Tamil Nadu Election Vijay Hung Assembly की स्थिति बनती दिख रही है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam) को जबरदस्त सफलता मिली है लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी जादुई आंकड़े से वे अभी भी दूर हैं। वर्तमान रुझानों के अनुसार TVK को लगभग 107 सीटें मिल रही हैं जबकि सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है। यह स्थिति तमिलनाडु की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि TVK की आंधी तो थी लेकिन DMK की overconfidence और AIADMK की रणनीतिक चूकों ने इस परिणाम को जन्म दिया। अब सवाल यह है कि विजय सरकार कैसे बनाएंगे? क्या वे किसी पार्टी से हाथ मिलाएंगे या फिर अरविंद केजरीवाल का रास्ता अपनाएंगे?
देखा जाए तो यह सिर्फ एक exit poll का नतीजा नहीं है बल्कि TVK की एक वास्तविक जमीनी लहर थी जिसे DMK ने गंभीरता से नहीं लिया। DMK overconfident इसलिए रही क्योंकि उन्हें लगा कि उनके मजबूत कैडर ground level पर काम कर रहे हैं और वे अपने मतदाताओं को safe करने में कामयाब रहे हैं। लेकिन ground reality कुछ और ही थी।
जब Special Summary Revision (SSR) के तहत तकरीबन 97 लाख लोगों के नाम voter list से काटे गए थे, तभी से एक undercurrent दिख रहा था। पश्चिम बंगाल में जिस तरह ममता बनर्जी ने SSR के खिलाफ लड़ाई लड़ी, तमिलनाडु में DMK ने वैसी कोई मजबूत पहल नहीं की। यह उनकी पहली बड़ी चूक थी।
विजय की चुप्पी और रणनीतिक चालें
दिलचस्प बात यह है कि विजय ने अपनी किसी भी रैली में कभी भी BJP के खिलाफ, नरेंद्र मोदी जी के खिलाफ या फिर AIADMK के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला। उनका पूरा फोकस DMK की सरकार और करप्शन के मुद्दे पर था। ठीक वैसे ही BJP की रैलियों में या उनके नेताओं के बयानों में किसी ने भी विजय के बारे में कुछ नहीं कहा।
विजय ने साफ-साफ कहा था कि “मैं BJP या NDA के साथ नहीं जाऊंगा क्योंकि हमारे बीच ideological difference है। लेकिन दूसरी तरफ मैं DMK के खिलाफ हूं क्योंकि मैं यहां बदलाव लाना चाहता हूं।” यह दो-तरफा रुख था जिसने मतदाताओं को आकर्षित किया।
समझने वाली बात यह है कि AIADMK और DMK दोनों ने एक-दूसरे के ऊपर ही फोकस किया। इन दोनों ने अपना पूरा प्रचार एक-दूसरे के खिलाफ केंद्रित किया। किसी ने भी विजय को इतनी गंभीरता से नहीं लिया। यह उनकी दूसरी बड़ी रणनीतिक भूल साबित हुई।
मीडिया कंट्रोल का खेल – PEN की भूमिका
DMK ने एक तरह का web create किया हुआ था अपने आसपास। PEN organization जो MK Stalin के दामाद का है, पूरे media को control करता है। Complete media is controlled by PEN। PEN से जुड़े हुए जितने भी YouTubers थे या पत्रकार थे, किसी ने भी ground reality जाकर नहीं बताई।
उनको बस यह कहा गया कि “आपके खिलाफ तो कोई लहर है ही नहीं, आप जीत रहे हैं।” जो ground में realities दिख रही थीं, जो undercurrent था, उसके बारे में किसी ने सही-सही जाकर सत्ताधारी लोगों को नहीं बताया। यह एक systematic information blackout था जो DMK की हार का बड़ा कारण बना।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि जो experts थे, जिनके exit polls आए थे, उनमें से भी ज्यादातर ने TVK को 8-10 सीटों से ज्यादा नहीं दिया था। सिर्फ Axis My India के exit poll ने कहा था कि विजय सरकार बना रहे हैं। बाकी सबका गणित गलत हो गया। इसका मतलब है कि सिर्फ political party DMK ही नहीं बल्कि experts भी इस जमीनी लहर को समझने में चूक गए।
हंग असेंबली – विजय के सामने विकल्प
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विजय सरकार बना पाएंगे? हंग असेंबली की स्थिति में विजय के पास मुख्य रूप से तीन विकल्प हैं:
पहला विकल्प – DMK से समर्थन: लेकिन विजय पहले ही यह कह चुके हैं कि वे DMK के साथ नहीं जाएंगे क्योंकि उनकी पूरी लड़ाई ही DMK के खिलाफ थी।
दूसरा विकल्प – NDA/BJP से समर्थन: यहां भी विजय ने कहा है कि वे ideologically BJP के साथ नहीं हैं। लेकिन एक soft corner दिखता है क्योंकि विजय ने कभी भी BJP के खिलाफ कुछ नहीं कहा। शायद बाहरी तौर पर BJP उन्हें support करे और AIADMK से कुछ लोगों को विजय की पार्टी में शामिल किया जाए। AIADMK ही इकलौती पार्टी है जो उनके साथ मिलकर सरकार बना सकती है।
तीसरा विकल्प – अरविंद केजरीवाल मॉडल: क्या विजय वही रास्ता अपनाएंगे जो पहली बार दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने अपनाया था? उस समय कांग्रेस ने भी support करने की कोशिश की, BJP ने भी की, लेकिन केजरीवाल ने कहा कि नहीं, हम दोनों की तरफ नहीं जाएंगे। फिर दोबारा election हुआ और उन्हें भारी बहुमत मिला।
हालांकि एक correction यह है कि केजरीवाल immediately election नहीं करवाने गए थे। बाहर से कांग्रेस के समर्थन से उन्होंने सरकार बनाई, वह सरकार चलाई, फिर इस्तीफा दिया और उसके बाद election हुए जिसमें thumping majority मिली। क्या विजय भी यही रास्ता अपनाएंगे?
Horse Trading का खतरा
चिंता का विषय यह है कि हंग असेंबली में horse trading की आशंका बढ़ जाती है। विजय को भी यह डर लग रहा है कि उनकी तरफ से अगर लोग टूट गए तो क्या होगा। इसीलिए जितने भी TVK के MLA चुनकर आए हैं, सबको एक जगह ले जाया गया है।
क्योंकि DMK के पास “बेशुमार पैसा” है और वे पैसे देकर कुछ भी कर सकते हैं या फिर re-election की तरफ लेकर जाने की कोशिश कर सकते हैं। पहले भी कई states में हमने देखा है जहां ऐसी खरीद-फरोख्त होती है।
महिलाओं और युवाओं का वोट
दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में यह माना जा रहा था कि सिर्फ 18-25 साल के युवा ही विजय को वोट देंगे। लेकिन जब ground पर जाकर लोगों से मिले तो एक चीज समझ में आई – विजय के साथ सिर्फ stardom नहीं है, बल्कि एक emotional connect जुड़ा हुआ है।
खासतौर पर महिलाओं ने बढ़-चढ़कर वोट डाला। वो भी urban areas में, जो IT industry में काम कर रही हैं। कई सारे लोगों ने डर के मारे वोट नहीं भी डाला था क्योंकि उन्हें लगा कि विजय आएंगे ही नहीं। अगर दोबारा election होता है तो यह वोट भी मिल सकते हैं।
DMK की रणनीतिक चूकें
DMK ने अपने strong cadres को इस बार seats नहीं दीं। जो सड़कों पर उतरकर लोगों के साथ जुड़ने का काम करते थे, उन्हें नजरअंदाज किया गया। जब seats बांटे गए तो सिर्फ तीन लोग इसमें शामिल हुए:
- MK Stalin (मुख्यमंत्री)
- Udhayanidhi Stalin (उनके बेटे, उपमुख्यमंत्री)
- Sabaresan (उनके दामाद)
इन तीन लोगों ने जो list पकड़ाई वही बाहर आई। बहुत सारे लोगों में असंतोष था। कुछ लोग कह रहे थे कि समय पर चीजें नहीं बताई गईं। जो stronghold था जहां DMK जीत सकती थी, वहां पर कई जगह Congress को seats दे दी गईं।
यह सारी चीजें DMK के खिलाफ गईं। overconfidence के चलते ये लोग पिट गए और जो विजय की आंधी थी उसको इन्होंने gauge नहीं किया।
विजय के एजेंडे की अस्पष्टता
एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि जिसने भी विजय को वोट डाला, अगर उनसे पूछा जाए कि विजय को क्यों वोट डाला, तो वे बोलते हैं “हमने change के लिए वोट डाला।” लेकिन कैसा change चाहिए? इसका स्पष्ट जवाब नहीं है।
विजय की पार्टी के लोगों से जब यह सवाल पूछा गया कि वे किस तरह का development model लाना चाहते हैं, तो उन्हें खुद नहीं पता। Corruption को कैसे रोकेंगे? इसका भी स्पष्ट roadmap नहीं है। Progress के लिए भी कोई concrete plan नहीं दिखता।
समझने वाली बात यह है कि तमिलनाडु already एक progressive state है। यहां नौकरियां हैं, industry है, per capita income शायद देश में सबसे ज्यादा है। तो ऐसे state में किस तरह का development model की बात हो रही है – यह अभी स्पष्ट नहीं है।
Congress की स्थिति और विकल्प
Congress ने हमेशा कहा कि वे विजय को support कर सकते हैं। लेकिन Congress के पास सिर्फ 5 seats ऐसी दिख रही हैं जहां वे lead कर रहे हैं। उनके पास भी कुछ खास नहीं है। इसलिए Congress का support भी पर्याप्त नहीं होगा।
अगर Congress अलग से support भी कर देती है, उसके बाद भी 5-7 seats की कसर रह जाएगी। तो इकलौता रास्ता AIADMK ही है – या तो पूरी पार्टी के साथ या फिर AIADMK से कुछ लोग टूटकर TVK में शामिल हों।
विजय के खेमे में खुशी
फिलहाल विजय के खेमे में एक बहुत बड़ी खुशी की लहर है। जो भी वहां के लोगों से बात हुई है, सभी बहुत happy हैं। यह उनकी पहली electoral success है और एक नए actor-turned-politician के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।
लेकिन अब देखना होगा कि Thalapathy Vijay सरकार कैसे बना पाते हैं क्योंकि numbers उनके पास थोड़े कम रह गए हैं। क्या वे अपने principles पर अड़े रहेंगे या political compulsions के सामने झुकेंगे? क्या यह एक stepping stone है उनके political future के लिए या एक missed opportunity?
यह सब आने वाले कुछ दिनों में ही साफ हो जाएगा जब विजय अपना अगला कदम उठाएंगे।
मुख्य बातें (Key Points):
• Tamil Nadu Election Vijay Hung Assembly – TVK को 107 seats मिलीं, 118 का magic figure चाहिए, सरकार बनाना चुनौतीपूर्ण
• DMK की overconfidence और PEN organization द्वारा media control ने ground reality छुपाई, SSR में 97 lakh voters काटे गए
• विजय ने BJP/Modi के खिलाफ कुछ नहीं बोला, DMK और AIADMK ने एक-दूसरे पर focus किया, विजय को seriously नहीं लिया
• Horse trading का डर, सभी MLAs को एक जगह रखा गया, options – AIADMK support, BJP external support, या Kejriwal model
• महिलाओं ने बढ़-चढ़कर vote किया, DMK ने strong cadres को seats नहीं दीं, family politics (Stalin, Udhayanidhi, Sabaresan) ने seats बांटीं













