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The News Air - Breaking News - CBSE में 3-Language Policy पर बड़ा U-Turn: Class 10 के छात्रों को छूट, 7वीं-9वीं में दो Foreign Languages की इजाजत

CBSE में 3-Language Policy पर बड़ा U-Turn: Class 10 के छात्रों को छूट, 7वीं-9वीं में दो Foreign Languages की इजाजत

1 जुलाई से लागू होने वाली Three Language Policy में सरकार का यूटर्न, क्लास 10 के छात्रों को पूरी तरह छूट, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के बाद CBSE का स्पष्टीकरण

Ajay Kumar by Ajay Kumar
मंगलवार, 30 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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3-Language Policy
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CBSE Three Language Policy U-Turn: सरकार ने थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला (तीन भाषा नीति) में एक बड़ा बदलाव किया है। एक बड़ा यूटर्न भी आप कह सकते हैं क्योंकि जस्ट दो हफ्ते पहले सरकार ने कहा था कि यह Three Language Formula CBSE स्टूडेंट्स के लिए 1 जुलाई 2026 से लागू किया जाएगा। लेकिन देखा जाए तो इसमें एक बड़ा परिवर्तन हुआ है। CBSE ने Three Language Policy को Relax कर दिया है खासकर क्लास 7वीं, 8वीं, 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए। अब दो विदेशी भाषाओं (Foreign Languages) का विकल्प भी उपलब्ध होगा। यह बदलाव Supreme Court में चुनौती और अभिभावकों-शिक्षकों की चिंताओं के बाद आया है।

🔍 यह भी पढ़ें- EPFO New Rules: PF का 8.25% ब्याज कब मिलेगा? जानें पूरी जानकारी

क्या था विवाद? 15 जून की घोषणा

जून 2026 में, ठीक 15 जून को, CBSE ने अनाउंस किया था कि नया Three Language Formula 1 जुलाई 2026 से लागू किया जा रहा है।

तुरंत ही यहां पर सवाल उठने लगे:

  • क्या हर एक स्टूडेंट को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी?
  • क्या जो French, German, Spanish पढ़ रहे हैं, उन्हें अपना विषय बदलना होगा?
  • क्या क्लास 10 में कोई स्टूडेंट है जो पढ़ते आ रहा है Foreign Language, क्या उसको अपनी Language बदलनी पड़ेगी?
  • क्या Hindi अब compulsory हो जाएगी?
  • क्या additional board exam देना पड़ेगा?

समझने वाली बात यह है कि ये सारे सवाल उठने के बाद मामला गंभीर हो गया और अंततः Supreme Court तक पहुंच गया।

🔍 यह भी पढ़ें- NCERT Textbook Changes: 9वीं की किताब से हटाए French और Russian Revolution!

Three Language Formula क्या है? कोई नई बात नहीं

दिलचस्प बात यह है कि Three Language Formula कोई नया concept नहीं है। कोठारी कमीशन (Kothari Commission) में भी इसको recommend किया गया था। National Policy on Education 1968 में भी इसकी बात कही गई थी।

बार-बार objective यही था:

  • Multilingualism को प्रमोट करना
  • भारतीय भाषाओं को मजबूत करना
  • Cognitive Development (याद रखने की क्षमता) में सुधार
  • National Integration को encourage करना
  • भारत की Linguistic Heritage को preserve करना
  • विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर संवाद (Communication)
Three Language Formula का Structure: R1, R2, R3

Three Language Formula में R1, R2, R3 की बात होती है:

R1 (सबसे महत्वपूर्ण): Student अपनी सबसे मजबूत भाषा चुन सकते हैं। जैसे:

  • उत्तर भारत (UP, Bihar) में Hindi
  • तमिलनाडु में Tamil
  • आंध्र प्रदेश में Telugu
  • बंगाल में Bengali

R2 (दूसरी भाषा): कोई दूसरी Indian Language या English

R3 (तीसरी भाषा): Indian Language या Foreign Language (French, German, Spanish)

सबसे महत्वपूर्ण नियम: तीन में से कम से कम दो भाषाएं Indian Languages होनी चाहिए।

उदाहरण संयोजनR1R2R3
विकल्प 1HindiEnglishFrench
विकल्प 2TamilEnglishGerman
विकल्प 3HindiTeluguFrench
विकल्प 4TamilHindiGerman
बड़ा बदलाव: CBSE का नया Clarification

29 जून 2026 को, यानी लागू होने से सिर्फ एक दिन पहले, CBSE ने detailed implementation guidelines जारी की और कई बड़े बदलाव किए:

1. Class 10 के छात्रों को पूरी तरह छूट (Complete Exemption):

सबसे बड़ी राहत यह है कि Class 10 के students को अब compulsory अपना language subject change करने की जरूरत नहीं है।

  • कोई additional language पढ़ने की जरूरत नहीं
  • Board examination में अलग से language की exam देने की जरूरत नहीं
  • जो Foreign Language पढ़ रहे हैं, वो continue कर सकते हैं

अगर गौर करें तो यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि Class 10 में board exam का बहुत pressure होता है। अगर अचानक से language change करना पड़े तो:

  • Academic stress बढ़ेगा
  • जो proficiency acquire कर रहे थे, वो loss हो सकती है
  • Board exam में unfairly marks कम आ सकते हैं

2. Class 7, 8, 9 के छात्रों के लिए Flexibility:

ये तीनों classes के students को अपनी Foreign Language change करने की जरूरत नहीं है। अगर वो English और French पढ़ते आ रहे हैं, तो continue कर सकते हैं।

लेकिन: उन्हें एक तीसरी भाषा (Hindi, Telugu, Tamil जो भी Indian Language) लेनी होगी।

महत्वपूर्ण छूट: इस तीसरी Indian Language का Board Exam नहीं देना पड़ेगा Class 10 में।

यानी:

  • Foreign Languages continue रहेंगी
  • एक Indian Language सीखनी होगी (लेकिन board exam नहीं)
  • यह gradual transition है, अचानक बदलाव नहीं
Supreme Court में चुनौती और सरकार की प्रतिक्रिया

27 मई 2026 को मामला Supreme Court में चुनौती दी गई। 19 parents और teachers ने मिलकर (दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, चेन्नई से) 15 मई को release किए गए CBSE circular को challenge किया।

Supreme Court bench ने सवाल उठाए:

  • क्या schools के पास उतने books हैं?
  • क्या teachers हैं?
  • क्या infrastructure है?

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि Supreme Court को भी लगा कि यह बदलाव बहुत जल्दबाजी में लागू किया जा रहा है।

इसी को देखते हुए CBSE ने finally changes किए और अब मामला जुलाई में फिर से Supreme Court में सुनवाई के लिए आएगा।

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क्या Hindi Compulsory है? नहीं!

सदर्न स्टेट्स से बार-बार शिकायत आती है कि क्या Hindi को compulsory किया जा रहा है?

जवाब: बिल्कुल नहीं।

NEP 2020 और CBSE guidelines में कहीं भी नहीं कहा गया कि आपको Hindi ही पढ़नी है। Students जो भी Indian Language चुनना चाहें:

  • Tamil, Telugu, Kannada, Malayalam
  • Bengali, Marathi, Gujarati
  • Sanskrit, Urdu, Punjabi

कोई भी Indian Language choose कर सकते हैं। किसी को force नहीं किया जाएगा कि particular language पढ़ें।

दो Indian Languages क्यों जरूरी?

भारत सरकार का मानना है:

  • भारत world’s most linguistically diverse country है
  • अब तक students या तो English पढ़ लेते थे या maximum एक Indian Language
  • बाकी Indian Languages से वो familiar नहीं होते थे

इसलिए कहीं न कहीं:

  • अगर हम एक-दूसरे की languages सीखें
  • तो inter-state issues (जैसे Marathi, Tamil, Kannada को लेकर झगड़े) कम होंगे
  • National integration बढ़ेगा
International Comparison: क्या दूसरे देश भी करते हैं?

Switzerland: Multiple languages encourage करता है

Canada: English-French bilingual education support करता है

Singapore: English तो पढ़ो लेकिन एक Mother Tongue भी

South Africa: 11 official languages recognize करता है, multilingual education promote करती है

यानी multilingualism एक global trend है और भारत भी इसी direction में जा रहा है।

भारत की Linguistic Diversity

भारत में 19,500 mother tongues/dialects Census में record किए गए हैं।

हमारा Constitution 22 scheduled languages recognize करता है।

Tribal और regional languages सैकड़ों की संख्या में बोली जाती हैं।

लेकिन English dominant language बन गई है higher education और employment में। और कई Indian Languages के speakers लगातार कम होते जा रहे हैं।

सरकार का मानना है:

  • Global competitiveness through English जरूरी है
  • लेकिन Cultural identity और Indian Languages भी जरूरी हैं
1991 Liberalization का Impact

1991 के बाद:

  • Cities की growth हुई
  • Middle class बढ़ा
  • Ultra-processed food का invasion आया
  • Traditional Indian diet से modern diet में shift हुआ

इसी तरह language में भी:

  • English-medium schools बढ़े
  • Foreign languages (French, German) popular हुईं
  • Indian languages को थोड़ा neglect किया गया

अब सरकार इस balance को restore करना चाहती है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • CBSE ने Three Language Policy में बड़ा U-turn लिया
  • Class 10 के students को पूरी तरह exempt किया गया
  • Class 7, 8, 9 के students दो Foreign Languages continue कर सकते हैं
  • तीसरी Indian Language सीखनी होगी लेकिन Board Exam नहीं
  • Supreme Court में चुनौती के बाद यह बदलाव
  • Hindi compulsory नहीं, कोई भी Indian Language चुन सकते हैं

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या Class 10 के students को अब अपनी Foreign Language छोड़नी पड़ेगी?

नहीं, Class 10 के students को पूरी तरह exempt कर दिया गया है। उन्हें अपनी language में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है और न ही कोई additional exam देना होगा।

प्रश्न 2: Class 7, 8, 9 के students का क्या होगा जो पहले से French/German पढ़ रहे हैं?

वे अपनी दो Foreign Languages (जैसे English और French) continue कर सकते हैं। उन्हें बस एक तीसरी Indian Language (Hindi, Tamil आदि) लेनी होगी, लेकिन इसका Class 10 में Board Exam नहीं होगा।

प्रश्न 3: क्या Hindi पढ़ना अनिवार्य है?

नहीं, बिल्कुल नहीं। Students किसी भी Indian Language का चुनाव कर सकते हैं – Tamil, Telugu, Kannada, Bengali, Marathi, Sanskrit आदि। Hindi compulsory नहीं है।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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