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The News Air - Breaking News - Punjab Twin Blasts: खालिस्तानी समूह ने ली जिम्मेदारी, सैन्य प्रतिष्ठानों के बाहर विस्फोट

Punjab Twin Blasts: खालिस्तानी समूह ने ली जिम्मेदारी, सैन्य प्रतिष्ठानों के बाहर विस्फोट

अमृतसर और जालंधर में 2 घंटे के अंदर दो विस्फोट, BSF और आर्मी कैंटोनमेंट के बाहर हमला, Khalistan Tiger Force ने ली जिम्मेदारी, पाकिस्तान कनेक्शन की जांच

The News Air Team by The News Air Team
बुधवार, 6 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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Punjab Twin Blasts
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Punjab Twin Blasts ने एक बार फिर राज्य में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। 5 मई 2026 की देर रात अचानक खबर आई कि पंजाब में दो जगह विस्फोट हुए हैं। अगर आप पंजाब का नक्शा देखें तो सीमा के पास सटा हुआ अमृतसर में एक और उससे लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर जालंधर में ये दो विस्फोट हुए हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये दोनों विस्फोट सेना के प्रतिष्ठानों के बाहर हुए हैं – जो हेडक्वार्टर होते हैं, उसके बाहर हुआ है। दो विस्फोट दो घंटों में सैन्य प्रतिष्ठानों के बाहर – यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

और सबसे बड़ी बात – खालिस्तानी संगठन Khalistan Tiger Force (KTF) ने इसकी जिम्मेदारी ली है। इसके पीछे का पूरा बैकग्राउंड, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और पंजाब की मौजूदा स्थिति को समझना जरूरी है।

पहला विस्फोट: जालंधर में BSF हेडक्वार्टर के बाहर

सबसे पहला जो विस्फोट होता है, वह कल रात को 8:00 बजे के आसपास जालंधर में हुआ था। और यह बेसिकली जो BSF (Border Security Force) का हेडक्वार्टर है, उसके बाहर हुआ है। समझने वाली बात यह है कि पंजाब फ्रंटियर हेडक्वार्टर जो कि अपने आप में वन ऑफ द मोस्ट सिक्योर्ड एरिया माना जाता है और उत्तर भारत में यह काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

बताया गया कि इसके बाहर जो है एक स्कूटर पार्क था। अचानक से आग लगती है इसके अंदर और यहां पर एक बड़ा साउंड, लाउड साउंड सुनाई देता है। इतना ज्यादा साउंड था कि 1 किलोमीटर की दूरी तक इसकी आवाज पहुंची थी।

दिलचस्प बात यह है कि यह जो स्कूटर आइडेंटिफाई किया गया है, बेसिकली गुरप्रीत सिंह को बिलोंग करता है जो कि एक कूरियर डिलीवरी वर्कर है। अभी यह नहीं कहा जा सकता कि वह जिम्मेदार है या नहीं। अंततः जब जांच होगी तभी चीजें पता चलेंगी। हो सकता है कोई दूसरा लगा दिया हो।

यहां पर महत्वपूर्ण यह है कि वो लगातार डिलीवरी पार्सल्स ले जाता था BSF के लिए, आर्मी पर्सनल के लिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसका जो स्कूटर है वो बाहर था। अचानक से पहले बताया गया कि कुछ आग लगी और तेज आवाज आई और यह आवाज 1 किमी दूरी तक सुनाई दी थी।

गुरप्रीत का ऐसा मानना है कि यह जो बम था या फिर जो भी वस्तु होगी, वो बेसिकली स्कूटर की तरफ फेंका गया था और उसकी वजह से यह पूरा घटनाक्रम हुआ। और जो पुलिस बम डिस्पोजल यूनिट्स, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स – वो सभी तुरंत लोकेशन पर पहुंच गए।

दूसरा विस्फोट: अमृतसर में आर्मी कैंटोनमेंट के पास

जालंधर से 100 किलोमीटर की दूरी पर 2 घंटे के जस्ट बाद लगभग 10:50 बजे के आसपास अमृतसर में यह विस्फोट सुनाई देता है। और यह काफी पावरफुल विस्फोट बताया गया। आर्मी ऑफिशियल्स यहां पर पंजाब पुलिस के साथ कोऑर्डिनेट कर रहे हैं।

अगर आप देखें तो अमृतसर में जो आर्मी का खासा कैंटोनमेंट एरिया है, वहां पर हुआ था। जो बम डिस्पोजल स्क्वाड है, वो तुरंत इंस्पेक्ट करने पहुंच गई। फॉरेंसिक टीम एविडेंस कलेक्ट कर रही है।

और देखिए, ये बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि उस बम के अंदर जो विस्फोट हुआ था, उसमें मेटैलिक फ्रेगमेंट्स थे। और वो तभी होता है जब आप विस्फोट का इंपैक्ट ज्यादा रखना चाहते हो। क्योंकि जैसे IED होता है, तो उसमें यही चीजें होती हैं कि जो शार्प चीजें होती हैं – नेल्स वगैरह – वो सब उसमें भर दिया जाता है ताकि जब विस्फोट होगा तो किसी को जब जाकर वो हिट करेगा तो उसकी वजह से इंपैक्ट काफी ज्यादा आएगा।

प्रिलिमिनरी जानकारी में यही सुझाव दिया जा रहा है कि कुछ मास्क पहने हुए व्यक्ति वहां आए थे। उन्होंने ये सारी चीजें की और तुरंत वहां से फरार हो गए। कोई कैजुअल्टीज या फिर किसी के घायल होने की कोई खबर अभी तक नहीं आई है।

2 घंटे के अंदर दो विस्फोट: कोऑर्डिनेशन का संकेत

ये जो टाइमिंग है, वो क्यों इतना महत्वपूर्ण हो जाता है? क्योंकि दो घटनाएं 2 घंटे के अंदर होना कोऑर्डिनेशन को दिखाता है। अगर एक कहीं पर कुछ होता, मान लीजिए स्कूटर में आग लगी होती, विस्फोट होता – शायद कोई ध्यान भी नहीं देता।

लेकिन यहां पर समझिए, डिफेंस सिक्योरिटी एरियाज में, उसके बाहर 2 घंटे के अंदर विस्फोट हो जाना – यह कहीं न कहीं सस्पिशन पैदा करता है। पंजाब सीमावर्ती राज्य है, ऐतिहासिक रूप से काफी संवेदनशील रहा है और वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव तो यहां चल ही रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ लगातार तनाव बना हुआ है। तो अगर विस्फोट लो इंटेंसिटी का भी है, जो एजेंसियां हैं वो टारगेट का जो चॉइस है उसको स्टडी करती हैं। टाइमिंग को देखती हैं। ऑपरेशनल पैटर्न को देखती हैं। मैसेजिंग वैल्यू को देखती हैं।

कहने का मतलब साफ है – काउंटर टेरर एनालिस्ट में स्केल से ज्यादा जो पैटर्न है, वह मायने रखते हैं। यह ज्यादा मायने नहीं रखता कि कितना बड़ा विस्फोट था, कितने लोग मारे गए। विस्फोट छोटा हो या बड़ा हो। लेकिन अगर आपको एक पैटर्न देखने को मिल रहा है कि हमारे आर्मी इंफ्रास्ट्रक्चर के बाहर इस तरह की कुछ चीजें की जा रही हैं, एक साथ की जा रही हैं – तो डेफिनेटली यहां पर हमें अलर्ट हो जाना चाहिए। और पंजाब को अलर्ट पर डाल दिया गया है।

पंजाब की सुरक्षा पृष्ठभूमि: 1980-90 की खालिस्तानी आतंकवाद

पंजाब का सुरक्षा बैकग्राउंड समझना जरूरी है। खालिस्तानी उग्रवाद 1980-90 में चला था। आपको याद होगा 1980 में ऑपरेशन ब्लू स्टार, ब्लैक थंडर – ये सारे ऑपरेशन हुए थे। पंजाब में हिंसक अलगाववादी उग्रवाद की इतिहास रही है।

जहां पर खालिस्तान का एक डिमांड किया जा रहा था। 1980 में स्पेशली अगर आप देखेंगे तो एक अलग देश की यहां पर मांग की जा रही थी। इसके अंदर हत्याएं, बम विस्फोट, पुलिस पर हमले, सुरक्षा बलों पर हमले हुए और इसके पीछे पाकिस्तान पूरी तरह से समर्थन कर रहा था।

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भारत ने अंततः यहां पर कैसे-जैसे करके जो उग्रवाद है उसको कुचला। काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन चलाए। इंटेलिजेंस पैनेट्रेशन किया। पॉलिटिकल स्टेबिलाइजेशन किया। वरना बहुत मुश्किल हो गया था। 1980-90 का जो दौर है पंजाब में बहुत खतरनाक था। और उसी का नतीजा है कि कुछ-कुछ कभी-कभी जो चीजें हैं वो भारत के अंदर इस तरह से सामने आती रहती हैं।

पाकिस्तान का स्ट्रैटेजिक इंटरेस्ट: पंजाब में घुसपैठ

पाकिस्तान का जो स्ट्रैटेजिक इंटरेस्ट है पंजाब में, यह भी समझना जरूरी है। पाकिस्तान की जो इंटेलिजेंस एस्टैब्लिशमेंट है, ऐतिहासिक रूप से पंजाब को एक स्ट्रैटेजिकली महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में लेती है क्योंकि:

• पाकिस्तान के साथ सीमा है
• सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बड़े पैमाने पर देखने को मिलता है
• ऐतिहासिक रूप से अलगाववादी फॉल्ट लाइंस देखने को मिलते हैं

तो इसका फायदा उठाने की कोशिश करती है पाकिस्तान। यहां पर तस्करी, हथियारों की आपूर्ति, विस्फोटकों की सप्लाई – ये सारी चीजें अक्सर आपको यहां देखने को मिलेंगी। और जो स्लीपर सेल्स हैं, कई बार उनको यहां पर फंडिंग दी जाती है पाकिस्तान के द्वारा। जो एक्सट्रीमिस्ट प्रोपेगेंडा होता है ऑनलाइन, उसको फैलाने की कोशिश की जाती है।

ड्रोन का नया खतरा: पाकिस्तान से हथियार और ड्रग्स की सप्लाई

यहां पर नया ड्रोन का खतरा भी है। हाल के वर्षों में अगर आप देखेंगे तो सबसे बड़ा बदलाव जो आया है पाकिस्तान के सुरक्षा परिदृश्य में, वो यही होता है कि पाकिस्तान की तरफ से अगर कोई भी हथियारों की आपूर्ति करनी हो, ड्रग्स की आपूर्ति करनी हो तो आजकल ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि वो आसानी से आ जाता है। लो लेवल पर फ्लाइंग करता है और उसको पकड़ना थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है।

तो सुरक्षा एजेंसियों ने लगातार AK सीरीज राइफल्स, पिस्टल्स, ग्रेनेड्स, नारकोटिक्स, सैटेलाइट फोन – ये सारी चीजें बरामद की हैं जो कि ड्रोन के जरिए पाकिस्तान से पंजाब के अंदर ड्रॉप किए गए थे।

और पंजाब को अब इंडिया का प्राइमरी एंटी-ड्रोन सिक्योरिटी थ्रेट माना जा रहा है। यह एक बड़ी समस्या बन गई है जिससे निपटना बेहद जरूरी है।

खालिस्तानी चिंता क्यों वापस आ रही है?

देखिए, वैसे तो 1990 में डिक्लाइन हो गया था। लेकिन हाल में जो घटनाएं हुई हैं कुछ-कुछ जगहों पर, उसमें ये वापस से रिवाइव होता हुआ दिख रहा है। सबसे पहला तो ओवरसीज यानी भारत के बाहर अगर आप देखेंगे तो ये प्रो-खालिस्तानी प्रोपेगेंडा चलाने की कोशिश की जाती है। फंड रेज किया जाता है।

कई बार आपने देखा होगा कनाडा में, ऑस्ट्रेलिया में – यहां पर आपने देखा होगा कि रेफरेंडम कराया जाता है कि क्या हमें एक अलग अपना देश मिलना चाहिए। हालांकि भारत ने बार-बार डिप्लोमेटिक चिंताएं जताई हैं इसको लेकर।

और इसी का नतीजा आप देख सकते हैं – हाल ही में कनाडा ने खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट को नेशनल सिक्योरिटी थ्रेट भी डिक्लेअर कर दिया अंततः। हालांकि आपको याद होगा जस्टिन ट्रूडो के समय भारत-कनाडा के संबंध काफी खराब हो गए थे। लेकिन नई सरकार बनने के बाद चीजें वापस से थोड़ी सी ठीक हो रही हैं।

और हाल ही में एक घटना भी हुई थी। आपको याद होगा दलजीत दोसांझ का कनाडा में इवेंट था और वहां पर खालिस्तानी झंडा फहराने की कोशिश की जा रही थी। और उसी समय दलजीत दोसांझ ने उसको नोटिस किया और साफ-साफ कह दिया कि ये बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है, आप वहां से चले जाओ।

सोशल मीडिया के जरिए रेडिकलाइजेशन और गैंगस्टर-टेरर नेक्सस

इसके अलावा सोशल मीडिया के जरिए रेडिकलाइजेशन – इंक्रिप्टेड ऐप्स होते हैं, ऑनलाइन वीडियोस, प्रोपेगेंडा चैनल्स – वहां पर अपनी जो विचारधारा है उसको फैलाने की कोशिश की जाती है कि देखो हमें अलग होना है, खालिस्तान बनाना है।

फिर ड्रोन-बेस्ड स्मगलिंग तो मैंने आपको बता ही दिया। ये एक बड़ी समस्या बन गई है पाकिस्तान से जो आता है पंजाब के अंदर।

फिर गैंगस्टर-टेरर का नेक्सस होता है। देखो कई बार लोग बहुत हल्के में लेते हैं कि ड्रग्स वगैरह है, क्या ही फर्क पड़ता है। मान लीजिए अगर कोई ड्रग्स आया तो चलो ठीक है, वो हम संभाल लेंगे। लेकिन वास्तव में ऐसा होता नहीं है। सिर्फ वो ड्रग्स का कारोबार नहीं है। यहां पर जो गैंगस्टर्स हैं, ऑर्गेनाइज्ड जो क्राइम किए जाते हैं, एक्सट्रीम जो ग्रुप्स होते हैं – वो इसका फायदा उठाते हैं।

वहां से ड्रग्स के साथ-साथ हथियारों की सप्लाई, किस तरह से लोगों को नशे में डालना – तो ये एक बहुत बड़ी समस्या है। ये जो गैंगस्टर-टेरर का नेक्सस है, इसमें पैसे का लेनदेन – ये सब कुछ यहां पर कराने की कोशिश की जाती है।

जांचकर्ता अब क्या देखेंगे? संभावित परिदृश्य

यहां पर अब सवाल ये है कि जांचकर्ता क्या-क्या चीजें अब देखेंगे? देखिए, सबसे पहला तो यह है कि कई सिनेरियो हो सकते हैं:

1. सिंबॉलिक टेरर अटैक: एक बड़ी संभावना हो सकती है कि जानबूझकर कुछ डर पैदा करने की कोशिश की जाए। देखा जाए कि कितनी क्षमता है उनके पास। सुरक्षा एजेंसियों को शर्मिंदा किया जाए। प्रचार हासिल किया जाए। तो इस तरह की चीज करने के लिए कई बार इस तरह के विस्फोट किए जाते हैं।

2. सिक्योरिटी प्रोबिंग: कई बार जो टेररिस्ट ग्रुप्स हैं, वो जानबूझकर इस तरह की चीजें करते हैं ताकि एक टेस्ट किया जाए कि सामने वाला जो सुरक्षा बल है, वो कितना तैयार है। किस तरह का रिस्पांस आएगा उसका। तो कई बार इस तरह की भी चीजें होती हैं।

3. पाकिस्तान बैक्ड प्रॉक्सी ऑपरेशन: पाकिस्तान की ISI, क्रॉस बॉर्डर हैंडलिंग। देखो अभी श्योर नहीं है लेकिन कुछ इस प्रकार के परिदृश्य हो सकते हैं।

4. लोन वुल्फ अटैक: या फिर एक और परिदृश्य ये भी हो सकता है। कई बार जो कुछ रेडिकलाइज्ड एलिमेंट होते हैं समाज के अंदर, भावुकता में कुछ ज्यादा ही बह जाते हैं। वो कई बार इस तरह की घटनाएं कर बैठते हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: कानून-व्यवस्था पर सवाल

इसके बाद यहां पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर:

• पंजाब कांग्रेस के चीफ ने यहां पर विस्फोट को गंभीर रूप से चिंताजनक बताया है। कहा है कि ये जो सीमावर्ती राज्य पर इस तरह की चीजें हो रही हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता है।

• शिरोमणि अकाली दल के लीडर्स ने भी कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल किए हैं।

• बीजेपी ने आम आदमी पार्टी की आलोचना की है।

फॉरेंसिक जांच: क्या-क्या देखा जाएगा?

यहां पर फॉरेंसिक टीम कई चीजों पर विश्लेषण कर सकती है:

• जो केमिकल रेसिड्यू है – जो बम फटा है उसमें कौन सा केमिकल शामिल था?
• एक्सप्लोसिव कंपाउंड कौन सा था?
• मेटल फ्रेगमेंटेशन क्या था?
• जलने का पैटर्न

ये सारी चीजों को देखा जाएगा और हो सकता है संभवतः कि NIA (National Investigation Agency) को भी इसके अंदर शामिल कर लिया जाए। निर्भर करता है कि यहां पर जो प्रारंभिक जांच होगी, उसमें क्या चीजें निकलकर आती हैं। अगर ऐसा लगता है कि ये कोई बड़ा टेरर अटैक करने की कोशिश की जा रही है तो NIA को भी इसके अंदर शामिल किया जा सकता है क्योंकि ये हमारी विशेषीकृत एजेंसी है। जब भी कोई टेरर अटैक होता है, वो तुरंत वहां पहुंचती है।

आगे क्या होगा?

देखना होगा आगे क्या होता है। लेकिन यह Punjab Twin Blasts निश्चित रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। पंजाब को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सभी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। और जांच तेजी से जारी है।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा को कभी हल्के में नहीं लिया जा सकता। क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म, ड्रोन-आधारित तस्करी और खालिस्तानी उग्रवाद के पुनरुत्थान के खतरे से निपटने के लिए सतर्कता और मजबूत कार्रवाई जरूरी है।


मुख्य बातें (Key Points)

• 5 मई 2026 को पंजाब में Twin Blasts – जालंधर और अमृतसर में दो घंटे के अंदर दो विस्फोट

• जालंधर में BSF पंजाब फ्रंटियर हेडक्वार्टर के बाहर रात 8 बजे पहला विस्फोट, अमृतसर में आर्मी खासा कैंटोनमेंट के पास रात 10:50 बजे दूसरा विस्फोट

• Khalistan Tiger Force (KTF) ने विस्फोटों की जिम्मेदारी ली

• अमृतसर वाले विस्फोट में मेटैलिक फ्रेगमेंट्स मिले, जो IED की ओर इशारा करते हैं

• पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स की तस्करी बड़ी समस्या, पंजाब इंडिया का प्राइमरी एंटी-ड्रोन सिक्योरिटी थ्रेट


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: Punjab Twin Blasts कब और कहां हुए?

उत्तर: Punjab Twin Blasts 5 मई 2026 को हुए। पहला विस्फोट रात 8 बजे जालंधर में BSF पंजाब फ्रंटियर हेडक्वार्टर के बाहर हुआ और दूसरा विस्फोट रात 10:50 बजे अमृतसर में आर्मी खासा कैंटोनमेंट के पास हुआ। दोनों विस्फोट सैन्य प्रतिष्ठानों के बाहर हुए और दो घंटे के अंदर, जो समन्वित हमले की ओर इशारा करता है।

प्रश्न 2: Khalistan Tiger Force (KTF) क्या है और इसने जिम्मेदारी क्यों ली?

उत्तर: Khalistan Tiger Force (KTF) एक प्रो-खालिस्तानी अलगाववादी संगठन है जो 1980-90 के दशक में पंजाब में सक्रिय था। इस संगठन ने Punjab Twin Blasts की जिम्मेदारी ली है। हालांकि 1990 में खालिस्तानी उग्रवाद को काफी हद तक कुचल दिया गया था, लेकिन विदेशों से फंडिंग, सोशल मीडिया पर रेडिकलाइजेशन और पाकिस्तान की संभावित मदद से यह फिर से सिर उठा रहा है।

प्रश्न 3: पंजाब में ड्रोन के जरिए तस्करी क्यों बड़ी समस्या है?

उत्तर: पाकिस्तान की सीमा से लगे पंजाब में ड्रोन-आधारित तस्करी एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बन गई है। पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए AK सीरीज राइफल्स, पिस्टल्स, ग्रेनेड्स, नारकोटिक्स और सैटेलाइट फोन पंजाब में ड्रॉप किए जाते हैं। ड्रोन लो लेवल पर उड़ते हैं, इसलिए इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है। पंजाब को अब इंडिया का प्राइमरी एंटी-ड्रोन सिक्योरिटी थ्रेट माना जा रहा है।

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