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The News Air - Breaking News - Ram Mandir Corruption का बड़ा खुलासा: 40 दिन में 70 बार चोरी, ₹80 लाख बरामद

Ram Mandir Corruption का बड़ा खुलासा: 40 दिन में 70 बार चोरी, ₹80 लाख बरामद

अयोध्या राम मंदिर में दान पेटी से करोड़ों की चोरी, 8 लोग गिरफ्तार, ट्रस्ट के टॉप अधिकारियों ने दिया इस्तीफा, जानें पूरा सच

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
गुरूवार, 2 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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Ram Mandir Corruption
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Ram Mandir Corruption का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरा आघात किया है। जून 2026 में अयोध्या के भव्य राम मंदिर से आठ लोग गिरफ्तार हुए हैं, जिनके पास से ₹80 लाख का कैश और विदेशी मुद्रा बरामद की गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि केवल 40 दिनों में 70 बार व्यवस्थित तरीके से दान पेटी से चोरी की गई। हैरान करने वाली बात यह है कि इस घोटाले के बाद मंदिर का मासिक दान ₹7 करोड़ से गिरकर सिर्फ ₹1.5 करोड़ रह गया है – यानी 78% की भारी गिरावट।

22 जनवरी 2024 को जब यह मंदिर खुला था, तो यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं था। यह एक विशाल वित्तीय संस्थान बन चुका था जो पूरी तरह से जनता के विश्वास पर खड़ा था। लेकिन देखा जाए तो अंदर से सिस्टम इतना कमजोर था कि CCTV कैमरों के सामने, वीआईपी सुरक्षा के बीच, रोज़ाना चोरी होती रही और किसी को पता तक नहीं चला।

🔍 यह भी पढ़ें- Punjab VB-G RAM G Scheme: विरोध के महीनों बाद सरकार ने MGNREGA की जगह लाई नई योजना

कितना बड़ा है यह मंदिर का वित्तीय साम्राज्य

पहले इस समस्या का स्केल समझना जरूरी है। राम मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक संस्थान बन चुका है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस मंदिर की कुल आय ₹327 करोड़ थी। इसमें से ₹153 करोड़ सीधे दान से आया और ₹173 करोड़ कॉर्पस फंड पर मिले ब्याज से आया।

अगर हम सिर्फ हुंडी कलेक्शन की बात करें – यानी वो पैसा जो श्रद्धालु दान पात्र में नकद डालते हैं – तो अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच केवल 5 महीने में ₹21 करोड़ का सीधा कैश आया था। इसका मतलब सामान्य दिनों में रोजाना ₹13 से ₹15 लाख का कैश कलेक्शन होता था। त्योहारों के दिनों में यह तीन गुना बढ़ जाता था।

मंदिर का नामवार्षिक आय (करोड़ में)रैंक
तिरुपति बालाजी₹4000+1
शिरडी साईं बाबा₹9002
सोमनाथ मंदिर₹4003
राम मंदिर अयोध्या₹3274

दिलचस्प बात यह है कि अपने पहले ही साल में राम मंदिर देश का चौथा सबसे अधिक कमाई करने वाला मंदिर बन गया था। हर रोज 70 से 80 हजार श्रद्धालु माथा टेकने आते थे, दान देते थे।

🔍 यह भी पढ़ें- Ram Mandir Donation विवाद: Supreme Court ने पटीशनर को 29 जून को रखने के निर्देश दिए

चोरी का पूरा तरीका: कैसे लूटा गया विश्वास

अब आते हैं असली मुद्दे पर कि आखिर चोरी हुई कैसे? किसी भी बड़े मंदिर में दान की एक सुरक्षित प्रक्रिया होती है: श्रद्धालु दान पेटी में पैसा डालते हैं → हुंडी लॉक होती है → चाबी सिर्फ अधिकृत हिरासत में होती है → कैश काउंटिंग रूम में जाता है → वहां गिनती होती है → सीधे बैंक में जमा हो जाता है।

लेकिन समझने वाली बात यह है कि इस पूरे चक्र की सबसे कमजोर कड़ी बनी – काउंटिंग रूम।

SIT की रिपोर्ट के अनुसार, चोरों का तरीका चार स्टेप्स में चलता था:

स्टेप 1 – CCTV ब्लॉक करना: जब भी काउंटिंग चल रही होती थी, एक स्टाफ मेंबर बहुत चालाकी से सीसीटीवी कैमरे के ठीक सामने जाकर खड़ा हो जाता था। इससे कैमरे का व्यू ब्लॉक हो जाता था।

स्टेप 2 – नोट निकालना: उसी समय दूसरा व्यक्ति जो टेबल पर बैठा था, वह आराम से नोटों के बंडल से कैश निकालकर अपनी जेब में डाल लेता था।

स्टेप 3 – वॉशरूम में छुपाना: चोरी किया गया पैसा तुरंत बाहर नहीं ले जाया जाता था। पहले मंदिर के ही किसी वॉशरूम में छुपा दिया जाता था। SIT को रेड के दौरान एक वॉशरूम से ₹5 लाख कैश छुपा हुआ मिला।

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स्टेप 4 – शिफ्ट के बाद बाहर निकालना: जब शिफ्ट खत्म होती, तो वह पैसा चुपचाप बाहर निकालकर आपस में बांट लिया जाता था।

अगर गौर करें तो यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं थी। SIT की इंटरिम रिपोर्ट कहती है कि सिर्फ 40 दिन के अंदर – 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच – 70 बार व्यवस्थित तरीके से चोरी की गई।

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मुख्य आरोपी कौन हैं: जानें नाम और पद

इस पूरे घोटाले में कुछ नाम बेहद चौंकाने वाले हैं:

रामशंकरण यादव (टीनू यादव): यह व्यक्ति ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय का पुराना ड्राइवर था। उसके पास हुंडी की चाबियां थीं और उसने अपने ही रिश्तेदार मनीष कुमार को काउंटिंग यूनिट में घुसवा दिया।

सुभाष श्रीवास्तव: यह काउंटिंग इंचार्ज था। यह कोई आम आदमी नहीं था – यह पूर्व बैंक कर्मचारी था जिसे एक सीनियर ट्रस्ट अधिकारी की व्यक्तिगत सिफारिश पर नियुक्त किया गया था। सोचिए, एक बैंक प्रोफेशनल जिसे सिस्टम सुरक्षित करने के लिए लगाया गया, उसने ही सिस्टम का लूपहोल एक्सप्लॉइट किया।

महिपाल सिंह का दर्दनाक केस: यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि महिपाल सिंह जो मंदिर की अकाउंट्स टीम का सुपरवाइजर था, उसने जब शुरुआत में अलर्ट किया कि कैश हैंडलिंग और कीमती धातुओं के रजिस्टर्स में गड़बड़ी है, तो उसे न्याय देने के बजाय नौकरी से हटा दिया गया। आज वह डर के मारे बोलने से भी मना कर रहा है क्योंकि उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं।

यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं है – यह जवाबदेही को दबाने की, सच बोलने वाले को चुप कराने की एक गहरी व्यवस्थागत बीमारी है।

Standard Operating Procedures का मजाक: कागज पर कुछ, जमीन पर कुछ और

जब आप राम मंदिर की गवर्नेंस का पोस्टमार्टम करते हैं तो एक भयंकर सच सामने आता है। जो Standard Operating Procedures (SOPs) ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने खुद साइन किए थे, उनका ग्राउंड रियलिटी से कोई लेना-देना नहीं था।

SOP नियम 1: कागज पर लिखा था कि CCTV फुटेज 180 दिन तक सुरक्षित रखी जाएगी। लेकिन जमीन पर क्या हो रहा था? सिर्फ 45 दिन में फुटेज डिलीट की जा रही थी। मतलब जांच शुरू होने से पहले ही सबूत गायब थे।

SOP नियम 2: काउंटिंग स्टाफ के लिए पॉकेट-फ्री कपड़ों का नियम था ताकि कोई जेब में कैश डालकर बाहर न निकल सके। लेकिन जमीन पर यह नियम कभी लागू ही नहीं किया गया।

SOP नियम 3: नियुक्तियां स्वतंत्र HR प्रक्रिया से होनी थीं। लेकिन काउंटिंग इंचार्ज को किसी सीनियर ट्रस्ट अधिकारी की व्यक्तिगत सिफारिश पर बिठा दिया गया।

देखा जाए तो मंदिर जनवरी 2024 में शुरू हुआ, लेकिन कैश हैंडलिंग के नियम कब बनाए गए? एक साल बाद – 2025 में। और वो भी तब जब अंदर से अनियमितताओं की खबरें आनी शुरू हो गईं। और सबसे हैरानी की बात यह है कि जो SOPs बनाए गए, उन्हें कभी गंभीरता से लागू ही नहीं किया गया।

यह गवर्नेंस फेलियर नहीं है – यह जवाबदेही का नाटक है।

78% की गिरावट: श्रद्धालुओं ने दिया चुपचाप जवाब

इस पूरे घोटाले का सबसे बड़ा और सबसे दर्दनाक नतीजा क्या रहा? लोगों ने कोई प्रदर्शन नहीं किया, कोई नारे नहीं लगाए, कोई पत्थर नहीं फेंके। बस चुपचाप अपना हाथ पीछे खींच लिया।

पहले हर महीने दान पात्र में ₹7 करोड़ आता था। लेकिन घोटाले की खबर आने के बाद यह एक झटके में गिरकर सिर्फ ₹1.5 करोड़ रह गया। यह 78% की गिरावट केवल एक संख्या नहीं है – यह विश्वासघात के खिलाफ करोड़ों लोगों का साइलेंट बॉयकॉट है।

यह बताता है कि जनता ने समझ लिया कि उनकी श्रद्धा, उनके विश्वास के साथ बड़े पैमाने पर धोखा हो रहा था। कहने का मतलब साफ है – जब आस्था के साथ विश्वासघात होता है, तो लोग शोर नहीं मचाते, बस खामोशी से दूरी बना लेते हैं।

चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा: नैतिक जिम्मेदारी या बचाव की कोशिश?

जब यह स्कैंडल सार्वजनिक हुआ और दबाव पड़ना शुरू हुआ, तो 27 जून 2026 को एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विकास हुआ। ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और एक ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपना इस्तीफा दे दिया। वजह बताई गई – “नैतिक आधार पर”।

यहां पर UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा छुपी है – Legal Culpability और Moral Responsibility में अंतर।

देखिए, कानूनी तौर पर चंपत राय ने कैश नहीं चुराया। अदालत में वो चोर साबित नहीं होंगे। लेकिन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एक सिद्धांत होता है – Westminster Model of Ministerial Responsibility। इसका मतलब है कि अगर आप किसी संस्थान के मुखिया हैं, आपने SOPs पर साइन किया है, और आपके नीचे काम करने वाली मशीनरी फेल हो जाती है, तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी आपकी होती है।

भले ही आपने क्राइम खुद न किया हो, लेकिन निगरानी फेल होने की रचनात्मक जिम्मेदारी आपको लेनी पड़ेगी।

लेकिन इस पूरे प्रकरण में एक और नैतिक दाग है। जून के शुरुआती हफ्ते में जब खबरें बाहर आने लगीं, तो ट्रस्ट की तरफ से एक सार्वजनिक बयान आया कि “आंतरिक ऑडिट में कुछ महत्वपूर्ण नहीं मिला”। मतलब सब ठीक है।

लेकिन बाद में SIT ने कन्फर्म किया कि 27 अप्रैल से 5 जून के बीच 70 बार चोरी हो चुकी थी। यानी अपराध हो रहा था और मंदिर का शीर्ष प्रशासन जनता को झूठ बोल रहा था। यह सबसे बड़ा नैतिक उल्लंघन है।

तिरुपति मॉडल से सीखें: समाधान मौजूद है

अगर ट्रस्ट मॉडल फेल हो गया है तो नया ढांचा कैसा होना चाहिए? देखिए, हमें कहीं और देखने की जरूरत नहीं है। हमारे पास तिरुमल तिरुपति देवस्थानम (TTD) का बेहद कुशल मॉडल मौजूद है।

TTD का वार्षिक राजस्व ₹4000 करोड़ से ऊपर है, लेकिन वहां इस स्तर का संकट नहीं आता। क्यों? क्योंकि उन्होंने धार्मिक कार्यों और प्रशासनिक कार्यों के बीच एक फायरवॉल खड़ी कर दी है।

TTD मॉडल की प्रमुख विशेषताएं:

  • फुल टाइम प्रोफेशनल CEO: एक सीनियर IAS अधिकारी जो सिर्फ प्रशासन देखता है, जिसका धर्म या राजनीति से सीधा लिंक नहीं है।
  • बायोमेट्रिक एंट्री: काउंटिंग रूम में सख्त बायोमेट्रिक एंट्री होती है।
  • आधिकारिक यूजरनेम रिजर्व: जो आधिकारिक यूजर नेम हैं, वे पहले से रिजर्व हैं।
  • AI सिस्टम: नकली नामों और इंपर्सोनेशन को डिटेक्ट करने के लिए AI का उपयोग।
  • तुरंत शिकायत निवारण: किसी भी शिकायत को तुरंत हल किया जाता है।
  • CAG ऑडिट: हर साल अनिवार्य सरकारी ऑडिट होता है।

Ram Mandir को भी यही मॉडल अपनाना चाहिए:

पहलूवर्तमान स्थितिसुझाया गया सुधार
नेतृत्वट्रस्ट आधारितIAS अधिकारी के नेतृत्व में प्रोफेशनल टीम
काउंटिंग सुरक्षाकमजोर, पॉकेट वाले कपड़ेबायोमेट्रिक एंट्री, पॉकेट-फ्री कपड़े अनिवार्य
CCTV45 दिन में डिलीट180 दिन तक संरक्षण अनिवार्य
ऑडिटवैकल्पिकCAG द्वारा अनिवार्य वार्षिक ऑडिट
क्या सबक मिला: विश्वास प्रक्रियाओं से बनता है, भावनाओं से नहीं

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि चाहे वह धार्मिक संस्थान हो या सरकारी संस्था – जनता का विश्वास भावनाओं और इमोशंस से नहीं चलता। यह प्रक्रियाओं से, नियमों से और पारदर्शी गवर्नेंस से चलता है।

अगर ₹80 लाख की चोरी ने करोड़ों लोगों को साइलेंट बॉयकॉट करने पर मजबूर कर दिया, तो यह साफ बताता है कि जनता आज भी सब देख रही है। और बिना पारदर्शी सुधारों के यह विश्वास दोबारा जीतना इतना आसान नहीं होगा।

जब हम दान पात्र में पैसा डालते हैं, तो वह केवल कागज का टुकड़ा नहीं होता – उसमें एक मां की दुआ होती है, एक पिता की फिक्र होती है, एक परिवार की आस्था होती है। उस विश्वास के साथ विश्वासघात की कीमत सिर्फ ₹80 लाख नहीं – ₹327 करोड़ की संस्था की साख और करोड़ों लोगों का टूटा हुआ भरोसा है।

आम आदमी के लिए क्या सबक है

हर व्यक्ति जो किसी भी धार्मिक स्थल पर दान करता है, उसे यह अधिकार है कि वह जाने कि उसका पैसा कहां जा रहा है। पारदर्शिता केवल सरकारी योजनाओं में नहीं, धार्मिक ट्रस्टों में भी उतनी ही जरूरी है।

अगर आप किसी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे या चर्च में दान करते हैं, तो यह पूछने का पूरा हक है कि:

  • क्या वहां पारदर्शी लेखा-जोखा है?
  • क्या नियमित ऑडिट होता है?
  • क्या दान की रकम का सही उपयोग हो रहा है?

आस्था अंधी नहीं होनी चाहिए – यह सजग और जागरूक होनी चाहिए।

मुख्य बातें (Key Points)
  • Ram Mandir Corruption मामले में 40 दिनों में 70 बार व्यवस्थित चोरी हुई, ₹80 लाख बरामद किए गए
  • मंदिर का मासिक दान ₹7 करोड़ से गिरकर ₹1.5 करोड़ रह गया – 78% की गिरावट जो श्रद्धालुओं के साइलेंट बॉयकॉट को दर्शाती है
  • CCTV फुटेज 180 दिन की जगह 45 दिन में डिलीट की जा रही थी, SOPs कागज पर थे लेकिन जमीन पर लागू नहीं थे
  • व्हिसलब्लोअर महिपाल सिंह को न्याय देने के बजाय नौकरी से हटा दिया गया, जो सिस्टम की विफलता दर्शाता है
  • चंपत राय और अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया, तिरुपति TTD मॉडल अपनाने की जरूरत

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: अयोध्या राम मंदिर घोटाले में कितने लोग गिरफ्तार हुए और कितना पैसा बरामद हुआ?

जून 2026 में 8 लोग गिरफ्तार हुए जिनमें मुख्य आरोपी रामशंकरण यादव (टीनू यादव) और काउंटिंग इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। उनके पास से ₹80 लाख का कैश और विदेशी मुद्रा बरामद की गई। SIT रिपोर्ट के अनुसार 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच 70 बार चोरी हुई।

Q2: राम मंदिर के दान में इतनी भारी गिरावट क्यों आई?

घोटाले की खबर आने के बाद श्रद्धालुओं ने चुपचाप दान देना कम कर दिया। मासिक दान ₹7 करोड़ से गिरकर ₹1.5 करोड़ रह गया – यानी 78% की गिरावट। यह किसी प्रदर्शन का नतीजा नहीं बल्कि जनता का साइलेंट बॉयकॉट है जो टूटे हुए विश्वास को दर्शाता है।

Q3: राम मंदिर में बेहतर गवर्नेंस के लिए क्या सुधार जरूरी हैं?

तिरुपति TTD मॉडल की तरह राम मंदिर में भी पूर्णकालिक प्रोफेशनल CEO (IAS अधिकारी) की नियुक्ति होनी चाहिए, काउंटिंग रूम में बायोमेट्रिक एंट्री अनिवार्य होनी चाहिए, CCTV फुटेज 180 दिन तक संरक्षित रहे, और सबसे महत्वपूर्ण – CAG द्वारा अनिवार्य वार्षिक ऑडिट हो।

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अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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