Sacrilege Law: श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा निर्धारित समय सीमा के खत्म होने के बाद आज पंजाब सरकार ने बेअदबी रोकू कानून में संशोधन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पत्र श्री अकाल तख्त सचिवालय में सौंप दिया है। देखा जाए तो यह 28 पन्नों का ड्राफ्ट सरकार की ओर से एक जरूरी कदम है, लेकिन अकाल तख्त ने इसे घोखने (समीक्षा) का समय मांगा है।

🔍 यह भी पढ़ें- पंजाब के विधायकों ने Anti Sacrilege Bill बिना पढ़े पास करने का पूरा विवाद क्या था, जानें
विधायक निज्जर और DC अमृतसर ने सौंपा पत्र
यह पत्र पंजाब सरकार के प्रतिनिधि के रूप में विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर और डिप्टी कमिश्नर अमृतसर द्वारा श्री अकाल तख्त के सचिवालय में सौंपा गया। जिसमें बेअदबी रोकू कानून (श्री गुरु ग्रंथ साहिब जागत ज्योत सोध एक्ट 2026) में आपत्तिजनक धाराओं के संबंध में सरकार की तरफ से एक ड्राफ्ट शामिल है।
समझने वाली बात यह है कि यह पत्र सचिवालय के इंचार्ज बगीचा सिंह को आधिकारिक रूप में आज 29 जुलाई को सौंपा गया।
🔍 यह भी पढ़ें- बड़ा फैसला: Shri Akal Takht ने दिया 1 महीने का आदेश, Sacrilege Law में करना होगा संशोधन
अकाल तख्त ने मांगा समीक्षा का समय
मिली जानकारी के मुताबिक श्री अकाल तख्त द्वारा सरकारी प्रतिनिधियों को कहा गया है कि भेजे गए इस ड्राफ्ट को घोखने (परखने) का समय दिया जाए। इस बारे में सिख संस्थाओं की सहमति होना जरूरी है। यह 28 पन्नों का विस्तृत ड्राफ्ट है।
दिलचस्प बात यह है कि इस पत्र में 3 अगस्त को सरकार द्वारा बुलाए गए विधानसभा सत्र का कोई जिक्र नहीं है। जिस बारे में चर्चा है कि सरकार द्वारा इस सत्र में आपत्तिजनक धाराओं को दुरुस्त किया जा सकता है।
🔍 यह भी पढ़ें- Punjab Anti-Sacrilege Act: CM Mann का शुक्राना यात्रा, अकालियों को घेरा, BJP पर साधा निशाना
“जल्दबाजी मत करो” – अकाल तख्त का संदेश
श्री अकाल तख्त द्वारा सरकारी प्रतिनिधि को साफ कहा गया है कि पहले भी इस मामले में सरकार द्वारा जल्दबाजी की गई थी और दोबारा जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए। अगर गौर करें तो उन्होंने सरकार को संदेश भिजवाया है कि इस मामले में एक साझा कमेटी बनाई जानी चाहिए ताकि इस एक्ट को अंतिम मंजूरी देने से पहले आपत्तिजनक धाराओं और शब्दावली को हटाया जा सके और इस संबंध में सहमति बनाई जा सके।
29 जून को क्या हुआ था?
जिक्रयोग है कि 29 जून को इस मामले में श्री अकाल तख्त द्वारा पंजाब विधानसभा के सभी सिख विधायकों और मंत्रियों को तलब किया गया था, जहां उन्हें इस कानून में आपत्तिजनक धाराओं को हटाने और आपत्तिजनक शब्दावली को ठीक करने के लिए आदेश दिए गए थे। इस संबंध में सरकार को एक महीने का समय दिया गया था जो 28 जुलाई को समाप्त हो गया है।
जत्थेदार गड़गज्ज ने जताया था सख्त विरोध
एक महीने की निर्धारित समय सीमा में सरकार द्वारा संशोधन संबंधी दी गई सहमति के बारे में कोई जवाब नहीं आने के कारण श्री अकाल तख्त द्वारा इस मामले पर चिंता जताई गई थी। जिस पर बीते कल जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने सख्त आपत्ति भी जताई थी।
उन्होंने स्पष्ट किया था कि कल निर्धारित समय सीमा की समाप्ति तक शाम 5 बजे तक सरकार द्वारा कोई भी हुंगारा (जवाब) नहीं आया था। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि श्री अकाल तख्त द्वारा इस एक्ट में मौजूद कुछ धाराओं और शब्दावली पर सख्त आपत्ति जताई गई है।
क्या-क्या हैं आपत्तिजनक धाराएं?
हालांकि सरकार द्वारा सौंपे गए इस 28 पन्नों के ड्राफ्ट की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जागत ज्योत सोध एक्ट 2026 में कुछ ऐसी धाराएं और शब्दावली हैं जो सिख धर्म की मान्यताओं के अनुरूप नहीं हैं।
अकाल तख्त का कहना है कि इन आपत्तिजनक प्रावधानों को हटाए बिना इस कानून को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता। इसके लिए सिख संस्थाओं और धार्मिक विद्वानों की सहमति जरूरी है।
मुख्य बातें (Key Points)
✓ पंजाब सरकार ने अकाल तख्त को 28 पन्नों का ड्राफ्ट सौंपा
✓ बेअदबी रोकू कानून में आपत्तिजनक धाराएं हटाने की मांग
✓ अकाल तख्त ने मांगा समीक्षा का समय, साझा कमेटी बनाने की सलाह
✓ 29 जून को दी गई एक महीने की समय सीमा 28 जुलाई को खत्म
✓ 3 अगस्त के विधानसभा सत्र का पत्र में कोई जिक्र नहीं













