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The News Air - NEWS-TICKER - Punjab Anti Drug Campaign में Women Power बनी सबसे बड़ी ताकत, परिवारों ने बदली तस्वीर

Punjab Anti Drug Campaign में Women Power बनी सबसे बड़ी ताकत, परिवारों ने बदली तस्वीर

भगवंत मान सरकार के नशा मुक्ति अभियान में परिवार की महिलाएं बनीं आशा की किरण, मोगा में सुनाई दीं दिल छू लेने वाली सफलता की कहानियां

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शुक्रवार, 24 जुलाई 2026
in NEWS-TICKER, पंजाब
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Punjab Anti Drug Campaign: नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सरकारी योजनाओं से नहीं जीती जाती। इसमें सबसे बड़ी ताकत परिवार की होती है, खासकर माताओं, पत्नियों और बहनों की। पंजाब का ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान इस सच्चाई का जीता-जागता सबूत बन रहा है। देखा जाए तो, जहां पहले परिवार नशे को छुपाते थे, वहीं अब वे खुद अपने प्रियजनों को नशा मुक्ति केंद्रों तक ले जा रहे हैं। और इस बदलाव की अगुवाई कर रही हैं महिलाएं।

भगवंत मान सरकार के इस अभियान में महिलाएं केवल देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत बनकर उभरी हैं। हाल ही में मोगा में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम ने पूरे पंजाब को यह संदेश दिया कि जब परिवार साथ खड़ा हो, तो नशे से मुक्ति असंभव नहीं।

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नशे की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, पूरे परिवार की होती है

जब घर का कोई सदस्य नशे की चपेट में आता है, तो सबसे ज्यादा मार महिलाओं और बच्चों पर पड़ती है। आर्थिक संकट, मानसिक तनाव, घरेलू हिंसा और सामाजिक अपमान – यह सब झेलना पड़ता है। कई बार तो घर की महिलाओं को खाने-पीने तक के लिए संघर्ष करना पड़ता है क्योंकि पूरी कमाई नशे में खर्च हो जाती है।

लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। पंजाब में परिवार नशे को अपराध नहीं, बल्कि एक बीमारी के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। वे अपने प्रियजनों को उपचार के लिए प्रेरित कर रहे हैं और पुनर्वास की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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लुधियाना की रागिनी कौर की संघर्ष और जीत की कहानी

लुधियाना की रागिनी कौर की कहानी किसी फिल्म के सीन जैसी लगती है, लेकिन यह पूरी तरह सच है। उन्होंने एस.एफ.सी. कॉलेज, जलालाबाद में आयोजित “मीनेस ऑफ सब्सटेंस एब्यूज–अनकवरिंग द बर्डन ऑन वुमेन” कार्यक्रम में अपना अनुभव साझा किया।

रागिनी ने बताया, “मेरे पति हमारे विवाह से पहले ही नशे के आदी थे, लेकिन मुझे इसका पता शादी के बाद चला। शुरुआत में तो लगा कि अब क्या होगा। घर में लड़ाई, पैसों की तंगी, बच्चों का भविष्य – सब कुछ अंधकार में दिखने लगा। हमने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी।”

समझने वाली बात यह है कि रागिनी ने हार नहीं मानी। तभी किसी ने उन्हें नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र ले जाने की सलाह दी। उन्होंने हिम्मत की और अपने पति को केंद्र में भर्ती कराया। वहां हुए उपचार ने उनके पति को नया जीवन दिया। आज वे पूरी तरह नशा-मुक्त हैं।

हैरान करने वाली बात यह है कि रागिनी यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने अपने मामा के बेटे को भी उसी केंद्र में इलाज के लिए भेजा और वह भी सफलतापूर्वक नशे की लत से बाहर आ गया। अब रागिनी खुद दूसरे परिवारों को जागरूक करती हैं।

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मोगा की बलविंदर कौर: जब पूरा परिवार साथ खड़ा हुआ

मोगा जिले के गांव बुट्टर कलां की बलविंदर कौर की कहानी भी उतनी ही प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि नशे ने उनके परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था। पति की कमाई नशे में खर्च हो जाती थी। घर में कलह का माहौल रहता था।

बलविंदर कौर ने कहा, “काउंसलिंग के दौरान हमें समझाया गया कि नशा मुक्ति एक ऐसी यात्रा है जिसमें पूरे परिवार की भागीदारी आवश्यक होती है। मैं स्वयं अपने पति को नशा मुक्ति केंद्र लेकर गई। शुरुआत में बहुत मुश्किल था, लेकिन धीरे-धीरे बदलाव दिखने लगा।”

आज उनके पति पूरी तरह नशा-मुक्त हैं। इतना ही नहीं, उनके पड़ोस का एक युवक जो हेरोइन का आदी था, वह भी सफलतापूर्वक नशे से बाहर आ चुका है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि एक सफलता की कहानी दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाती है।

परिवार की काउंसलिंग अब अनिवार्य हिस्सा

ऐसी प्रेरणादायक सफलता की कहानियों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में प्रत्येक मरीज के उपचार के दौरान पारिवारिक काउंसलिंग को अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है।

इसका मकसद साफ है – नशा मुक्ति केवल दवाइयों से नहीं होती। इसमें परिवार का भावनात्मक सहयोग, समझ और धैर्य बेहद जरूरी है। जब परिवार के सदस्य काउंसलिंग में शामिल होते हैं, तो वे समझ पाते हैं कि नशा एक बीमारी है, अपराध नहीं। वे यह भी सीखते हैं कि उपचार के बाद घर का माहौल कैसा होना चाहिए ताकि व्यक्ति दोबारा नशे की ओर न जाए।

विशेषज्ञ की राय: परिवार ही सबसे बड़ा सहारा

लुधियाना के जिला नोडल मनोचिकित्सक डॉ. अरविंद गोयल ने स्पष्ट किया कि नशे की लत से मुक्ति सबसे अधिक सफल तब होती है, जब उपचार के साथ परिवार का मजबूत सहयोग भी मिले। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार ने पूरे पंजाब में निःशुल्क उपचार, काउंसलिंग और नशा मुक्ति सेवाओं को सशक्त बनाया है, लेकिन परिवार की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।”

डॉ. गोयल ने आगे कहा, “परिवार भावनात्मक संबल देता है, उपचार को नियमित रूप से जारी रखने के लिए प्रेरित करता है, कठिन परिस्थितियों में हौसला बढ़ाता है और ऐसा वातावरण तैयार करता है जिससे व्यक्ति लंबे समय तक नशा-मुक्त जीवन जी सके। हमने अनेक मामलों में देखा है कि माताएं, पत्नियां और बहनें लोगों को नशा मुक्ति के मार्ग पर बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।”

महिलाएं बन रही हैं चेंज मेकर

दिलचस्प बात यह है कि महिलाएं केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं रह रही हैं। वे अपने रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को भी नशा मुक्ति केंद्रों तक पहुंचने और उपचार लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं। यह जन आंदोलन का रूप ले रहा है जहां एक महिला की सफलता दूसरी महिला को प्रेरणा देती है।

इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह यह है कि अब नशे को लेकर समाज का नजरिया बदल रहा है। पहले जहां लोग नशेड़ी को समाज से बाहर मानते थे, वहीं अब उसे एक मरीज के रूप में देखा जा रहा है जिसे इलाज की जरूरत है।

स्वास्थ्य मंत्री का संदेश: महिलाएं हैं इस लड़ाई की असली योद्धा

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “हर सफल नशा मुक्ति के पीछे एक परिवार, एक समुदाय और ऐसी सरकारी व्यवस्था होती है जो आशा और संवेदनशीलता को प्राथमिकता देती है। माताएं, पत्नियां और बहनें स्वस्थ, नशा-मुक्त और रंगले पंजाब के निर्माण की मशालवाहक बन रही हैं।”

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उन्होंने आगे कहा, “भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने नशे के खिलाफ लड़ाई को जन आंदोलन का रूप दे दिया है। और हम इस परिवर्तन का नेतृत्व कर रही महिलाओं की आवाज को आगे भी केंद्र में रखते रहेंगे।”

सरकार की पहल: मुफ्त इलाज और पुनर्वास

पंजाब सरकार ने पूरे राज्य में निःशुल्क नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए हैं। यहां न केवल शारीरिक डिटॉक्सिफिकेशन होता है, बल्कि मानसिक काउंसलिंग, कौशल विकास और रोजगार से जुड़ने में भी मदद मिलती है। सरकार का मानना है कि जब तक व्यक्ति को रोजगार और सम्मानजनक जीवन नहीं मिलेगा, तब तक वह पूरी तरह नशे से मुक्त नहीं हो सकता।

अगर गौर करें, तो यह एक व्यापक दृष्टिकोण है जो केवल इलाज तक सीमित नहीं है। इसमें पूरे पुनर्वास की योजना है ताकि व्यक्ति समाज की मुख्यधारा में वापस आ सके।

जन आंदोलन बन रहा नशा मुक्ति अभियान

चिंता का विषय यह है कि पंजाब में नशे की समस्या एक दिन में नहीं आई और यह एक दिन में खत्म भी नहीं होगी। लेकिन उम्मीद की किरण यह है कि जब परिवार, समाज और सरकार मिलकर काम करते हैं, तो बदलाव जरूर आता है। मोगा में आयोजित कार्यक्रम में जो कहानियां सामने आईं, वे इस बात का सबूत हैं कि बदलाव संभव है।

और इस बदलाव की अगुवाई कर रही हैं पंजाब की वे महिलाएं जो अपने परिवार को बचाने के लिए हर मुश्किल का सामना करने को तैयार हैं। वे न केवल अपने घर में बदलाव ला रही हैं, बल्कि पूरे समाज को प्रेरणा दे रही हैं।


मुख्य बातें (Key Points)

  • मोगा में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में महिलाओं ने साझा कीं अपनी नशा मुक्ति की सफलता की कहानियां
  • लुधियाना की रागिनी कौर ने न केवल अपने पति को नशा मुक्त कराया, बल्कि रिश्तेदार की भी मदद की
  • मोगा की बलविंदर कौर ने पूरे परिवार को साथ लेकर पति को नशे से बाहर निकाला
  • सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में अब पारिवारिक काउंसलिंग अनिवार्य हिस्सा बनाई गई
  • डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि महिलाएं नशा-मुक्त पंजाब की असली मशालवाहक बन रही हैं

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पंजाब में नशा मुक्ति केंद्र में उपचार के लिए कैसे संपर्क करें?

पंजाब में सरकारी नशा मुक्ति केंद्र पूरी तरह निःशुल्क हैं। आप अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल, सिविल सर्जन कार्यालय या हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। परिवार के सदस्य भी मरीज को लेकर जा सकते हैं और उन्हें भी काउंसलिंग दी जाती है।

प्रश्न 2: नशा मुक्ति में परिवार की क्या भूमिका होती है?

नशा मुक्ति में परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। परिवार भावनात्मक सहारा देता है, उपचार के लिए प्रेरित करता है और ठीक होने के बाद दोबारा नशे में न जाने के लिए सकारात्मक वातावरण बनाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन मरीजों को परिवार का साथ मिलता है, उनके ठीक होने की संभावना कहीं ज्यादा होती है।

प्रश्न 3: क्या महिलाओं के लिए भी अलग से नशा मुक्ति केंद्र हैं?

हां, पंजाब में महिलाओं के लिए अलग से नशा मुक्ति केंद्र और सुविधाएं उपलब्ध हैं। महिलाओं की गोपनीयता और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। इसके अलावा महिला काउंसलर भी उपलब्ध हैं।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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