Census Teacher Paralysis Punjab: लुधियाना में अत्यधिक गर्मी में घर-घर जाकर मरदमशुमारी (जनगणना) का काम करते समय एक ETT (Elementary Teacher Training) अध्यापक को कथित तौर पर लकवा (Paralysis) का दौरा पड़ गया है। इसके बाद मरदमशुमारी की ड्यूटी में लगे सरकारी कर्मचारियों के काम के हालात और उनके साथ किए जा रहे व्यवहार पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, सरकारी प्राइमरी स्कूल इंदरपुरी मंगट-II में तैनात ETT अध्यापक राम सिंह मंगलवार सुबह भामिया कलां इलाके में मरदमशुमारी से संबंधित फील्ड का काम कर रहे थे, जब ड्यूटी के दौरान वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। और बस यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा घटनाक्रम जो पंजाब में सरकारी कर्मचारियों के साथ हो रहे व्यवहार की असलियत उजागर करता है।
साथी अध्यापकों और स्थानीय निवासियों ने बताया कि जब उन्हें यह दौरा पड़ा, उस समय वह भयानक गर्मी के मौसम में अकेले ही घरों की गिनती का काम कर रहे थे।
क्या हुआ उस दिन? घटना का पूरा विवरण
सूत्रों ने बताया कि मोगा जिले के रहने वाले यह अध्यापक अपनी स्कूल की ड्यूटी पूरी करने के बाद मरदमशुमारी के काम के लिए गए थे।
देखा जाए तो यह दोहरी जिम्मेदारी थी – पहले स्कूल में पढ़ाना, फिर चिलचिलाती धूप में जनगणना करना।
साथी कर्मचारियों ने दोष लगाया कि सीनियर अधिकारियों को सूचित करने के बावजूद विभाग की ओर से एंबुलेंस का कोई प्रबंध नहीं किया गया और बीमार अध्यापक को निजी वाहनों की मदद से अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
अगर गौर करें तो यह एक सरकारी कर्मचारी के साथ हुई लापरवाही का मामला है।
₹60,000 के इंजेक्शन की सलाह, फिर फरीदकोट रेफर
अध्यापकों ने दावा किया कि राम सिंह को पहले नजदीकी निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने कथित तौर पर लगभग ₹60,000 की कीमत वाले एक टीके (इंजेक्शन) की सलाह दी, जो वहां उपलब्ध नहीं था।
बाद में उन्हें इलाज के लिए फरीदकोट रेफर कर दिया गया। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही थी।
पीड़ित से बाद में बात करने वाले एक अध्यापक ने बताया कि राम सिंह की सेहत खराब लग रही थी और आखिर वह विभाग की ओर से बिना किसी सरकारी चिकित्सा सहायता के एक निजी वाहन में अपने जन्मस्थान (जद्दी पिंड) के लिए रवाना हो गए।
उस अध्यापक ने कहा: “कोई एंबुलेंस नहीं मंगवाई गई। हम इस घटना के बारे में पूरे लिखित विवरण इकट्ठे करने की कोशिश कर रहे हैं।”
| घटनाक्रम | विवरण |
|---|---|
| घटना की तारीख | मंगलवार सुबह |
| स्थान | भामिया कलां, लुधियाना |
| पीड़ित | राम सिंह (ETT शिक्षक, इंदरपुरी मंगट-II) |
| समस्या | लकवा (Paralysis) का दौरा |
| विभागीय मदद | कोई एंबुलेंस नहीं भेजी गई |
| इलाज की लागत | ₹60,000 का इंजेक्शन सुझाया गया |
| अंतिम रेफरल | फरीदकोट |
गुलजिंदर कौर का मामला: बीमार होने पर भी FIR के आदेश
इस दौरान Democratic Teachers Front (DTF) लुधियाना ने मरदमशुमारी की ड्यूटी में लगे कर्मचारियों की कथित मानसिक परेशानी और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई की सख्त निंदा की है।
यूनियन ने सरकारी हाई स्कूल, उप्पल में तैनात पंजाबी मिस्ट्रेस गुलजिंदर कौर के केस का हवाला दिया।
उनके मामले में क्या हुआ?
गुलजिंदर कौर ने कथित तौर पर विभाग को सूचित किया था कि वह अस्वस्थ (बीमार) हैं और मरदमशुमारी की किट लेने में असमर्थ हैं।
इसके बावजूद उन्हें कथित तौर पर नोटिस जारी किए गए और बाद में FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
दिलचस्प बात यह है कि यूनियन ने आगे दोष लगाया कि उक्त अध्यापिका को 27 अप्रैल को जारी एक सरकारी पत्र के जरिए पहले ही ड्यूटी से छूट दी जा चुकी थी क्योंकि वह अक्टूबर 2026 में सेवानिवृत्त होने वाली हैं।
फिर भी उन पर कार्रवाई क्यों?
यह सवाल शिक्षक संगठनों ने उठाया है।
Democratic Teachers Front का गुस्सा: “अमानवीय और असंवेदनशील रवैया”
एक संयुक्त बयान में DTF के जिला प्रधान रमनजीत सिंह संधू और जनरल सेक्रेटरी रुपिंदर पाल सिंह गिल ने कहा कि प्रशासन कर्मचारियों के प्रति “अमानवीय और असंवेदनशील” रवैया अपना रहा है।
उन्होंने दोष लगाया कि स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे कई अन्य कर्मचारी भी ऐसे ही दबाव के तहत हो सकते हैं।
समझने वाली बात यह है कि यह सिर्फ एक या दो मामले नहीं हैं। यह एक व्यापक समस्या का संकेत है।
ADC पूनम सिंह का जवाब: कंट्रोल रूम स्थापित किए गए
ADC (Additional District Commissioner) पूनम सिंह ने कहा कि मरदमशुमारी की ड्यूटी पर तैनात अध्यापकों के लिए एमरजेंसी मेडिकल सेवाओं के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।
लेकिन राम सिंह के मामले में यह कंट्रोल रूम काम क्यों नहीं आया?
यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है।
शिक्षक संगठनों की मांगें: तत्काल राहत चाहिए
इस घटना ने शिक्षक संगठनों में भारी रोष पैदा कर दिया है, जिन्होंने मांग की है कि सरकार:
1. उचित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करे:
हर फील्ड टीम के साथ चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो।
2. मानवीय कामकाजी हालात:
चिलचिलाती गर्मी में काम के घंटे कम किए जाएं, पानी-छाया की व्यवस्था हो।
3. जबरदस्ती कार्रवाई वापस ली जाए:
बीमार कर्मचारियों के खिलाफ FIR और नोटिस वापस लें।
4. एंबुलेंस की व्यवस्था:
हर जनगणना क्षेत्र में तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध हो।
पंजाब में गर्मी का कहर: क्या Census Timing गलत है?
पंजाब में मई-जून के महीने में तापमान 45-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसे में फील्ड में जाकर जनगणना करना एक चुनौतीपूर्ण काम है।
सवाल उठता है: क्या जनगणना की टाइमिंग सही चुनी गई है?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह काम अक्टूबर-नवंबर या फरवरी-मार्च में करवाया जाना चाहिए जब मौसम सुहावना हो।
लेकिन सरकार ने मई में ही यह अभियान शुरू किया।
दोहरी ड्यूटी का बोझ: पहले स्कूल, फिर जनगणना
राम सिंह जैसे कई शिक्षकों को दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है:
सुबह: स्कूल में पढ़ाना
दोपहर/शाम: जनगणना का काम
यह शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाला है।
चिंता का विषय यह है कि कई शिक्षक उम्रदराज हैं। उन्हें इतना शारीरिक श्रम करना मुश्किल हो रहा है।
आम आदमी पर असर: जनगणना जरूरी, लेकिन कर्मचारियों की सुरक्षा भी
जनगणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है। इससे सरकार को नीतियां बनाने में मदद मिलती है।
लेकिन इस काम को करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
राम सिंह का मामला यह दर्शाता है कि सरकार अपने ही कर्मचारियों के प्रति लापरवाह है।
राहत की बात यह है कि शिक्षक संगठन आवाज उठा रहे हैं। लेकिन सरकार को भी संवेदनशील होना होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- लुधियाना में जनगणना करते ETT शिक्षक राम सिंह को लकवा (Paralysis) का दौरा पड़ा
- भयानक गर्मी में अकेले घर-घर जाकर काम कर रहे थे
- विभाग ने एंबुलेंस नहीं भेजी, निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाया गया
- ₹60,000 के इंजेक्शन की सलाह, फिर फरीदकोट रेफर किया गया
- गुलजिंदर कौर (उप्पल स्कूल) को बीमार होने पर भी FIR के निर्देश
- Democratic Teachers Front ने “अमानवीय और असंवेदनशील” रवैये की निंदा की
- शिक्षक संगठनों ने उचित चिकित्सा सहायता और मानवीय कामकाजी हालात की मांग की
- ADC पूनम सिंह ने कहा कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं
- राम सिंह मोगा जिले के रहने वाले, स्कूल ड्यूटी के बाद जनगणना कर रहे थे
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