RTE EWS Admission Punjab: स्कूल शिक्षा डायरेक्टोरेट (एलीमेंट्री), पंजाब ने सूबे के समूह गैर-सहायता प्राप्त (unaided) प्राइवेट स्कूलों को एक अहम आदेश जारी करते हुए शिक्षा का अधिकार (RTE) एक्ट, 2009 की धारा 12(1)(c) के तहत आर्थिक तौर पर कमजोर (EWS) और पिछड़े वर्गों के चुने गए बच्चों की दाखला प्रक्रिया को 20 जुलाई तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
यह दाखले शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए सूबे भर के मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में गरीब परिवारों के बच्चों के लिए आरक्षित 25 फीसदी कोटे के अधीन किए जाने हैं।
देखा जाए तो यह कदम गरीब बच्चों के शिक्षा के संवैधानिक अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है।
कोई फीस नहीं, कोई टेस्ट नहीं
स्कूलों को जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि RTE नियमों की सख्ती से पालना करते हुए, इस कोटे के तहत चुने गए किसी भी बच्चे से दाखले के समय कोई भी फीस नहीं वसूली जा सकती और न ही उनका कोई प्रवेश टेस्ट या स्क्रीनिंग प्रक्रिया ली जा सकती है।
यह हिदायतें विभाग द्वारा 24 जून को पंजाब RTE दाखला पोर्टल पर दस्तावेजों की पड़ताल के बाद निकाली गई केंद्रीकृत ऑनलाइन लॉटरी (ड्रॉ) के नतीजों के बाद सामने आई हैं।
अगर गौर करें तो यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होती है।
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पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य
विभाग ने स्कूलों को आदेश दिए हैं कि वे ऑफिशियल पोर्टल पर लॉग-इन करके अपने स्कूल को अलॉट किए गए बच्चों की सूची चेक करें और संबंधित मॉड्यूल एक्टिव होते ही हरेक विद्यार्थी के दाखले का स्टेटस (स्थिति) अपडेट करें।
विभाग ने स्कूलों को मिलने वाले वित्तीय भुगतान (रीइम्बर्समेंट) को भी इसी पोर्टल की पालना से जोड़ दिया है।
पोर्टल पर अपडेट करने की प्रक्रिया:
| चरण | विवरण |
|---|---|
| 1. लॉग-इन | RTE पोर्टल पर स्कूल आईडी से |
| 2. सूची देखें | अलॉट किए बच्चों की list |
| 3. दाखला दें | निर्धारित तिथि तक |
| 4. स्टेटस अपडेट | पोर्टल पर जानकारी भरें |
| 5. दस्तावेज अपलोड | हाजिरी, रिपोर्ट कार्ड |
समझने वाली बात यह है कि बिना पोर्टल अपडेट के स्कूलों को फंड नहीं मिलेगा।
हाजिरी और रिपोर्ट कार्ड अपलोड करना जरूरी
स्कूलों को सत्र के अंत में बच्चों की हाजिरी, शैक्षिक प्रगति और रिपोर्ट कार्ड का डाटा अपलोड करना होगा, जिसके बाद ही उनके फंड जारी किए जाएंगे।
विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस दाखला प्रक्रिया को सुचारू ढंग से चलाने के लिए जल्द ही जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs), ब्लॉक प्राइमरी शिक्षा अधिकारियों (BPEOs) और स्कूल प्रबंधकों के लिए एक विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित किया जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि सरकार हर कदम पर निगरानी रख रही है ताकि किसी गरीब बच्चे को दाखला से वंचित न रखा जाए।
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शिकायत निवारण तंत्र
माता-पिता की शिकायतों के निपटारे के लिए विभाग ने विशेष प्रबंध किए हैं। यदि किसी भी माता-पिता को स्कूल स्तर पर दाखले के दौरान कोई मुश्किल आती है, तो वे एक हफ्ते के अंदर-अंदर संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (एलीमेंट्री) को लिखित शिकायत दे सकते हैं, जिन्हें इस मामले के लिए शिकायत निवारण अधिकारी के रूप में नामित किया गया है।
डायरेक्टोरेट ने ताकीद की है कि अधिकारी और स्कूल मुखी इस दाखला प्रक्रिया को मुख्य प्राथमिकता दें।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
विभाग ने चेतावनी दी है कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही को बच्चों के संवैधानिक शिक्षा अधिकारों की उल्लंघना माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि शिक्षा का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है और इसमें कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
25% कोटा: गरीब बच्चों के लिए उम्मीद की किरण
RTE Act 2009 के तहत हर प्राइवेट स्कूल को अपनी कुल सीटों का 25% गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है।
EWS कोटे के मुख्य लाभ:
✅ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुफ्त में
✅ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर
✅ योग्य शिक्षक
✅ सामाजिक समानता
✅ गरीबी की जंजीर तोड़ने का मौका
अगर गौर करें तो यह योजना समाज में आर्थिक असमानता को कम करने का एक मजबूत माध्यम है।
मुख्य बातें (Key Points)
✔️ 20 जुलाई तक EWS दाखला प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य
✔️ RTE Act 2009 की धारा 12(1)(c) के तहत 25% कोटा
✔️ चुने गए बच्चों से कोई फीस नहीं, कोई टेस्ट नहीं
✔️ 24 जून को ऑनलाइन लॉटरी के बाद सूची जारी
✔️ पोर्टल पर स्टेटस अपडेट करना जरूरी
✔️ हाजिरी और रिपोर्ट कार्ड अपलोड करने पर ही फंड
✔️ DEO (Elementary) शिकायत निवारण अधिकारी













