NEET Paper Leak Protest: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही ‘कोकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का संसद मार्च सोमवार को हिंसक झड़पों में तब्दील हो गया। दिल्ली पुलिस के साथ भीषण टकराव के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक भी बेनतीजा रही। सीजेपी नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना और प्रदर्शन लगातार जारी रहेंगे।
देखा जाए तो यह विरोध प्रदर्शन 20 जून से चल रहा है, लेकिन सोमवार को स्थिति बेकाबू हो गई। केंद्रीय दिल्ली में हजारों की संख्या में इकट्ठे हुए प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस भड़की हिंसा और भगदड़ में बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी और प्रदर्शनकारी जख्मी हो गए।
पुलिस ने लगभग 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। साल 2019 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी आंदोलन की याद दिलाता यह प्रदर्शन दिल्ली की सड़कों पर फिर से गूंज उठा है।
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केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक
20 जून से चल रहे धरने के बाद पहली बार केंद्र सरकार ने सीजेपी नेताओं से रस्मी बातचीत की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सीजेपी के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका से मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी समेत अपनी प्रमुख मांगों का मांग-पत्र नड्डा को सौंपा।
सरकार ने मांग-पत्र पर विचार करने का भरोसा दिलाते हुए धरना खत्म करने की अपील की है। लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सीजेपी नेताओं ने सरकार के इस आश्वासन को नाकाफी बताया है।
दूसरी ओर, हॉस्पिटल में इलाज करा रहे जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने ऐलान किया है कि उनकी भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक नौजवान नेताओं को संसद में सांसदों (MPs) से मिलने की इजाजत नहीं मिलती या संसद सदस्य हॉस्पिटल आकर उनसे मुलाकात नहीं करते।
वांगचुक की भूख हड़ताल मंगलवार को 24वें दिन में दाखिल हो गई है। अगर गौर करें तो उनकी सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है, लेकिन फिर भी वे अपनी मांग पर अडिग हैं।
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सोमवार को दिल्ली में क्या हुआ था?
सोमवार को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। इस टकराव में दोनों तरफ के कई लोग घायल हो गए।
दिल्ली पुलिस ने इस हिंसक प्रदर्शन के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कम से कम पांच FIR दर्ज की हैं। प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में वरिष्ठ अधिकारियों और महिला पुलिस कर्मचारियों समेत कुल 118 पुलिस कर्मी जख्मी हो गए हैं।
ये मामले कनॉट प्लेस, पार्लियामेंट स्ट्रीट और अन्य संबंधित पुलिस थानों में दर्ज किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी और FIR भी दर्ज की जा सकती हैं।
फिलहाल घटनास्थल के CCTV फुटेज और वीडियोज की मदद से हिंसा में शामिल शरारती तत्वों की पहचान की जा रही है। समझने वाली बात है कि पुलिस गंभीरता से कार्रवाई कर रही है।
दिल्ली पुलिस की सफाई: सुरक्षा घेरा तोड़ने से रोकने के लिए बल का इस्तेमाल
दिल्ली में संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने की घटनाओं के बाद दिल्ली पुलिस ने सफाई दी है। पुलिस का कहना है कि बल का इस्तेमाल किसी दबंगई के लिए नहीं, बल्कि प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा घेरा (सुरक्षा कॉर्डन) तोड़ने से रोकने के लिए किया गया था।
पुलिस के मुताबिक सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और भगदड़ जैसी खतरनाक स्थिति को टालने के लिए हल्का बल का इस्तेमाल करना पड़ा।
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी नौजवानों और सीजेपी नेताओं ने पुलिस के दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि उनके शांतिपूर्ण ‘यूथ मार्च’ पर पुलिस ने बार-बार बेरहमी से लाठियां बरसाईं और अत्याचार किया।
दिलचस्प बात यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा रहे हैं। इस हिंसक झड़प में दोनों पक्षों के कई लोग जख्मी हुए हैं, जिस कारण राजधानी के केंद्रीय इलाकों में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
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सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने जख्मी विद्यार्थियों से मांगी माफी
संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस के साथ हुई झड़पों में कई विद्यार्थियों और प्रदर्शनकारियों के जख्मी होने के बाद कोकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने गहरे दुख का इजहार किया है।
दीपके ने जख्मी हुए नौजवानों और विद्यार्थियों से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हुए माना कि आंदोलनकारियों की सुरक्षा के लिए योजनाबंदी में और सुधार किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों के लिए बेहतर सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।
यह ध्यान देने वाली बात है कि दीपके को पुलिस ने हिरासत में लिया था और सोमवार को ही उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है।
जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई
दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बल तैनात हैं। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए चौकसी बढ़ा दी गई है। पुलिस ने धारा 144 लागू कर रखी है और बड़े जमावड़े पर रोक है।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपने शांतिपूर्ण विरोध का लोकतांत्रिक अधिकार इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पेपर लीक रोकने के लिए ठोस कदम उठाने तक उनका धरना जारी रहेगा।
क्या हैं सीजेपी की मुख्य मांगें?
कोकरोच जनता पार्टी और विद्यार्थी संगठनों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा: सीजेपी का कहना है कि बार-बार पेपर लीक होना शिक्षा व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। इसकी जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री पर है।
नीट परीक्षा को रद्द करना: विद्यार्थी संगठनों की मांग है कि नीट जैसी केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली को खत्म किया जाए।
पेपर लीक माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई: पेपर लीक में शामिल सभी दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।
परीक्षा प्रणाली में सुधार: परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और धांधली-मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
विरोध प्रदर्शन का राजनीतिक असर
यह विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। विपक्षी दल इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं। कांग्रेस, आप और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर नौजवानों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है।
इस बीच, सोशल मीडिया पर #NEETProtests और #JusticeForStudents जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कई सेलिब्रिटीज और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी विद्यार्थियों के समर्थन में आवाज उठाई है।
अगली कुछ दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। क्या शिक्षा मंत्री इस्तीफा देंगे? क्या सरकार विद्यार्थियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी? ये सवाल अभी भी बरकरार हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
• NEET पेपर लीक विरोध में सीजेपी का संसद मार्च हिंसक झड़पों में बदला
• केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ बातचीत बेनतीजा, धरना जारी
• दिल्ली पुलिस ने 5 FIR दर्ज कीं, 118 पुलिस कर्मी घायल
• सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 24वें दिन में, स्वास्थ्य चिंताजनक
• 100 से अधिक प्रदर्शनकारी गिरफ्तार
• सीजेपी संस्थापक दीपके ने जख्मी विद्यार्थियों से माफी मांगी
• विद्यार्थियों की मुख्य मांग: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और पेपर लीक रोकने के लिए ठोस कदम













