NEET Controversy: इस साल की NEET-UG परीक्षा में कथित बेनियमियों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को जंतर-मंतर पर सातवें दिन में दाखिल हो गया। इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का जन्मदिन जवाबदेही की मांग करने वाली मुहिम का नया केंद्र बन गया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री को ‘जन्मदिन का तोहफा’ देते हुए इस्तीफे की मांग की।
देखा जाए तो यह विरोध प्रदर्शन अब सिर्फ NEET परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। यह भारत की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की लड़ाई बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि अब प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक भी इस मुहिम में शामिल हो गए हैं।
शिक्षा मंत्री के जन्मदिन पर ‘खास तोहफा’
इस मौके को केंद्रित करते हुए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि समूह के पास मंत्री के लिए एक ‘जन्मदिन का तोहफा’ है। प्रदर्शन वाली जगह से साझा की गई एक वीडियो में दीपके ने एक व्हाइटबोर्ड पर लिखा, “हैप्पी बर्थडे, प्रधान। कृपया इस्तीफा दीजिए।”
इस दौरान समर्थक पृष्ठभूमि में जन्मदिन का गीत गा रहे थे। यह दृश्य काफी मार्मिक था।
अगर गौर करें तो दीपके ने कहा, “आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई, धर्मेंद्र प्रधान। हमारे ऊपर एक एहसान करो और इस्तीफा दे दो। तोहफे के रूप में हम आपको इस्तीफा पत्र भेजते हैं, आप बस अंगूठा लगा दीजिए।”
समझने वाली बात यह है कि यह केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं है। यह लाखों छात्रों की उस पीड़ा की आवाज है जो परीक्षा में हुई कथित धांधली से प्रभावित हुए हैं।
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सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल का ऐलान
हैरान करने वाली बात यह है कि यह विरोध प्रदर्शन शनिवार से और भी तेज होने वाला है। प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने घोषणा की है कि अगर सरकार कथित NEET पेपर लीक को लेकर उठाई गई मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देती है तो वे अनिश्चित समय के लिए भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
X (Twitter) पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि वे 28 जून को भूख हड़ताल शुरू करने से पहले 27 जून तक सरकार के जवाब की प्रतीक्षा करेंगे।
जेनेवा के अपने हालिया दौरे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले समर्थकों को भरोसा दिया था कि वे स्विट्जरलैंड से वापस आने के बाद मुहिम की स्थिति की समीक्षा करेंगे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सोनम वांगचुक का नाम जुड़ने से इस आंदोलन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जाएगा।
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दो प्रमुख मांगें: शिक्षा और लद्दाख
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनकी मुहिम दो मांगों पर केंद्रित है: शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और लद्दाख के वातावरण, संस्कृति और लोगों की भलाई के प्रति अधिक जिम्मेदारी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा से संबंधित फैसलों में नागरिकों की अधिक भूमिका होनी चाहिए। जबकि लद्दाख के लोगों से पर्यावरण संभाल और उनकी सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए।
देखा जाए तो वांगचुक लद्दाख के लिए छठी अनुसूची की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। अब उन्होंने इसे NEET विवाद से भी जोड़ दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि दोनों मुद्दों में एक समानता है – सरकारी फैसलों में जनभागीदारी और पारदर्शिता की कमी।
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NEET परीक्षा में क्या हुआ था?
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NEET-UG 2024 परीक्षा में कई गंभीर आरोप लगे हैं:
- परीक्षा से पहले पेपर लीक होने के आरोप
- कई छात्रों को असामान्य रूप से पूरे 720/720 अंक मिलना
- ग्रेस मार्क्स देने में अनियमितता
- कई शहरों में परीक्षा केंद्रों पर धांधली के आरोप
चिंता का विषय यह है कि NEET परीक्षा देशभर में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का एकमात्र जरिया है। इसमें हुई किसी भी अनियमितता लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है।
हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार ने शुरू में सभी आरोपों को खारिज कर दिया था। लेकिन जब विरोध बढ़ा तो कुछ परीक्षा केंद्रों पर जांच की घोषणा की गई।
कॉकरोच जनता पार्टी क्या है?
Cockroach Janta Party (CJP) युवाओं का एक स्वतंत्र समूह है जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता के लिए लड़ रहा है। संस्थापक अभिजीत दीपके एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
समूह का नाम ‘कॉकरोच’ (तिलचट्टा) इसलिए रखा गया है क्योंकि तिलचट्टे किसी भी परिस्थिति में जीवित रह सकते हैं। यह नाम प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है कि आम जनता की आवाज को कोई दबा नहीं सकता।
समझने वाली बात यह है कि यह संगठन किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है। यह पूरी तरह से छात्रों और युवाओं की पहल है।
सरकार की प्रतिक्रिया अब तक
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अब तक इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि NTA ने पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षा आयोजित की है।
लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार ने कुछ अनियमितताओं को स्वीकार किया है और जांच के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं दायर की गई हैं।
राहत की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और NTA से जवाब मांगा है।
छात्रों का भविष्य दांव पर
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ी चिंता यह है कि लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। कई छात्रों ने पूरे साल कड़ी मेहनत की है।
अगर परीक्षा रद्द होती है तो उन्हें फिर से तैयारी करनी होगी। और अगर परीक्षा नहीं रद्द होती तो जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी है, उनके साथ अन्याय होगा।
देखा जाए तो यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं है। यह देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है।
मुख्य बातें (Key Points)
- NEET विवाद पर जंतर-मंतर में सातवें दिन भी जारी रहा विरोध प्रदर्शन
- CJP ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के जन्मदिन पर इस्तीफे की मांग की
- सोनम वांगचुक ने 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की
- NEET परीक्षा में पेपर लीक और अंक वितरण में अनियमितता के गंभीर आरोप
- लाखों छात्रों का भविष्य इस विवाद के कारण अधर में लटका हुआ है













