Anand Marriage Act के तहत अब सिक्किम में भी सिख दंपति अपनी शादियां रजिस्टर करा सकेंगे। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार के बाद सिक्किम सरकार ने आखिरकार 1 जून 2026 से इस कानून को लागू करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
दरअसल, आनंद मैरिज एक्ट 1909 से ही देश में मौजूद था, लेकिन सिक्किम ने इसे अपने यहां लागू करने में दशकों की देरी की। अब जाकर सिख समुदाय को अपनी पारंपरिक ‘आनंद कारज’ रस्म को कानूनी मान्यता मिल पाई है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लड़ी गई लड़ाई
समझने वाली बात यह है कि यह जीत आसान नहीं थी। सिक्किम के रहने वाले अमनजोत सिंह चड्ढा ने इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 (Article 32) के तहत जनहित याचिका दायर की थी।
अपनी याचिका में उन्होंने मांग की थी कि जिन राज्यों ने अभी तक आनंद मैरिज एक्ट को लेकर अपने नियम तय नहीं किए हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सख्त आदेश जारी किया जाए।
दिलचस्प बात यह है कि सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। और अब 2026 में उसके सुखद परिणाम सामने आने लगे हैं।
1909 का कानून, लेकिन रजिस्ट्रेशन का प्रावधान नहीं था
अगर गौर करें तो आनंद विवाह अधिनियम मूल रूप से ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1909 में बनाया गया था। लेकिन उस समय इस कानून में शादियों को कानूनी रूप से ‘रजिस्टर’ करने का कोई प्रशासनिक ढांचा या नियम शामिल नहीं था।
यानी कानून तो था, लेकिन उसे जमीन पर लागू करने की व्यवस्था नहीं थी। यह एक बड़ी खामी थी। इसी वजह से सिख समुदाय दशकों तक परेशान रहा।
2012 में संशोधन, लेकिन राज्यों ने दिखाई ढिलाई
सिख समुदाय की दशकों पुरानी मांग को देखते हुए 2012 में भारतीय संसद ने इस कानून में एक बड़ा संशोधन किया। इसमें ‘धारा 6’ जोड़ी गई।
इस संशोधन के जरिए केंद्र सरकार ने देश की सभी राज्य सरकारों को जिम्मेदारी सौंपी कि वे अपने-अपने राज्यों में इस एक्ट के तहत शादियों के रजिस्ट्रेशन के लिए स्थानीय नियम (Rules) और नियमावली तैयार करें।
लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि संसद से संशोधन पास होने के बावजूद सिक्किम सहित कई राज्य सरकारों ने सालों तक अपने यहां ‘आनंद मैरिज रजिस्ट्रेशन रूल्स’ को नोटिफाई ही नहीं किया।
फाइलें दबी रहीं। स्थानीय स्तर पर कोई नियम न होने के कारण वहां के प्रशासनिक अधिकारी सिखों की शादी को इस एक्ट के तहत दर्ज करने से मना कर देते थे।
सिखों की मजबूरी: हिंदू मैरिज एक्ट के तहत करना पड़ता था रजिस्ट्रेशन
सिक्किम में नियम न होने के कारण वहां के सिख जोड़ों को भारी मन से अपने पारंपरिक ‘आनंद कारज’ विवाह को हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 या सिक्किम के पुराने स्थानीय विवाह नियमों (1963) के तहत रजिस्टर कराना पड़ता था।
सिख समुदाय का मानना था कि यह उनकी धार्मिक पहचान और परंपराओं के साथ एक तरह का समझौता है। इसी विवशता और प्रशासनिक सुस्ती को खत्म करने के लिए अमनजोत सिंह चड्ढा को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट की दो बार फटकार, तब जाकर हुई कार्रवाई
मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, तब भी सिक्किम सरकार ने इसे लागू नहीं किया। जब सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा सरकार को फटकार लगाई, तब जाकर अधिसूचना जारी हुई।
सिक्किम सरकार ने आनन-फानन में स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए ‘सिक्किम आनंद मैरिज रजिस्ट्रेशन रूल्स, 2026’ को तैयार किया।
इसके बाद ही केंद्रीय कानून मंत्रालय ने 14 मई को अधिसूचना जारी कर 1 जून 2026 से इसे लागू करने की तारीख मुकर्रर की।
अब पूरे देश में एक समान कानून
देखा जाए तो अब पूरे भारत में आनंद मैरिज एक्ट के तहत सिख दंपति अपनी शादी रजिस्टर करा सकेंगे। यह सिख समुदाय के लिए बड़ी जीत है।
इससे न सिर्फ उनकी धार्मिक पहचान को सम्मान मिलेगा, बल्कि कानूनी प्रक्रिया भी सरल हो जाएगी। अब किसी सिख जोड़े को अपनी शादी को हिंदू मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर कराने की मजबूरी नहीं होगी।
1 जून से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन, सिख समुदाय में खुशी
1 जून 2026 से सिक्किम में सिख दंपति मैरिज रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। सिख समुदाय के लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
कई सिख संगठनों ने इसे ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई दशकों से चल रही थी और आखिरकार न्याय मिला है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय: यह संवैधानिक अधिकार था
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक मामला नहीं था, बल्कि यह सिखों का संवैधानिक अधिकार था।
संविधान सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार जीने का अधिकार देता है। आनंद मैरिज एक्ट को लागू न करना इस अधिकार का उल्लंघन था।
अब जब यह कानून पूरे देश में लागू हो गया है, तो यह धार्मिक समानता और न्याय की जीत है।
मुख्य बातें (Key Points):
- Anand Marriage Act अब सिक्किम में भी 1 जून 2026 से लागू होगा
- सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सिक्किम सरकार ने जारी की अधिसूचना
- अमनजोत सिंह चड्ढा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका
- 1909 से था कानून, लेकिन रजिस्ट्रेशन का प्रावधान नहीं था
- 2012 में संशोधन हुआ, लेकिन राज्यों ने दिखाई ढिलाई
- अब पूरे देश में सिख दंपति आनंद कारज को करा सकेंगे रजिस्टर













