IMD Weather Alert 27 April 2026: भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 27 अप्रैल 2026 को देशभर के लिए एक अहम मौसम चेतावनी जारी की है। India Meteorological Department (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में लू की स्थिति बनी हुई है, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा है। पिछले 24 घंटों में विदर्भ के अकोला में तापमान 46.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो देश में सबसे अधिक दर्ज किया गया।
देखा जाए तो इस बार मौसम विभाग ने कई राज्यों के लिए ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है। त्रिपुरा में पिछले 24 घंटों में 12 से 20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश हो चुकी है। वहीं असम, मेघालय, सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में आने वाले दिनों में भारी बारिश की संभावना है। समझने वाली बात यह है कि अगले एक हफ्ते तक मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

पिछले 24 घंटों में कैसा रहा मौसम का हाल
भारत मौसम विज्ञान विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 26 अप्रैल सुबह 8:30 बजे से 27 अप्रैल सुबह 8:30 बजे तक देशभर में कई इलाकों में तेज आंधी-तूफान और बारिश हुई। त्रिपुरा के सिपाहीजला में 13 सेंटीमीटर, बगफा में 10 सेंटीमीटर और अमरपुर में 9 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। मेघालय के नोंगस्टीन में भी 9 सेंटीमीटर बारिश हुई।
दिलचस्प बात यह है कि कई इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। त्रिपुरा के तेलियामुरा में हवा की रफ्तार 113 किमी प्रति घंटा, आइजोल में 76 किमी प्रति घंटा और असम के करीमगंज में 63 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई। इस तेज आंधी ने पेड़ों को उखाड़ दिया और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचाया।
अगर गौर करें तो तापमान की बात करें, तो विदर्भ, हिमाचल प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में लू की स्थिति बनी रही। देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान 40 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। केवल पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पूर्वी बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में तापमान 36 डिग्री से नीचे रहा।
18 राज्यों के लिए जारी हुआ अलर्ट, जानें कहां क्या होगा
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले 5 से 7 दिनों के लिए देशभर में मौसम की स्थिति का विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है। आइए जानते हैं किन राज्यों में क्या मौसम रहने वाला है।
उत्तर-पश्चिम भारत: जम्मू-कश्मीर में 27 से 29 अप्रैल तक, हिमाचल प्रदेश में 28 से 30 अप्रैल और 3 मई को, उत्तराखंड में 28 अप्रैल से 3 मई तक बारिश और बर्फबारी की संभावना है। साथ ही गरज, बिजली और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है। पंजाब और हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली में 27 से 30 अप्रैल और 2-3 मई को हल्की बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 28 और 29 अप्रैल को पंजाब और हरियाणा-चंडीगढ़ में तेज आंधी (50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 70 किमी तक बढ़ सकती है) चलने की संभावना है। 28 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में और 28-29 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में ओलावृष्टि भी हो सकती है।
पूर्वोत्तर भारत: अगले 5 दिनों तक असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक रूप से हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। 27 अप्रैल को असम-मेघालय में और 27-28 अप्रैल को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में तेज आंधी (50-70 किमी प्रति घंटे) चल सकती है।
चिंता का विषय यह है कि असम-मेघालय में 27 से 30 अप्रैल तक और अरुणाचल प्रदेश में 30 अप्रैल से 2 मई तक बहुत भारी बारिश (115.6 से 204.4 मिमी) होने की संभावना है। यह बाढ़ और भूस्खलन का कारण बन सकता है।
पूर्वी भारत में आंधी-तूफान का खतरा
पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अगले 7 दिनों तक व्यापक बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाओं की संभावना है। बिहार और ओडिशा में 27 अप्रैल से 1 मई तक छिटपुट बारिश हो सकती है। 27 अप्रैल को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में, 27 से 30 अप्रैल तक गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल में और 28 अप्रैल को बिहार में तेज आंधी चलने की आशंका है।
समझने वाली बात यह है कि 28 अप्रैल को बिहार में, 29-30 अप्रैल को गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल में और 27 अप्रैल से 2 मई तक उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश हो सकती है। 30 अप्रैल को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 27 और 30 अप्रैल को झारखंड में ओलावृष्टि भी हो सकती है।
मध्य और दक्षिण भारत का मौसम पूर्वानुमान
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिनों तक हल्की बारिश, गरज और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। विदर्भ में 27 अप्रैल और 29 अप्रैल से 1 मई तक गरज और बिजली की संभावना है। 29 अप्रैल से 1 मई तक छत्तीसगढ़ में तेज आंधी (50-70 किमी प्रति घंटे) चल सकती है।
दक्षिण भारत में केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बारिश होगी। 30 अप्रैल को दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में, 30 अप्रैल से 2 मई तक तमिलनाडु-पुडुचेरी-कराईकल में और 29 अप्रैल से 1 मई तक केरल-माहे में भारी बारिश हो सकती है। 28 से 30 अप्रैल तक उत्तर आंतरिक कर्नाटक और 29-30 अप्रैल को दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में ओलावृष्टि की चेतावनी है।
लू की स्थिति और तापमान में बदलाव
देखा जाए तो लू की स्थिति कई राज्यों में गंभीर बनी हुई है। 27 और 28 अप्रैल को विदर्भ के कुछ इलाकों में लू चलेगी। 27 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा-चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम मध्य प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भी लू की स्थिति बन सकती है। 27-28 अप्रैल को पश्चिम राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, रायलसीमा, छत्तीसगढ़ और उत्तरी तेलंगाना में भी लू चलने की संभावना है।
दिलचस्प बात यह है कि तापमान में भी बदलाव आने वाला है। उत्तर-पश्चिम भारत में 28 अप्रैल से 1 मई तक अधिकतम तापमान में 3-5 डिग्री की गिरावट आएगी। मध्य भारत में 29 अप्रैल से 1 मई तक 2-3 डिग्री की गिरावट और 2-3 मई को 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी होगी। पूर्वी भारत में 30 अप्रैल तक 3-5 डिग्री की गिरावट आएगी।
महाराष्ट्र में 30 अप्रैल से 3 मई तक तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट आएगी। गुजरात में 29 अप्रैल से 1 मई तक 2-3 डिग्री की गिरावट और 2-3 मई को 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी होगी।
दिल्ली-NCR में कैसा रहेगा मौसम
राजधानी दिल्ली-NCR के लिए मौसम विभाग ने विशेष पूर्वानुमान जारी किया है। पिछले 24 घंटों में दिल्ली में अधिकतम तापमान 42-43 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24-26 डिग्री सेल्सियस रहा। तापमान सामान्य से 3.1 से 5 डिग्री अधिक रहा।
27 अप्रैल 2026: मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा, लेकिन दोपहर/शाम को आंशिक बादल छा सकते हैं। अलग-अलग इलाकों में लू की स्थिति बनेगी। दोपहर/शाम को गरज की संभावना है। हवा की रफ्तार 15-25 किमी प्रति घंटे रहेगी, जो कभी-कभी 35 किमी प्रति घंटे तक जा सकती है। अधिकतम तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
28 अप्रैल 2026: आंशिक बादल छाए रहेंगे और दोपहर में आकाश पूरी तरह से बादलों से ढक जाएगा। दोपहर/शाम को बहुत हल्की बारिश/बूंदाबांदी हो सकती है। गरज, बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (50 किमी तक बढ़ सकती है) से तेज हवाएं चलेंगी। अधिकतम तापमान 40-42 डिग्री और न्यूनतम 27-29 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है।
29 अप्रैल 2026: आंशिक बादल छाए रहेंगे और दिन में एक-दो बार बहुत हल्की बारिश/बूंदाबांदी हो सकती है। गरज, बिजली और तेज हवाएं (30-50 किमी प्रति घंटे) चलेंगी। अधिकतम तापमान 39-41 डिग्री और न्यूनतम 25-27 डिग्री सेल्सियस रहेगा।
30 अप्रैल 2026: आंशिक बादल छाए रहेंगे और शाम को गरज की संभावना है। अधिकतम तापमान 37-39 डिग्री और न्यूनतम 23-25 डिग्री सेल्सियस रहेगा। तापमान सामान्य हो जाएगा।
मछुआरों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी
मौसम विभाग ने मछुआरों को 27 अप्रैल से 2 मई 2026 तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है। बंगाल की खाड़ी में ओडिशा, पश्चिम बंगाल के तटों और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में समुद्र में उफान रहेगा। अरब सागर के लिए कोई चेतावनी नहीं है।
यहां समझने वाली बात यह है कि मछुआरों को समुद्र में तेज हवाओं और ऊंची लहरों का खतरा है। इसलिए तटीय राज्यों, विशेष रूप से केरल के मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
लू और गर्म मौसम से बचाव के उपाय
मौसम विभाग ने लू से बचने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। लू की स्थिति में मध्यम स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है, विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए। लंबे समय तक गर्मी में रहने से बचें। हल्के रंग के और ढीले सूती कपड़े पहनें। बाहर जाते समय सिर को कपड़े, टोपी या छाता से ढकें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, भले ही प्यास न लगी हो। ORS, लस्सी, तोरानी (चावल का पानी), नींबू पानी, छाछ जैसे घर में बने पेय पदार्थों का सेवन करें। खुद को हाइड्रेटेड रखें।
आंधी-तूफान और बारिश में सावधानियां
गरज, बिजली और तेज हवाओं (30-50 किमी प्रति घंटे, कभी-कभी 70 किमी तक) के दौरान पेड़ों की शाखाएं टूट सकती हैं, पेड़ उखड़ सकते हैं, फसलों को नुकसान हो सकता है, बिजली और संचार लाइनें प्रभावित हो सकती हैं, कमजोर संरचनाओं को आंशिक नुकसान हो सकता है और ढीली वस्तुएं उड़ सकती हैं।
घर के अंदर रहें और खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें। यदि संभव हो तो यात्रा से बचें। पेड़ों के नीचे शरण न लें। कंक्रीट की दीवारों/फर्श, जल निकायों और बिजली के तारों से दूर रहें। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग कर दें और बिगड़ती मौसम की स्थिति के लिए सतर्क रहें।
भारी बारिश से होने वाले नुकसान और सुरक्षा उपाय
भारी से बहुत भारी बारिश के दौरान सड़कों पर स्थानीय बाढ़, निचले इलाकों में जल भराव और शहरी क्षेत्रों में अंडरपास बंद हो सकते हैं। भारी बारिश के कारण कभी-कभी दृश्यता कम हो सकती है। प्रमुख शहरों में सड़कों पर जल भराव के कारण यातायात बाधित हो सकता है और यात्रा का समय बढ़ सकता है। कच्ची सड़कों को मामूली नुकसान हो सकता है। संवेदनशील संरचनाओं को नुकसान की संभावना है। स्थानीय भूस्खलन/मिट्टी का खिसकना हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में बागवानी और खड़ी फसलों को डूबने से नुकसान हो सकता है।
अपने गंतव्य के लिए निकलने से पहले अपने मार्ग पर यातायात की भीड़ की जांच करें। इस संबंध में जारी किए गए किसी भी यातायात परामर्श का पालन करें। ऐसे इलाकों में जाने से बचें जहां अक्सर जल भराव की समस्या होती है। संवेदनशील संरचनाओं में रहने से बचें।
किसानों के लिए कृषि सलाह
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक में फलों के बागों और सब्जियों के पौधों को यांत्रिक क्षति से बचाने के लिए ओलों के जाल या टोपी का उपयोग करें। जल भराव को रोकने के लिए प्रभावी खेत की निकासी सुनिश्चित करें। पके फलों की तुड़ाई जल्द से जल्द करें। कटाई की गई उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखें।
अरुणाचल प्रदेश में कटाई किए गए बंदगोभी, मटर, सरसों और आलू को सुरक्षित स्थानों पर ले जाएं। धान, मक्का, अन्य खड़ी फसलों, सब्जियों और बागों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें। असम में फसल के खेतों में पानी के ठहराव से बचने के लिए उचित जल निकासी बनाए रखें। परिपक्व फसलों की तत्काल कटाई को प्राथमिकता दें और उपज को सूखे, ढके गए गोदाम में ले जाएं।
मेघालय में गाजर, भिंडी, फ्रेंच बीन की बुवाई स्थगित करें। मक्का, अदरक और टमाटर में उचित जल निकासी प्रदान करें। गिरने से बचाने के लिए बांस का सहारा दें। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में प्री-खरीफ चावल की शुरुआती वनस्पति अवस्था के दौरान 5-8 सेमी पानी का स्तर बनाए रखें, फसल के खेत में लंबे समय तक बारिश के पानी के ठहराव से बचें।
पश्चिम बंगाल और सिक्किम में जल भराव को रोकने के लिए उचित खेत की निकासी सुनिश्चित करें, विशेष रूप से अदरक, टमाटर के खेतों में। कद्दूवर्गीय पौधों की नर्सरी को पॉलीथीन शीट या एग्रो-नेट से ढकें। अदरक के खेतों में स्थानीय रूप से उपलब्ध मल्चिंग सामग्री लगाएं।
बिहार में सिंचाई, खेती के काम और खड़ी फसलों में कीटनाशक और उर्वरक का प्रयोग स्थगित करें। जल भराव से बचने के लिए खड़ी फसल के खेतों में पर्याप्त जल निकासी प्रदान करें। केरल में जल भराव से बचने के लिए खड़ी फसल के खेतों में पर्याप्त जल निकासी प्रदान करें, कटाई किए गए पुंचा चावल को सूखे, ढके गोदाम में ले जाएं, केले की रोपाई स्थगित करें।
लू के प्रभाव से फसलों को बचाने के उपाय
महाराष्ट्र (मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ) में गर्मी के मूंग, मूंगफली, प्याज, सूरजमुखी, तिल, चारा फसलों, बागों और सब्जियों को ठंडे घंटों में जरूरत के अनुसार हल्की और बार-बार सिंचाई करें। वाष्पीकरण को कम करने के लिए सब्जियों और बागवानी फसलों में पुआल की मल्चिंग का उपयोग करें, और नए लगाए गए पौधों के लिए छाया जाल स्थापित करें।
गुजरात (सौराष्ट्र और कच्छ) में सुबह या शाम के घंटों में क्लस्टर बीन, खीरा, तोरई, लौकी, स्पंज लौकी और करेला जैसी खड़ी फसलों को हल्की और बार-बार सिंचाई करें। फूल और खूंटी चरण में मूंगफली की सिंचाई करें।
मध्य प्रदेश में मक्का, मूंग, उड़द, मूंगफली और सब्जियों की फसलों को आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई दें। छत्तीसगढ़ में निराई और गुड़ाई के बाद रबी मक्का, केला और पपीता के बागानों में हल्की सिंचाई करें। गेहूं और चने की कटाई पूरी करें और सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करें।
हिमाचल प्रदेश में गेहूं, सरसों, बागवानी और सब्जियों की फसलों जैसे टमाटर, शिमला मिर्च, पत्तागोभी, फूलगोभी, फ्रेंच बीन्स, खीरा, करेला, लौकी आदि में जरूरत के आधार पर सिंचाई करें। हरियाणा में गर्मी की मूंग, कपास, सब्जियां, आम, अमरूद और लोकाट जैसी खड़ी फसलों में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करें।
उत्तर प्रदेश में हाइब्रिड मक्का, जायद उड़द, मूंग, सब्जियां और गन्ना जैसी खड़ी फसलों में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करें। राजस्थान में जायद मूंग, अमेरिकी कपास और देसी कपास, भिंडी, तरबूज, खरबूजा, टिंडा, खीरा और लंबा तरबूज जैसी खड़ी फसलों में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करें।
पशुपालन, मुर्गी पालन और मछली पालन के लिए सुझाव
भारी बारिश के दौरान जानवरों को शेड के अंदर रखें और उन्हें संतुलित आहार प्रदान करें। खराब होने से बचाने के लिए चारा और चारा सुरक्षित स्थान पर रखें। अतिप्रवाह की स्थिति में मछलियों के भागने से रोकने के लिए तालाबों के चारों ओर उचित जाल के साथ एक आउटलेट बनाएं।
उच्च तापमान और लू वाले क्षेत्रों में, जानवरों के लिए साफ, स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराएं, और प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए मुर्गी पालन की छतों को घास से ढकें। तटीय राज्यों (विशेष रूप से केरल) में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी जाती है।
मुख्य बातें (Key Points)
• भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 27 अप्रैल 2026 को देशभर के लिए मौसम चेतावनी जारी की
• विदर्भ के अकोला में तापमान 46.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, देश में सबसे अधिक
• त्रिपुरा में पिछले 24 घंटों में 12-20 सेमी बहुत भारी बारिश दर्ज
• असम, मेघालय, सिक्किम, पश्चिम बंगाल में आने वाले दिनों में बहुत भारी बारिश की संभावना
• पंजाब, हरियाणा में 28-29 अप्रैल को 50-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलेगी
• जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, झारखंड, कर्नाटक में ओलावृष्टि की चेतावनी
• विदर्भ, राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, तेलंगाना में लू की स्थिति बनी रहेगी
• दिल्ली-NCR में 28-29 अप्रैल को हल्की बारिश और आंधी की संभावना
• मछुआरों को बंगाल की खाड़ी में 27 अप्रैल से 2 मई तक न जाने की सलाह
• लू से बचने के लिए पर्याप्त पानी पिएं और हल्के रंग के कपड़े पहनें













