Southwest Monsoon 2026: भारतीय मौसम विभाग (India Meteorological Department) ने 1 जून 2026 को एक अहम अपडेट जारी करते हुए कहा है कि दक्षिण पश्चिम मानसून अगले 2-3 दिनों में केरल में दस्तक दे सकता है। देखा जाए तो यह खबर किसानों और आम जनता दोनों के लिए राहत भरी है, लेकिन साथ ही कई राज्यों में भारी बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि की चेतावनी भी जारी की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पूर्व, दक्षिण भारत और मध्य भारत के कई हिस्सों में अगले एक हफ्ते मौसम का मिजाज काफी उग्र रह सकता है।
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मानसून की रफ्तार और मौजूदा स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल 10°N/60°E से लेकर 22°N/97°E तक फैली हुई है। अगले 2-3 दिनों में Southwest Monsoon 2026 का दायरा अरब सागर के दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों, लक्षद्वीप द्वीपसमूह, केरल और तमिलनाडु के कुछ भागों, तथा बंगाल की खाड़ी के कई इलाकों में और बढ़ने की संभावना है। दिलचस्प बात यह है कि मानसून की यह एडवांस सामान्य से थोड़ी देर से हो रही है, लेकिन मौसम के हालात इसके जल्द सक्रिय होने की ओर इशारा कर रहे हैं।
अगर गौर करें तो पिछले 24 घंटों में ही मणिपुर में बहुत भारी बारिश (11-20 सेमी) दर्ज की गई है, जबकि तमिलनाडु और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी भारी बारिश (7-11 सेमी) हुई है। वहीं, महाराष्ट्र के वाशिम में देश का सबसे अधिक तापमान 43.8°C रिकॉर्ड किया गया।
केरल और दक्षिण भारत में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने केरल और माहे के लिए 1 से 7 जून तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। खास बात यह है कि 3 से 7 जून के दौरान केरल में बहुत भारी बारिश (very heavy rainfall) की संभावना है। इसके अलावा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भी 1 से 7 जून तक भारी बारिश हो सकती है।
समझने वाली बात यह है कि लक्षद्वीप में 1 से 5 जून तक, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 1 और 2 जून को, रायलसीमा में 1 जून को, तटीय कर्नाटक में 3 से 5 जून तक और अंदरूनी कर्नाटक में 1 से 4 जून के बीच भारी बारिश हो सकती है। इन सभी क्षेत्रों में गरज के साथ बिजली चमकने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं की भी आशंका है।
उत्तर-पूर्व भारत में मौसम का मिजाज
उत्तर-पूर्व भारत में भी अगले हफ्ते बारिश का दौर जारी रहेगा। अरुणाचल प्रदेश में 1 जून और फिर 2 से 7 जून के दौरान भारी बारिश हो सकती है। असम और मेघालय में 4 से 7 जून के बीच, जबकि नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 1, 6 और 7 जून को भारी बारिश की संभावना है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले 24 घंटों में मणिपुर के ईडन लॉग (उत्तर) में 14 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जो काफी ज्यादा है। इससे इस क्षेत्र में जलभराव और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।
उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में आंधी-तूफान की चेतावनी
उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के लिए मौसम विभाग ने गंभीर चेतावनी जारी की है। इन क्षेत्रों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जो 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। साथ ही कुछ इलाकों में ओलावृष्टि भी हो सकती है।
पश्चिम मध्य प्रदेश में 1 से 4 जून तक, पूर्व मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में 1 जून को तेज आंधी की संभावना है। ओलावृष्टि की बात करें तो पश्चिम मध्य प्रदेश में 1 और 2 जून को तथा पूर्व मध्य प्रदेश में 1 जून को ओले गिर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर में 3 से 5 जून के दौरान तेज आंधी आ सकती है और 3 व 4 जून को ओलावृष्टि की भी आशंका है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 3 और 4 जून को तेज आंधी चल सकती है।
चिंता का विषय यह है कि पिछले 24 घंटों में ही पश्चिम मध्य प्रदेश के सीहोर में 94 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चली हैं, जबकि तटीय आंध्र प्रदेश के अंफू लम गुंटूर में 78 किमी प्रति घंटे की हवा दर्ज की गई।
दिल्ली-NCR में मौसम का हाल
दिल्ली और NCR में भी अगले कुछ दिन मौसम काफी बदला-बदला रहने वाला है। 1 जून को आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और दोपहर से शाम के बीच हल्की बारिश के साथ गरज, बिजली, धूल भरी आंधी और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं की संभावना है, जो 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।
2 से 4 जून के बीच भी दिल्ली में इसी तरह के मौसम के हालात रहने की उम्मीद है। अधिकतम तापमान 35 से 40°C के बीच रहेगा, जबकि न्यूनतम तापमान 22 से 29°C के बीच रह सकता है।
पिछले 24 घंटों में दिल्ली का अधिकतम तापमान 34-36°C और न्यूनतम तापमान 22-25°C के बीच रहा है। दिलचस्प बात यह है कि तापमान सामान्य से काफी नीचे चल रहा है, जो मौसम में बदलाव का संकेत है।
पश्चिम भारत में मानसून की तैयारी
महाराष्ट्र के तटीय इलाके कोंकण और गोआ में 1 से 7 जून तक बारिश का दौर जारी रहेगा। मध्य महाराष्ट्र में 2 से 5 जून तक, मराठवाड़ा में 2 और 3 जून को, सौराष्ट्र और कच्छ में 1 से 4 जून तक तथा गुजरात क्षेत्र में 1 और 4 जून को बारिश हो सकती है।
मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 1 जून को 50-60 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं की आशंका है, जो 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है।
गुजरात में 3 जून तक तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन 3 से 7 जून के दौरान तापमान में 2-4°C की गिरावट आ सकती है।
बिहार में लू की स्थिति, गर्म-नम मौसम की चेतावनी
मौसम विभाग ने बिहार के लिए 3 से 7 जून तक लू (heat wave) की चेतावनी जारी की है। यह विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि इस दौरान तापमान सामान्य से काफी ऊपर रह सकता है।
इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश में 1 से 3 जून तक, असम और मेघालय तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 1 और 2 जून को, सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 1 से 3 जून तक तथा ओडिशा में 2 से 5 जून तक गर्म और नम मौसम रहने की संभावना है।
मछुआरों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी
मौसम विभाग ने मछुआरों को सलाह दी है कि वे निम्नलिखित क्षेत्रों में समुद्र में न जाएं:
बंगाल की खाड़ी: मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन और मालदीव क्षेत्र, तमिलनाडु और श्रीलंका के तटों के साथ, दक्षिण और मध्य बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों तथा दक्षिण और उत्तर अंडमान सागर में 1 से 6 जून तक। दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर 1 और 3 जून को।
अरब सागर: सोमालिया तट और आसपास के समुद्री क्षेत्र में 3 से 6 जून तक। केरल, लक्षद्वीप, मालदीव और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में 1 से 6 जून तक। कर्नाटक तट पर 3 से 6 जून तक।
तापमान में होंगे ये बदलाव
उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अगले हफ्ते अधिकतम तापमान में 4-6°C की क्रमिक वृद्धि हो सकती है। पूर्वी भारत में 1 जून तक तापमान में 2-3°C की वृद्धि और फिर 2 से 7 जून के दौरान कोई खास बदलाव नहीं होगा।
महाराष्ट्र में 5 जून तक तापमान में 2-3°C की क्रमिक गिरावट आ सकती है और 6 व 7 जून को कोई बदलाव नहीं होगा। देश के बाकी हिस्सों में 7 जून तक तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होने की संभावना है।
किसानों के लिए खास सलाह
मौसम विभाग ने किसानों को कई महत्वपूर्ण सलाह दी हैं:
ओलावृष्टि के लिए: मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और मध्य प्रदेश में फलों के बगीचों और सब्जी के पौधों को यांत्रिक क्षति से बचाने के लिए ओला जाल या ओला कैप का उपयोग करें। जल जमाव से बचने के लिए खेतों में प्रभावी जल निकासी सुनिश्चित करें।
भारी बारिश के लिए: अरुणाचल प्रदेश में सब्जी, मक्का और नर्सरी क्षेत्रों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें। केरल में केले, नारियल और अन्य सब्जियों के लिए पर्याप्त जल निकासी प्रदान करें। केले के पौधों को सहारा दें।
तेज हवाओं के लिए: कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें या तिरपाल से ढक दें। बागवानी फसलों को यांत्रिक सहारा और सब्जियों तथा युवा फलदार पौधों को दांव या सहारा प्रदान करें ताकि तेज हवाओं से गिरने से बचाया जा सके।
पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए सुझाव
ओलावृष्टि और भारी बारिश के दौरान जानवरों को शेड के अंदर रखें और उन्हें संतुलित आहार प्रदान करें। चारा और फसल को खराब होने से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर रखें।
तालाबों के चारों ओर उचित जाली के साथ एक आउटलेट का निर्माण करें ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके और ओवरफ्लो होने पर मछलियां बाहर न निकलें।
उच्च तापमान और लू वाले क्षेत्रों में जानवरों को साफ, स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल प्रदान करें, और प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए मुर्गी पालन शेड की छतों को घास से ढकें।
आम जनता के लिए सुरक्षा सलाह
मौसम विभाग ने आम लोगों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
• मौसम के अपडेट पर कड़ी नजर रखें और बिगड़ती स्थितियों के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें
• घर के अंदर रहें, खिड़कियां और दरवाजे सुरक्षित रूप से बंद करें और यदि संभव हो तो यात्रा से बचें
• सुरक्षित आश्रय लें; पेड़ों के नीचे शरण न लें
• बिजली की गतिविधि के दौरान कंक्रीट के फर्श पर न लेटें और कंक्रीट की दीवारों के खिलाफ न झुकें
• विद्युत/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग करें
• तुरंत जल निकायों से बाहर निकलें
• बिजली का संचालन करने वाली सभी वस्तुओं से दूर रहें
प्रभावित क्षेत्रों में संभावित नुकसान
तेज आंधी और ओलावृष्टि से पेड़ों की शाखाएं टूट सकती हैं, बड़े पेड़ गिर सकते हैं, खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है। शाखाओं के गिरने से बिजली और संचार लाइनों को मामूली से लेकर बड़ा नुकसान हो सकता है। तेज हवाओं के कारण कमजोर संरचनाओं को आंशिक क्षति हो सकती है। ढीली वस्तुएं उड़ सकती हैं।
भारी बारिश से सड़कों पर स्थानीय बाढ़, निचले इलाकों में जलभराव और मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में अंडरपास बंद हो सकते हैं। भारी बारिश के कारण दृश्यता में कभी-कभी कमी आ सकती है। जल जमाव के कारण प्रमुख शहरों में यातायात बाधित हो सकता है, जिससे यात्रा का समय बढ़ सकता है।
स्थानीय भूस्खलन, मिट्टी का खिसकना और जमीन धंसने की संभावना भी रहती है। जलमग्नता के कारण कुछ क्षेत्रों में बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है।
मौसम विभाग की निगरानी जारी
India Meteorological Department लगातार मौसम की निगरानी कर रहा है और जरूरत के अनुसार अपडेट जारी कर रहा है। विभाग ने सभी राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को अलर्ट पर रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।
देखा जाए तो Southwest Monsoon 2026 का जल्द आगमन किसानों के लिए राहत की बात है, लेकिन साथ ही तेज आंधी, ओलावृष्टि और भारी बारिश से होने वाले नुकसान से बचने के लिए सभी को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना और सुरक्षा सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है।
नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे सतर्क रहें और जान-माल के किसी भी नुकसान से बचने के लिए सुरक्षा सावधानियों का पालन करें।
मुख्य बातें (Key Points)
• Southwest Monsoon 2026 अगले 2-3 दिनों में केरल में दस्तक देने की संभावना
• केरल में 3-7 जून के दौरान बहुत भारी बारिश की चेतावनी
• उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में 70 किमी प्रति घंटे तक की तेज आंधी और ओलावृष्टि की आशंका
• बिहार में 3-7 जून तक लू चलने की संभावना
• दिल्ली-NCR में अगले कुछ दिन गरज, बिजली और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है
• मछुआरों को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में न जाने की सलाह
• किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह












