Kartarpur Corridor को लेकर सिख श्रद्धालुओं की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है। श्री कर्तारपुर साहिब लांघा खोलने और सिख श्रद्धालुओं के लिए वीजा कोटा बढ़ाने की उठ रही मांगों के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। देखा जाए तो यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है।
मंत्रालय ने साफ किया है कि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए श्री कर्तारपुर साहिब लांघे की सेवाएं फिलहाल बंद ही रहेंगी। जबकि दोनों देशों के बीच श्रद्धालुओं की यात्रा पुराने द्विपक्षीय समझौतों के तहत ही जारी रहेगी।
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SGPC की मांग और पाकिस्तान से मुलाकात
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने यह टिप्पणी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) द्वारा पाकिस्तानी डिप्लोमैट के साथ की गई मुलाकात के बाद दी है। SGPC प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की अगुवाई में दिल्ली में पाकिस्तान के चार्ज डी अफेयर्स साद अहमद वड़ैच से मुलाकात की गई।
इस मुलाकात में नवंबर 2026 में आने वाले श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब के लिए 7,500 से अधिक श्रद्धालुओं को वीजे देने की अपील की गई थी। अगर गौर करें तो आम तौर पर यह कोटा लगभग 1,800 वीजों का होता है। यानी SGPC ने करीब चार गुना वृद्धि की मांग की थी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि SGPC ने यह पहल श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए की थी, लेकिन केंद्र सरकार का फोकस सुरक्षा पर बना हुआ है।
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पहलगाम हमले के बाद से बंद है कॉरिडोर
लांघा खोलने के मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद 7 मई 2025 से सुरक्षा कारणों से श्री कर्तारपुर साहिब लांघे की सेवाएं निलंबित की गई थीं।
उन्होंने कहा, “मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए यह सेवाएं अभी भी बंद रखने का फैसला बरकरार है।”
समझने वाली बात यह है कि भारत सरकार ने यह निर्णय हल्के में नहीं लिया है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने सीमा पार से आने वाले खतरों को एक बार फिर रेखांकित किया था। दिलचस्प बात यह है कि कर्तारपुर कॉरिडोर 2019 में बड़ी उम्मीदों के साथ खुला था और यह भारत-पाकिस्तान के बीच एक अनोखी पहल थी।
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| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| बंद होने की तारीख | 7 मई 2025 |
| बंद होने का कारण | पहलगाम आतंकी हमला, सुरक्षा चिंताएं |
| SGPC की मांग | 7,500 वीजा (नवंबर 2026 प्रकाश पुरब के लिए) |
| सामान्य वीजा कोटा | लगभग 1,800 वीजा |
| वर्तमान स्थिति | निलंबित, जल्द खुलने की संभावना नहीं |
द्विपक्षीय समझौतों के तहत यात्रा जारी
हालांकि कर्तारपुर कॉरिडोर बंद है, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच पुराने द्विपक्षीय समझौतों के तहत श्रद्धालुओं की यात्रा जारी रहेगी। यानी जो पारंपरिक वीजा प्रक्रिया है, वह अभी भी मान्य है।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जब तक सुरक्षा स्थिति में सुधार नहीं होता, कॉरिडोर को फिर से खोलने पर विचार नहीं किया जाएगा। यह एक सोची-समझी नीति है, न कि कोई राजनीतिक निर्णय।
SGPC का केंद्र सरकार से आग्रह
दूसरी ओर, SGPC ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए इस लांघे को जल्द से जल्द बहाल करवाए। SGPC के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह केवल धार्मिक स्थल तक पहुंचने का मामला नहीं है, बल्कि लाखों सिख श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मुद्दा है।
श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाश पुरब सिख समुदाय के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। 2026 में होने वाले इस आयोजन के लिए हजारों श्रद्धालु कर्तारपुर साहिब जाना चाहते हैं, जो पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है और गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष यहीं बिताए थे।
कर्तारपुर कॉरिडोर का इतिहास और महत्व
कर्तारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन नवंबर 2019 में हुआ था। यह भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐतिहासिक कदम था। इस कॉरिडोर ने भारतीय श्रद्धालुओं को बिना वीजा के सीधे कर्तारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने की सुविधा दी थी।
भारत की ओर से गुरदासपुर, पंजाब के डेरा बाबा नानक से यह कॉरिडोर शुरू होता है और पाकिस्तान की सीमा तक जाता है। यह मात्र 4.7 किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसका धार्मिक और भावनात्मक महत्व बहुत बड़ा है।
कोविड-19 महामारी के दौरान भी यह कॉरिडोर बंद रहा था और बाद में धीरे-धीरे खोला गया। लेकिन मई 2025 से सुरक्षा कारणों से फिर से बंद कर दिया गया।
सुरक्षा बनाम आस्था: संतुलन की चुनौती
केंद्र सरकार के सामने अब एक नाजुक संतुलन बनाने की चुनौती है। एक ओर लाखों सिख श्रद्धालुओं की भावनाएं हैं, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार नहीं होता और सीमा पार आतंकवाद पर अंकुश नहीं लगता, तब तक कॉरिडोर खोलना जोखिम भरा हो सकता है।
हालांकि, SGPC और सिख संगठनों का तर्क है कि धर्म और आस्था को राजनीति से अलग रखना चाहिए। उनका कहना है कि कर्तारपुर कॉरिडोर एक मानवीय और धार्मिक पहल थी, जिसे सुरक्षा के उचित इंतजामों के साथ फिर से शुरू किया जा सकता है।
क्या है आगे का रास्ता?
फिलहाल विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि कॉरिडोर जल्द नहीं खुलेगा। हालांकि, अगर सुरक्षा स्थिति में सुधार होता है और दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है, तो भविष्य में इसे फिर से खोलने पर विचार किया जा सकता है।
SGPC ने कहा है कि वह इस मुद्दे को उच्चतम स्तर पर उठाएगी और केंद्र सरकार से लगातार संपर्क बनाए रखेगी। नवंबर 2026 के प्रकाश पुरब तक कॉरिडोर खोलने की उम्मीद तो कम दिख रही है, लेकिन कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे।
क्या भारत-पाकिस्तान संबंधों में सुधार संभव?
कर्तारपुर कॉरिडोर का भविष्य काफी हद तक भारत-पाकिस्तान संबंधों पर निर्भर करता है। पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर अंकुश नहीं लगाता, तब तक भारत का रुख सख्त बना रहेगा।
हालांकि, अतीत में भी कई बार ऐसे मौके आए हैं जब तनाव के बावजूद धार्मिक और मानवीय मुद्दों पर सहयोग हुआ है। कर्तारपुर कॉरिडोर खुद इसी का उदाहरण है।
मुख्य बातें (Key Points)
✓ कर्तारपुर कॉरिडोर 7 मई 2025 से सुरक्षा कारणों से बंद है और फिलहाल खुलने की संभावना नहीं
✓ SGPC ने नवंबर 2026 के प्रकाश पुरब के लिए 7,500 वीजा की मांग की थी, जो सामान्य 1,800 से चार गुना अधिक है
✓ विदेश मंत्रालय ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद की सुरक्षा स्थिति का हवाला देते हुए कॉरिडोर बंद रखने का फैसला बरकरार रखा
✓ पुराने द्विपक्षीय समझौतों के तहत श्रद्धालुओं की यात्रा जारी रहेगी
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