America Iran Conflict: हॉर्मुज स्ट्रेट में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों पर ईरान की मिसाइलों की बरसात के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने घुटने टेक दिए हैं। जिस America Iran Conflict को लेकर वॉशिंगटन बड़े-बड़े दावे कर रहा था, उसे अब अचानक समाप्त कर दिया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ऐलान किया कि 28 फरवरी से चल रहा Operation Epic Fury अब खत्म हो चुका है।
देखा जाए तो यह अमेरिका की बड़ी हार मानी जा रही है। जिस ट्रंप ने हॉर्मुज खुलवाने के लिए Project Freedom लॉन्च किया था, वही अब शांति की भीख मांग रहे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत अच्छी चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही बड़ा समझौता हो सकता है। पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों ने मध्यस्थता की है।
ईरान ने युद्धपोतों पर बोला हमला, अमेरिका ने माना
यह पहली बार है जब अमेरिकी सेना ने खुलेआम स्वीकार किया है कि ईरान ने उसके युद्धपोतों को निशाना बनाने की कोशिश की। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि सीजफायर के बाद से अब तक Iran ने 10 बार सैन्य जहाजों और 9 बार कमर्शियल जहाजों पर हमले किए हैं। हॉर्मुज स्ट्रेट के करीब इस वक्त सिर्फ अमेरिका के ही युद्धपोत हमलावर स्थिति में तैनात थे।
यानी ईरान ने जो दावे किए थे, वे सच साबित हुए हैं। जब 4 मई को Donald Trump ने Project Freedom शुरू किया था, तब ईरान ने मिसाइलों, ड्रोनों और छोटे हथियारबंद नौकाओं से धावा बोल दिया। अमेरिकी मीडिया NBC ने भी इसकी पुष्टि की थी कि दो अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमला हुआ था।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका पहले दावा कर रहा था कि उसने सभी हमलों को नाकाम कर दिया। लेकिन अब जब विदेश मंत्री Marco Rubio ने युद्ध खत्म करने का ऐलान किया, तो सच्चाई सामने आ गई।
हॉर्मुज स्ट्रेट में क्या हुआ था?
हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ता है। दुनिया की करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। जब ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी नेवी ने Operation Project Freedom शुरू किया, तब हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे।
यूएई ने कहा था कि उसके कुछ जहाजों पर ईरान की तरफ से हमला हुआ। फ्रांसीसी शिपिंग कंपनी CMA CGM ने भी अपने जहाज पर हमले की पुष्टि की थी। लेकिन जिस तरह ईरान ने प्रतिरोध किया, उसके बाद अमेरिका दबाव में आ गया।
समझने वाली बात यह है कि Trump ने जिस प्रोजेक्ट को 4 मई को लॉन्च किया था, उसे कुछ ही घंटों बाद वापस लेना पड़ा।
मार्को रूबियो का बड़ा बयान
अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ शब्दों में कहा कि Operation Epic Fury अब खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा, “ईरान में हमारे सभी मकसद पूरे हो चुके हैं। अमेरिका किसी नए युद्ध या संघर्ष को बढ़ाना नहीं चाहता। हम शांति चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि ईरान भी समझौते की तरफ आगे बढ़ेगा।”
अगर गौर करें तो यह बयान पूरी तरह से विरोधाभासी है। एक तरफ अमेरिकी विदेश मंत्री शांति की बात कर रहे हैं, वहीं कुछ दिन पहले ही Donald Trump ने कहा था कि अमेरिकी नेवी समुद्री लुटेरों की तरह काम कर रही है।
अब सवाल यह पूछे जा रहे हैं कि अमेरिका का कौन सा टारगेट पूरा हुआ? न ईरान जंग में हारा, न रिजीम चेंज हुआ। न ईरान ने तेल के कुएं सौंपे और न ही परमाणु कार्यक्रम बंद हुआ। कुछ भी तो अमेरिका हासिल नहीं कर पाया।
ईरान की बड़ी जीत
Trump के इस ऐलान को ईरान की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian का बयान भी सामने आया है। उन्होंने साफ कह दिया कि ईरान किसी के भी दबाव में नहीं झुकेगा।
Pezeshkian ने कहा, “अमेरिका ईरान पर दबाव की नीति अपना रहा है और दूसरी तरफ चाहता है कि ईरान बातचीत की मेज पर आए और उसकी एकतरफा मांगों के सामने आत्मसमर्पण कर दे। लेकिन यह नामुमकिन है।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अब अमेरिका ही ईरान के सामने झुकता दिखाई दे रहा है। ट्रंप ने Truth Social पर लिखा कि बातचीत आगे बढ़ रही है और डील हो सकती है। हालांकि उन्होंने हॉर्मुज में की गई नाकेबंदी हटाने की बात नहीं की है।
अमेरिकी दावों की हकीकत
जिस तरह से यह America Iran Conflict खत्म हुआ है, उससे अमेरिकी दावों की पोल खुल गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि वे हॉर्मुज खुलवा देंगे। इसके लिए Project Freedom भी लॉन्च किया गया था। लेकिन जैसे ही अमेरिकी युद्धपोत हॉर्मुज स्ट्रेट पहुंचे, ईरान ने मिसाइलों की बरसात कर दी।
ट्रंप ने तुरंत ही Project Freedom बंद कर दिया। और अब अमेरिका जंग से भाग रहा है। Trump और उनके विदेश मंत्री के बयान के बाद दावे किए जा रहे हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म हो गया है।
देखा जाए तो यह पूरी तरह से ईरान की राजनयिक और सैन्य जीत है। वॉशिंगटन को अपने दावों से पीछे हटना पड़ा है।
पाकिस्तान और अन्य देशों की मध्यस्थता
Donald Trump ने अपनी पोस्ट में बताया कि Pakistan और कुछ अन्य देशों ने इस मामले में मध्यस्थता की है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने की कोशिशों में थे।
हालांकि पाकिस्तान को भी अमेरिका से बड़ा झटका लगा है। अमेरिका ने पेशावर में अपना महावाणिज्य दूतावास बंद करने का ऐलान कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस फैसले के पीछे अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल का हवाला दिया है।
Operation Epic Fury की पूरी कहानी
28 फरवरी से शुरू हुए Operation Epic Fury का मकसद ईरान पर दबाव बनाना था। अमेरिका चाहता था कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करे, हॉर्मुज स्ट्रेट खोले और अमेरिकी शर्तों को माने। लेकिन ईरान ने साफ इनकार कर दिया।
जब डोनाल्ड ट्रंप ने 4 मई को Project Freedom शुरू किया, तब यह सैन्य अभियान चरम पर था। अमेरिकी नेवी के युद्धपोत हॉर्मुज स्ट्रेट में तैनात किए गए। मकसद था उन जहाजों को सुरक्षित निकालना जो वहां फंस गए थे।
लेकिन ईरान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए। मिसाइलों, ड्रोनों और छोटी नौकाओं से हमले किए गए। अमेरिकी कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया गया। यूएई और फ्रांसीसी जहाजों पर भी हमले हुए। हालात बेकाबू होते देख Trump ने कुछ ही घंटों में Project Freedom को रोक दिया।
क्या ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों को नुकसान पहुंचाया?
यह सबसे बड़ा सवाल है। अमेरिकी सेना ने स्वीकार किया है कि ईरान ने 10 बार सैन्य जहाजों पर हमले किए। लेकिन कितना नुकसान हुआ, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
चिंता का विषय यह है कि अगर अमेरिका ने सभी हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया था, तो फिर युद्ध खत्म करने की क्या जरूरत थी? यह सवाल अब वॉशिंगटन के सामने खड़ा है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के हमलों से अमेरिकी युद्धपोतों को काफी नुकसान पहुंचा होगा। इसी वजह से Trump प्रशासन ने जल्दबाजी में युद्ध समाप्त करने का फैसला लिया।
हॉर्मुज नाकेबंदी का क्या होगा?
Donald Trump ने कहा है कि हॉर्मुज में की गई नाकेबंदी जारी रहेगी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि धीरे-धीरे अमेरिका इसे भी हटा सकता है।
हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के 20% तेल की सप्लाई होती है। इस रास्ते को बंद रखना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। कई देशों में तेल की किल्लत हो गई है।
राहत की बात यह है कि अगर बातचीत सफल रही, तो जल्द ही यह नाकेबंदी खत्म हो सकती है। लेकिन यह ईरान की शर्तों पर होगी, अमेरिका की नहीं।
रूस-यूक्रेन युद्धविराम भी टूटा
इसी बीच एक और बड़ी खबर Russia और Ukraine से आ रही है। दोनों देशों के बीच Victory Day के मौके पर युद्धविराम की घोषणा की गई थी। लेकिन यह लागू होने से पहले ही टूट गया है।
Russia ने 5 मई को यूक्रेन के कई शहरों पर भीषण हमले किए। Zaporizhzhia, Kramatorsk, और अन्य शहरों पर शक्तिशाली ग्लाइड बम गिराए गए। इन हमलों में 27 लोगों की मौत हो गई और 45 अन्य घायल हुए।
यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि प्रचार के उद्देश्य से युद्धविराम की मांग करना और फिर मिसाइल हमले करना घोर निंदनीय है।
Zelenskyy ने कहा कि यूक्रेन को दीर्घकालिक युद्धविराम की जरूरत है। लेकिन जिस तरह से तनाव जारी है, यह मुश्किल नजर आ रहा है।
बांग्लादेश ने बढ़ाई भारत की चिंता
Bangladesh ने भारत के साथ संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील उर रहमान ने कहा कि तीस्ता समझौते के लिए वे अब India का इंतजार नहीं कर सकते।
उन्होंने साफ कर दिया कि अब China का रुख किया जाएगा। विदेश मंत्री जल्द ही चीन का दौरा करेंगे। वहां तीस्ता परियोजना पर भी बातचीत होगी।
तीस्ता नदी विवाद काफी पुराना है। Bangladesh चाहता है कि उसे नदी में बराबर हिस्सा मिले। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार इसका विरोध करती रही है। अब Bangladesh ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। वे चीन से मदद मांगेंगे ताकि भारत पर दबाव बनाया जा सके।
पाकिस्तान से बांग्लादेश की बढ़ती नजदीकी
इसके साथ ही Bangladesh और Pakistan के रिश्ते भी मजबूत हो रहे हैं। तारिक रहमान सरकार लगातार पाकिस्तान के साथ करीबी बढ़ाने की कोशिश में है।
इसी क्रम में Bangladesh ने अपने 12 सीनियर अधिकारियों को ट्रेनिंग के लिए Pakistan भेजा है। पाकिस्तान में एक मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम चल रहा है। खास बात यह है कि इस ट्रेनिंग का पूरा खर्च पाकिस्तान उठा रहा है।
यह भारत की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। Bangladesh का चीन और Pakistan दोनों की तरफ झुकाव बढ़ रहा है।
पाकिस्तान को अमेरिका से बड़ा झटका
Pakistan को लगातार अमेरिका को खुश करने की कोशिशों के बावजूद बड़ा झटका लगा है। अमेरिका ने पेशावर में अपना महावाणिज्य दूतावास बंद करने का ऐलान कर दिया है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस फैसले के पीछे अपने कर्मचारियों की सुरक्षा का हवाला दिया है। पेशावर कंसुलेट से जुड़ी राजनयिक जिम्मेदारियां Islamabad में अमेरिकी दूतावास को सौंप दी जाएंगी।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान सरकार अमेरिकी राजनयिकों को सुरक्षा देने में विफल रही है? अमेरिका के इस कदम से Pakistan और अमेरिका के रिश्तों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जलवायु और केमिकल्स से खतरे में प्रजनन क्षमता
एक नई वैज्ञानिक स्टडी में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। केमिकल्स और जलवायु परिवर्तन की वजह से इंसान और जानवर दोनों की प्रजनन क्षमता पर खराब असर पड़ रहा है।
Global Warming की वजह से तापमान तेजी से बढ़ रहा है। गर्मी, ऑक्सीजन की कमी और केमिकल्स का जानवरों पर ज्यादा तनाव पड़ रहा है। यह उनके प्रजनन को प्रभावित कर रहा है।
वहीं समय के साथ Synthetic Chemicals का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। कई Pesticides, Plastics, Pollutants और Forever Chemicals चुपचाप Fertility को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इंसानों पर माइक्रोप्लास्टिक का असर
वैज्ञानिकों ने बताया कि Microplastics और PFAS (Polyfluoroalkyl Substances) की वजह से पुरुषों में Sperm की संख्या और गति कम हो रही है। इससे उनमें Fertility की समस्या बढ़ रही है।
पक्षियों में PFAS और Organochlorines की वजह से अंडों से बच्चे निकलने में समस्या आती है। मछलियों में Microplastics और Pyrethroids की वजह से अंडे कम बन रहे हैं।
उम्मीद की किरण यह है कि अगर प्लास्टिक और प्रदूषण को कम किया जाए, Climate Change को रोका जाए, तो इस समस्या से निपटा जा सकता है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी
वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें केमिकल्स की सुरक्षा की जांच तेज करनी होगी। प्लास्टिक और प्रदूषण दोनों को कम करना होगा। Climate Change को रोकने में ज्यादा मेहनत करनी होगी।
अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियां गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करेंगी। कई प्रजातियां लुप्त हो सकती हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले 50 सालों में धरती पर कई वन्य जीवों की आबादी बहुत ज्यादा घट गई है। कई प्रजातियां लुप्त होने की कगार पर हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमेरिका ने 28 फरवरी से चल रहा Operation Epic Fury खत्म करने का ऐलान किया
- ईरान ने 10 बार अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले किए, अमेरिकी सेना ने माना
- Donald Trump ने Project Freedom कुछ घंटों में ही रोक दिया
- मार्को रूबियो बोले – अमेरिका शांति चाहता है, सभी मकसद पूरे हुए
- ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा – किसी दबाव में नहीं झुकेंगे
- रूस ने यूक्रेन पर हमले जारी रखे, 27 लोगों की मौत
- बांग्लादेश ने तीस्ता के लिए चीन का रुख करने का ऐलान किया
- अमेरिका ने पेशावर में अपना महावाणिज्य दूतावास बंद करने का फैसला लिया
- वैज्ञानिकों ने चेताया – केमिकल्स और Climate Change से खतरे में प्रजनन क्षमता












