Punjab Congress Reshuffle: कांग्रेस हाईकमान द्वारा तैयार किए गए ‘पंजाब फॉर्मूले’ से पार्टी के कई दिग्गज नेता नाखुश नजर आ रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और विरोधी धिर के नेता प्रताप सिंह बाजवा को बरकरार रखा है, लेकिन चार नई समितियां बनाकर सबको खुश करने का प्रयास किया है। हैरान करने वाली बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने अब तक सोशल मीडिया पर कोई धन्यवादी पोस्ट साझा नहीं की है।
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किसे क्या मिली जिम्मेदारी?
अगर गौर करें तो कांग्रेस ने इस बार एक अलग रणनीति अपनाई है। पार्टी ने चार अलग-अलग समितियां बनाकर कई नेताओं को जिम्मेदारियां दी हैं:
| समिति/पद | नेता का नाम |
|---|---|
| चुनाव प्रचार समिति अध्यक्ष | चरणजीत सिंह चन्नी |
| इलेक्शन मैनेजमेंट एंड कोऑर्डिनेशन समिति अध्यक्ष | विजय इंद्र सिंगला |
| कोर कमेटी अध्यक्ष | सुखजिंदर सिंह रंधावा |
| घोषणापत्र समिति अध्यक्ष | अमरजीत सिंह |
दिलचस्प बात यह है कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने रहेंगे और प्रताप सिंह बाजवा विधानसभा में विरोधी धिर के नेता की भूमिका जारी रखेंगे।
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चन्नी और रंधावा की खामोशी का मतलब
समझने वाली बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, लेकिन वे असल में पंजाब कांग्रेस की प्रधानगी के प्रबल दावेदार थे। 2022 में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाया गया था, तब चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। उनकी लोकप्रियता देखते हुए कई लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें PCC अध्यक्ष बनाया जाएगा।
इसी तरह सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी प्रधानगी की कतार में खड़े थे। उन्हें कोर कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है, लेकिन यह शायद उनकी अपेक्षाओं से कम है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि दोनों नेताओं ने अपने एक्स (X) खातों पर अब तक कोई धन्यवादी पोस्ट साझा नहीं की है। रंधावा ने सचिन पायलट की नई सूची को रीट्वीट जरूर किया है, लेकिन खुद से कोई स्वागत संदेश नहीं दिया।
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परगट सिंह भी चुप, बाजवा ने भी नहीं दिया धन्यवाद
इस पूरे घटनाक्रम में एक और दिलचस्प पहलू यह है कि साबका मंत्री परगट सिंह, जो प्रधानगी के दावेदार थे, ने भी कोई पोस्ट साझा नहीं की।
वहीं प्रताप सिंह बाजवा, जो विरोधी धिर के नेता के रूप में बरकरार रखे गए हैं, उनके एक्स खाते पर भी हाईकमान को संबोधित कोई धन्यवादी संदेश नजर नहीं आया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह खामोशी ‘तूफान से पहले की शांति’ जैसी है। कई नेताओं के शुभचिंतक अंदर-अंदर काफी नाराज बताए जा रहे हैं।
राजा वडिंग ने किया धन्यवाद
देखा जाए तो पूरे प्रकरण में सबसे पहले प्रतिक्रिया अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने दी। नई सूची आने के तुरंत बाद उन्होंने कांग्रेस हाईकमान का धन्यवाद किया। यह स्वाभाविक भी है क्योंकि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है।
लेकिन जब बाकी सभी दिग्गज नेता खामोश हैं, तो यह पंजाब कांग्रेस के भीतर की बेचैनी को साफ तौर पर दर्शाता है।
तीन वर्किंग प्रेसिडेंट की नियुक्ति
हाईकमान ने पंजाब यूनिट के लिए तीन वर्किंग प्रेसिडेंट की भी नियुक्ति की है:
- सुखविंदर सिंह डेनी
- राजकुमार वेरका
- संगत सिंह गिलजियान
यह नियुक्तियां भी इस बात का संकेत हैं कि पार्टी अलग-अलग धड़ों को साधने की कोशिश कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इतनी सारी समितियां और पदनाम देकर असली समस्या हल हो सकती है?
क्या है असली समस्या?
अगर गहराई से देखें तो पंजाब कांग्रेस की असली समस्या धड़ेबंदी है। कुछ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते हैं, कुछ सिद्धू खेमे के, और कुछ दलित नेताओं का अलग समूह है।
चन्नी को पहला दलित मुख्यमंत्री बनाया गया था, इसलिए उनकी एक अलग राजनीतिक पहचान बन गई है। वे चाहते हैं कि पार्टी में उनकी भूमिका और बड़ी हो।
वहीं रंधावा, बाजवा और परगट सिंह जैसे नेता भी अपनी-अपनी जगह मजबूत दावेदार हैं। ऐसे में हाईकमान के लिए सबको साधना मुश्किल हो रहा है।
2027 के चुनाव पर असर
यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह आंतरिक कलह 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगी?
देखा जाए तो पंजाब में कांग्रेस पहले ही 2022 के चुनाव में बुरी तरह हार चुकी है। आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई थी। ऐसे में अगर कांग्रेस अपने ही नेताओं को एकजुट नहीं रख पाती, तो 2027 में भी उसका प्रदर्शन कमजोर हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी को चुनावी रणनीति से पहले अपनी आंतरिक एकता पर काम करना होगा।
हाईकमान की मुश्किल
समझने वाली बात यह है कि मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुवाई वाली कांग्रेस हाईकमान के लिए भी यह आसान फैसला नहीं था। एक को जिम्मेदारी देने का मतलब दूसरे को नाराज करना बन गया है।
इसीलिए हाईकमान ने यह ‘पंजाब फॉर्मूला’ तैयार किया, जिसमें चार अलग समितियां बनाकर कई नेताओं को जिम्मेदारियां दी गईं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब के लिए चार नई समितियां बनाकर नियुक्तियां कीं
- चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति और सुखजिंदर रंधावा को कोर कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया
- दोनों नेता प्रधानगी के दावेदार थे, लेकिन सोशल मीडिया पर धन्यवाद संदेश नहीं दिया
- अमरिंदर सिंह राजा वडिंग PCC अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा विरोधी धिर के नेता बरकरार
- पंजाब कांग्रेस में आंतरिक धड़ेबंदी और असंतोष के संकेत मिल रहे हैं













