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The News Air - Breaking News - Land Pooling Policy के खिलाफ किसानों का ऐलान-ए-जंग

Land Pooling Policy के खिलाफ किसानों का ऐलान-ए-जंग

संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब सरकार की संशोधित लैंड पूलिंग नीति के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया, एक इंच भी जमीन जबरन नहीं लेने देंगे।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शनिवार, 4 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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Land Pooling Policy Punjab: संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब सरकार की संशोधित लैंड पूलिंग नीति के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले नई संशोधनों के बाद आई लैंड पूलिंग नीति को लेकर किसान संगठन चौकस हो गए हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा ने आम आदमी पार्टी सरकार को सख्त लहजे में कहा है कि पंजाब के किसान की मर्जी के बिना एक इंच भी जमीन जबरन नहीं लेने देंगे।


मोर्चे ने कहा कि लैंड पूलिंग नीति में संशोधनों के नाम पर किसानों को भ्रमजाल में फंसाने की कोशिश हो रही है। देखा जाए तो यह मुद्दा सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका और अस्तित्व का है।

🔍 यह भी पढ़ें- Punjab CM Flags Off 72 Teachers to Finland: Education Revolution का Global Milestone

“पुरखों की जमीनें कारपोरेट को नहीं देंगे”

संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जोगिंदर सिंह उगराहां ने बयान जारी करके कहा कि वे किसानों की पुरखों की जमीनें किसी भी कीमत पर कारपोरेट घराने के हवाले नहीं करने देंगे।

उन्होंने कहा:

“यह जमीनें नहीं बल्कि किसानों का खून-पसीना है और पुरखों की निशानी है।”

मोर्चे ने कहा कि पंजाब सरकार अब किसानों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश में है। संशोधनों के नाम पर जमीन बदले मिलने वाले रिहायशी और व्यावसायिक प्लॉट के क्षेत्र में मामूली बदलाव किए गए हैं।

अगर गौर करें तो किसान नेताओं का आरोप है कि यह सिर्फ दिखावा है, असली मकसद जमीनें हड़पना है।

🔍 यह भी पढ़ें- Bihar Land Registration New Rule: जमीन रजिस्ट्री महंगी हुई, 15 जुलाई से पूरी तरह पेपरलेस

पहले भी वापस लेनी पड़ी थी नीति

मोर्चे का कहना है कि पहले भी किसानों के विरोध के कारण पंजाब सरकार को लैंड पूलिंग नीति वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

अब सरकार फिर से कुछ वर्ग गजों का टुकड़ा फेंककर किसानों की कीमती जमीनों पर कब्जा करना चाहती है।

पुरानी बनाम नई नीति में फर्क:

पहलूपुरानी नीतिसंशोधित नीति
रिहायशी प्लॉट साइजकमथोड़ा बढ़ा
व्यावसायिक प्लॉटसीमितथोड़ा बढ़ा
मुआवजा दरनिश्चितथोड़ा संशोधित
किसान की सहमतिअस्पष्टअभी भी अस्पष्ट

समझने वाली बात यह है कि मूल ढांचा वही है, सिर्फ ऊपरी पॉलिश की गई है।

“सरकारें कारपोरेट की कठपुतलियां हैं”

जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि सरकारें कारपोरेट घरानों की कठपुतलियां हैं। उन्होंने कहा कि कारपोरेट घरानों की नजर अब खेती सेक्टर पर है क्योंकि ये घराने खेती से किसान को बाहर करके समूचे खेती सिस्टम का कंट्रोल अपने हाथों में लेना चाहते हैं।

उन्होंने पंजाब सरकार को चेतावनी दी:

“कारपोरेट घरानों की मंशा को पंजाब का किसान कदापि पूरा नहीं होने देगा।”

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 2020-21 के किसान आंदोलन के बाद किसान संगठन कारपोरेट के प्रवेश को लेकर बेहद संवेदनशील हो गए हैं।

बड़े आंदोलन की चेतावनी

उगराहां ने कहा कि जमीनों की लूट के खिलाफ किसान बड़ा आंदोलन छेड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।

हाल ही में भारतीय किसान यूनियन लखोवाल के हरिंदर सिंह लखोवाल भी इस नीति के खिलाफ कूद पड़े हैं।

दिलचस्प बात यह है कि चुनावों से पहले जमीनों को अधिग्रहित करने का कोई भी प्रयास पंजाब सरकार को राजनीतिक तौर पर महंगा पड़ सकता है।

विपक्ष ने भी उठाई आवाज

शिरोमणि अकाली दल भी इस नीति के खिलाफ मैदान में कूद पड़ी है। विपक्षी दल इसे सियासी मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं।

अगर गौर करें तो यह मुद्दा AAP सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है, खासकर जब:

✅ कर्मचारी पहले से ही नाराज हैं
✅ किसान संगठित हो रहे हैं
✅ विपक्ष हमलावर है
✅ चुनाव नजदीक हैं

सरकार का पक्ष: किसानों की मांग पर संशोधन

दूसरी तरफ पंजाब सरकार का कहना है कि किसानों की मांग के अनुसार ही यह नई संशोधन किए गए हैं।

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सरकार का दावा है कि:

✔️ जमीन मालिकों को बेहतर मुआवजा
✔️ रिहायशी और व्यावसायिक प्लॉट में हिस्सेदारी
✔️ विकास के लिए जरूरी
✔️ सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी

लेकिन किसान संगठनों को यह तर्क स्वीकार्य नहीं है।

कारपोरेट खेती का डर

किसान नेताओं का मुख्य डर यह है कि एक बार जमीन हाथ से गई तो वापस नहीं आएगी। और फिर धीरे-धीरे पूरी खेती का कारपोरेटीकरण हो जाएगा।

समझने वाली बात यह है कि:

❌ किसान मजदूर बन जाएगा
❌ जमीन से लगाव खत्म होगा
❌ पारंपरिक खेती नष्ट होगी
❌ कारपोरेट मुनाफा कमाएंगे

यह सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दा भी है।


मुख्य बातें (Key Points)

✔️ संयुक्त किसान मोर्चा ने लैंड पूलिंग नीति के खिलाफ लड़ाई का ऐलान किया
✔️ एक इंच भी जमीन जबरन अधिग्रहित नहीं होने देंगे
✔️ पुरखों की जमीनें कारपोरेट को नहीं सौंपने का संकल्प
✔️ जोगिंदर सिंह उगराहां ने सरकार को चेतावनी दी
✔️ पहले भी विरोध के कारण नीति वापस लेनी पड़ी थी
✔️ चुनाव से पहले यह मुद्दा सरकार के लिए मुसीबत
✔️ शिरोमणि अकाली दल भी मैदान में


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: लैंड पूलिंग पॉलिसी क्या है?

उत्तर: लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत सरकार किसानों से जमीन लेकर उसे विकास परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल करती है और बदले में किसानों को रिहायशी/व्यावसायिक प्लॉट और मुआवजा देती है। लेकिन किसान संगठनों को डर है कि यह जमीनें अंततः कारपोरेट घरानों के हाथ चली जाएंगी।

प्रश्न 2: किसान संगठन इस नीति का विरोध क्यों कर रहे हैं?

उत्तर: किसान संगठनों का मानना है कि यह नीति किसानों को भ्रमजाल में फंसाकर उनकी पुरखों की जमीनें कारपोरेट घरानों के हवाले करने की साजिश है। वे मानते हैं कि एक बार जमीन हाथ से गई तो खेती से किसान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।

प्रश्न 3: क्या यह मुद्दा पंजाब सरकार के लिए राजनीतिक खतरा बन सकता है?

उत्तर: हां, चुनाव से कुछ महीने पहले यह मुद्दा AAP सरकार के लिए गंभीर राजनीतिक खतरा बन सकता है। पहले ही सरकारी कर्मचारी नाराज हैं, अब किसान भी आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। विपक्षी दल इसे मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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