PM Modi Economic Appeal – यह सिर्फ एक राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के लिए एक राष्ट्रीय सलाह है। और जब प्रधानमंत्री ऐसी बातें कहें, तो समझ जाइए कि स्थिति गंभीर है।
Prime Minister Narendra Modi ने Hyderabad में अपने हालिया भाषण में कुछ ऐसा कह दिया जिसकी वजह से पूरे देश में खलबली मच गई। मतलब इस तरह की चीजें जनरली इमरजेंसी के समय कही जाती हैं।
जैसे आप देख सकते हो – खबर Work From Home को लेकर उन्होंने पुश किया। उन्होंने कहा कि जो फॉरेन ट्रैवल है और जो गोल्ड परचेज है, उसको अवॉइड करो। मतलब इस तरह की चीजें बहुत रेयर देखने को मिलती हैं।
क्यों की PM Modi ने यह अपील? गंभीरता का संकेत
तो कहीं न कहीं यह गंभीरता को भी दिखाता है कि अगर प्रधानमंत्री ऐसी बातें कर रहे हैं, तो क्या एक बड़ा मेजर लेने जा रही है सरकार? मतलब क्या यह एक वार्निंग साइन है?
देखा जाए तो जनरली हाल के वर्षों में अगर आप देखेंगे, तो प्रधानमंत्री मोदी इस तरह की अगर कोई चीजें कह रहे हैं, तो एक्चुअल में कोई बहुत बड़ा संकट है। जैसे कोरोना के समय अगर आपको याद होगा, तो यह कोई जस्ट एक पॉलिटिकल स्पीच नहीं था।
मतलब एक नेशनल एडवाइजरी था हर एक नागरिक के लिए। चाहे वो एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर हो, फॉरेन एक्सचेंज को लेकर हो, इनफ्लेशन को लेकर हो।
West Asia Crisis और Strait of Hormuz का असर
और यह जो स्पीच है, वो उसका बैकग्राउंड समझिए कि अभी अगर आप देखेंगे पूरी दुनिया में एक तो West Asia का कॉन्फ्लिक्ट चल रहा है। जो Strait of Hormuz है, वो डिसरप्ट हो गया है।
क्रूड ऑयल के प्राइसेस यहां पर बढ़ रहे हैं। भारत का जो इंपोर्ट बिल है, वो बहुत ज्यादा बढ़ता जा रहा है। और इसी की वजह से भारत के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में भी काफी प्रेशर आ रहा है।
अगर हम स्पेसिफिकली क्रूड ऑयल प्राइसेस की बात करें – गवर्नमेंट क्यों इतना ज्यादा चिंतित है? क्या है कि क्रूड ऑयल के प्राइसेस एक्चुअली वॉर के पहले आप देखेंगे तो $70 के भी नीचे था।
अब जस्ट इमेजिन – अगर यह ऑलमोस्ट डबल हो जाए $120-$125, तो ऑब्वियस सी बात है इसकी वजह से काफी प्रेशर आएगा इंडियन इकॉनमी के ऊपर।
एक डॉलर बढ़ा तो पूरी अर्थव्यवस्था पर असर
तो भारत की अगर हम बात करें, तो एक रुपया जब इनक्रीज होता है – एक डॉलर इनक्रीज होता है क्रूड ऑयल के प्राइसेस में – इसका मल्टीपल इंपैक्ट आपको भारत की इकॉनमी पर देखने को मिलता है।
जैसे ऑयल अगर आप देखेंगे तो इट अफेक्ट्स ऑलमोस्ट एवरीथिंग – चाहे वो आप ट्रांसपोर्ट की बात करो, एविएशन, लॉजिस्टिक, फार्मिंग, इलेक्ट्रिसिटी, मैन्युफैक्चरिंग, फूड डिस्ट्रीब्यूशन, फर्टिलाइजर्स, प्लास्टिक, केमिकल्स – हर एक सेक्टर के ऊपर इंपैक्ट आता है।
इंपोर्टेड इनफ्लेशन: बाहर से आया महंगाई का झटका
और इसको हम कहते हैं इंपोर्टेड इनफ्लेशन। इंपोर्टेड इनफ्लेशन का मतलब यह है कि एक्सटर्नल ग्लोबल फैक्टर्स की वजह से अगर हमारे देश में इनफ्लेशन हो रहा है – मतलब वो इनफ्लेशन जो बाहर की वजह से आ रहा है – तो उसको इंपोर्टेड इनफ्लेशन कहा जाता है।
अच्छा, यहां पर PM Modi ने क्या-क्या चीजों पर जिक्र किया है?
पहली अपील: Work From Home को अपनाएं
पहला – उन्होंने यहां पर सभी से यह निवेदन किया कि आप Work From Home का कल्चर ज्यादा अपनाइए। मतलब उन्होंने सभी सिटीजन्स को याद दिलाया कि जैसे कोविड के समय आप वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे, यहां पर जो कम्यूटिंग है वह कम कर रहे थे।
फ्यूल कंजम्पशन इसकी वजह से गिर गया था। ऑनलाइन जो मीटिंग्स हैं, उसकी वजह से ट्रैवल रिड्यूस हो गया था। डिजिटल सिस्टम में एफिशिएंसी ज्यादा आ रही थी।
तो यह सारी चीजें जो कोविड में आप अपना रहे थे, PM Modi उनका यही कहना था कि इसको भी आपको अभी अपनाना चाहिए।
वर्क फ्रॉम होम से बचेंगे अरबों डॉलर
और इसके पीछे का लॉजिक समझिए। अगर हम Work From Home की बात करते हैं तो मिलियन्स ऑफ वर्क रिमोटली हो सकता है। इनफैक्ट कोविड के पहले तो सोचा भी नहीं जाता था कि यह वर्क भी हम वर्क फ्रॉम होम कर सकते हैं।
लेकिन कोविड में जो सिचुएशन बदला, उससे हमें समझ में आया कि नहीं, यह एक्चुअल में पॉसिबल है। और यहां पर डीजल कंजम्पशन कम हो जाएगा। ट्रैफिक कंजेशन कम होगा। क्रूड जो इंपोर्ट बिल है, वो भी यहां पर गिर जाएगा।
तो छोटा सा रिडक्शन भी अगर होता है फ्यूल कंजम्पशन में, तो इसकी वजह से बिलियन्स जो है फॉरेन एक्सचेंज में यहां पर बचते हैं। और स्पेसिफिकली अगर आप देखेंगे तो यहां पर भारत क्योंकि क्रूड ऑयल के जो भी यहां पर खरीदारी करता है, उसको डॉलर में पे करता है। तो इससे भारत की काफी बचत हो सकती है।
दूसरी अपील: सोना खरीदने से बचें
इसके अलावा PM Modi ने यहां पर यह भी कहा कि लोग जिस तरह से गोल्ड खरीद रहे हैं, वो नहीं खरीदना चाहिए। मतलब यहां पर उन्होंने ऐसा नहीं कि कोई अभी ऑर्डर दे दिया गया है कि इतना ही गोल्ड खरीद सकते हो। ऐसा कुछ भी नहीं है।
उन्होंने बेसिकली अपील की है क्योंकि भारत अगर आप देखेंगे वर्ल्ड का लार्जेस्ट गोल्ड इंपोर्टर है। मतलब हमारे देश में गोल्ड होता नहीं है, लेकिन फिर भी गोल्ड चाहिए होता है।
अब अगर हमें गोल्ड खरीदना है बाहर के देशों से, तो इसकी वजह से हमें डॉलर पे करना होगा। फॉरेन एक्सचेंज करेंसी देना होगा। जो डॉलर आउटफ्लो है, वो बढ़ जाएगा। मतलब हमारे देश से डॉलर चला जाएगा। करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ेगा इसकी वजह से।
सोना है नॉन-प्रोडक्टिव एसेट
मतलब क्राइसिस के समय गवर्नमेंट यहां पर कोशिश करती है कि जो नॉन-एसेंशियल इंपोर्ट है – अब जैसे क्रूड ऑयल है, अब क्रूड ऑयल एक लेवल तक ही आप कम कर सकते हो।
लेकिन अगर आप गोल्ड नहीं मंगाओगे तो इससे कोई हमारा नुकसान थोड़ी हो रहा है, क्योंकि गोल्ड को जनरली नॉन-प्रोडक्टिव एसेट बोला जाता है। और क्योंकि यह इमोशन से जुड़ा है।
वेडिंग्स के समय ह्यूज क्वांटिटी में लोग खरीदते हैं। मिडिल क्लास जो है, वो यहां पर डिमांड करता है कई बार। फेस्टिव सीजन्स के दौरान इसकी डिमांड बढ़ जाती है।
तो PM Modi का बेसिकली एक इमोशनली और पेट्रियोटिकली अप्रोच था। यहां पर देश के नागरिकों को कह रहे थे कि प्लीज अगर आप यह अवॉइड कर सकते हो तो यहां पर मत खरीदो गोल्ड। इससे कुछ भी यहां पर हासिल नहीं होने वाला।
तीसरी अपील: फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व बचाएं
अच्छा, इसके अलावा यहां पर उन्होंने फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व – बेसिकली यह सारी चीजें अगर आप देखेंगे न, तो अल्टीमेटली फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व पर आकर ही अटकती हैं।
क्योंकि भारत को डॉलर चाहिए। चाहे हमें ऑयल खरीदना हो, इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदना हो, डिफेंस इंपोर्ट कुछ भी, गोल्ड से लेकर कुछ भी खरीदना हो। तो क्रूड के प्राइसेस अगर ज्यादा होंगे, तो भारत जो है वो ज्यादा डॉलर इन्वेस्टमेंट करेगा।
फॉरेक्स रिजर्व इसकी वजह से हमारा कम हो जाएगा। रुपी कमजोर होगा। और अगर रुपी कमजोर हुआ, तो इसकी वजह से हमारा इंपोर्ट फिर महंगा होगा, इनफ्लेशन होगा और RBI के ऊपर प्रेशर आएगा।
मतलब इसका आप डायरेक्ट इंपैक्ट देख सकते हो – यह जो भी PM Modi कह रहे हैं।
चौथी अपील: खाद्य तेल और उर्वरक आयात कम करें
इनफैक्ट अगर आप देखेंगे तो यहां पर उन्होंने यह तक भी कह दिया कि जो एडिबल ऑयल है और जो फर्टिलाइजर है, उसको लेकर भी हमें थोड़ा सा सावधानी बरतनी चाहिए।
तो उसमें बेसिकली क्या है न कि PM Modi ने यहां पर डिस्कस किया कि जो एडिबल ऑयल इंपोर्ट है – चाहे वो केमिकल फर्टिलाइजर, नेचुरल फार्मिंग, जो भी है यहां पर – यह दिखाता है कि जो गवर्नमेंट है, वो ब्रॉडली इंपोर्ट डिपेंडेंसी से हटना चाह रही है।
मतलब भारत का जो इंपोर्ट है न – चाहे पाम ऑयल हो, सनफ्लावर ऑयल हो, फर्टिलाइजर हो, पोटैश-फास्फेट हो – यह काफी कॉस्टली होते हैं। हमें इसके लिए डॉलर में पे करना होता है।
सो PM Modi ने इसको इकोनॉमिक रेजिलिएंस से लिंक कर दिया। रिड्यूस्ड इंपोर्ट से लिंक कर दिया। सस्टेनेबिलिटी से लिंक कर दिया। और एक नैरेटिव सेट करने की कोशिश की कि अगर हम इसका सही तरीके से इस्तेमाल करें, तो यहां पर भी पैसा बच सकता है।
पांचवीं अपील: विदेश यात्रा टालें
फिर इसके अलावा यहां पर एक बहुत – मतलब इनफैक्ट अगर आप देखेंगे तो जनरली यह कभी कहा नहीं जाता है कि आप फॉरेन ही मत जाओ। फॉरेन ट्रैवल को अवॉइड करो।
यहां पर उन्होंने सभी नागरिकों को कहा कि जो फॉरेन वेकेशन्स हैं, शादियां, अननेसेसरी जो फॉरेन ट्रैवल करते हैं साल में एक बार – इस चाहे जो भी चीजें हैं, उसको अभी के लिए पोस्टपोन कर दो।
PM Modi यह नहीं कह रहे हैं कि कभी जाओ ही मत, लेकिन एटलीस्ट अभी के लिए उसको पोस्टपोन कर दो। क्योंकि इंटरनेशनल ट्रैवल की वजह से फॉरेन एक्सचेंज भी कम होता है।
विदेश यात्रा से डॉलर का बहिर्गमन
क्योंकि लोग अक्सर आप देखेंगे – चाहे वो यूरोप, अमेरिका जब भी जाएंगे, तो यहां से डॉलर में कन्वर्ट करके ले जाते हैं। तो हमारा डॉलर तो जा ही रहा है न। और जो फॉरेन ट्रैवल है, वो तो बहुत ज्यादा इंपैक्ट करता ही है।
चाहे आप वहां एयरलाइन फ्यूल की बात करिए, होटल्स की बात करिए जो आप फॉरेन एक्सचेंज में पे करते हो। शॉपिंग अब किया जाता है, तो उसमें भी डॉलर खर्च होता है। टूरिज्म इंपोर्ट राइज होता है। तो बहुत सारे इसमें यहां पर इशूज हैं। तो अगेन उसकी तरफ भी उन्होंने इशारा किया।
छठी अपील: फ्यूल प्राइसेस पर हिडन मैसेज
अच्छा, यहां पर फ्यूल प्राइसेस को लेकर हिडन मैसेज क्या था? बेसिकली हिडन मैसेज यह था कि हमारे देश में जो इन – जो ऑयल मार्केटिंग कंपनीज हैं, OMCs जिनको बोला जाता है – चाहे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum – तो इनको बहुत ज्यादा लॉसेस हो रहा है।
लॉसेस इसीलिए हो रहा है – क्रूड ऑयल के प्राइसेस तो काफी बढ़ गए हैं इंटरनेशनली, लेकिन जो डोमेस्टिक रिटेल प्राइसेस है, वो उतना बढ़ नहीं पाया है। और इसी को कहा जाता है अंडर-रिकवरीज।
मतलब रियल कॉस्ट ऑफ पेट्रोल अगर ₹110 पर लीटर है, लेकिन भारत सरकार मजबूर कर रही है कि आप ₹100 के ऊपर नहीं बेच सकते। तो यहां पर यही हुआ कि जो बीच का ₹10 है, that is under-recovery.
ऑयल कंपनियां रोज ₹100 करोड़ का नुकसान उठा रहीं
तो एक प्रकार से यहां पर जो भारत का इतना ज्यादा फ्यूल कंजम्पशन है – नाउ जस्ट इमेजिन हर एक लीटर पर ₹10 अंडर-रिकवरी – मतलब देश में हर दिन कितने लाखों लीटर जो है यहां पर इस्तेमाल होते हैं।
तो ऑयल कंपनीज यहां पर टेन्स ऑफ थाउजेंड्स ऑफ करोड़ हर साल यहां पर लूज करें। हर महीने लूज कर रही हैं। इनफैक्ट आप देख सकते हो यहां पर जो खबर आई है: “Oil firms bleeding ₹100 crore daily to shield buyers from price high.”
और इवेंचुअली इसमें क्या होता है कि सरकार को कंपनसेट करना पड़ता है। सरकार कंपनसेट कहां से ला रही है? कोई घर से तो ला नहीं रही है। अल्टीमेटली यह पब्लिक का पैसा है। तो हमारे ऊपर ही इसका उल्टा कॉस्ट आता है।
सातवीं अपील: गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ सकती है
फिर इसके अलावा यहां पर गोल्ड इंपोर्ट के ऊपर जो उन्होंने बोला, तो हो सकता है कि बहुत जल्द ड्यूटी हाइक कर दिया जाए। अभी अगर आप देखेंगे गोल्ड इंपोर्ट पर इफेक्टिव जो इंपोर्ट ड्यूटी है, वो 6% है। 5% प्लस 1% एग्रीकल्चर सेस वगैरह हो गया।
तो यह अगेन जो भारत ने यहां पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाई है और लगाने वाले हैं और ज्यादा जो समझ में आ रहा है, तो उसका मेन मकसद यही है कि इंपोर्ट को कम किया जाए। क्योंकि अगर आप ज्यादा ड्यूटी लगाओगे, तो यहां पर लोग कम इंपोर्ट करना चाहेंगे।
डॉलर्स को कंजर्व करेंगे। जो फॉरेन फॉरेक्स रिजर्व है, उसको प्रोटेक्ट करेंगे। तो गवर्नमेंट यहां पर हो सकता है कि इस ड्यूटी में जो है इजाफा कर दे।
ड्यूटी बढ़ी तो स्मगलिंग भी बढ़ेगी
अच्छा, इजाफा करेगी तो ऑब्वियस सी बात है गोल्ड के प्राइसेस बढ़ेंगे। ज्वेलरी एक्सपेंसिव होगी। लेकिन इसका एक नेगेटिव इंपैक्ट यह होता है कि स्मगलिंग बढ़ जाती है।
क्योंकि जो स्मगलर्स हैं, उनको तो दिख रहा है न कि यह और बढ़ गया। मान लो यह 12% हो गया, तो उनको लगेगा कि कौन पे करे 11-12% – यहां पर स्मगलिंग कर लिया जाए। तो यह प्रॉब्लम है।
1991 के संकट से अलग है यह स्थिति
अच्छा, इसका हिस्टोरिकल कंपैरिजन भी लोग कर रहे हैं। मतलब 1991 के क्राइसिस से – देखो वो बहुत डिफरेंट क्राइसिस था। आप इसको इससे कंपेयर कर ही नहीं सकते।
मतलब उस समय तो फॉरेन रिजर्व हमारे पास हार्डली एक हफ्ते-दो हफ्ते तक के लिए बचा था। कुछ था ही नहीं। और यहां पर अल्टीमेटली हमें अपना जो गोल्ड है, वो भी गिरवी पर रखना पड़ा था। तो यह सारी चीजें थीं।
ऑलदो भारत ने वो सब पेमेंट पहले ही कंप्लीट कर लिया। लेकिन यहां पर 1991 के मुकाबले नो डाउट भारत की सिचुएशन काफी बेटर है। मच बेटर है।
अब ₹700 बिलियन का फॉरेक्स रिजर्व है
इनफैक्ट आप देख सकते हो जो फॉरेक्स रिजर्व है, वो ₹700 बिलियन के आसपास है। ₹700 बिलियन। और उस समय तो हार्डली 15 दिन का हमारे पास रिजर्व था।
अभी तो आप समझो कि लगभग 11-12 महीने तक का रिजर्व जो है, वो हमारे पास रखा हुआ है। और सिर्फ रिजर्व ही नहीं, यहां पर बैंकिंग सिस्टम आप देख लीजिए कितना स्ट्रांग हो गया है।
इकॉनमी जो है, मतलब काफी बड़ी हो गई है पहले के मुकाबले। एक्सपोर्ट कैपेसिटी बढ़ गया है। सर्विस सेक्टर काफी स्ट्रांग हो गया है।
लेकिन भारत भी वल्नरेबल है
लेकिन हां, भारत भी वल्नरेबल है – जैसे एनर्जी शॉक की वजह से, इंपोर्टेड इनफ्लेशन की वजह से जो मैंने आपको बताया।
अच्छा, यहां पर जो स्पीच है, वो पॉलिटिकली इतना इंपॉर्टेंट क्यों? क्योंकि मैंने आपको बताया था कि प्राइम मिनिस्टर रेयरली इस तरह की बातें अपने नागरिकों से कहते हैं।
जनरली क्या है कि पॉजिटिव बात करते हैं। ऐसा कोई दिक्कत नहीं है। सब ठीक है। लेकिन यहां पर – गोल्ड मत खरीदो, फॉरेन वेकेशन्स पोस्टपोन कर दो, फ्यूल कंजम्पशन कम कर दो।
यह पैनिक नहीं, बल्कि सतर्कता का संदेश है
तो यह कहीं न कहीं मैसेज दिखाता है। और कई बार हो सकता है कि पैनिकिक सिचुएशन भी क्रिएट हो जाए। तो वो वाली चीज तो नहीं है। लेकिन हां, यहां पर सतर्क रहना होगा कि एग्जैक्टली सरकार क्या करने जा रही है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि PM Modi की यह अपील किसी राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि आर्थिक यथार्थवाद का संकेत है। Strait of Hormuz की नाकेबंदी 75 दिन पूरे कर चुकी है। और जब तक यह संकट बना रहेगा, भारत को अपने विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करनी ही होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
• PM Modi ने हैदराबाद में भारतीयों से 7-सूत्री अपील की – Work From Home, विदेश यात्रा टालें, सोना न खरीदें और फ्यूल खपत कम करें
• Strait of Hormuz की 75 दिन की नाकेबंदी के कारण क्रूड ऑयल $70 से बढ़कर $120-125 तक पहुंच सकता है
• भारत वर्ल्ड का लार्जेस्ट गोल्ड इंपोर्टर है और हर साल अरबों डॉलर सोने के आयात पर खर्च करता है
• ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अंडर-रिकवरी की वजह से रोज ₹100 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं
• फॉरेक्स रिजर्व ₹700 बिलियन है जो 11-12 महीने का आयात कवर करता है, 1991 जैसी स्थिति नहीं है
• गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 12% तक की जा सकती है ताकि डॉलर आउटफ्लो रोका जा सके













