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The News Air - Breaking News - Subhash Chandra Debt Case: ₹22,006 करोड़ में से सिर्फ ₹6.5 करोड़ settlement, बड़ा विवाद

Subhash Chandra Debt Case: ₹22,006 करोड़ में से सिर्फ ₹6.5 करोड़ settlement, बड़ा विवाद

राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ने जी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में समाधान योजना को मंजूरी दी

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 29 अगस्त 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस
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Subhash Chandra Debt Case
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Subhash Chandra NCLT Debt Settlement Case: एक बेहद असामान्य व्यक्तिगत दिवालियापन मामला सुर्खियों में है। Zee Group के संस्थापक Subhash Chandra से जुड़े इस मामले में लेनदारों ने स्वीकार किया है कि ₹22,006 करोड़ का कर्ज दिया गया था।

हैरान करने वाली बात यह है कि National Company Law Tribunal (NCLT) द्वारा स्वीकृत समाधान योजना में सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत रूप से अपनी जेब से सिर्फ ₹6.5 करोड़ ही देने हैं।

🔍 यह भी पढ़ें- Ram Mandir Donation Controversy: Supreme Court सोमवार को सुनवाई, CBI जांच की मांग वाली PILs

असली मामला क्या है?

समझने वाली बात यह है कि ₹22,006 करोड़ का कर्ज सुभाष चंद्रा ने व्यक्तिगत तौर पर नहीं लिया था। यह राशि बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने Zee Group की विभिन्न कंपनियों को दी थी।

देखा जाए तो सुभाष चंद्रा ने इन लोन के लिए personal guarantor के तौर पर हस्ताक्षर किए थे। इसका मतलब है कि अगर कंपनियां लोन नहीं चुका पातीं, तो सुभाष चंद्रा व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

🔍 यह भी पढ़ें- Raghav Chadha BJP Merger: क्या दलबदल कानून से बच सकते हैं चड्ढा

तीन अलग-अलग पहलू

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस मामले में तीन अलग-अलग चीजें हैं:

1. Corporate Borrowing (कॉर्पोरेट उधारी):
Zee Group की कंपनियों ने बैंकों से करीब ₹22,006 करोड़ उधार लिया।

2. Personal Guarantee (व्यक्तिगत गारंटी):
सुभाष चंद्रा ने इन loans के लिए अपनी व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

3. Current Liability (वर्तमान देयता):
सवाल यह है कि सुभाष चंद्रा आज की तारीख में कितना भुगतान करने में सक्षम हैं?

₹22,006 करोड़ का आंकड़ा क्यों?

अगर गौर करें तो कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सुभाष चंद्रा ने पूरे ₹22,006 करोड़ पर व्यक्तिगत गारंटी दी थी। जबकि कुछ अन्य रिपोर्ट्स कहती हैं कि सिर्फ ₹574 करोड़ पर व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

लेकिन Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत, personal guarantee भी पूरी insolvency proceedings का हिस्सा बनती है। इसलिए पूरा ₹22,006 करोड़ का आंकड़ा चर्चा में आ रहा है।

0.028% रिकवरी: क्या मायने?

दिलचस्प बात यह है कि अगर ₹22,006 करोड़ को base मान लें, तो ₹6.5 करोड़ की रिकवरी सिर्फ 0.028% बैठती है।

विवरणराशि
कुल दावा₹22,006 करोड़
Settlement राशि₹6.5 करोड़
Recovery Rate0.028%
Haircut99.97%

इसका मतलब है कि हर ₹100 पर बैंकों को सिर्फ 3 पैसे मिल रहे हैं।

क्या पूरा ₹22,006 करोड़ डूब गया?

यहां सबसे बड़ी गलतफहमी यह है। नहीं, ऐसा नहीं है कि बैंकों का पूरा ₹22,006 करोड़ डूब गया।

समझने वाली बात यह है कि ₹6.5 करोड़ सिर्फ वह राशि है जो सुभाष चंद्रा व्यक्तिगत रूप से अपनी जेब से दे रहे हैं।

Zee Group की कंपनियों के पास अभी भी assets हैं। आगे की proceedings में उन assets को बेचकर बैंक और पैसा recover करेंगे।

NCLT ने ₹6.5 करोड़ क्यों approve किए?

NCLT ने यह देखा कि सुभाष चंद्रा की वर्तमान financial स्थिति क्या है। अगर उनके पास ₹22,006 करोड़ के assets होते, तो शायद पूरी राशि की मांग की जाती।

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लेकिन चिंता का विषय यह है कि सुभाष चंद्रा की disclosed personal net worth सिर्फ ₹31 करोड़ रह गई है।

Net Worth में भारी गिरावट

हैरान करने वाली बात यह है:

वर्षNet Worth
2017₹45,000 करोड़
2018₹4,000 करोड़
वर्तमान₹31 करोड़

यह सवाल उठता है कि क्या इतनी तेजी से net worth में गिरावट संभव है?

Major Lenders का विरोध

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जबकि 80% से अधिक creditors ने इस settlement को approve किया, कुछ प्रमुख lenders ने विरोध किया:

  • LIC Housing Finance
  • HDFC Bank
  • Axis Bank
  • Canara Bank

इन बैंकों का कहना है कि सुभाष चंद्रा के पास ज्यादा assets हैं जो जानबूझकर छुपाए जा रहे हैं।

Commercial Wisdom of Creditors

अगर गौर करें तो यह ₹22,006 करोड़ किसी एक बैंक या संस्थान ने नहीं दिया। बहुत सारे financial institutions ने मिलकर दिया है।

IBC के तहत, creditors की voting होती है। 80% से अधिक ने कहा कि हम ₹6.5 करोड़ accept करते हैं क्योंकि:

  • अगर assets की नीलामी होती तो शायद सिर्फ ₹4 करोड़ मिलते
  • प्रक्रिया में कई साल लग जाते
  • ₹6.5 करोड़ कम से कम तुरंत मिल रहे हैं
सुभाष चंद्रा का पक्ष

दिलचस्प बात यह है कि सुभाष चंद्रा ने इस मामले को बड़े स्तर पर challenge किया है। उनका कहना है:

“हमारी कंपनियों ने ₹45,088 करोड़ उधार लिया था, जिसमें से ₹43,000 करोड़ already चुकाया जा चुका है। अब मामला सिर्फ करीब ₹2,000-2,500 करोड़ का है।”

यह दर्शाता है कि पूरी तस्वीर कुछ और भी है।

IBC का Track Record

राहत की बात यह है कि सरकार का कहना है कि Insolvency and Bankruptcy Code से देश को काफी फायदा हुआ है:

विवरणआंकड़ा
Total Recovery₹4.32 लाख करोड़
Liquidation Value से Recovery116%
Fair Value से Recovery94.5%

सरकार का तर्क है कि यह सुभाष चंद्रा का personal guarantee वाला मामला है, और उनकी current capacity के हिसाब से settlement हुई है।

आगे क्या होगा?

उम्मीद की किरण यह है कि जिन major lenders ने oppose किया है, वे अब National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) में इसे challenge कर सकते हैं।

वहां यह देखा जाएगा कि:

  • क्या सुभाष चंद्रा की actual net worth ज्यादा है?
  • क्या assets छुपाए गए हैं?
  • क्या ₹6.5 करोड़ की settlement fair है?
मुख्य बातें (Key Points):

• Zee Group की कंपनियों ने ₹22,006 करोड़ का कर्ज लिया था
• Subhash Chandra ने personal guarantor के रूप में हस्ताक्षर किए थे
• NCLT ने ₹6.5 करोड़ की व्यक्तिगत settlement approve की
• 0.028% recovery rate – हर ₹100 पर सिर्फ 3 पैसे
• LIC, HDFC, Axis, Canara Bank ने विरोध किया
• 80% creditors ने settlement को support किया
• Net worth ₹45,000 करोड़ (2017) से घटकर ₹31 करोड़ (वर्तमान)
• Major lenders NCLAT में challenge कर सकते हैं


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या सुभाष चंद्रा ने खुद ₹22,006 करोड़ लिए थे?

नहीं। यह राशि Zee Group की कंपनियों ने ली थी। सुभाष चंद्रा ने इन loans के लिए personal guarantor के रूप में हस्ताक्षर किए थे।

प्रश्न 2: क्या पूरा ₹22,006 करोड़ माफ हो गया?

नहीं। ₹6.5 करोड़ सिर्फ सुभाष चंद्रा की personal liability है। बाकी का पैसा Zee Group की कंपनियों के assets बेचकर recover किया जाएगा।

प्रश्न 3: NCLT ने इतनी कम राशि क्यों approve की?

NCLT ने सुभाष चंद्रा की current financial capacity देखी। उनकी disclosed net worth सिर्फ ₹31 करोड़ है। अगर assets की नीलामी होती तो शायद सिर्फ ₹4 करोड़ मिलते, इसलिए ₹6.5 करोड़ बेहतर माना गया।

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