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The News Air - Breaking News - Nepal Flash Floods: ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों से खुला हादसे का राज, 175 की मौत

Nepal Flash Floods: ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों से खुला हादसे का राज, 175 की मौत

नेपाल में अचानक आए भीषण बाढ़ में अब तक 175 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 579 लोग लापता बताए जा रहे हैं, ISRO ने सैटेलाइट इमेज से बर्फ के खिसकने की पुष्टि की

Ajay Kumar by Ajay Kumar
गुरूवार, 27 अगस्त 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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Nepal Flash Floods
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Nepal Flash Floods के पीछे की असली वजह अब सामने आ गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें जारी कर यह साफ कर दिया है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर में बड़े पैमाने पर बदलाव और बर्फ का तोड़ा (avalanche) गिरने से त्रिशूली नदी का रास्ता अचानक रुक गया था। जमा हुआ पानी और मलबा जब एकदम से छूटा, तो देखते ही देखते तबाही की भयानक लहर पूरे इलाके में फैल गई। अब तक 175 लोगों की मौत हो चुकी है और 579 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 28 देशों के सैलानी भी शामिल हैं।

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ISRO की सैटेलाइट से मिले सबूत: कैसे हुई तबाही की शुरुआत

ISRO की National Remote Sensing Centre (NRSC) ने अपने शुरुआती विश्लेषण में बताया कि त्रिशूली नदी के किनारे स्थित ग्लेशियर की सतह में बड़े बदलाव देखे गए हैं। यह इलाका नेपाल-तिब्बत सीमा के बिल्कुल करीब है, जहां से बाढ़ का पानी आया माना जा रहा है। ISRO ने ‘पहले और बाद’ (before and after) की जो तस्वीरें साझा की हैं, उनमें यह बदलाव साफ तौर पर दिख रहा है।

देखा जाए तो तस्वीर के दाहिने हिस्से में जहां ग्लेशियर है, वहां प्रभावित क्षेत्र को दिखाने वाला स्लेटी रंग का हिस्सा ‘बाद’ वाली तस्वीर में काफी बड़ा नजर आ रहा है। NRSC के मुताबिक घटनाओं की शुरुआत बर्फ-पत्थर के तोड़े या जमीन खिसकने से हुई। इससे अस्थायी तौर पर नदी का रास्ता रुक गया और फिर जमा हुए पानी और मलबे को अचानक छोड़ दिया गया।

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25 अगस्त को कैप्चर हुई थीं ये खतरनाक तस्वीरें

दिलचस्प बात यह है कि ये तस्वीरें ISRO ने 25 अगस्त 2025 को RESOURCESAT-2A सैटेलाइट का इस्तेमाल करके कैप्चर की थीं। यह सैटेलाइट दिसंबर 2016 में PSLV-C36 द्वारा लॉन्च किया गया था और यह धरती के प्राकृतिक संसाधनों की नियमित निगरानी के लिए 817 किलोमीटर की ऊंचाई पर पोलर सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में काम करता है।

ISRO ने कहा कि इसके नतीजे में त्रिशूली नदी प्रणाली के साथ अचानक बाढ़ आ गई और भारी मलबा आ गया, जिससे तेजी से पानी भर गया। अंतरिक्ष एजेंसी विस्तृत मूल्यांकन कर रही है।

175 की मौत, 579 लोग अभी भी लापता

Nepal Flash Floods में अब तक 175 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाली दूतावास के सूत्रों ने बताया, “हुण तक 175 लाशें बरामद की जा चुकी हैं, जबकि बहुत सारे लोग, स्थानीय और सैलानी दोनों, अभी भी लापता हैं। नवीनतम उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 28 देशों के 476 लोग लापता दर्ज किए गए हैं। खोज और बचाव कार्य जारी रहने के कारण ये आंकड़े तस्दीक के अधीन हैं।”

समझने वाली बात यह है कि Nepal Tourism Board के शुरुआती डेटा से पता चलता है कि 466 विदेशी नागरिकों और 113 नेपालियों समेत 579 यात्री लापता हैं। इनमें कम से कम 133 भारतीय और 37 NRI शामिल हैं। खास बात यह है कि घटना के समय घटनास्थल पर तैनात 44 नेपाल आर्मी कर्मचारी, 28 नेपाल पुलिस कर्मचारी और 13 Armed Police Force (APF) कर्मचारी भी संपर्क से बाहर और लापता हैं।

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अधिकारियों ने बताया कि लापता लोगों में कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए तीर्थ यात्री थे। अच्छी खबर यह है कि 123 लोगों को रसुवा के तिमुरे से हवाई रास्ते से सफलतापूर्वक बचा लिया गया है, जिनमें 94 नेपाली और 29 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

बिना बारिश के आ गई थी तबाही की लहर

The Kathmandu Post की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को दिन में आई अचानक बाढ़ ने तीन जिलों में तबाही मचा दी। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि क्षेत्र में कोई बारिश नहीं हुई थी, इसलिए लोगों को तबाही की कोई चेतावनी नहीं मिली। जब बाढ़ आई तो लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे।

जैसे ही तबाही का पैमाना स्पष्ट हुआ, रसुवा के मुख्य कस्टम अधिकारी राजिंदर धुंगाना और कई अन्य नजदीकी जंगल में भाग गए। कस्टम चेकप्वाइंट पर खड़े 300 से ज्यादा वाहन और ट्रक पलक झपकते ही बह गए।

त्रिशूली नदी: तिब्बत से निकलकर भारत तक

अगर गौर करें तो त्रिशूली नदी तिब्बत में किरोंग त्सांगपो और लेंधे खोला के मेल से निकलती है। यह मध्य नेपाल में नारायणी नदी प्रणाली की एक प्रमुख सहायक नदी है और व्हाइट-वाटर राफ्टिंग के लिए एक लोकप्रिय स्थान है। समझने वाली बात यह है कि नेपाल में पैदा होने वाली नदियों का पानी अंत में इंडो-गंगा के मैदानों की ओर बहता है, इसलिए यह आपदा सिर्फ नेपाल की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की समस्या है।

नेपाल के आधुनिक इतिहास की सबसे घातक बाढ़

सुरक्षा अधिकारियों और आपदा विशेषज्ञों का कहना है कि बुधवार की यह बाढ़ नेपाल के आधुनिक इतिहास में सबसे घातक बाढ़ों में से एक हो सकती है। सैकड़ों लोगों के घर, बहुत बड़ी बस्ती बाढ़ के नीचे जाने से पहले ध्वस्त हो गई थी।

बचाव और राहत कार्य जारी

नेपाली दूतावास के सूत्रों ने बताया, “इस पड़ाव पर, हमारी तुरंत प्राथमिकता जानें बचाना और प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव, निकासी और राहत प्रयासों का समर्थन करना है। बाढ़ के कारण हुए व्यापक नुकसान के मद्देनजर, सरकार जमीन पर स्थिति और उभरती जरूरतों का मूल्यांकन करना जारी रखेगी और, जहां जरूरी हो, स्थापित आधिकारिक चैनलों के जरिए सहायता के लिए खास जरूरतों का संचार करेगी।”

आपदा प्रबंधन अथॉरिटीज ने गुरुवार को एक शुरुआती मूल्यांकन में सुझाव दिया कि अचानक बाढ़ नेपाल-चीन सीमा पर एक नदी को रोकने वाले ऊपरी हिस्से में बर्फ के तोड़े गिरने के कारण आई थी। मूल्यांकन से पता चलता है कि त्रिशूली नदी में बाढ़ नेपाल-चीन सीमा पर, रसुवागढ़ी से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में, बर्फ और पत्थर के खिसकने के कारण लेंधे नदी में मलबे से भरा बाढ़ आने से आई थी।

मुख्य बातें (Key Points)
  • ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों से नेपाल बाढ़ का कारण स्पष्ट: ग्लेशियर में avalanche से नदी का रास्ता रुका
  • Nepal Flash Floods में अब तक 175 लोगों की मौत, 579 लोग लापता
  • 28 देशों के 476 विदेशी सैलानी लापता, 133 भारतीय और 37 NRI शामिल
  • त्रिशूली नदी प्रणाली में 25 अगस्त से ही बदलाव दिख रहे थे
  • 81 सुरक्षा बल के जवान संपर्क से बाहर, 300+ वाहन बह गए
  • कस्टम अधिकारी राजिंदर धुंगाना समेत कई अधिकारी जंगल में भागकर बचे
  • रसुवा के तिमुरे से 123 लोगों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया
  • कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 50 भारतीय तीर्थयात्री भी लापता

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: नेपाल में बाढ़ का मुख्य कारण क्या था?

उत्तर: ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर त्रिशूली नदी के पास ग्लेशियर में बर्फ और पत्थर का तोड़ा (avalanche) गिरा, जिससे नदी का रास्ता रुक गया। जमा हुआ पानी और मलबा अचानक छूटने से भयंकर बाढ़ आ गई।

प्रश्न 2: नेपाल बाढ़ में कितने भारतीय लापता हैं?

उत्तर: नेपाल की बाढ़ में कम से कम 133 भारतीय और 37 NRI लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थ यात्री भी शामिल हैं। अब तक 175 लोगों की मौत हो चुकी है और कुल 579 लोग लापता हैं।

प्रश्न 3: ISRO ने नेपाल बाढ़ की तस्वीरें कब और कैसे लीं?

उत्तर: ISRO ने 25 अगस्त 2025 को RESOURCESAT-2A सैटेलाइट से ग्लेशियर और त्रिशूली नदी क्षेत्र की तस्वीरें कैप्चर की थीं। National Remote Sensing Centre (NRSC) ने ‘before and after’ तस्वीरों में ग्लेशियर की सतह में बड़े बदलाव की पुष्टि की है।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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