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The News Air - Breaking News - कर्नाटक में सियासी उलटफेर! Karnataka CM Siddaramaiah का इस्तीफा, DK Shivakumar बनेंगे अगले मुख्यमंत्री

कर्नाटक में सियासी उलटफेर! Karnataka CM Siddaramaiah का इस्तीफा, DK Shivakumar बनेंगे अगले मुख्यमंत्री

कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव, ढाई साल बाद सिद्धारमैया ने दिया इस्तीफा, अब डीके शिवकुमार संभालेंगे मुख्यमंत्री की कुर्सी

The News Air Team by The News Air Team
गुरूवार, 28 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय, सियासत
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Karnataka CM Siddaramaiah
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Karnataka CM Resignation: कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आज सुबह एक महत्वपूर्ण ब्रेकफास्ट मीटिंग के दौरान अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। अब उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। यह वही नेता हैं जो लंबे समय से मुख्यमंत्री पद की दावेदारी कर रहे थे।

देखा जाए तो यह फैसला अचानक नहीं है। 2023 में जब कांग्रेस ने कर्नाटक में सरकार बनाई थी, तभी से अटकलें लगाई जा रही थीं कि रोटेशन बेसिस पर मुख्यमंत्री बदले जाएंगे। आज वही हकीकत बन गया। ढाई साल के कार्यकाल के बाद सिद्धारमैया अपनी कुर्सी डीके शिवकुमार को सौंपने के लिए तैयार हैं।

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ब्रेकफास्ट मीटिंग में हुआ बड़ा ऐलान

आज सुबह कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक खास ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई थी। इस बैठक में कांग्रेस पार्टी के सीनियर लीडर्स और मंत्री मौजूद थे। यह कोई साधारण सामाजिक मुलाकात नहीं थी। इसी बैठक में सिद्धारमैया ने खुलकर यह घोषणा कर दी कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं।

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दिलचस्प बात यह है कि इस मीटिंग में उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी शामिल थे। और क्यों न होते, आखिर वही तो अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया तब हुई है जब दिल्ली में कांग्रेस हाई कमान के साथ कई दौर की बातचीत पहले ही हो चुकी थी। शिवकुमार के समर्थक लगातार दबाव बना रहे थे कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाए।

समझने वाली बात यह है कि यह सत्ता का औपचारिक हस्तांतरण है। कांग्रेस पार्टी ने अपने अंदरूनी समीकरणों को साध लिया है। यह पावर ट्रांजिशन कर्नाटक कांग्रेस में एक नए युग की शुरुआत करने जा रहा है।

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कर्नाटक कांग्रेस के लिए क्यों अहम है?

अगर गौर करें तो कर्नाटक कांग्रेस पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है। पूरे देश में आज कांग्रेस के पास बहुत कम राज्य बचे हैं। ज्यादातर जगहों पर बीजेपी की सरकारें हैं। ऐसे में कर्नाटक वो राज्य है जहां कांग्रेस ने सीधे बीजेपी को हराकर सत्ता हासिल की है।

वित्तीय और राजनीतिक, दोनों ही दृष्टि से कर्नाटक का महत्व बहुत बड़ा है। यह कांग्रेस पार्टी के लिए एक मजबूत गढ़ बन चुका है। यह राज्य कांग्रेस के लिए एक फ्यू स्टेट्स में से एक है जहां उनकी पूर्ण बहुमत की सरकार है।

अगर यहां कोई अस्थिरता आती है तो इसका असर राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की एकता पर भी पड़ सकता है। 2029 में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को अपने इस गढ़ को संभालना बेहद जरूरी है।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि कर्नाटक केवल एक राज्य की समस्या नहीं है। इसके राष्ट्रीय निहितार्थ हैं। इसी वजह से यह खबर इतनी महत्वपूर्ण है।

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2023 के चुनाव में क्या हुआ था?

साल 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव हुए थे। अगला चुनाव 2028 के अंत में होगा। लेकिन 2023 में जब चुनाव हुआ था तो कांग्रेस को शानदार जीत मिली थी।

पार्टीसीटें
कांग्रेस135
बीजेपी66
जेडीएस19

यह बड़े अंतर से जीत थी। लेकिन जीत के बाद असली संघर्ष शुरू हुआ – मुख्यमंत्री कौन बनेगा? दो दावेदार थे। एक थे सिद्धारमैया और दूसरे थे डीके शिवकुमार। दोनों ही मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक थे। शिवकुमार के समर्थकों ने काफी दबाव डाला था।

कांग्रेस हाई कमान के सामने बड़ी दुविधा थी। सिद्धारमैया चुनावी रूप से बेहद लोकप्रिय थे। लेकिन डीके शिवकुमार ने कर्नाटक में कांग्रेस को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके पास अच्छा-खासा पैसा और संगठनात्मक ताकत है।

आखिरकार एक समझौता हुआ। तय किया गया कि अभी के लिए सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बनेंगे और शिवकुमार उप-मुख्यमंत्री। रूमर्स थीं कि यह रोटेशन बेसिस पर होगा। यानी आधे कार्यकाल के बाद बदलाव होगा। और अब ठीक ढाई साल बाद यही हो रहा है।

डीके शिवकुमार कौन हैं?

डीके शिवकुमार कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली संगठनात्मक नेताओं में से एक हैं। वे कर्नाटक की प्रमुख वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, जो राज्य की प्रभावशाली कृषक जाति है।

उनकी ताकत कहां है? संगठन पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत है। उन्होंने कर्नाटक कांग्रेस को दोबारा खड़ा किया। विधायकों को मैनेज करना हो, चुनाव अभियान चलाना हो या गठबंधन संभालना हो – सब में वे माहिर हैं।

और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। 2019 में जब महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट आया था, तब कांग्रेस ने सबसे पहले डीके शिवकुमार को ही याद किया। बीजेपी अपनी तरफ विधायक खींच रही थी। ऐसे में शिवकुमार ने महाराष्ट्र के विधायकों को कर्नाटक में रिसॉर्ट में सुरक्षित रखा था।

यही है उनकी ख्याति – संकट प्रबंधक के रूप में। जब भी रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की बात आती है, डीके शिवकुमार का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उन्होंने विधायकों को बचाने का काम बेहतरीन तरीके से किया था।

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अब शिवकुमार को क्यों बनाया जा रहा है CM?

देखा जाए तो डीके शिवकुमार के शिविर से लगातार दबाव बन रहा था। ढाई साल हो चुके थे। उनके समर्थकों में बेचैनी थी कि कब तक इंतजार करेंगे।

हाई कमान भी चीजों को संतुलित करना चाहता था। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा – सभी यह चाहते थे कि मामला बढ़ने से पहले ही हल हो जाए। दिल्ली में कई राउंड्स ऑफ टॉक्स हुए इस मुद्दे पर।

साथ ही, भविष्य के चुनावों को देखते हुए भी यह फैसला समझदारी भरा है। 2028 में कर्नाटक में फिर से चुनाव होंगे। सत्ताधारी दल के खिलाफ असंतोष का खतरा हमेशा रहता है। ऐसे में पहले ही नया चेहरा ले आना बेहतर रणनीति है।

बीजेपी भी यही करती रही है। उत्तराखंड हो या गुजरात – कई बार मुख्यमंत्री बदल दिए। इससे असंतोष कम होता है। लगता है कांग्रेस भी यही रणनीति अपना रही है। एंटी-इनकंबेंसी को रोकने के लिए यह एक स्मार्ट मूव है।

संवैधानिक प्रक्रिया क्या होगी?

हमारी संसदीय प्रणाली में मुख्यमंत्री सबसे पहले राज्यपाल को इस्तीफा सौंपते हैं। फिर कांग्रेस विधायक दल अपना नया नेता चुनता है। यहां चुनाव की जरूरत नहीं है क्योंकि कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत है।

कांग्रेस लेजिस्लेचर पार्टी सबसे संभावित रूप से डीके शिवकुमार को नया नेता चुनेगी। उसके बाद राज्यपाल उन्हें नई सरकार बनाने के लिए बुलाएंगे। फिर अनुच्छेद 164 के तहत उनका मुख्यमंत्री पद का शपथ ग्रहण होगा।

कहने का मतलब साफ है कि प्रक्रिया बिल्कुल संवैधानिक और पारदर्शी तरीके से होगी। कोई विवाद या अस्थिरता का मामला नहीं है।

राज्यपाल की अनुपस्थिति का सवाल

कई समाचारों में यह चर्चा हो रही है कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत अभी कर्नाटक में नहीं हैं। बुधवार सुबह 10:30 बजे वे बेंगलुरु से इंदौर के लिए निकल गए थे। पारिवारिक आपातकाल बताया जा रहा है। अभी तक वे वापस नहीं लौटे हैं।

तो अब सवाल उठता है – क्या राज्यपाल की मौजूदगी जरूरी है?

जवाब है – नहीं। संविधान में कहीं नहीं लिखा कि राज्यपाल को राजभवन में ही होना जरूरी है। इस्तीफा हाथों-हाथ सौंपना अनिवार्य नहीं है। संविधान संचार पर जोर देता है, भौतिक उपस्थिति पर नहीं।

संभव है कि आधिकारिक लिखित संचार के जरिए यह काम हो जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय मुख्य सचिव के माध्यम से राजभवन अधिकारियों को इस्तीफा भेज सकता है। राज्यपाल इंदौर से ही इसे स्वीकार कर सकते हैं।

बाद में जब राज्यपाल वापस आएंगे, तब औपचारिकताएं पूरी होंगी। डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण समारोह तब आयोजित किया जाएगा। तब तक सिद्धारमैया कार्यवाहक सरकार के रूप में काम संभाल सकते हैं।

सरकार नहीं रुक सकती

हमारे लोकतांत्रिक सिद्धांतों में एक बात साफ है – शासन नहीं रुक सकता सिर्फ इसलिए कि कोई पदाधिकारी यात्रा पर है। मान लीजिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विदेश दौरे पर हैं। क्या इसका मतलब यह है कि भारत में कोई इस्तीफा नहीं दे सकता? कोई नियुक्ति नहीं हो सकती? बिल्कुल नहीं।

अगर ऐसा होता तो शासन पंगु हो जाता। आपात स्वीकृतियां नहीं मिल पातीं। इसीलिए संविधान में यह लचीलापन रखा गया है। काम आसानी से आगे बढ़ सके, यही उद्देश्य है।

संवैधानिक सिद्धांत यही है – गवर्नेंस कैन नॉट स्टॉप मेयरली बिकॉज एन ऑफिस होल्डर इज ट्रैवलिंग। शासन जारी रहना चाहिए, चाहे कुछ भी हो।

कैबिनेट का क्या होगा?

भारत में सामूहिक जवाबदेही की प्रणाली चलती है। संसदीय लोकतंत्र में मंत्रिपरिषद मुख्यमंत्री की वजह से ही अस्तित्व में रहती है। अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा देते हैं तो पूरी मंत्रिपरिषद गिर जाती है।

यह समझना जरूरी है। मंत्री मुख्यमंत्री की सलाह पर नियुक्त होते हैं। इसलिए जब डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनेंगे तो वे अपनी खुद की कैबिनेट बनाएंगे। कौन-कौन मंत्री होगा, कौन उनके वफादार होंगे – यह सब नए सिरे से तय होगा।

काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स चीफ मिनिस्टर की एडवाइस पर अपॉइंटेड होते हैं। तो पूरी कैबिनेट में फेरबदल की पूरी संभावना है। यह कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने वाला है।

जानें पूरा मामला

2023 के चुनावों में जब कांग्रेस को भारी जीत मिली, तभी से यह तय था कि सत्ता साझेदारी का फॉर्मूला अपनाया जाएगा। सिद्धारमैया अनुभवी और लोकप्रिय चेहरे थे। लेकिन डीके शिवकुमार संगठनात्मक रूप से बेहद मजबूत थे।

दोनों के बीच संतुलन बनाना कांग्रेस की मजबूरी थी। अगर किसी एक को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाता तो आंतरिक विद्रोह का खतरा था। फैक्शनल पॉलिटिक्स से पार्टी को बचाना जरूरी था।

इसलिए ढाई साल सिद्धारमैया को और अब बाकी समय शिवकुमार को देने का फॉर्मूला अपनाया गया। यह कर्नाटक कांग्रेस की आंतरिक राजनीति का सबसे बड़ा खेल था।

अब देखना होगा कि डीके शिवकुमार अपने कार्यकाल में क्या कमाल दिखाते हैं और 2028 के चुनावों के लिए कांग्रेस को कैसे तैयार करते हैं। उनकी संगठनात्मक क्षमता की असली परीक्षा अब शुरू होगी।


मुख्य बातें (Key Points)

• कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आज ब्रेकफास्ट मीटिंग में इस्तीफे का ऐलान किया

• उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार अब कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे

• 2023 में कांग्रेस की जीत के बाद रोटेशन बेसिस पर यह बदलाव तय था

• राज्यपाल थावरचंद गहलोत की अनुपस्थिति में भी संवैधानिक प्रक्रिया जारी रहेगी

• कर्नाटक कांग्रेस के लिए राजनीतिक और वित्तीय रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्य है

• मुख्यमंत्री बदलने से पूरी मंत्रिपरिषद भी बदल जाएगी, नई कैबिनेट का गठन होगा


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: डीके शिवकुमार कब मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे?

उत्तर: आधिकारिक तौर पर शपथ ग्रहण की तारीख की घोषणा अभी नहीं हुई है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत के वापस लौटने के बाद औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। हालांकि प्रक्रिया जल्द ही पूरी होने की उम्मीद है। कुछ सूत्रों के अनुसार यह इस सप्ताह के अंत तक हो सकता है।

प्रश्न 2: क्या सिद्धारमैया का इस्तीफा पार्टी के अंदरूनी विवाद की वजह से है?

उत्तर: नहीं, यह पहले से तय योजना का हिस्सा है। 2023 में जब सरकार बनी थी तभी रोटेशन बेसिस पर मुख्यमंत्री बदलने की बात हुई थी। ढाई साल बाद अब यह योजना अमल में आ रही है। यह आंतरिक समझौते का परिणाम है, विवाद का नहीं। कांग्रेस हाई कमान ने दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाने के लिए यह फॉर्मूला अपनाया था।

प्रश्न 3: क्या इस बदलाव से कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर कोई असर पड़ेगा?

उत्तर: कांग्रेस के पास विधानसभा में पूर्ण बहुमत है (135 सीटें)। इसलिए सरकार की स्थिरता पर कोई खतरा नहीं है। हालांकि नई कैबिनेट का गठन होगा और कुछ नीतिगत बदलाव हो सकते हैं। डीके शिवकुमार को संगठनात्मक कौशल के लिए जाना जाता है, इसलिए प्रशासन मजबूत रह सकता है। कल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी।

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