India Fifth Largest Defence Spender: भारत ने रक्षा खर्च के मामले में एक नया इतिहास रच दिया है। पहली बार देश दुनिया के शीर्ष पांच सबसे बड़े सैन्य खर्च करने वाले देशों में शामिल हो गया है। Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 2025 में कुल $92.1 बिलियन (करीब ₹7.8 लाख करोड़) का रक्षा खर्च किया है।
यह 2024 की तुलना में 8.9 फीसदी ज्यादा है। देखा जाए तो यह कोई अचानक का उछाल नहीं है, बल्कि पिछले कई सालों से लगातार बढ़ते सैन्य खर्च का नतीजा है। लेकिन सवाल उठता है – भारत को इतना पैसा खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या हम सही जगह पैसा लगा रहे हैं? और दुनिया में अमेरिका का खर्च क्यों घटा जबकि यूरोप का 14% बढ़ गया?
इन सभी सवालों के जवाब समझने से पहले एक बात साफ कर लें – यह सिर्फ आंकड़ों की खबर नहीं है। यह भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और हमारे सामने खड़ी गंभीर सुरक्षा चुनौतियों की कहानी है।
SIPRI की रिपोर्ट में क्या है खास?
SIPRI यानी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना 1966 में स्वीडन के स्टॉकहोम में हुई थी। यह संस्था दुनिया भर में चल रहे सशस्त्र संघर्षों, सैन्य खर्च और हथियारों की होड़ पर गहन शोध करती है।
हर साल SIPRI जो World Military Expenditure Report जारी करता है, वह दुनिया की रक्षा नीतियों को समझने का सबसे विश्वसनीय स्रोत माना जाता है।
इस बार की रिपोर्ट में सबसे बड़ी बात यह है कि 2025 में दुनिया भर के देशों ने कुल $2.9 ट्रिलियन (करीब ₹245 लाख करोड़) का रक्षा खर्च किया। सोचिए, यह पैसा अगर विकास पर खर्च होता तो क्या नहीं हो सकता था?
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि यह खर्च पिछले 11 सालों से लगातार बढ़ता जा रहा है। 2010 से 2015 के बीच थोड़ी गिरावट जरूर आई थी, लेकिन उसके बाद से रुकने का नाम ही नहीं ले रहा।
शीर्ष पांच देशों की सूची – कौन कितना खर्च कर रहा है?
अब आते हैं असली मुद्दे पर। India Fifth Largest Defence Spender बनने के साथ ही टॉप 5 की पूरी तस्वीर बदल गई है:
1. अमेरिका (USA) – करीब $1 ट्रिलियन (कुल खर्च का 33%)
दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश अमेरिका है। अकेला अमेरिका जितना खर्च करता है, उतना अगले 10 देश मिलकर नहीं करते। लेकिन 2024 की तुलना में इसमें थोड़ी गिरावट आई है।
2. चीन (China) – कुल खर्च का 12%
चीन तेजी से अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है। भारत से 3-4 गुना ज्यादा खर्च कर रहा है। यही India Fifth Largest Defence Spender बनने की सबसे बड़ी वजह है – चीन का बढ़ता दबाव।
3. रूस (Russia) – कुल खर्च का 6.6%
यूक्रेन युद्ध के कारण रूस का खर्च आसमान छू रहा है। यह पूरी तरह युद्ध-संचालित वृद्धि (War-Driven Surge) है।
4. जर्मनी (Germany) – कुल खर्च का 3.9%
NATO की जिम्मेदारी और ट्रंप के दबाव के चलते जर्मनी ने अपना खर्च बड़े पैमाने पर बढ़ाया है।
5. भारत (India) – कुल खर्च का 3.2% ($92.1 बिलियन)
पहली बार टॉप 5 में। पाकिस्तान से 8 गुना ज्यादा खर्च, लेकिन चीन से अभी भी काफी पीछे।
इसके बाद ब्रिटेन (UK), यूक्रेन, सऊदी अरब, फ्रांस और जापान का स्थान है।
अमेरिका का खर्च घटा क्यों?
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अमेरिका अभी भी नंबर एक पर है, लेकिन 2024 के मुकाबले इसका खर्च थोड़ा कम हुआ है। इसके पीछे मुख्य कारण यूक्रेन को मिलने वाली आर्थिक मदद में कटौती है।
बाइडन प्रशासन के दौरान यूक्रेन को अरबों डॉलर की मदद दी जा रही थी। लेकिन Donald Trump के आने के बाद यह मदद कम कर दी गई। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका दूसरे देशों की लड़ाई में अपना पैसा नहीं लगाएगा।
हालांकि SIPRI का मानना है कि यह कमी अस्थायी है। 2026 के लिए पहले से ही $1 ट्रिलियन से ज्यादा का बजट आवंटित किया जा चुका है। Iran War और मध्य पूर्व के तनाव के चलते अमेरिका का खर्च फिर से बढ़ेगा।
यूरोप में 14% की छलांग क्यों?
अगर गौर करें तो यूरोप ने अपना रक्षा खर्च 14% बढ़ाकर $864 बिलियन कर दिया है। यह बेहद बड़ी छलांग है।
इसके पीछे मुख्य कारण:
NATO में ट्रंप का दबाव: डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर दबाव बनाया कि या तो वे अपना रक्षा खर्च बढ़ाएं, या अमेरिका NATO से बाहर हो जाएगा। अमेरिका पर भारी निर्भर यूरोप को अपनी सुरक्षा खुद संभालनी पड़ रही है।
यूक्रेन युद्ध: रूस का खतरा यूरोप के सिर पर मंडरा रहा है। यूक्रेन को बचाने और खुद की सुरक्षा के लिए यूरोप को भारी खर्च करना पड़ रहा है।
रूस की आक्रामकता: पुतिन की रणनीति ने पूरे यूरोप को चौकन्ना कर दिया है।
भारत ने इतना खर्च क्यों बढ़ाया?
भारत का रक्षा खर्च एकदम से नहीं बढ़ा। यह एक Steady Upward Trend है:
- 2020: $72 बिलियन
- 2023: $81 बिलियन
- 2025: $92.1 बिलियन
हर साल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। लेकिन 2025 में खासतौर पर बढ़ोतरी के कुछ तात्कालिक कारण हैं:
मई 2025 का भारत-पाकिस्तान युद्ध: ड्रोन, मिसाइल और एयर पावर का भारी इस्तेमाल हुआ। Operational Expenditure बढ़ गया। आपातकालीन हथियार खरीद (Emergency Procurement) करनी पड़ी। एयर डिफेंस सिस्टम में बूस्ट दिया गया।
चीन का दबाव: यह सबसे बड़ा दीर्घकालिक कारण है। चीन भारत से 3-4 गुना ज्यादा खर्च करता है। सीमा पर तनाव बना हुआ है। हिमालयी क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर की होड़ लगी है। इंडो-पैसिफिक में नौसेना का विस्तार चल रहा है। Two-Front War (दो मोर्चों पर युद्ध) का खतरा हमेशा बना रहता है – एक तरफ पाकिस्तान, दूसरी तरफ चीन।
पाकिस्तान फैक्टर: भारत पाकिस्तान से 8 गुना ज्यादा खर्च करता है ($92 बिलियन vs $11-12 बिलियन)। लेकिन समझने वाली बात यह है कि यह गैप भ्रामक है। पाकिस्तान को चीन से भारी मदद मिलती है। उसके पास परमाणु हथियार हैं। ट्रंप प्रशासन से भी मदद मिल रही है। इसलिए कम खर्च के बावजूद उसकी ताकत कम नहीं आंकी जा सकती।
सैन्य आधुनिकीकरण की जरूरत
भारत Manpower Heavy Army से Technology-Driven Force बनने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए निवेश जरूरी है:
- लड़ाकू विमान (Fighter Jets)
- ड्रोन (Drones)
- मिसाइल सिस्टम (Missile Systems)
- साइबर वारफेयर (Cyber Warfare)
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
आत्मनिर्भर भारत भी एक बड़ा फैक्टर है। हमारा लक्ष्य है:
- आयात कम करना
- घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देना
- निर्यात बढ़ाना
उदाहरण के लिए तेजस लड़ाकू विमान, डिफेंस कॉरिडोर आदि। लेकिन चिंता का विषय यह है कि अभी भी प्रगति धीमी है। बड़े पैमाने पर सफलता नहीं मिल पाई है।
बजट में सबसे बड़ी समस्या – पेंशन का बोझ
भारत के रक्षा बजट की संरचना में सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश हिस्सा Revenue Expenditure (राजस्व व्यय) में चला जाता है:
- सैलरी (Salaries)
- पेंशन (Pensions)
- रखरखाव (Maintenance)
हैरान करने वाली बात यह है कि पेंशन का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसकी वजह से आधुनिकीकरण के लिए कम पैसा बचता है।
Capital Expenditure (पूंजीगत व्यय) जितना होना चाहिए, उतना नहीं हो पा रहा:
- हथियार खरीद (Weapons Procurement)
- इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure)
- टेक्नोलॉजी अपग्रेड (Technology Upgrade)
राहत की बात यह है कि सरकार इस समस्या को समझ रही है। नई पेंशन योजनाओं और सुधारों पर विचार चल रहा है।
टॉप 5 में आना क्या दर्शाता है?
India Fifth Largest Defence Spender बनना कई चीजें बताता है:
भारत एक प्रमुख सैन्य शक्ति है: हम अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक भूमिका निभा रहे हैं।
आर्थिक ताकत: इतना बड़ा रक्षा खर्च हमारी बढ़ती अर्थव्यवस्था का संकेत है।
रणनीतिक महत्वाकांक्षा: भारत अब सिर्फ रक्षात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय रणनीतिक भूमिका चाहता है।
गंभीर सुरक्षा चुनौतियां: अगर पड़ोसी देश इतने आक्रामक नहीं होते, तो इतना खर्च करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
फायदे क्या हैं?
निवारक शक्ति (Deterrence): पाकिस्तान और चीन दोनों को पता है कि भारत मजबूत है। यह युद्ध से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है।
रक्षा उद्योग का विकास: घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल रहा है।
तकनीकी प्रगति: AI, ड्रोन, साइबर सिक्योरिटी में निवेश बढ़ रहा है।
चुनौतियां और चिंताएं
आर्थिक दबाव: इतना पैसा रक्षा पर खर्च करने से विकास कार्यों पर असर पड़ता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास – इन सब पर कम पैसा बचता है।
यह सबसे बड़ा विकास बनाम सुरक्षा का द्वंद्व है। अगर देश ही सुरक्षित नहीं रहेगा तो विकास किसके लिए? लेकिन अगर विकास नहीं होगा तो देश कमजोर होगा।
हथियारों की होड़ (Arms Race): भारत बढ़ाएगा तो पाकिस्तान और चीन भी बढ़ाएंगे। यह एक खतरनाक चक्र है।
अक्षमता का खतरा: अगर पैसा सही जगह नहीं लगा, तो सब बेकार। Revenue Expenditure को कम करना जरूरी है।
क्या भारत सही दिशा में जा रहा है?
यह सवाल सबसे अहम है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को चाहिए:
- पेंशन सुधार ताकि ज्यादा पैसा आधुनिकीकरण पर लगे
- आत्मनिर्भरता को तेज गति देना
- रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) हासिल करना – किसी देश पर निर्भर न रहना
- Capital Expenditure का हिस्सा बढ़ाना
- रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना
वैश्विक स्तर पर क्या हो रहा है?
Great Power Rivalry: अमेरिका-चीन की प्रतिस्पर्धा चरम पर है। दोनों भारी खर्च कर रहे हैं।
Indo-Pacific Militarization: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्यीकरण तेज हो रहा है।
Security Dilemma: एक देश बढ़ाता है तो दूसरे को खतरा महसूस होता है। वह भी बढ़ाता है। यह दुष्चक्र चलता रहता है।
Ongoing Conflicts:
- रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है
- ईरान युद्ध (2026 में बड़ा, लेकिन 2025 में भी 11 दिन का युद्ध हुआ था)
- मध्य पूर्व में अस्थिरता
मुख्य बातें (Key Points)
- SIPRI रिपोर्ट के अनुसार भारत पहली बार दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश बना
- भारत ने 2025 में $92.1 बिलियन खर्च किया, जो 2024 से 8.9% ज्यादा है
- वैश्विक रक्षा खर्च $2.9 ट्रिलियन तक पहुंचा, पिछले 11 सालों से लगातार बढ़ रहा है
- अमेरिका टॉप पर ($1 ट्रिलियन), लेकिन यूक्रेन मदद घटने से थोड़ी कमी आई
- चीन दूसरे, रूस तीसरे और जर्मनी चौथे स्थान पर
- यूरोप ने 14% खर्च बढ़ाया ($864 बिलियन) – NATO दबाव और रूस खतरे के कारण
- मई 2025 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद आपातकालीन हथियार खरीद हुई
- चीन भारत से 3-4 गुना ज्यादा खर्च करता है – यही दीर्घकालिक दबाव है
- भारत पाकिस्तान से 8 गुना ज्यादा खर्च करता है ($92 बिलियन vs $11-12 बिलियन)
- भारत के बजट में Revenue Expenditure (सैलरी, पेंशन) का बोझ ज्यादा – आधुनिकीकरण के लिए कम पैसा













