Punjab Registry Language Changes : पंजाब के लोगों को अपनी जमीन और संपत्ति की खरीद-बिक्री के समय रजिस्ट्रेशन कराने में अब 35 कठिन शब्दों से छुटकारा मिल जाएगा। राज्य सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्री की भाषा को आम लोगों के लिए सरल और समझने योग्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देखा जाए तो यह फैसला उन करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है जो सदियों से चले आ रहे उर्दू और फारसी शब्दों को समझने में परेशानी महसूस करते थे।
इन शब्दों में से अधिकतर उर्दू और फारसी से संबंधित थे, जो सदियों से चले आ रहे थे। अब इन कठिन शब्दों की जगह सरल पंजाबी शब्द इस्तेमाल किए जाएंगे। अगर गौर करें तो यह पहल आम जनता को कानूनी प्रक्रियाओं से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर बनी समिति
कुछ समय पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्व विभाग में इस्तेमाल होने वाले कठिन शब्दों की जगह सरल शब्द लाने का निर्देश दिया था।
इसी आधार पर राजस्व और पुनर्वास विभाग द्वारा एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने संपत्ति रजिस्ट्रेशन की भाषा को सुगम बनाने के लिए पुराने 35 कठिन शब्दों की जगह नए सरल 35 शब्दों की सिफारिश की थी।
समझने वाली बात यह है कि यह सिर्फ भाषा का बदलाव नहीं है, बल्कि यह आम आदमी को कानूनी प्रक्रिया से जोड़ने और उसे सशक्त बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।
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सभी जिलों को भेजी गई नई सूची
राजस्व और पुनर्वास विभाग की स्टांप और रजिस्ट्रेशन शाखा ने इस संबंध में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन और पंजाब के सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को एक पत्र लिखकर पुराने और नए सिफारिश किए गए शब्दों की सूची साझा की है।
विभाग द्वारा भेजे गए पत्र में आम जनता की सुविधा के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की भाषा को सुगम बनाने के लिए नए प्रस्तावित शब्दों को इस्तेमाल करने को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने को कहा गया है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह निर्देश केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं।
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35 शब्दों की पूरी सूची: पुराने बनाम नए
यहां उन 35 शब्दों की पूरी तुलना दी जा रही है जिन्हें बदला गया है:
| पुराना/कानूनी शब्द | नया सरल पंजाबी शब्द |
|---|---|
| उजर | इतराज (आपत्ति) |
| उजरत | फीस |
| अराजी | जमीन |
| साकिन | वासी/निवासी |
| साकिन देह | पिंड दा वसनीक (गांव का निवासी) |
| हसब जाबता | कानून अनुसार |
| हिब्बा | दान |
| कैफियत | विशेष कथन |
| गैर मजरूआ | अनसिंचित खेत |
| गिरिंदा | लेने वाला |
| जर | रकम (राशि) |
| ताबो | अनुसार/मुताबिक/अधीन |
| तकावी | खेती ऋण |
| तरमीम | संशोधन/सुधार |
| तस्सबर/तस्वर | मान लेना |
| तलबाना | खर्चा |
| देह | पिंड (गांव) |
| दाखिल खारिज | इंतकाल (हस्तांतरण) |
| हक उल रहिन | गिरवी संपत्ति छुड़ाना |
| फौत | मृत्यु |
| फर्द | नकल जमाबंदी |
| फरीक | पक्ष/धिर |
| फरीक अव्वल | पहली धिर (पहला पक्ष) |
| फरीक दोम | दूजी धिर (दूसरा पक्ष) |
| बदस्तूर | पहले की तरह |
| बैनामा | विक्री नामा (बिक्री पत्र) |
| बजरिया | राहीं (के माध्यम से) |
| बाया | वेचण वाला (बेचने वाला) |
| मखसूस | खास (विशेष) |
| मुश्तरका | सांझा (साझा) |
| मुंतकिल | तबदील (हस्तांतरित) |
| मजकूर | उपरोक्त |
| मंसूख करना | रद्द करना/खारिज करना |
| मुश्तरी होशियार बास | खरीददार चुकन्ना रहे (खरीदार सावधान रहे) |
| मुर्तहिन | जमीन गिरवी लेने वाला |
आम आदमी पर क्या होगा असर?
दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव सिर्फ भाषाई नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम लोगों के जीवन पर पड़ेगा:
1. समझने में आसानी: अब लोगों को अपनी ही संपत्ति के कागजात समझने के लिए किसी विशेषज्ञ की जरूरत नहीं होगी।
2. धोखाधड़ी में कमी: जब लोग खुद दस्तावेज समझ सकेंगे तो संपत्ति से जुड़ी धोखाधड़ी की संभावना कम होगी।
3. कानूनी जागरूकता: सरल भाषा से लोग अपने कानूनी अधिकारों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
4. समय की बचत: कठिन शब्दों को समझाने में लगने वाला समय बचेगा।
अन्य राज्यों के लिए मिसाल
अगर गौर करें तो पंजाब सरकार का यह कदम पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है। कई अन्य राज्यों में भी संपत्ति रजिस्ट्री और कानूनी दस्तावेजों में ऐसी भाषा का इस्तेमाल होता है जो आम आदमी की समझ से परे है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्य राज्य भी इसी तरह की पहल करें तो देश में कानूनी साक्षरता बढ़ेगी और आम नागरिक अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक होंगे।
कब से होगा लागू?
हालांकि विभाग ने नई सूची जारी कर दी है, लेकिन इसे पूरी तरह से लागू करने में कुछ समय लग सकता है। सभी जिला कार्यालयों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे नए शब्दों का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर शुरू करें।
संभावना है कि आने वाले कुछ महीनों में सभी नए रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों में नए सरल शब्द दिखाई देने लगेंगे। पुराने दस्तावेजों में बदलाव की कोई बात नहीं की गई है।
मुख्य बातें (Key Points)
• पंजाब सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्री की भाषा से 35 कठिन उर्दू-फारसी शब्द हटाए
• मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर राजस्व विभाग ने समिति गठित की थी
• “बैनामा” अब “विक्री नामा”, “फौत” की जगह “मृत्यु” जैसे सरल शब्द होंगे
• सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नर और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन को नई सूची भेजी गई
• यह पहल आम जनता को कानूनी प्रक्रिया को समझने में मदद करेगी













