IT Sector Job Cuts: 93,000 – यह नंबर है 2026 में अब तक गई IT jobs का। मतलब साल आधा भी नहीं हुआ और लगभग 1 लाख लोग tech industry से बाहर हो चुके हैं। और अगर आपको लगता है कि यह America की Silicon Valley की कोई problem है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है।
India दुनिया का IT hub है। देखा जाए तो पिछले 20 सालों में भारत का पूरा urban middle class एक चीज पर टिका रहा है – वो है IT jobs। इसीलिए इन job cuts में शामिल हैं Bengaluru, Hyderabad, Pune, Noida और Chennai।
एक फॉर्मूला था जो लाखों परिवारों के लिए सुरक्षित जिंदगी की गारंटी था: Engineering college से निकलो → Campus placement लो → 6-7 लाख का package मिले → धीरे-धीरे promotion हो → EMI, घर, कार, परिवार – सब settle। भारत की कई families के लिए यही एक सुरक्षित जिंदगी का model था। लेकिन अब वही model बदलता हुआ दिख रहा है।
समझने वाली बात यह है कि यह केवल numbers का खेल नहीं है। यह उस पूरी social mobility system पर सवाल है जिस पर भारत का aspirational middle class टिका हुआ है।
Bernstein की चेतावनी: Middle Class का सपना टूट रहा है
Bernstein Research ने अप्रैल 2026 में Prime Minister Narendra Modi को एक open letter लिखा। उसमें कहा गया कि पिछले दो दशकों में IT और BPO sector ने भारत का एक aspirational middle class बनाया – घर खरीदने वाले, flights लेने वाले, EMI पर car खरीदने वाले लोग।
लेकिन AI नौकरियों के जरिए अब समाज के स्तर पर बदलाव ला रहा है। Tier-2 और Tier-3 शहरों से लाखों students Bengaluru और Hyderabad पहुंचे। पहली बड़ी salary IT नौकरी से आई। पूरा social mobility model इसी sector पर टिका रहा।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह सिर्फ job loss नहीं है – यह एक पूरे economic ecosystem का transformation है, और वो भी बेहद तेज़ी से।
TCS, Wipro, Cognizant: भारत की दिग्गज कंपनियों में बड़े कट्स
अगर गौर करें तो हाल ही में कुछ ऐसी companies ने बहुत बड़े job cuts किए हैं जो भारतीय IT sector की रीढ़ मानी जाती हैं।
TCS (Tata Consultancy Services):
TCS भारत की सबसे बड़ी private sector employer है। इसने 2025-26 में 23,426 employees कम किए। यह आंकड़ा एक छोटे शहर की पूरी working population के बराबर है।
Wipro:
Wipro का headcount 2023 के peak 236,921 से गिरकर 2025-26 में लगभग 233,000 रह गया। यानी लगभग 24,000 लोग कम। दिलचस्प बात यह है कि company profitable चल रही है, फिर भी लोग कम हो रहे हैं।
HCL Tech:
HCL Technologies के shares अप्रैल 2026 में एक ही दिन में लगभग 9.7% गिर गए थे। सिर्फ इसलिए कि company ने एक “cautious guidance” दी थी कि AI की वजह से job cuts हो सकते हैं। सिर्फ इतनी सी बात पर market ने इतनी बड़ी प्रतिक्रिया दी।
Cognizant का सबसे चौंकाने वाला मामला:
अब सबसे interesting case है Cognizant का। Cognizant की पूरी दुनिया में कुल 357,000 employees हैं। इसमें से करीब 2 से ढाई लाख employees सिर्फ Indians हैं और भारत में हैं। यानी company practically Indian talent पर चलती है।
और अब company ने “Project Leap” नाम से एक restructuring शुरू की है। अनुमान लगाया जा रहा है कि 12,000 से 15,000 नौकरियां जा सकती हैं और majority impact Indians पर होगा।
Cognizant के CEO Ravi Kumar S ने analyst call में कहा कि company अब “broader and shorter pyramid” बनाना चाहती है जिसमें “digital labor और human labor दोनों होंगे।”
Corporate Lingo का सच: Digital Labor का मतलब क्या है
अब वो corporate lingo थोड़ा समझाते हैं। “Digital Labor” क्या होता है? It’s not a fancy word – इसका सीधा मतलब है AI।
TCS ने कहा कि वो “AI-first service model” की तरफ जा रही है। यानी पहले जहां किसी project में 100 लोग लगते थे, अब शायद 60 लोग और कुछ AI tools वही काम कर देंगे।
और यह सिर्फ भारतीय companies की कहानी नहीं है।
Meta, Amazon, Coinbase: Global Tech Giants का हाल
Meta (Facebook):
Meta ने अपनी workforce का 10% कम करने की बात कही है। मतलब लगभग 8,000 लोग। CEO Mark Zuckerberg ने खुद कहा कि यह number आगे और बढ़ सकता है।
Block (formerly Square):
Block ने लगभग आधी workforce कम कर दी है। हाँ, आपने सही पढ़ा – आधी!
Amazon:
Amazon ने लगभग 14,000 office jobs cut किए हैं। Focus उनका हुआ है AI-powered logistics पर और automation पर।
Statistics जो डराते हैं:
2026 के पहले quarter में 86 tech companies ने 80,000 से ज्यादा employees निकाले। लेकिन 2025 में इसी quarter की बात करें तो 103 companies ने 30,000 से ज्यादा jobs cut की थीं।
Economic Times के हिसाब से सिर्फ एक साल में layoffs लगभग तीन गुना हो गए।
भारत के लिए खतरे की घंटी
IT sector भारत की GDP का लगभग 7.5% है। 50 लाख से ज्यादा लोग directly इसमें जुड़े हुए हैं और काफी सारे लोग indirectly इन jobs से जुड़े हुए हैं।
हर साल लगभग 15 lakh engineering graduates निकलते हैं और उनमें से majority IT sector में जाना चाहते हैं। लेकिन hiring वो हो रही है slow।
समझने वाली बात यह है कि यह केवल unemployment का मुद्दा नहीं है – यह एक पूरी generation के career planning और life goals का मुद्दा है।
Freshworks का चौंकाने वाला बयान: “आधे से ज्यादा Code अब AI लिख रहा है”
Global situation भी देखते हैं। सबसे fresh news जो आई है वो है Freshworks की – एक Indian-founded tech company।
6 मई 2026 को company ने announce किया कि वो अपने 11% workforce को कम कर रही है। Company के CEO Dennis Woodside ने Reuters से कहा: “हमारा आधे से ज्यादा code तो अब AI लिख रहा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि automation ने जो “rote work” होता है – यानी जो repetitive काम होता है – वो लगभग खत्म कर दिया है।
और रूटीन काम कौन करता था?
• Junior developers
• Testers
• Support engineers
• Documentation वाले लोग
Freshworks कोई छोटा startup नहीं है। भारत में उसकी बड़ी engineering presence है।
Coinbase का AI-Native Vision
दूसरी खबर आई Coinbase से। Coinbase भी अपनी company में 14% छंटनी कर रहा है।
Company के CEO Brian Armstrong ने लिखा कि company अब “lean, fast and AI-native” बनना चाहती है। सुनने में बहुत futuristic लगता है। Simple Hindi में इसका मतलब है: कम लोग रखो, ज्यादा काम मशीनों से करवाओ।
Fortune की report के मुताबिक, company के engineers अब कुछ दिनों में वो काम deliver करते हैं जिसके लिए पहले पूरी team को कई हफ्ते लगते थे।
यहां ध्यान देने वाली बात है: अगर economics की नजर से देखें तो productivity बढ़ गई है। यहां तक कि जो non-technical employees हैं – मतलब जो engineering की field से नहीं आते – वो भी AI की मदद से अब production code लिख रहे हैं।
AI Blame Game: क्या Companies बहाना बना रही हैं?
Experts के मुताबिक pandemic के दौरान जरूरत से ज्यादा hiring हुई थी। अब companies staff को कम कर रही हैं और blame AI पर डाल रही हैं। ऐसा भी कुछ लोगों का कहना है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि AI का असर fake है। असर बिल्कुल असली है और भारत में भी दिख रहा है।
हम सुनते तो रहते हैं “AI jobs खा गया” – पर कैसे, क्या कर रहा है वो ऐसा? आइए समझते हैं।
AI कैसे Jobs खा रहा है: तीन बड़े क्षेत्र
1. Coding और Testing पर पहला वार:
GitHub Copilot, Amazon CodeWhisperer, Google Gemini जैसे tools अब junior developer का काम कर रहे हैं।
Infosys के CEO Salil Parekh ने कहा कि AI tools से developer की productivity 30 से 40% बढ़ी है। उतने ही काम के लिए अब कम लोग चाहिए।
और एक business के लिए इससे ज्यादा खुशी की क्या बात हो सकती है कि आपके कम पैसे में ज्यादा काम हो रहा है। But at the same time, वो employees के लिए कितना अच्छा और कितना नहीं – आप देख सकते हैं।
2. BPO और Customer Support का सफाया:
भारत का एक बड़ा workforce BPO industry में काम करता है। लेकिन अब chatbots बिना इंसान की मदद के 70 से 80% customer queries handle कर लेते हैं।
पहले जहां हजारों लोग call centers में बैठते थे, अब companies कह रही हैं कि AI first layer संभाल लेगा। Humans की जरूरत सिर्फ complex cases में होगी।
3. Middle Management पर भी खतरा:
जो लोग data इकट्ठा करते हैं, reports बनाते हैं, presentations तैयार करते हैं – उनका काफी काम अब Microsoft Copilot या फिर Salesforce Einstein जैसे tools कर रहे हैं।
Stanford Digital Economy Lab के data के मुताबिक, ChatGPT launch होने के बाद young software developer employment लगभग 20% घटी।
Tech Leaders का Contradictory Stand
यहां interesting बात यह है कि जो tech world के leaders हैं, वो खुद एक contradictory बात कर रहे हैं। मतलब जो हो रहा है और वो जो कह रहे हैं – वो दो अलग चीजें हैं।
LinkedIn के CEO Ryan Roslansky कहते हैं कि “AI और jobs को लेकर panic मत करो।”
Sam Altman – OpenAI के CEO, यानी वो company जिसने पूरी दुनिया में artificial intelligence की technology को empower किया – उन्होंने Delhi में India AI Impact Summit के दौरान यह कहा कि:
“कुछ companies AI का नाम लेकर वो layoffs justify कर रही हैं जो वैसे भी करने वाले थे।” उन्होंने कहा कि अगले कुछ सालों में AI का असली impact दिखना शुरू होगा। मतलब यानी अभी जो हो रहा है वो शायद सिर्फ एक शुरुआत है।
Anthropic के CEO Dario Amodei और भी blunt हैं। उनका कहना है कि अगले 5 सालों में AI entry-level white-collar jobs का 50% तक replace कर सकता है।
भारत पर Impact: Middle Income Trap का खतरा
भारत की top IT companies की total hiring 2025-26 में लगभग 2.3 lakh से गिरकर 1.7 lakh रह गई।
Nomura की Chief Economist Sonal Varma ने warning दी कि अगर भारत adapt नहीं कर पाया, तो देश एक “middle income trap” में फंस सकता है।
यानी एक ऐसी situation जहां पर देश न तो पूरी तरह developed हो पाता है, न तेजी से grow कर पाता है। एक तरह से plateau achieve हो जाता है।
और problem यह है कि IT jobs का कोई बड़ा replacement sector अभी तैयार नहीं दिख रहा।
Make in India के बावजूद, manufacturing अभी इतनी high-quality skilled jobs create नहीं कर पाई है। Gig economy की बात करें – जैसे delivery workers – तो वो ज्यादातर low-paying jobs होते हैं।
Fresher का सपना टूटा: Campus Placement Model की मौत
देखा जाए तो freshers के लिए पुराना formula टूट रहा है: Engineering college → Campus placement → Stable IT job।
Companies अब बड़े fresher batches को train नहीं करना चाहतीं क्योंकि clients इसके लिए पैसे नहीं देना चाहते।
Clients सोच रहे हैं कि “हमें artificial intelligence में invest करना है rather than एक fresher-level job के लिए invest करना।”
भारत की top IT companies की total hiring 2025-26 में लगभग 26% गिर गई – 2.3 lakh से 1.7 lakh।
नई Jobs आएंगी, पर किसके लिए?
अब कुछ लोग कहेंगे कि नई jobs तो आएंगी। और हां, यह बात सही है। AI, Cloud, Cybersecurity, Data Engineering – इन सब में space बन रहा है।
लेकिन problem यह है कि:
• जो लोग अपने career के middle में हैं
• अभी middle management में हैं
• 35-45 age group में हैं
वो कितनी जल्दी और कितनी आसानी से नई skills में convert कर सकते हैं?
History में हर industrial revolution ने नए jobs बनाए। Textile mills आईं, steam engine आया, internet आया। लेकिन इसी “eventually” के बीच में कहीं एक पूरी generation पिस जाती है।
BPO Sector: सबसे ज्यादा खतरे में
BPO और customer support jobs, जो भारत के Tier-2 और Tier-3 cities में लाखों युवाओं को रोजगार देती थीं, अब सबसे ज्यादा vulnerable हैं।
Chatbots और AI voice assistants ने इस sector को सबसे पहले निशाना बनाया है। जहां पहले 100 लोगों की team चाहिए होती थी, अब 20-30 लोग और AI tools काम चला लेते हैं।
क्या है आगे का रास्ता?
तो picture क्या बनती है?
• दुनिया में जनवरी से मई 2026 के बीच लगभग 93,000 tech jobs जा चुकी हैं – और यह तो वो number है जो quoted है, जो recorded है
• Prediction markets कह रहे हैं कि 2026 शायद 2025 से भी ज्यादा brutal होगा
• भारत में TCS, Infosys, Wipro, Cognizant जैसी companies openly “AI-first” और “lean teams” की बात कर रही हैं
• Freshers के लिए पुराना formula टूट रहा है
• Mid-career professionals के लिए reskilling का challenge है
• BPO sector सबसे ज्यादा vulnerable है
समझने वाली बात यह है कि यह transition period है। Jobs जाएंगी भी और बनेंगी भी। लेकिन जो बनेंगी, वो अलग skills मांगेंगी। और जो जाएंगी, उनमें real people का career और livelihood जुड़ा है।
मुख्य बातें (Key Points)
• 2026 के पहले 5 महीनों में globally 93,000 tech jobs खत्म हुईं, India heavily affected
• TCS ने 23,426, Wipro ने 24,000, Cognizant 12,000-15,000 jobs cut कीं
• AI tools (GitHub Copilot, ChatGPT) ने coding, testing, customer support jobs replace करना शुरू किया
• Freshworks के CEO ने कहा “आधे से ज्यादा code अब AI लिख रहा है”
• भारतीय IT sector की hiring 2.3 lakh से गिरकर 1.7 lakh रही (26% drop)
• Traditional “Engineering → Campus Placement → Stable Career” model टूट रहा है
• BPO sector सबसे ज्यादा vulnerable, chatbots 70-80% queries handle कर रहे
• Nomura की economist ने “middle income trap” का warning दिया India को










