Punjab Teacher Training Program : पंजाब में नशे के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने अपने प्रमुख नशा विरोधी अभियान “युद्ध नशेआं विरुद्ध” के तहत 12 जिलों में शिक्षकों के लिए जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया है। 11 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ से जारी सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य 21,850 से अधिक शिक्षकों को छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और नशे के दुरुपयोग के शुरुआती संकेतों की पहचान करने और समय पर आवश्यक कदम उठाने के लिए आवश्यक क्षमता और व्यावहारिक कौशल से लैस करना है।
देखा जाए तो यह एक अनोखी पहल है। आमतौर पर नशे के खिलाफ अभियान पुलिस कार्रवाई तक सीमित रहते हैं, लेकिन यहां शिक्षकों को फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में तैयार किया जा रहा है। समझने वाली बात यह है कि शिक्षक बच्चों के सबसे करीब होते हैं और वे सबसे पहले किसी समस्या को देख सकते हैं।
प्रशिक्षण की शुरुआत कहां से हुई?
इस अभियान की शुरुआत सोमवार को फाजिल्का और तरन तारन से की गई। पिछले सप्ताह इन दोनों जिलों में 800 से अधिक शिक्षकों ने वर्कशॉप में भाग लिया। प्रारंभिक प्रतिक्रिया बेहद सकारात्मक रही है।
यह कार्यक्रम स्कूलों में सरकार द्वारा चलाए गए पिछले जागरूकता कार्यक्रमों की सफलता के बाद शुरू किया गया है। इससे पहले जनवरी 2026 में नौ जिलों के वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च विद्यालयों के प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
दिलचस्प बात यह है कि अमृतसर में एक पायलट शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 2,800 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। सर्वेक्षण में 75 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने बताया कि वे स्वस्थ स्कूली वातावरण बनाने में योगदान देने के लिए प्रेरित हुए।
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कौन-कौन से 12 जिले शामिल हैं?
अमृतसर पायलट की सफलता के आधार पर, अब प्रशिक्षण मॉड्यूल का चरणबद्ध विस्तार किया जा रहा है। इसमें शामिल 12 जिले हैं: फाजिल्का, तरन तारन, फिरोजपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फरीदकोट, मोहाली (एस.ए.एस. नगर), रोपड़ (रूपनगर), कपूरथला, लुधियाना और पटियाला।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इन जिलों में सीमावर्ती और शहरी दोनों तरह के इलाके शामिल हैं। सीमावर्ती इलाकों में ड्रग्स की तस्करी का खतरा ज्यादा है, जबकि शहरी इलाकों में युवा तनाव और प्रतिस्पर्धा के कारण नशे की ओर आकर्षित होते हैं।
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डॉ. बलबीर सिंह का बयान
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा: “हर वह बच्चा जो नशे के अंधेरे में चला जाता है, वह एक ऐसा बच्चा है जिस तक हम पहले पहुंच सकते थे। हमारे शिक्षक बच्चों के साथ सबसे अधिक समय बिताते हैं। वे उनकी खामोशियों, अनुपस्थितियों और उन बदलावों को देखते हैं, जिन्हें कोई और नहीं देख पाता।”
यह बयान बेहद भावनात्मक और सच है। अगर गौर करें तो शिक्षक वास्तव में बच्चों की छोटी-छोटी बातें नोटिस करते हैं। अचानक किसी छात्र का प्रदर्शन गिरना, स्कूल से गैरहाजिर रहना, व्यवहार में बदलाव – ये सब शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
प्रशिक्षण में क्या सिखाया जाएगा?
प्रशिक्षण मॉड्यूल इस तरह तैयार किया गया है कि शिक्षकों को किशोरों से जुड़े मुद्दों, उनके मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण की बेहतर समझ मिल सके। मुख्य बिंदु हैं:
किशोरावस्था की मनोविज्ञान: किशोरों के मन में क्या चलता है, वे किन दबावों से गुजरते हैं, यह समझना।
मानसिक स्वास्थ्य के लक्षण: चिंता, अवसाद, तनाव के शुरुआती संकेतों को पहचानना।
नशे की ओर बढ़ने के संकेत: व्यवहार में बदलाव, शारीरिक संकेत, दोस्तों के समूह में बदलाव।
संवेदनशील संवाद कौशल: बच्चों से कैसे बात करें, कैसे सुनें, कैसे उन्हें सहज महसूस कराएं।
रेफरल सिस्टम: जरूरत पड़ने पर छात्रों को काउंसलर, डॉक्टर या सहायता केंद्रों से कैसे जोड़ें।
गैर-निर्णयात्मक दृष्टिकोण: बच्चों को दोषी न ठहराएं बल्कि मदद करें।
500 से अधिक प्रशिक्षण बैच
अगस्त 2026 से चरणबद्ध तरीके से 12 जिलों में 500 से अधिक बैचों में एक दिवसीय जागरूकता-सह-क्षमता निर्माण सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह एक विशाल अभियान है।
| गतिविधि | संख्या/विवरण |
|---|---|
| कुल शिक्षक प्रशिक्षण | 21,850+ |
| प्रशिक्षण बैच | 500+ |
| जिले | 12 |
| अवधि | प्रति सत्र 1 दिन |
| शुरुआत | अगस्त 2026 |
इन सत्रों में विशेषज्ञ प्रशिक्षक नशे के उपयोग की समस्या के मानसिक और सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षकों में मनोवैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता, नशा-मुक्ति विशेषज्ञ और अनुभवी शिक्षक शामिल होंगे।
शपथ और व्यावहारिक गतिविधियां
प्रशिक्षण में प्राप्त शिक्षा को कक्षा में लागू करना सुनिश्चित करने के लिए हर शिक्षक अपने छात्रों को नशे से दूर रखने की जिम्मेदारी निभाने की शपथ लेगा। यह प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
प्रशिक्षण के बाद के हफ्तों में शिक्षक छात्रों के साथ विभिन्न गतिविधियां करेंगे:
- नशे के खिलाफ निबंध प्रतियोगिता
- पोस्टर बनाना
- नुक्कड़ नाटक
- समूह चर्चा
- काउंसलिंग सत्र
अंतर-विभागीय सहयोग
यह एक व्यापक अंतर-विभागीय पहल है। इसके कार्यान्वयन को राज्य शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT), सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सुनिश्चित किया जा रहा है।
राज्य की डेटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (DITSU) कार्यक्रम के कार्यान्वयन में सहयोग देने के साथ-साथ प्रशिक्षण सामग्री तैयार करेगी और पूरे अभियान के दौरान गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी।
जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, ताकि सभी वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च विद्यालयों के शिक्षक इन सत्रों में भाग ले सकें।
ये सत्र नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) और राष्ट्रीय कार्य योजना नशीली दवाओं की मांग में कमी (NAPDDDR) के सहयोग से आयोजित किए जा रहे हैं।
निगरानी और मूल्यांकन
प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया और एक सुचारू निगरानी प्रणाली के माध्यम से कार्यक्रम की पहुंच और प्रभावशीलता पर नजर रखी जाएगी।
हर प्रशिक्षण सत्र के बाद फीडबैक फॉर्म भरवाया जाएगा। तीन महीने और छह महीने बाद फॉलो-अप किया जाएगा कि शिक्षक क्या कर रहे हैं और क्या बदलाव आया है।
स्कूल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य और नशा रोकथाम समितियां बनाई जाएंगी जो नियमित रूप से मिलेंगी और रिपोर्ट देंगी।
अमृतसर पायलट की सफलता
अमृतसर में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता ने इस विस्तार को प्रेरित किया। 2,800 शिक्षकों में से 75% से अधिक ने कहा कि उन्हें प्रशिक्षण से बहुत फायदा हुआ।
एक शिक्षक ने कहा: “मुझे नहीं पता था कि बच्चों के व्यवहार में छोटे-छोटे बदलाव इतने महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। अब मैं ज्यादा सजग हूं।”
दूसरे शिक्षक ने कहा: “पहले हम किसी परेशान बच्चे को बस डांट देते थे। अब समझ आया कि उसे मदद की जरूरत हो सकती है।”
मुख्य बातें (Key Points)
- भगवंत मान सरकार “युद्ध नशेआं विरुद्ध” के तहत 21,850 शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगी
- 12 जिलों में 500 से अधिक प्रशिक्षण बैच अगस्त 2026 से शुरू होंगे
- शिक्षक छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और नशे के शुरुआती संकेत पहचानने में सक्षम होंगे
- SCERT, सामाजिक सुरक्षा विभाग और DITSU के सहयोग से अंतर-विभागीय पहल
- अमृतसर पायलट में 75% शिक्षकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी










