TMC Crisis : ममता बनर्जी की राजनीतिक किश्ती में एक बड़ा छेद हो गया है। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को ऐसा झटका लगा है जो आने वाले दिनों में सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। लोकसभा में पार्टी के करीब 20 सांसदों ने TMC छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने का फैसला किया है। यह खुलासा खुद पार्टी की लोकसभा चीफ व्हिप काकोली घोष ने किया है।
सोमवार को ‘द ट्रिब्यून’ के साथ खास बातचीत में काकोली घोष ने इस सनसनीखेज घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि उनके साथ कुल मिलाकर लगभग 20 TMC सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को औपचारिक पत्र लिखने और NDA संसदीय दल में रस्मी तौर पर शामिल होने जा रहे हैं। देखा जाए तो यह ममता सरकार के लिए सिर्फ एक राजनीतिक झटका नहीं, बल्कि पार्टी की आंतरिक कलह और नाराजगी का सबसे बड़ा सबूत है।
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काकोली घोष का बड़ा बयान: “हमने साथी सांसदों से लंबी चर्चा के बाद लिया फैसला”
काकोली घोष, जो अभी तक लोकसभा में TMC की चीफ व्हिप के पद पर थीं, ने अपने बयान में साफ किया कि यह फैसला रातोंरात या किसी दबाव में नहीं लिया गया। उन्होंने बताया, “मेरे समेत लगभग 20 TMC सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखने और औपचारिक रूप से NDA का हिस्सा बनने की अपनी इच्छा जाहिर करने का फैसला किया है। यह फैसला साथी सांसदों के साथ लंबी चर्चा के बाद लिया गया है।”
अब यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि काकोली घोष सिर्फ एक सामान्य सांसद नहीं हैं। वह TMC की लोकसभा में चीफ व्हिप थीं, यानी पार्टी की संसदीय रणनीति और अनुशासन की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। ऐसे में उनका यह कदम पार्टी के लिए दोहरी मार है—न सिर्फ संख्या बल के लिहाज से, बल्कि नेतृत्व की साख के मामले में भी।
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पार्टी चेयरपर्सन ने हटाया, लेकिन संवैधानिक पद बरकरार: काकोली का पलटवार
दिलचस्प बात यह है कि TMC की पार्टी चेयरपर्सन ममता बनर्जी ने हाल ही में काकोली घोष को चीफ व्हिप के पद से हटाने की घोषणा कर दी थी। इससे पहले, उन्हें TMC महिला विंग की प्रधान पद से भी इस्तीफा देना पड़ा था। लेकिन काकोली ने इसे एकतरफा और मनमाना फैसला बताते हुए पलटवार किया।
उन्होंने कहा, “पार्टी चेयरपर्सन ने भले ही मेरी जगह किसी और को लगाने का ऐलान कर दिया हो, लेकिन इससे संवैधानिक और संसदीय स्थिति रातोंरात नहीं बदल जाती। जब तक स्पीकर को औपचारिक सूचना नहीं मिलती, तब तक मैं संसदीय तौर पर चीफ व्हिप ही हूं।”
यह बयान साफ करता है कि TMC के अंदर सिर्फ विचारधारा का नहीं, बल्कि सत्ता और सम्मान का भी बड़ा संघर्ष चल रहा है।
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“जनता के फैसले को स्वीकार किया, अब NDA में देखते हैं भविष्य”
काकोली घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि सांसदों ने जनता के फैसले को स्वीकार कर लिया है। उनका कहना है कि केंद्र में NDA की सरकार है और वे मानते हैं कि उनका भविष्य का सियासी रास्ता NDA के अनुकूल होना चाहिए।
“इस मुताबिक, हम स्पीकर को अपने फैसले के बारे में बताएंगे। हम NDA का हिस्सा बनना चाहते हैं और स्पीकर को पत्र जल्द ही भेजा जाएगा,” उन्होंने आगे जोड़ा।
समझने वाली बात यह है कि TMC सांसदों का यह कदम सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राजनीतिक कदम भी हो सकता है। अगर 20 सांसद सच में NDA में शामिल हो जाते हैं, तो लोकसभा में TMC की ताकत काफी कमजोर हो जाएगी और NDA की संख्या और मजबूत हो जाएगी।
ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती: क्या टूटेगी TMC की एकता?
ममता बनर्जी, जिन्होंने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वाम मोर्चे के खिलाफ TMC को एक मजबूत विकल्प के तौर पर खड़ा किया था, अब अपनी ही पार्टी में बगावत का सामना कर रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब TMC से नेताओं और कार्यकर्ताओं का पलायन हुआ हो। पिछले कुछ सालों में कई बड़े नेता TMC छोड़कर BJP में शामिल हो चुके हैं।
लेकिन इस बार मामला अलग है। यहां बात सिर्फ एक-दो नेताओं की नहीं, बल्कि पूरे 20 लोकसभा सांसदों की हो रही है, जिनमें खुद चीफ व्हिप शामिल हैं। अगर गौर करें, तो यह TMC के संसदीय दल की लगभग आधी ताकत है।
INDIA गठबंधन पर भी असर: विपक्ष की एकता को झटका
TMC, INDIA गठबंधन का एक अहम हिस्सा है, जिसे केंद्र में BJP के खिलाफ एक मजबूत विपक्षी मोर्चा बनाने के लिए गठित किया गया था। ऐसे में TMC के 20 सांसदों का NDA में जाना सिर्फ ममता बनर्जी के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे INDIA गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका होगा।
यह सवाल उठता है कि क्या INDIA गठबंधन में दरारें पड़ने लगी हैं? क्या अन्य दलों में भी असंतोष की आग सुलग रही है? और सबसे बड़ी बात, क्या ममता बनर्जी अपनी पार्टी को संभाल पाएंगी या यह सिलसिला जारी रहेगा?
राजनीतिक विश्लेषण: क्यों उठा यह कदम?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि TMC सांसदों के इस कदम के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
आंतरिक कलह और उपेक्षा: कई सांसदों को लगता है कि पार्टी में उन्हें उचित सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिल रही। काकोली घोष का चीफ व्हिप पद से हटाया जाना इसका एक उदाहरण है।
केंद्र में सत्ता का आकर्षण: NDA केंद्र में सत्ता में है। ऐसे में कई सांसदों को लगता है कि सत्ताधारी गठबंधन में शामिल होकर वे अपने क्षेत्र के लिए बेहतर काम कर सकते हैं।
पश्चिम बंगाल में BJP का बढ़ता प्रभाव: पिछले कुछ सालों में पश्चिम बंगाल में BJP का आधार काफी मजबूत हुआ है। कई नेता मानते हैं कि भविष्य में BJP की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
ममता बनर्जी की निरंकुश छवि: कई लोगों का आरोप है कि ममता बनर्जी पार्टी में एकछत्र राज चलाती हैं और दूसरों की राय को तवज्जो नहीं देतीं। यह असंतोष का एक बड़ा कारण हो सकता है।
आगे क्या होगा? स्पीकर और संसदीय प्रक्रिया
अब सवाल यह है कि जब ये 20 सांसद औपचारिक रूप से स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखेंगे, तो क्या होगा?
संसदीय नियमों के मुताबिक, अगर किसी दल के एक-तिहाई से अधिक सदस्य दल बदल करते हैं, तो उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे में अगर TMC के कुल सांसदों में से एक-तिहाई से ज्यादा (यानी करीब 20) सांसद साथ आ जाते हैं, तो वे कानूनी रूप से सुरक्षित हो सकते हैं।
हालांकि, TMC इसे चुनौती दे सकती है और स्पीकर के सामने अपना पक्ष रख सकती है। यह पूरा मामला कानूनी और संवैधानिक दांवपेच का हिस्सा बन सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसद पार्टी छोड़कर NDA में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।
- काकोली घोष, जो TMC की लोकसभा चीफ व्हिप थीं, ने इस फैसले की पुष्टि की है।
- सांसद जल्द ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को औपचारिक पत्र भेजेंगे।
- काकोली घोष को हाल ही में चीफ व्हिप पद से हटाया गया था, जिसे उन्होंने मनमाना और एकतरफा बताया।
- यह कदम ममता बनर्जी और INDIA गठबंधन दोनों के लिए बड़ा झटका है।
- राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह आंतरिक असंतोष और सत्ता के आकर्षण का नतीजा हो सकता है।













