Kharge Land Scam: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर बड़े आरोप लगाते हुए दावा किया है कि कर्नाटक में कांग्रेस शासन के दौरान खड़गे परिवार से जुड़े ट्रस्टों को सरकारी जमीनें आवंटित कर सीधा लाभ पहुंचाया गया। पार्टी ने इस मामले में जनता से जवाबदेही की मांग की है।
देखा जाए तो यह आरोप ऐसे समय आया है जब कांग्रेस और भाजपा के बीच भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजनीतिक तकरार चरम पर है। हाल ही में कांग्रेस ने भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार पर इसी तरह के आरोप लगाए थे।
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भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने क्या कहा?
दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि जो जमीन आम जनता के कामों के लिए आरक्षित रखी गई थी, वह उन ट्रस्टों के नाम कर दी गई जिनमें खड़गे खुद और उनके पुत्र (कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे) सदस्य हैं।
भंडारी ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि “जिस तरह गांधी-वाड्रा परिवार पर जमीनें हड़पने के आरोप लगते रहे हैं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी राजनीतिक प्रभाव की वर्तोष का वही ‘गांधी परिवार वाला तरीका’ अपनाया है।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भाजपा ने सिर्फ आरोप नहीं लगाए, बल्कि भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धाराओं का हवाला देते हुए कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है।
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सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को मिली थी 19 एकड़ जमीन
प्रदीप भंडारी के मुताबिक, कर्नाटक के गुलबर्गा जिले में पाली भाषा की खोज के नाम पर सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को पहले 19 एकड़ जमीन 30 साल की लीज पर दी गई थी, जिसे बाद में पक्के तौर पर ट्रांसफर कर दिया गया।
अगर गौर करें तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि पाली भाषा की खोज और विकास के लिए इतनी बड़ी जमीन की क्या जरूरत थी? और वह भी उस ट्रस्ट को जिसका इस क्षेत्र में कोई पुराना अनुभव या ट्रैक रिकॉर्ड नहीं था।
भाजपा का दावा है कि इसके अलावा एयरोस्पेस (हवाबाजी) खोज के नाम पर भी 5 एकड़ और अन्य कीमती जमीनें इस ट्रस्ट को आवंटित की गईं। यह सब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ।
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CAG रिपोर्ट में भी सवाल उठे थे
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा ने CAG (Comptroller and Auditor General) की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। उनका दावा है कि CAG की रिपोर्ट में इस आवंटन के जनहित पर सवाल उठाए गए थे।
यानी यह सिर्फ राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं ने भी इस लेनदेन को संदिग्ध माना था। अगर यह सच है, तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।
करोड़ों की सरकारी जमीन की बांटवंड का आरोप
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपए की इस सरकारी जमीन की बांटवंड से सिर्फ एक राजनीतिक परिवार को लाभ मिला, न कि आम जनता को। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला सार्वजनिक पद की दुरुपयोग और राजनीतिक भाई-भतीजावाद का उदाहरण है।
समझने वाली बात यह है कि यदि सरकारी जमीन वाकई में जनहित के लिए आरक्षित थी और उसे किसी निजी ट्रस्ट को हस्तांतरित किया गया, तो यह गंभीर प्रशासनिक और नैतिक उल्लंघन है।
कांग्रेस ने MP के CM पर भी लगाए थे आरोप
यह सियासी हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों पार्टियों के बीच भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तल्खी चरम पर है। हाल ही में कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी फर्मों द्वारा उज्जैन में जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर भाजपा पर राजनीतिक प्रभाव की दुरुपयोग के आरोप लगाए थे।
हालांकि MP BJP प्रधान ने उन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया था। अब भाजपा ने भी उसी तरह का पलटवार किया है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जब दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती हैं, तो आम जनता का विश्वास राजनीति पर और कम होता जाता है। इसलिए इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक कांग्रेस पार्टी या मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि कांग्रेस इन गंभीर आरोपों का जवाब कैसे देती है।
मुख्य बातें (Key Points):
- भाजपा ने खड़गे परिवार पर कर्नाटक में जमीन घोटाले का आरोप लगाया
- सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को 19 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी
- CAG की रिपोर्ट में भी इस आवंटन पर सवाल उठे थे
- भाजपा ने Prevention of Corruption Act के तहत कार्रवाई की मांग की













