Tamil Nadu Hung Assembly: पांच राज्यों में चुनाव हुए। चार जगह तो साफ है कि कौन सरकार बनाएगा – असम, केरल, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल। लेकिन मामला अटक गया है Tamil Nadu में। सबको लग रहा था कि अभिनेता Vijay आसानी से मुख्यमंत्री बन जाएंगे। बस 10 सीटों की कमी है। लेकिन जब विजय राज्यपाल से मिलने पहुंचे, तो राज्यपाल ने कह दिया – “मुझे विश्वास नहीं है कि आपके पास पर्याप्त संख्या है।”
देखा जाए तो यह तमिलनाडु की राजनीति में 60 साल बाद सबसे बड़ा बदलाव है। 1967 के बाद से तमिलनाडु में सिर्फ दो पार्टियों का राज रहा – DMK और AIADMK। लेकिन अब एक नया खिलाड़ी मैदान में आ गया है – TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam), जो अभिनेता विजय की पार्टी है।
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। जहां एक तरफ TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, वहीं दूसरी तरफ ऐतिहासिक सहयोगी Congress ने DMK को छोड़कर TVK को समर्थन दे दिया। DMK ने इसे “विश्वासघात” कहा है। और अब सबसे चौंकाने वाली अफवाह यह है कि DMK और AIADMK – दो कट्टर प्रतिद्वंद्वी – एक साथ आ सकते हैं!
यह ऐसा है जैसे राष्ट्रीय स्तर पर PM Modi और Rahul Gandhi मिलकर सरकार बना लें। अविश्वसनीय, लेकिन तमिलनाडु में यह संभव हो सकता है।
234 सीटों की विधानसभा, जरूरत 118 की
समझने वाली बात यह है कि तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं। बहुमत के लिए 50% + 1 यानी 118 सीटों की जरूरत है। अब देखिए क्या हुआ:
TVK: 108 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन 10 सीट कम)
DMK: 59 सीटें (बड़ा झटका, मुख्यमंत्री MK Stalin भी अपनी सीट हार गए)
AIADMK: 49 सीटें (और कमजोर हुई)
Congress: 5 सीटें (किंगमेकर की भूमिका में)
BJP और अन्य: बाकी सीटें (कोई खास भूमिका नहीं)
दिलचस्प बात यह है कि विश्लेषक इसे 1972 में MG Ramachandran (MGR) द्वारा AIADMK की स्थापना के बाद से सबसे बड़ा राजनीतिक विघटन बता रहे हैं। कुछ तो यह भी कह रहे हैं कि यह Jayalalithaa के उदय से भी बड़ा है।
Governor ने क्यों नहीं दी तुरंत मंजूरी?
चुनाव परिणाम आने के बाद अभिनेता विजय राज्यपाल से मिलने पहुंचे। उन्होंने औपचारिक रूप से सरकार बनाने का दावा किया। उनका तर्क था – “TVK सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए मुझे सरकार बनाने का अधिकार मिलना चाहिए।”
लेकिन राज्यपाल ने तुरंत मंजूरी नहीं दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्यपाल ने कहा – “आपके पास 108 सीटें हैं। बाकी 10 सीटों के समर्थन का लिखित प्रमाण लाइए।”
अगर गौर करें तो राज्यपाल की यह मांग संवैधानिक रूप से सही है। संविधान का अनुच्छेद 164 कहता है कि मुख्यमंत्री राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया जाता है। लेकिन लटकी हुई विधानसभा (Hung Assembly) के मामले में क्या करना चाहिए, यह संविधान में स्पष्ट नहीं है।
ऐसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय, सरकारिया आयोग और पूंजी आयोग की सिफारिशों का पालन किया जाता है। इनके अनुसार:
पहली प्राथमिकता: प्री-पोल गठबंधन को बहुमत (जैसे 2024 में NDA)
दूसरी प्राथमिकता: समर्थन के साथ सबसे बड़ी पार्टी
तीसरी प्राथमिकता: चुनाव के बाद का गठबंधन (पोस्ट-पोल)
चौथी प्राथमिकता: बाहरी समर्थन के साथ अल्पमत सरकार
तमिलनाडु में अभी दूसरी श्रेणी में फंसाव है। TVK सबसे बड़ी पार्टी तो है, लेकिन क्या उसके पास 10 और सीटों का समर्थन है? यही राज्यपाल जानना चाहते हैं।
Congress का बड़ा राजनीतिक झटका: DMK को छोड़ा
और यहीं से सबसे बड़ा राजनीतिक नाटक शुरू होता है। Congress और DMK लंबे समय से सहयोगी रहे हैं। INDIA Bloc में DMK एक महत्वपूर्ण भागीदार है। चुनाव भी साथ मिलकर लड़ा गया था। 234 सीटों में से 28 सीटों पर Congress चुनाव लड़ी और बाकी पर DMK।
लेकिन चुनाव के बाद अचानक Congress ने DMK को छोड़कर TVK को समर्थन देने की घोषणा कर दी। Congress नेता Karthik Chidambaram ने सार्वजनिक रूप से कहा – “तमिलनाडु को एक धर्मनिरपेक्ष सरकार चाहिए जिसका नेतृत्व TVK करे।”
यह सुनते ही DMK में तूफान आ गया। DMK नेताओं ने Congress को “बैकस्टैबर” (पीठ में छुरा घोंपने वाला) कहा। उनका तर्क था:
पहला: “हम साथ मिलकर चुनाव लड़े। हमने आपके लिए 28 सीटें छोड़ीं ताकि आप भी जीत सकें। अब आपने 5 सीटें जीतीं – हमारी वजह से – और अब आप हमें छोड़ रहे हैं?”
दूसरा: “इससे INDIA Bloc खतरे में आ जाएगा। अगर Congress हमें छोड़ती है, तो बाकी क्षेत्रीय दलों को भी Congress पर भरोसा नहीं रहेगा।”
तीसरा: “लंबे समय में TVK हमें replace कर देगा। DMK का अस्तित्व खतरे में है।”
चिंता का विषय यह है कि DMK का गुस्सा सिर्फ भावनात्मक नहीं है – यह अस्तित्वगत है। 60 साल बाद पहली बार कोई तीसरी ताकत तमिलनाडु में उभरी है।
AIADMK में आंतरिक संकट: MLA रिसॉर्ट में
लेकिन DMK ही नहीं, AIADMK में भी भूचाल आया है। 49 सीटों में से करीब 30 से ज्यादा MLA कह रहे हैं – “हमें TVK को समर्थन देना चाहिए ताकि DMK को बाहर रखा जा सके।”
यह AIADMK के लिए बड़ा संकट है। पार्टी नेतृत्व को डर है कि उनके MLA TVK में शामिल हो जाएंगे या उन्हें वोट दे देंगे।
और बस यहीं से शुरू हुआ भारतीय राजनीति का सबसे पुराना खेल – रिसॉर्ट पॉलिटिक्स। AIADMK ने अपने कई MLA को पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में भेज दिया है। उन्हें वहां “सुरक्षित” रखा जा रहा है ताकि वे किसी दूसरी पार्टी में न जा सकें।
आपको याद होगा – महाराष्ट्र, कर्नाटक, हर जगह यही होता है। जब भी राजनीतिक अनिश्चितता होती है, MLA को रिसॉर्ट में बंद कर दिया जाता है। यह लोकतंत्र का एक विचित्र पहलू है।
AIADMK में दो गुट बन गए हैं:
पहला गुट: “TVK को समर्थन दो, DMK को बाहर रखो।”
दूसरा गुट: “अपनी विचारधारा पर कायम रहो। TVK को मजबूत मत करो, वरना वे हमें हमेशा के लिए खत्म कर देंगे।”
DMK-AIADMK गठबंधन की अफवाहें: 60 साल के दुश्मन एक साथ?
और अब सबसे चौंकाने वाला ट्विस्ट। कल रात से चर्चा है कि DMK और AIADMK गुप्त वार्ता कर रहे हैं। यह कल्पना कीजिए – यह ऐसा है जैसे राष्ट्रीय स्तर पर BJP और Congress मिलकर सरकार बना लें।
समझने वाली बात यह है कि DMK और AIADMK 60 साल से कट्टर प्रतिद्वंद्वी हैं। 1967 के बाद से तमिलनाडु में कभी DMK सत्ता में रही, कभी AIADMK। 1972 में MGR DMK से अलग होकर AIADMK बनाते हैं। तब से ये दोनों वैचारिक दुश्मन हैं।
द्रविड़ पहचान की राजनीति, व्यक्तित्व संघर्ष, कल्याणकारी राजनीति, सिनेमा प्रभाव – हर मामले में ये एक-दूसरे के विरोधी रहे हैं।
लेकिन अब एक बड़ा सवाल है – क्या ये दोनों TVK के डर से एक साथ आ सकते हैं?
दिलचस्प बात यह है कि दोनों को एक ही डर सता रहा है:
DMK का डर:
• पारंपरिक रूप से शहरी मतदाता, अल्पसंख्यक, युवा, शिक्षित मध्यम वर्ग, द्रविड़ विचारधारा वाले मतदाता उन्हें वोट देते थे
• लेकिन TVK ने पहली बार मतदाताओं, युवाओं को अपनी तरफ खींच लिया
• भ्रष्टाचार विरोधी छवि और “ताजा विकल्प” के रूप में खुद को पेश किया
• बड़े-बड़े नेता, मंत्री हार गए। खुद मुख्यमंत्री MK Stalin अपनी सीट नहीं बचा सके
AIADMK का डर:
• जयललिता के जाने के बाद से संकट में है
• नेतृत्व कमजोर, आंतरिक गुटबाजी बढ़ रही है
• TVK अब भावनात्मक स्थान पर कब्जा कर रहा है – जैसे MGR और जयललिता ने किया था
• सिनेमा और राजनीति का मिश्रण तमिलनाडु में हमेशा काम करता है
तो दोनों को लग रहा है कि TVK उन्हें हमेशा के लिए खत्म कर सकता है। और इसी डर में, ये दो कट्टर दुश्मन एक साथ आने की बात कर सकते हैं।
लेकिन ध्यान दीजिए – अभी यह सिर्फ अफवाह है। कुछ भी आधिकारिक रूप से नहीं हुआ है। लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में कुछ भी संभव है।
Vijay का राजनीतिक उदय: MGR और Jayalalithaa से भी बड़ा?
तो यह विजय कौन हैं और इतने शक्तिशाली कैसे बन गए? विजय तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक हैं। लेकिन सिनेमा से राजनीति में आना तमिलनाडु में नया नहीं है।
Kamal Haasan ने कोशिश की – बेहद लोकप्रिय, लेकिन राजनीति में सफल नहीं हुए। Rajinikanth ने आने-जाने का नाटक किया – कभी आएंगे, कभी नहीं आएंगे – अंततः नहीं आए।
लेकिन विजय ने क्या किया? उन्होंने जमीनी काम किया। TVK को सिर्फ एक सेलिब्रिटी पार्टी नहीं बनाया। उन्होंने:
• युवाओं से सीधा संवाड़ किया
• भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दा उठाया
• ताजा विकल्प के रूप में खुद को पेश किया
• DMK और AIADMK दोनों पर “पुरानी राजनीति” का आरोप लगाया
और परिणाम सामने है – 108 सीटें। 60 साल में पहली बार किसी तीसरी पार्टी ने इतना बड़ा प्रदर्शन किया।
संवैधानिक संकट की आशंका
अब सवाल है – आगे क्या होगा? राज्यपाल के सामने कई विकल्प हैं:
पहला: अगर TVK 10 और सीटों का समर्थन पत्र लाती है, तो राज्यपाल उन्हें सरकार बनाने को कह सकते हैं।
दूसरा: अगर TVK समर्थन नहीं जुटा पाती, तो राज्यपाल दूसरी सबसे बड़ी पार्टी DMK को बुला सकते हैं। लेकिन DMK के पास सिर्फ 59 सीटें हैं – और भी कम।
तीसरा: अगर कोई भी बहुमत साबित नहीं कर पाता, तो राज्यपाल राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।
चौथा: मध्यावधि चुनाव – लेकिन यह बहुत महंगा और अव्यवहारिक विकल्प है।
चिंता का विषय यह है कि अगर राज्यपाल जल्दबाजी में कोई फैसला लेते हैं, तो यह संवैधानिक संकट में बदल सकता है। सर्वोच्च न्यायालय में मामला जा सकता है।
तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था पर असर
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि तमिलनाडु भारत की अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह देश का:
• विनिर्माण पावरहाउस है
• इलेक्ट्रॉनिक्स हब है
• ऑटोमोबाइल केंद्र है
• निर्यात में अग्रणी है
Apple, Hyundai, Samsung, Foxconn – सभी बड़ी कंपनियों की प्रमुख फैक्ट्रियां तमिलनाडु में हैं। निवेशक राजनीतिक स्थिरता बहुत बारीकी से देखते हैं।
अगर तमिलनाडु में राजनीतिक अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रहती है, तो:
• नए निवेश पर असर पड़ेगा
• मौजूदा परियोजनाएं धीमी हो सकती हैं
• रोजगार सृजन प्रभावित होगा
• राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है
इसलिए जल्द से जल्द स्थिर सरकार का बनना बहुत जरूरी है।
60 साल की द्रविड़ राजनीति का अंत?
अगर गौर करें तो यह महज एक चुनाव नहीं है। यह 60 साल की एक राजनीतिक व्यवस्था का संभावित अंत हो सकता है।
1967 में जब DMK पहली बार सत्ता में आई, तब से तमिलनाडु की राजनीति एक निश्चित पैटर्न में चलती रही। DMK आई, फिर AIADMK, फिर DMK, फिर AIADMK – यह सिलसिला चलता रहा।
लेकिन अब एक तीसरा विकल्प आ गया है। और यह सिर्फ एक विकल्प नहीं – यह सबसे बड़ी पार्टी बनकर आया है।
यह दर्शाता है कि:
• मतदाता परिवर्तन चाहते हैं
• पुरानी पार्टियों से थक चुके हैं
• ताजा नेतृत्व, नए विचारों की तलाश में हैं
• भ्रष्टाचार और राजवंशवाद से दूर जाना चाहते हैं
लेकिन सवाल यह है – क्या TVK यह बदलाव ला पाएगा? या फिर यह भी पुरानी राजनीति का हिस्सा बन जाएगा? समय ही बताएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• तमिलनाडु में हंग असेंबली – TVK को 108 सीटें (बहुमत के लिए 118 चाहिए), DMK को 59, AIADMK को 49, Congress को 5
• Governor ने Vijay को तुरंत सरकार बनाने की अनुमति नहीं दी, 10 और सीटों के समर्थन पत्र मांगे
• Congress ने ऐतिहासिक सहयोगी DMK को छोड़कर TVK को समर्थन दिया – DMK ने इसे “विश्वासघात” कहा
• AIADMK में आंतरिक संकट – 30+ MLA TVK को समर्थन देना चाहते हैं, कई को पुडुचेरी के रिसॉर्ट में भेजा गया
• DMK-AIADMK के बीच गुप्त वार्ता की अफवाहें – 60 साल के कट्टर दुश्मन TVK के डर से एक साथ आ सकते हैं
• यह 1972 में MGR द्वारा AIADMK बनाने के बाद से तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव
• मुख्यमंत्री MK Stalin सहित कई बड़े DMK नेता अपनी सीटें हार गए – भारी एंटी-इनकंबेंसी का संकेत
• तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था पर असर की चिंता – Apple, Samsung, Hyundai जैसी कंपनियों की बड़ी उपस्थिति













