Jaswant Singh Khalra Murder Case : मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की हत्या के 30 साल बाद भी उनके परिवार को न्याय नहीं मिल पाया है। खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से पूर्व DSP जसपाल सिंgh और सब-इंस्पेक्टर सतनाम सिंह तथा जसबीर सिंह की मौजूदगी के बारे में सवाल पूछकर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को घेरे में ले लिया है।
देखा जाए तो फिल्म ‘सतलुज’ से जुड़े विवाद के बीच खालड़ा हत्याकांड के दोषियों पर एक बार फिर चर्चा छिड़ गई है। जहां 26 मई 2023 को नाभा ओपन एयर जेल से रिहा हुए पूर्व DSP जसपाल सिंह के ठिकाने के बारे में अभी भी कोई जानकारी नहीं है, वहीं पंजाब सरकार का दावा है कि भगवंत मान सरकार ने इस केस के दोषियों की समय से पहले रिहाई से जुड़ी किसी फाइल पर दस्तखत नहीं किए हैं।
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कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा?
अगर गौर करें तो 1990 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के दौर में जसवंत सिंह खालड़ा एक निडर मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उन्होंने पुलिस द्वारा हजारों युवकों की गुप्त हत्याओं और अवैध क्रिया-कलापों का पर्दाफाश किया था।
1995 में उनका अपहरण कर लिया गया और कस्टडी में उनकी हत्या कर दी गई। यह मामला पंजाब के इतिहास के सबसे संवेदनशील मामलों में से एक माना जाता है।
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CBI कोर्ट का फैसला और सजा
उल्लेखनीय है कि पूर्व DSP जसपाल सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों को 2005 में सीबीआई (CBI) अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को 2007 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
समझने वाली बात यह है कि तीन अदालतों ने इन पुलिसकर्मियों को दोषी माना, फिर भी वे आज जेल से बाहर हैं। जसपाल सिंह मई 2023 में अंतरिम जमानत पर बाहर आया था।
आठ दोषियों में से कितने बचे?
इस केस में दोषी ठहराए गए आठ पुलिस कर्मचारियों में से चार की मौत हो चुकी है। बचे हुए चार में से तीन जमानत/पैरोल पर बाहर हैं और एक अभी भी जेल में है।
दिलचस्प बात यह है कि इनमें जसपाल सिंह सबसे सीनियर अधिकारी (DSP रैंक के) थे। बाकी दोषियों में सतनाम सिंह, सुरिंदर सिंह और जसबीर सिंह शामिल हैं।
AAP की सफाई: कानून का हवाला
इस मामले पर AAP के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि BNSS, 2023 की धारा 477 (जो पहले CrPC की धारा 435 थी) के तहत सीबीआई केसों में दोषियों की समय से पहले रिहाई का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के पास होता है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि पन्नू ने आर्टिकल और कानूनी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला सीबीआई द्वारा इन्वेस्टिगेट किया गया था, इसलिए रिहाई का फैसला केंद्र का है, न कि राज्य सरकार का।
2017 से चली आ रही अर्जियां
जसपाल सिंह ने 2017 में रिहाई के लिए अर्जी दी थी, जिसे केंद्र और बाद में 2018 में राज्यपाल ने रद्द कर दिया था। 2019 में कांग्रेस सरकार के समय भी यह मामला केंद्र को भेजा गया था।
बाकी दोषियों की अर्जियों को भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मार्च 2023 में रद्द कर दिया था। अक्टूबर 2023 में मामला फिर से केंद्र को भेजा गया था, लेकिन उसके बाद केंद्रीय मंत्रालय की ओर से पंजाब सरकार को कोई प्रस्ताव या अर्जी वापस नहीं भेजी गई।
पूर्व DSP जसपाल सिंह कहां हैं?
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। जसपाल सिंह 26 मई 2023 को नाभा ओपन एयर जेल से रिहा हुए थे, लेकिन उनके ठिकाने के बारे में अभी तक कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं है।
सवाल उठता है कि एक उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी को जमानत पर रिहा करने के बाद उस पर निगरानी क्यों नहीं रखी जा रही? क्या यह न्याय प्रणाली की विफलता नहीं है?
परमजीत कौर के सवाल
परमजीत कौर खालड़ा ने सीधे तौर पर पूछा है कि भगवंत मान सरकार इन दोषियों की मौजूदगी और गतिविधियों के बारे में क्या जानती है? क्या सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि ये लोग अपनी पैरोल/जमानत की शर्तों का पालन कर रहे हैं?
उनका यह भी कहना है कि अगर एनआईए (NIA) ने साफ चिट दी है, तो अमृतपाल सिंह को दिब्रूगढ़ जेल में क्यों रखा गया है, लेकिन खालड़ा हत्याकांड के सिद्धदोषियों को जमानत पर क्यों छोड़ा गया?
राजनीतिक निहितार्थ
यह मामला AAP सरकार के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। खालड़ा परिवार की लड़ाई पंजाब में मानवाधिकार आंदोलन का प्रतीक रही है। अगर सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता नहीं दिखाती, तो उसे राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि यह केंद्र का मामला है और राज्य सरकार के हाथ बंधे हैं। लेकिन जनता का सवाल है कि क्या राज्य सरकार केंद्र पर दबाव नहीं बना सकती?
मुख्य बातें (Key Points):
- जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड के दोषियों को 2005 में उम्रकैद की सजा मिली थी
- आठ दोषियों में से चार की मौत हो चुकी है, तीन जमानत/पैरोल पर बाहर हैं
- पूर्व DSP जसपाल सिंह मई 2023 से जेल से बाहर हैं, लेकिन उनका ठिकाना अज्ञात
- AAP सरकार ने कहा कि रिहाई का अधिकार केंद्र के पास है, राज्य के पास नहीं
- परमजीत कौर खालड़ा ने मुख्यमंत्री से सवाल किए हैं












