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The News Air - NEWS-TICKER - पंजाब Tax विभाग ने पकड़ा ₹15.56 करोड़ का GST घोटाला, लुधियाना फर्म के डायरेक्टर गिरफ्तार

पंजाब Tax विभाग ने पकड़ा ₹15.56 करोड़ का GST घोटाला, लुधियाना फर्म के डायरेक्टर गिरफ्तार

फर्जी बिलिंग का जाल: FASTag और E-way Bill से पकड़ी गई ₹85.4 करोड़ की सप्लाई, ₹15.56 करोड़ का ITC घोटाला

The News Air Team by The News Air Team
शुक्रवार, 8 मई 2026
in NEWS-TICKER, पंजाब
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Harpal Singh Cheema
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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की आर्थिक अपराधों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति की पुष्टि करते हुए, वित्त, आबकारी एवं कर मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां स्टेट इंटेलिजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट (SIPPU) द्वारा हासिल की गई एक बड़ी सफलता की घोषणा की।

कार्रवाई के विवरण साझा करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा, “आज कर विभाग ने एक बेहद संगठित फर्जी बिलिंग नेटवर्क को सफलतापूर्वक ध्वस्त करते हुए मैसर्स API प्लास्टिक रिसाइक्लर्स प्राइवेट लिमिटेड, लुधियाना के डायरेक्टर एवं अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता परमजीत सिंह को ₹85.4 करोड़ के फर्जी लेन-देन पर गलत तरीके से फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने और ₹15.56 करोड़ का बड़ा GST घोटाला करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।”

देखा जाए तो यह महज एक गिरफ्तारी नहीं थी। यह टेक्नोलॉजी और खुफिया तंत्र की जीत थी।

407 संदिग्ध वाहन आवागमन – कोई माल नहीं गया

जांच के बारे में विस्तार से बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “आरोपी फर्म योजनाबद्ध और संगठित टैक्स चोरी में शामिल थी। उन्होंने बिना वास्तविक रूप से माल प्राप्त किए, कई राज्यों में गैर-मौजूद और धोखाधड़ी वाली फर्मों द्वारा जारी किए गए फर्जी चालानों (बिलों) के आधार पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया।”

आगे खुलासा करते हुए आबकारी एवं कर मंत्री ने कहा, “हमारी खुफिया टीमों ने यह भी पाया कि लेन-देन में शामिल कई सप्लायर फर्मों को संबंधित GST अधिकारियों द्वारा पहले ही स्वतः रद्द, निलंबित या गैर-कार्यशील घोषित किया जा चुका था। अब तक सामने आई कुल धोखाधड़ी ₹15.56 करोड़ की है और यह आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है क्योंकि हमारी जांच अभी भी सख्ती से जारी है।”

समझने वाली बात यह है कि धोखाधड़ी के जटिल जाल का पर्दाफाश करते हुए आबकारी एवं कर मंत्री ने कहा, “मैं हमारे विभाग द्वारा e-way बिलों और FASTag टोल डेटा के किए गए विस्तृत विश्लेषण की सराहना करता हूं। इस विश्लेषण ने निर्णायक रूप से यह साबित कर दिया कि ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों में दर्शाए गए वाहन माल की घोषित आवाजाही से बिल्कुल मेल न खाने वाले स्थानों पर पाए गए थे, जो यह साबित करता है कि वास्तव में कोई ढुलाई नहीं हुई थी।”

दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कहा, “हमारी जांच में ऐसे 407 अत्यधिक संदिग्ध वाहन आवागमन का खुलासा हुआ है, जिनमें ₹2.65 करोड़ से अधिक का फर्जी ITC शामिल है।”

FASTag और E-way Bill के जरिए पकड़ी गई धोखाधड़ी

यहां ध्यान देना होगा कि पंजाब टैक्स विभाग ने एडवांस डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करके यह साबित किया कि जिन वाहनों के बारे में दावा किया गया था कि वे माल ले जा रहे थे, वे वास्तव में उन रूट्स पर थे ही नहीं।

FASTag टोल डेटा ने यह स्पष्ट कर दिया कि वाहन कहां-कहां से गुजरे और e-way bill में जो रूट दिखाया गया था, वह पूरी तरह झूठा था। यह टेक्नोलॉजी और पारंपरिक खुफिया तंत्र का शानदार संयोजन था।

डेबिट नोट में भी जालसाजी – ₹5.79 करोड़ का फर्जी ITC

आबकारी एवं कर मंत्री चीमा ने दस्तावेजों की जालसाजी की गंभीरता को उजागर करते हुए कहा, “हमारी जांच में धोखाधड़ी वाले डेबिट नोटों को शामिल करने के एक नए तरीके का भी खुलासा हुआ है, जिसके जरिए लगभग ₹5.79 करोड़ का अतिरिक्त फर्जी ITC तैयार किया गया था।”

“इन डेबिट नोटों में बड़ी अनियमितताएं थीं, जिनमें टैक्स योग्य मूल्य और टैक्स की राशि को बराबर दर्शाया गया था। GST कानून के तहत यह असंभव है और यह स्पष्ट रूप से फर्जी ITC पैदा करने के लिए रिकॉर्ड में खुली हेराफेरी को साबित करता है,” मंत्री ने कहा।

इसके अलावा, PGST/CGST Act की धारा 67 के तहत की गई तलाशी कार्रवाई के दौरान करदाता के ठिकाने से विभिन्न ट्रांसपोर्टरों की खाली गुड्स रसीद पुस्तिकाएं बरामद की गईं, जो आवाजाही का झूठा रिकॉर्ड तैयार करने के लिए ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों की जालसाजी की ओर संकेत करती हैं।

गैर-जमानती अपराध, 5 साल तक की सजा संभव

टैक्स चोरों को सख्त संदेश देते हुए आबकारी एवं कर मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “जांच के दौरान एकत्र किए गए ठोस सबूतों के मद्देनजर आरोपी को आज, 8 मई 2026 को पंजाब गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट, 2017 की धाराओं 69 और 132(1)(c) के तहत गिरफ्तार किया गया है।”

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“चूंकि टैक्स चोरी की राशि ₹5 करोड़ से कहीं अधिक है, इसलिए यह अपराध गंभीर और गैर-जमानती है तथा इसके लिए जुर्माने के साथ पांच वर्ष तक की कैद की सजा हो सकती है,” उन्होंने कहा।

जानें पूरा मामला – कैसे काम करता था यह रैकेट?

यह रैकेट कई राज्यों में फैला हुआ था। मैसर्स API प्लास्टिक रिसाइक्लर्स प्राइवेट लिमिटेड ने कागजों पर दिखाया कि उन्होंने विभिन्न राज्यों की कंपनियों से प्लास्टिक का कच्चा माल खरीदा।

इन खरीद के बिलों के आधार पर उन्होंने Input Tax Credit (ITC) का दावा किया। लेकिन असलियत यह थी कि:

  1. सप्लायर फर्में फर्जी थीं – कई कंपनियां GST विभाग द्वारा पहले ही निलंबित या रद्द की जा चुकी थीं
  2. कोई माल नहीं भेजा गया – e-way bill और FASTag डेटा ने साबित किया कि वाहन उन रूट्स पर थे ही नहीं
  3. फर्जी ट्रांसपोर्ट दस्तावेज – खाली गुड्स रसीद बुक मिलीं जिनमें बाद में फर्जी एंट्री की गई
  4. डेबिट नोट में हेराफेरी – टैक्स और टैक्सेबल वैल्यू बराबर दिखाकर फर्जी ITC बनाया गया

यह पूरा खेल केवल कागजों पर था। असल में न तो माल खरीदा गया और न ही ट्रांसपोर्ट हुआ। लेकिन सरकारी खजाने से ₹15.56 करोड़ का ITC निकाल लिया गया।

SIPPU की भूमिका – टेक्नोलॉजी से जीती जंग

State Intelligence and Preventive Unit (SIPPU) ने इस मामले में आधुनिक तकनीक का शानदार इस्तेमाल किया:

  • FASTag Data Analysis: हर वाहन की असली लोकेशन और मूवमेंट ट्रैक की
  • E-way Bill Verification: दावे और हकीकत में अंतर पकड़ा
  • GST Network Data: निलंबित और रद्द फर्मों की पहचान की
  • Forensic Document Analysis: फर्जी डेबिट नोट और गुड्स रसीद पकड़ीं

मंत्री चीमा ने कहा, “मैं फर्जी बिलिंग रैकेटों और GST धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए राज्य के टैक्स विभाग की प्रतिबद्धता को दृढ़ता से दोहराता हूं। राज्य के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले फर्जी ITC तैयार करने और उसका इस्तेमाल करने में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।”

मुख्य बातें
  • गिरफ्तार: परमजीत सिंह, डायरेक्टर, API Plastic Recyclers Pvt Ltd, लुधियाना
  • फर्जी सप्लाई: ₹85.4 करोड़ की
  • कुल घोटाला: ₹15.56 करोड़ का फर्जी ITC
  • संदिग्ध वाहन: 407 आवागमन (₹2.65 करोड़ का फर्जी ITC)
  • डेबिट नोट घोटाला: ₹5.79 करोड़ का अतिरिक्त फर्जी ITC
  • तकनीक: FASTag और E-way Bill डेटा एनालिटिक्स
  • धाराएं: PGST Act 69 और 132(1)(c)
  • सजा: गैर-जमानती, 5 साल तक कैद + जुर्माना
  • बरामदगी: खाली गुड्स रसीद बुक, फर्जी डेबिट नोट
  • स्थिति: जांच जारी, आंकड़ा बढ़ सकता है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. फर्जी Input Tax Credit (ITC) क्या है और यह घोटाला कैसे किया गया?

Input Tax Credit वह टैक्स है जो कंपनी ने खरीद पर चुकाया हो और बाद में अपने बेचे गए माल के टैक्स से घटा सकती है। इस मामले में API Plastic Recyclers ने फर्जी कंपनियों से खरीद के नकली बिल बनाए जो वास्तव में निलंबित या रद्द थीं। उन्होंने दिखाया कि माल खरीदा और ट्रांसपोर्ट हुआ, लेकिन FASTag और e-way bill डेटा ने साबित किया कि वाहन उन रूट्स पर थे ही नहीं। इस तरह बिना असल खरीद के ₹15.56 करोड़ का ITC क्लेम किया गया।

2. FASTag और E-way Bill डेटा से कैसे पकड़ा गया घोटाला?

SIPPU ने आधुनिक डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया। E-way bill में दिखाया गया था कि कुछ वाहन माल लेकर लुधियाना आए, लेकिन जब FASTag के टोल रिकॉर्ड चेक किए तो पता चला कि वे वाहन उन रूट्स पर थे ही नहीं। 407 संदिग्ध वाहन आवागमन में कोई भी असल ट्रांसपोर्ट नहीं हुआ था। यह तकनीकी जांच का शानदार उदाहरण है जिसने ₹2.65 करोड़ की धोखाधड़ी पकड़ी।

3. इस मामले में क्या सजा हो सकती है?

चूंकि टैक्स चोरी की राशि ₹5 करोड़ से अधिक है, यह Punjab GST Act 2017 की धारा 69 और 132(1)(c) के तहत गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। आरोपी को जुर्माने के साथ 5 साल तक की कैद हो सकती है। परमजीत सिंह को 8 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने साफ किया है कि राज्य के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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