आफत बनकर आई है। पहाड़ों में पड़ी बारिश के कारण रविवार रात सुखना झील में पानी खतरे के निशान पर पहुंच गया था, जिसके बाद यूटी प्रशासन ने तीनों में से एक फ्लड गेट को खोल दिया था। राहत की बात यह है कि सात घंटे बाद यह फ्लड गेट बंद कर दिया गया है।
देखा जाए तो हालांकि अभी भी सुखना झील में पानी का स्तर खतरे के निशान से कुछ ही दूरी पर है, लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार पहाड़ी इलाके से आ रहे पानी की रफ्तार घट गई है, इसलिए यह फ्लड गेट बंद किया गया।
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1163 फुट है खतरे का निशान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ स्थित सुखना झील में खतरे का निशान 1163 फुट पर है। रविवार की रात पानी 1162.92 फुट पर पहुंच गया था—मतलब खतरे के निशान से मात्र 0.08 फुट नीचे। यह स्थिति कितनी गंभीर थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।
अगर गौर करें तो लगातार पानी बढ़ता देख यूटी प्रशासन ने रविवार रात 8:30 बजे सुखना झील का एक फ्लड गेट खोल दिया था। इसे सात घंटे बाद सोमवार तड़के 3:30 बजे बंद किया गया।
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वर्तमान स्थिति
| विवरण | माप (फुट में) |
|---|---|
| खतरे का निशान | 1163.00 |
| रविवार रात का जल स्तर | 1162.92 |
| वर्तमान जल स्तर (सोमवार) | 1162.70 |
| खतरे से दूरी | 0.30 |
इस समय सुखना झील में पानी का स्तर 1162.70 फुट पर है, जबकि खतरे का निशान 1163 फुट पर है। समझने वाली बात यह है कि अभी भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
24 घंटे निगरानी जारी
यूटी प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि उनके द्वारा 24 घंटे सुखना झील पर निगरानी की जा रही है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि अगर झील में पानी फिर से बढ़ता है, तो दोबारा फ्लड गेट खोल दिए जाएंगे।
दिलचस्प बात यह है कि चंडीगढ़ में अक्सर बरसात के मौसम में यह समस्या आती है। पहाड़ों में भारी बारिश होने पर मैदानी इलाकों में पानी की समस्या बढ़ जाती है।
पहाड़ी इलाके से आता है पानी
सुखना झील में पानी मुख्य रूप से शिवालिक पहाड़ियों से बहकर आने वाली छोटी नदियों और नालों से आता है। जब पहाड़ों में भारी बारिश होती है, तो यह पानी तेजी से नीचे की ओर बहता है और झील में जमा होता है।
अगर यह पानी खतरे के निशान से ऊपर चला जाए, तो आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा हो सकता है। इसीलिए प्रशासन सतर्कता बरत रहा है।
फ्लड गेट का महत्व
सुखना झील में कुल तीन फ्लड गेट हैं। जब झील में पानी का स्तर बढ़ता है, तो इन गेट्स को खोलकर अतिरिक्त पानी को बाहर निकाला जाता है। यह पानी आगे नदी प्रणाली में चला जाता है।
रविवार रात की स्थिति में केवल एक फ्लड गेट खोलना पड़ा, जो यह बताता है कि हालांकि स्थिति गंभीर थी, लेकिन पूरी तरह से खतरनाक नहीं थी।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में चंडीगढ़ और आसपास के पहाड़ी इलाकों में और बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन को सतर्क रहना होगा।
यहां सवाल उठता है कि क्या चंडीगढ़ प्रशासन के पास बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं? क्या सुखना झील की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है?
सुखना झील का महत्व
सुखना झील सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की पहचान है। हजारों पर्यटक रोजाना यहां घूमने आते हैं। बोटिंग, पक्षी देखना और सुबह की सैर के लिए यह स्थान प्रसिद्ध है।
1958 में Le Corbusier की योजना के तहत बनाई गई यह कृत्रिम झील चंडीगढ़ की खूबसूरती में चार चांद लगाती है। इसका संरक्षण बेहद जरूरी है।
नागरिकों के लिए सलाह
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अगले कुछ दिनों में सुखना झील के आसपास के इलाकों में सावधानी बरतें। अगर फिर से फ्लड गेट खोले जाते हैं, तो निचले इलाकों में पानी भर सकता है।
राहत की बात यह है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है।
मुख्य बातें (Key Points)
- सुखना झील में रविवार रात पानी खतरे के निशान (1163 फुट) के करीब पहुंचा
- रात 8:30 बजे एक फ्लड गेट खोला गया, सुबह 3:30 बजे बंद किया गया
- वर्तमान में जल स्तर 1162.70 फुट पर, अभी भी अलर्ट जारी
- पहाड़ी इलाके से आने वाले पानी की रफ्तार घटी
- यूटी प्रशासन द्वारा 24 घंटे निगरानी जारी










