Manpreet Singh Ayali joins Akali Dal Waris Punjab De पंजाब की सियासत से आज एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। Chandigarh में मंगलवार यानी 9 जून को लुधियाना के दाखा से विधायक Manpreet Singh Ayali ने अपनी पुरानी पार्टी को अलविदा कह दिया है। वह आधिकारिक तौर पर Akali Dal Waris Punjab De में शामिल हो गए हैं। इस बड़े उलटफेर से पंजाब के राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। देखा जाए तो विधायक इयाली को पार्टी में शामिल कराने के लिए खुद सांसद Sarabjit Singh और सांसद Amritpal Singh के पिता तरसेम सिंह मौजूद थे। इन दोनों दिग्गज नेताओं ने इयाली का पार्टी में स्वागत किया। राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि इस नई जॉइनिंग से पार्टी का आधार काफी मजबूत होने वाला है।
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‘इयाली का पुराना सियासी सफर और बड़े चुनावी मुकाबले’
अगर उनके राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो कहानी बेहद दिलचस्प रही है। मनप्रीत सिंह इयाली पहली बार साल 2012 के विधानसभा चुनावों में Shiromani Akali Dal (B) के टिकट पर दाखा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। इसके बाद साल 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने Ludhiana सीट से अपनी किस्मत आजमाई थी। कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि साल 2019 के उपचुनावों के दौरान उन्होंने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई। उन्होंने कांग्रेस के बड़े उम्मीदवार कैप्टन संदीप संधू को शिकस्त देकर दोबारा दाखा से विधायकी जीती थी। इसके बाद साल 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (ब) के टिकट पर ही अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा।
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‘अकाल तख्त का आदेश और पदों से इस्तीफा’
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि Akal Takht Sahib द्वारा पंथक एकता के लिए जारी किए गए विशेष आदेश के बाद इयाली को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्हें भर्ती अभियान का प्रभार दिया गया था। इसके कुछ समय बाद वह शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सुरजीत) गुट के साथ जुड़ गए थे। लेकिन हाल ही में इयाली ने अचानक शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सुरजीत) के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस कदम ने सबको हैरान कर दिया था। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी, जिसके बाद आज उन्होंने इस नए दल का दामन थाम लिया है। अब इसे इस नए गुट के लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।
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‘पंजाब की क्षेत्रीय राजनीति पर नया असर’
इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में पंजाब की क्षेत्रीय राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह दर्शाता है कि अकालियों के अलग-अलग धड़ों में चल रही उठापटक अब जमीनी स्तर पर नए समीकरण बना रही है। इस फैसले का आने वाले महीनों में राज्य की राजनीतिक जमीन पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना वाकई दिलचस्प होने वाला है।
अकाली दल (पुनर सुरजीत) से क्यों हुआ अलगाव
Manpreet Singh Ayali ने कुछ समय पहले शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के नेताओं से मतभेदों के चलते पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। अब वे 9 जून को चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल वारिस पंजाब में शामिल हो रहे हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि एक बागी विधायक का इस तरह पार्टी बदलना पंजाब की अकाली राजनीति में एक बड़ा संकेत है। इसका मतलब है कि पंजाब में अकाली दल के विभिन्न गुटों के बीच खींचतान और तेज हो सकती है।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
मनप्रीत सिंह इयाली दाखा क्षेत्र के एक स्थापित और मजबूत नेता माने जाते हैं, जो लंबे समय से शिरोमणि अकाली दल के साथ जुड़े रहे थे। पंथक राजनीति में मचे घमासान और अलग-अलग गुटों के उभरने के बीच इयाली का पहले पुनर्सुरजीत गुट में जाना और फिर वहां से इस्तीफा देकर ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ में शामिल होना पंजाब की पंथक राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
विधायक मनप्रीत सिंह इयाली आधिकारिक रूप से ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ में शामिल हुए।
सांसद सरबजीत सिंह और अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।
इयाली दाखा सीट से 2012, 2019 और 2022 में विधायक चुने जा चुके हैं।
हाल ही में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सुरजीत) के पदों से इस्तीफा दिया था।













