Government Office New Timings: पंजाब सरकार के सरकारी दफ्तर और संस्थान पहली जुलाई से फिर से सुबह 9 बजे से खुलेंगे। राज्य सरकार द्वारा आज जारी पत्र के अनुसार सभी सरकारी दफ्तरों/संस्थानों का समय पहले की तरह पहली जुलाई से सुबह 9 बजे से शाम पांच बजे तक का कर दिया गया है। गर्मी के बढ़ते प्रकोप के कारण पंजाब सरकार ने 25 मई को सरकारी दफ्तरों और शैक्षिक संस्थानों का समय अगले आदेशों तक सुबह 7.30 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक का किया था।
देखा जाए तो यह फैसला महज एक महीने में ही वापस ले लिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने जिन उद्देश्यों के साथ यह बदलाव किया था, वे जमीन पर उतने कारगर साबित नहीं हुए। अब सवाल उठता है कि आखिर क्यों सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा?
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बिजली की खपत में नहीं आया कोई बड़ा फर्क
दफ्तरी समय बदलने के पीछे सबसे बड़ा कारण बिजली की बचत बताया गया था। सरकार का मानना था कि गर्मी के दौरान बिजली की मांग और खपत बढ़ जाती है। दफ्तरों के जल्दी बंद होने से दोपहर बाद एयर कंडीशनर और अन्य उपकरणों की खपत कम होगी।
परंतू हकीकत में कोई बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ा। पंजाब सरकार ने जब अमल में देखा तो बेशक सरकारी कर्मचारी 7.30 बजे ही दफ्तरों में आ जाते थे, परंतू आम लोगों की आमद 9 बजे के बाद ही शुरू होती थी।
समझने वाली बात यह है कि दफ्तर भले ही सुबह 7.30 बजे खुल जाते थे, लेकिन असली कामकाज तो 9 बजे के बाद ही शुरू होता था। इस वजह से बिजली की बचत का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया।
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दूर-दुराडे से आने वाले लोगों को हो रही थी परेशानी
अधिकारी बताते हैं कि जो लोग पंजाब के दूर-दुराडे क्षेत्रों से काम के लिए चंडीगढ़ आते थे, उनके दोपहर तक पहुंचने पर दफ्तर बंद हो जाते थे। यह सबसे बड़ी समस्या थी जिसकी वजह से आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
अगर गौर करें तो दफ्तरी समय सुबह 7.30 से दोपहर 1.30 बजे तक रखने से केवल 6 घंटे का कामकाज होता था। पहले 9 बजे से 5 बजे तक 8 घंटे का काम होता था। इस कमी की वजह से भी काम प्रभावित हो रहा था।
हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार ने यह फैसला लेने से पहले जमीनी स्तर पर इसके प्रभाव का आकलन नहीं किया। नतीजा यह रहा कि महीने भर में ही यह प्रयोग विफल हो गया।
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आम जनता के लिए राहत का फैसला
दफ्तरी समय बदलने के बारे में इन मुश्किलों को देखते हुए अब पुराना दफ्तरी समय बहाल करने का फैसला लिया गया है। बिजली की मांग और खपत भी दफ्तरी समय बदले जाने से बहुत नीचे नहीं आ सकी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पहली बार अकाली-भाजपा गठजोड़ सरकार ने करीब ढाई दशक पहले सरकारी दफ्तरों का समय बदला था। AAP सरकार ने साल 2024 में समय बदले जाने का प्रयोग किया था। इस वर्ष फिर समय बदलाव का प्रयोग दोहराया गया जिसे अब गर्मी के घटने से पहले ही वापस ले लिया गया है।
राहत की बात यह है कि अब दूर से आने वाले लोगों को पूरा दिन मिलेगा अपने काम निपटाने के लिए। सरकारी कर्मचारियों को भी अब सुबह जल्दी उठने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्या था सरकार का तर्क
25 मई को जब यह फैसला लिया गया था, तब सरकार ने कहा था कि गर्मी की तपिश से राहत देने और बिजली की बचत के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। मौसम विभाग ने उस समय तापमान 45 डिग्री से ऊपर जाने की चेतावनी दी थी।
लेकिन सरकार के इस फैसले को लागू हुए महज 35-40 दिन ही हुए थे और अभी गर्मी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया था?
दिलचस्प बात यह है कि कई अन्य राज्यों ने भी गर्मी के दौरान दफ्तरी समय बदला था, लेकिन वहां यह व्यवस्था कारगर साबित हुई। पंजाब में यह प्रयोग क्यों विफल रहा, इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
सरकारी कर्मचारियों की प्रतिक्रिया
सरकारी कर्मचारियों का एक वर्ग इस बदलाव से खुश नजर आ रहा है। उनका कहना है कि सुबह 7.30 बजे दफ्तर पहुंचने के लिए उन्हें 6 बजे या उससे भी पहले घर से निकलना पड़ता था। इससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही थी।
वहीं दूसरी ओर, कुछ कर्मचारियों का मानना था कि दोपहर 1.30 बजे दफ्तर बंद होने से उन्हें बाकी का दिन अपने निजी कामों के लिए मिल जाता था। लेकिन यह संख्या बहुत कम थी।
अब जब पुराना समय बहाल हो रहा है, तो ज्यादातर कर्मचारी और आम जनता इससे राहत महसूस कर रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब के सरकारी दफ्तर 1 जुलाई से फिर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुलेंगे
- गर्मी के दौरान 25 मई से लागू किए गए 7.30 बजे से 1.30 बजे के समय को वापस लिया गया
- बिजली की खपत में अपेक्षित कमी नहीं आई, आम जनता को काफी परेशानी हो रही थी
- दूर-दुराडे से आने वाले लोगों के लिए दोपहर बाद दफ्तर बंद होना बड़ी समस्या थी
- यह AAP सरकार का दूसरा ऐसा प्रयोग था जो विफल रहा













